भजन संहिता 26
पाठ
भजन 26 एक ऐसी प्रार्थना है जो हमारी आदत के विरुद्ध जाती है। दाऊद परमेश्वर से क्षमा नहीं, बल्कि जाँच माँगता है: "हे यहोवा, मेरा न्याय कर, क्योंकि मैं खराई से चलता रहा हूँ।" वह अपने जीवन का ब्यौरा रखता है, किनसे उसने दूरी रखी, किस वेदी के चारों ओर वह चलता है, किस भवन से वह प्रेम करता है, और अन्त में प्रार्थना करता है कि उसका प्राण पापियों और हत्यारों के साथ न गिना जाए। आखिरी पंक्ति में वह अपने पाँवों को समतल भूमि पर खड़ा पाता है और मण्डली के बीच परमेश्वर को धन्य कहता है।
मर्म
यह भजन आत्मधार्मिकता का नहीं, आश्रय का है। ध्यान दीजिए कि पद 1 में दावा और भरोसा साथ-साथ खड़े हैं: "मैं खराई से चलता रहा हूँ, और मेरा भरोसा यहोवा पर अटल बना है।" इब्रानी शब्द तोम (खराई) का अर्थ पाप-रहितता नहीं, बल्कि अविभाजित हृदय है, वह जीवन जिसमें कोई दोहरा खाता नहीं चलता। और पद 11 में वही व्यक्ति कहता है, "तू मुझे छुड़ा ले, और मुझ पर दया कर।" जो सचमुच निर्दोष होता, वह दया क्यों माँगता? यहीं भजन की ईमानदारी है। परमेश्वर के सामने खड़े होने की हिम्मत कभी अपने रिकॉर्ड से नहीं आती, वह उनकी करुणा से आती है जो "मेरी आँखों के सामने है"।
सूत्र
इस भजन को पूरी गहराई तक केवल एक ही व्यक्ति प्रार्थना कर सका। दाऊद दया माँगते हुए निर्दोषता का दावा करता है; यीशु मसीह वह दावा बिना किसी छूट के कर सकते थे, और फिर भी उन्होंने न्याय माँगा और न्याय पाया, पर अपने लिए नहीं। जिसके हाथ सचमुच निर्दोषता के जल से धुले थे, वही उन हाथों से क्रूस पर कीलों को झेलने गया। और एक कड़वी विडम्बना देखिए: पद 9 की प्रार्थना है "मेरे प्राण को पापियों के साथ… न मिला" और सुसमाचार कहता है कि वे दो डाकुओं के बीच गिने गए। वहाँ दाऊद की प्रार्थना उलट गई, ताकि हमारे लिए पूरी हो सके। जब परमेश्वर हमें जाँचते हैं, तो मसीह में वे उस खराई को देखते हैं जो हमारी अपनी नहीं है, पर जो सचमुच हमें दी गई है।
दर्पण
यह भजन उस जगह पर उँगली रखता है जहाँ हम आमतौर पर सफाई देते हैं। पद 4 और 5 किसी गर्वीले सन्यास की बात नहीं कर रहे, बल्कि इस बात की कि आप किसके साथ बैठकर सहज महसूस करते हैं। दफ्तर में जब घूस को "व्यवस्था" कहकर सामान्य बना दिया जाता है, पारिवारिक बातचीत में जब किसी की प्रतिष्ठा टुकड़े-टुकड़े की जाती है और आप चुपचाप मुस्कुराते रहते हैं, तब "मैं निकम्मी चाल चलनेवालों के संग नहीं बैठा" एक असुविधाजनक वाक्य बन जाता है। साथ ही भजन उस डर को भी छूता है कि अगर परमेश्वर सचमुच "मेरे मन और हृदय को परख" लें तो क्या बचेगा। मसीह में उत्तर यह है: जाँच भयानक नहीं, क्योंकि न्यायी वही हैं जो आपके पक्ष में खड़े हैं।
आज ही, दस मिनट निकालकर पद 2 को ज़ोर से बोलिए और फिर एक कागज़ पर उस एक संगति या आदत का नाम लिखिए जिसे आप परमेश्वर की जाँच के सामने लाने से बचते रहे हैं।
पृष्ठभूमि
पहले सुनने वाले इसे किसी व्यक्तिगत डायरी की तरह नहीं, बल्कि मन्दिर की दहलीज़ पर बोले गए शब्दों की तरह सुनते थे। इस्राएल में जब किसी पर झूठा आरोप लगता और मानवीय अदालत में सबूत नहीं मिलते थे, तो वह व्यक्ति पवित्रस्थान जाकर परमेश्वर के सामने अपनी बात रखता था। "मैं अपने हाथों को निर्दोषता के जल से धोऊँगा" कोई काव्यात्मक कल्पना नहीं, बल्कि एक पहचानी हुई रीति थी, एक सार्वजनिक संकेत कि इस खून या इस रिश्वत में मेरा हाथ नहीं है। इसलिए पद 10 का "उनका दाहिना हाथ घूस से भरा रहता है" सीधा वार है: वे हाथ उठाकर शपथ खाते हैं जिनमें पैसा चिपका है।
सन्दर्भ
भजन के शीर्षक में यह दाऊद का है, और इसका माहौल किसी दरबारी षड्यंत्र जैसा लगता है, जहाँ सत्ता झूठे गवाहों और खरीदे गए न्यायाधीशों से चलती है। जिसके पास पैसा था वह गवाह खरीद सकता था; जिसके पास नहीं था, उसके पास केवल वेदी बची थी। इस दुनिया में परमेश्वर का भवन कमज़ोर का आखिरी न्यायालय था, और इसीलिए पद 8 केवल भावुकता नहीं है: "मैं तेरे धाम से तेरी महिमा के निवास-स्थान से प्रीति रखता हूँ।" वह जगह उसे प्रिय है क्योंकि वहीं सच्चाई को ज़बान मिलती है। अन्त में "चौरस स्थान" का चित्र फिसलन भरी पहाड़ी ढलानों के विपरीत है, वह ठोस ज़मीन जहाँ पाँव धँसते नहीं।
मुख्य पात्र
दाऊद यहाँ निर्भीक है, पर अकड़ा हुआ नहीं। वह आदमी जो आगे चलकर बतशेबा के मामले में बुरी तरह गिरेगा, यहाँ अपने हृदय को परीक्षा के लिए खोल देता है, और यह विरोधाभास नहीं है: वह जानता है कि उसकी मज़बूती उसके चरित्र में नहीं, "तेरी करुणा" में है। उसका आत्मिक परिदृश्य दो ध्रुवों के बीच फैला है, एक ओर अकेलेपन का दबाव कि कोई उसकी बात का विश्वास नहीं करता, दूसरी ओर आराधना की लालसा कि वह वेदी के चारों ओर चलकर ऊँचे शब्द से धन्यवाद करे। और वह अपने बचाव को प्रार्थना में बदल देता है, शिकायत में नहीं। यही उसे मसीह की छाया बनाता है: वह जो सही होते हुए भी अपना मुकदमा परमेश्वर के हाथ में छोड़ देता है।
चिंतन
जब आप कहते हैं "मुझ को जाँच और परख", तो आपके भीतर कौन सा कोना तुरन्त दरवाज़ा बन्द कर लेता है, और क्यों?
आपकी निर्भीकता किस पर टिकी है, अपने रिकॉर्ड पर या मसीह की खराई पर, और यह अन्तर आपके इस सप्ताह के निर्णयों में कहाँ दिखाई देगा?
Psalms में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
A year of daily devotions through every psalm, ideal alongside your reading.
The second half of the psalter with the same loved precision.
Lewis thinking out loud about praise, cursing psalms and joy.
Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Psalms 26 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 26 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 26 किस विषय में है?
भजन संहिता 26 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 26 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 26 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 26 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, मुझे उनके साथ बहकर जाने मत दे जिनके हाथ हिंसा और छल से भरे हैं। मेरा मन कमजोर है, और कई बार गलत रास्ता आसान लगता है। मुझे थाम ले, मेरे कदमों को अपनी सच्चाई में जमा दे, और मेरे जीवन को अपने पास सुरक्षित रख।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें
