बाइबल व्याख्या

नहेम्याह 3

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

भोर की ठंड में महायाजक एल्याशीब अपने याजक भाइयों के साथ कमर बाँधकर खड़ा है, भेड़फाटक के मलबे के सामने, जहाँ बलि के पशु सदियों से गुजरते आए थे। वह पत्थर उठाता है, पल्ले लगाता है, और उस दीवार की प्रतिष्ठा करता है। और फिर अध्याय एक घेरा खींचना शुरू करता है: फाटक दर फाटक, मोड़ दर मोड़, नाम दर नाम, जब तक चक्र पूरा होकर फिर उसी भेड़फाटक पर लौट नहीं आता, जहाँ अब सुनार और व्यापारी मरम्मत कर रहे हैं।

मर्म

यह अध्याय पढ़ने में सूची जैसा लगता है, पर असल में यह परमेश्वर के काम करने के ढंग का नक्शा है। वे आकाश से दीवार नहीं गिराते; वे लोगों के हाथों से बनाते हैं, और वे हाथ अजीब तरह मिले-जुले हैं। महायाजक चूना पोतता है। सुनार, जिसके हाथ नाजुक काम के आदी हैं, पत्थर ढोता है। गन्धियों के समाज का हनन्याह, इत्र बनाने वाला, "चौड़ी शहरपनाह तक" यरूशलेम को दृढ़ करता है। हल्लोहेश का पुत्र शल्लूम "अपनी बेटियों समेत" मरम्मत करता है, और लेखक इसे छिपाता नहीं। यहाँ कोई पवित्र और अपवित्र पेशा नहीं है। अनुग्रह से बुलाए गए लोग अपने-अपने हिस्से पर खड़े होते हैं, और परमेश्वर का नगर उन हिस्सों के जुड़ने से बनता है।

सूत्र

ध्यान दीजिए कि घेरा कहाँ से शुरू होता है और कहाँ खत्म: भेड़फाटक पर। वहीं से मन्दिर के लिए पशु भीतर लाए जाते थे। पूरी नगरी बलि के फाटक के चारों ओर खड़ी की जा रही है, मानो सुरक्षा का केंद्र प्रायश्चित हो, हथियार नहीं। और यह भी: एल्याशीब ने दीवार की "प्रतिष्ठा की", यानी पत्थरों की चारदीवारी भी परमेश्वर को समर्पित वस्तु थी, उपासना का विस्तार। पौलुस बाद में कलीसिया के लिए यही चित्र उठाएगा, कि मसीह में सारी इमारत जुड़कर एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। नहेम्याह 3 उस वाक्य का पूर्वाभ्यास है: अलग-अलग नाम, अलग-अलग जिले, एक ही दीवार; और जो मेम्ना भेड़फाटक से होकर गुजरा, वही अंत में उस नगर का द्वार बना।

दर्पण

आपका हिस्सा शायद "अपने ही घर के सामने" है, जैसे यदायाह का था। रसोई, दफ्तर की वह एक टीम, वह बूढ़ी माँ, वह मोहल्ला। ऐसा काम जिसका नाम किसी मंच से नहीं पुकारा जाएगा। हममें से कई इसी बात पर थकते हैं: हम बड़ी दीवार चाहते हैं, पर हमें बीस हाथ मिले हैं। और फिर वह चुभता हुआ वाक्य आता है, तकोइयों के रईसों के बारे में, जिन्होंने "अपने प्रभु की सेवा का जूआ अपनी गर्दन पर न लिया।" उनके मजदूर आए, वे नहीं। इतिहास ने उनका नाम तक नहीं लिखा, केवल उनकी अनुपस्थिति लिखी। दूसरी ओर बारूक है, जिसने "तन मन से" मरम्मत की। आज ही अपने घर के सामने की एक टूटी चीज चुनिए और उसे दस मिनट दीजिए: वह संदेश भेजिए, वह बर्तन धोइए, उस पड़ोसी का दरवाजा खटखटाइए, और करते हुए मन में कहिए, "यह मेरा हिस्सा है, प्रभु।"

पहचान

पहले सुननेवाले वे ही लोग थे जिनके नाम इस सूची में हैं, और उनके बच्चे। जब यह अध्याय सभा में पढ़ा गया होगा, तो यह आँकड़ा नहीं, पुकार थी: "यरीहो के मनुष्य", "गिबोन और मिस्पा के मनुष्य", "तकोई"। लोग एक-दूसरे की ओर देखकर सिर हिलाते होंगे, उस दिन को याद करते जब हाथों में छाले पड़े थे और पीठ धूप में जली थी। जिन परिवारों के पुरखे निर्वासन में मरे थे, उनके लिए अपना नाम यरूशलेम की दीवार के साथ दर्ज होना पुनर्वास का प्रमाणपत्र था। और नतीन लोग, मन्दिर के सबसे निचले दर्जे के सेवक, भी ओपेल में अपनी जगह पर गिने गए। परमेश्वर की स्मृति में कोई गुमनाम नहीं रहता।

संदर्भ

यह लगभग 445 ईसा पूर्व है, फारसी साम्राज्य के अधीन यहूदा एक छोटा, गरीब प्रान्त है। यरूशलेम डेढ़ सौ साल से खंडहर पड़ा है; दीवार के बिना नगर का अर्थ है खुला गाँव, जहाँ कोई भी लुटेरा या पड़ोसी राज्यपाल घुस सकता है। नहेम्याह राजा का प्याला पिलानेवाला था, यानी दरबारी भरोसे का आदमी, और अब वह अधिकार-पत्र लेकर आया है। इसीलिए पद 7 में "महानद के पार के अधिपति के सिंहासन" का जिक्र है: यह काम फारसी प्रशासन की नजर में वैध है। पर जमीन पर इसका मतलब था मलबा हटाना, कूड़ा फाटक और घोड़ाफाटक के बीच बदबू और धूल में, आसपास के शत्रुओं की नजरों के नीचे।

प्रश्न

फिर भी एक काँटा रह जाता है। जिस एल्याशीब से यह अध्याय शुरू होता है, वही बाद में तोबियाह को मन्दिर के कमरे में जगह देगा (नहेम्याह 13)। जिसने सबसे पहले कमर बाँधी, उसी ने बाद में समझौता किया। तो क्या उसकी प्रतिष्ठा झूठी थी? पाठ हमें यह सुविधा नहीं देता कि हम उसे खलनायक घोषित कर दें, न यह कि हम उसकी भक्ति पर मोहर लगा दें। यह बस दोनों बातें दर्ज करता है और हमें असहज छोड़ देता है। शायद इसलिए कि दीवार बनाना और दिल की रखवाली करना दो अलग काम हैं, और पहले में सफल होकर भी दूसरे में हारा जा सकता है। जो आज तन मन से पत्थर उठा रहा है, उसे कल के लिए भी अनुग्रह माँगना होगा।

चिंतन

आपकी दीवार का कौन सा हिस्सा "आपके ही घर के सामने" है, और आपने उसे कब से छुआ नहीं?

तकोई के रईस और बारूक के बीच आप आज कहाँ खड़े हैं, और उसका ईमानदार कारण क्या है?

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Ezra and Nehemiah: An Introduction and Commentary

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Nehemiah For You

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Nehemiah 3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

नहेम्याह 3 का क्या अर्थ है?
भोर की ठंड में महायाजक एल्याशीब अपने याजक भाइयों के साथ कमर बाँधकर खड़ा है, भेड़फाटक के मलबे के सामने, जहाँ बलि के पशु सदियों से गुजरते आए थे। वह पत्थर उठाता है, पल्ले लगाता है, और उस दीवार की प्रतिष्ठा करता है। और फिर अध्याय एक घेरा खींचना शुरू करता है: फाटक दर फाटक, मोड़ दर मोड़, नाम दर नाम, जब तक चक्र पूरा होकर फिर उसी भेड़फाटक पर लौट नहीं आता, जहाँ अब सुनार और व्यापारी मरम्मत कर रहे हैं।
नहेम्याह 3 किस विषय में है?
ध्यान दीजिए कि घेरा कहाँ से शुरू होता है और कहाँ खत्म: भेड़फाटक पर। वहीं से मन्दिर के लिए पशु भीतर लाए जाते थे। पूरी नगरी बलि के फाटक के चारों ओर खड़ी की जा रही है, मानो सुरक्षा का केंद्र प्रायश्चित हो, हथियार नहीं। और यह भी: एल्याशीब ने दीवार की "प्रतिष्ठा की", यानी पत्थरों की चारदीवारी भी परमेश्वर को समर्पित वस्तु थी, उपासना का विस्तार। पौलुस बाद में कलीसिया के लिए यही चित्र उठाएगा, कि मसीह में सारी इमारत जुड़कर एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। नहेम्याह 3 उस वाक्य का पूर्वाभ्यास है: अलग-अलग नाम, अलग-अलग जिले, एक ही दीवार; और जो मेम्ना भेड़फाटक से होकर गुजरा, वही अंत में उस नगर का द्वार बना।
नहेम्याह 3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पहले सुननेवाले वे ही लोग थे जिनके नाम इस सूची में हैं, और उनके बच्चे। जब यह अध्याय सभा में पढ़ा गया होगा, तो यह आँकड़ा नहीं, पुकार थी: "यरीहो के मनुष्य", "गिबोन और मिस्पा के मनुष्य", "तकोई"। लोग एक-दूसरे की ओर देखकर सिर हिलाते होंगे, उस दिन को याद करते जब हाथों में छाले पड़े थे और पीठ धूप में जली थी। जिन परिवारों के पुरखे निर्वासन में मरे थे, उनके लिए अपना नाम यरूशलेम की दीवार के साथ दर्ज होना पुनर्वास का प्रमाणपत्र था। और नतीन लोग, मन्दिर के सबसे निचले दर्जे के सेवक, भी ओपेल में अपनी जगह पर गिने गए। परमेश्वर की स्मृति में कोई गुमनाम नहीं रहता।
नहेम्याह 3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
फिर भी एक काँटा रह जाता है। जिस एल्याशीब से यह अध्याय शुरू होता है, वही बाद में तोबियाह को मन्दिर के कमरे में जगह देगा (नहेम्याह 13)। जिसने सबसे पहले कमर बाँधी, उसी ने बाद में समझौता किया। तो क्या उसकी प्रतिष्ठा झूठी थी? पाठ हमें यह सुविधा नहीं देता कि हम उसे खलनायक घोषित कर दें, न यह कि हम उसकी भक्ति पर मोहर लगा दें। यह बस दोनों बातें दर्ज करता है और हमें असहज छोड़ देता है। शायद इसलिए कि दीवार बनाना और दिल की रखवाली करना दो अलग काम हैं, और पहले में सफल होकर भी दूसरे में हारा जा सकता है। जो आज तन मन से पत्थर उठा रहा है, उसे कल के लिए भी अनुग्रह माँगना होगा।
नहेम्याह 3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
तकोई के रईस और बारूक के बीच आप आज कहाँ खड़े हैं, और उसका ईमानदार कारण क्या है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Nehemiah 3 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 10

पिता, मुझे वहीं से शुरू करना सिखा जहाँ तू ने मुझे रखा है, अपने ही घर के सामने, अपने ही मोहल्ले में। बड़े कामों की चाह में छोटी ज़िम्मेदारियाँ छूट न जाएँ। जो टूटा है उसे जोड़ने के लिए मेरे हाथ थाम ले, और मेरा काम तेरे नाम की दीवार बने।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 16

पिता, मुझे भी मेरा छोटा सा हिस्सा सौंपा गया है। जहाँ मैं खड़ा हूँ, वहीं की दीवार मैं ईमानदारी से बनाऊँ, चाहे मेरा नाम किसी को याद न रहे। बीते लोगों की कब्रों के पास काम करते हुए याद दिला कि जीवन छोटा है, पर तेरे लिए किया हर काम टिकता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

गिबोन और मिस्पा के लोग यरूशलेम में रहते ही नहीं थे। यह शहरपनाह उनके घरों की रखवाली नहीं करने वाली थी, फिर भी वे आए और उन्होंने "मरम्मत की।" और याद कीजिए, गिबोनी तो कभी छल से इस्राएल में घुसे बाहरी लोग थे। आज उनके नाम परमेश्वर के काम की सूची में दर्ज हैं। जिस काम से आपको सीधा लाभ नहीं मिलता, क्या आप उसमें हाथ लगाते हैं?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

उसके पास हक्कोस के पोते और ऊरिय्याह के पुत्र मरेमोत ने मरम्मत की।" नाम, पिता का नाम, और दीवार का बस एक छोटा टुकड़ा। कोई पूरी शहरपनाह अकेले नहीं बना रहा था। हर कोई अपने हिस्से पर झुका था, और बगल वाले पर भरोसा कर रहा था। तेरा हिस्सा छोटा लगता है? परमेश्वर ने उसे भी नाम के साथ लिख रखा है।

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