भजन संहिता 55:22
पाठ
भजन के अंत के पास, इतनी लंबी शिकायत के बाद, अचानक स्वर बदल जाता है। अब तक दाऊद अपने भीतर के कंपन की बात कर रहा था, उस मित्र की बात जिसकी बातें मक्खन सी चिकनी थीं पर मन में नंगी तलवारें थीं। और फिर, जैसे कोई अपने ही आँसुओं में से मुड़कर पास बैठे किसी और से बोले, वह कहता है: "अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा।" यह वादा नहीं है कि बोझ हल्का हो जाएगा या विश्वासघात मिट जाएगा। यह वादा है कि उठानेवाला बदल जाएगा, और जो परमेश्वर के साथ सीधा चल रहा है वह डगमगाकर गिरेगा नहीं।
मर्म
ध्यान दीजिए कि यहाँ "बोझ" हटाया नहीं जाता, स्थानांतरित किया जाता है। जिस इब्रानी शब्द का अनुवाद "बोझ" हुआ है, उसका अर्थ है वह हिस्सा जो जीवन ने आपको सौंप दिया है, आपकी नियति का भार, वह सब जो आपके कंधे पर आ पड़ा है बिना आपसे पूछे। दाऊद यह नहीं कह रहा कि विश्वासघात करनेवाला मित्र गायब हो जाएगा या शहर की शहरपनाह पर घूमते षड्यंत्र थम जाएँगे। वह कह रहा है कि उस भार को ढोने की जिम्मेदारी अब आपकी नहीं। परमेश्वर के बारे में यह एक तीखी बात कहता है: वे दर्शक नहीं, ढोनेवाले हैं। और मनुष्य के बारे में भी: हम इसलिए टूटते नहीं कि बोझ बड़ा है, बल्कि इसलिए कि हम उसे अपने ही कंधे पर रखे रहना चाहते हैं, क्योंकि उसे छोड़ देना नियंत्रण छोड़ देना है।
सूत्र
यह वचन अकेला नहीं खड़ा है। जिस मित्र ने रोटी बाँटी और मंदिर तक साथ चला, उसी का धोखा दाऊद को तोड़ता है, और सदियों बाद एक और व्यक्ति उसी अनुभव से गुज़रेगा: भोजन की मेज़ पर बैठा मित्र, चुम्बन, और सैनिक। यीशु मसीह ने गतसमनी में वही बोझ उठाया जिसे दाऊद यहाँ डालने को कह रहा है, और उन्होंने उसे पिता के हाथों में डाला: "आपकी इच्छा पूरी हो।" इसलिए जब पतरस अपनी पत्री में लिखता है कि "अपनी सारी चिन्ता उसी पर डाल दो" (1 पतरस 5:7), तो वह कोई नया विचार नहीं गढ़ रहा; वह उस लंबी परंपरा को दोहरा रहा है जो दाऊद से होते हुए क्रूस तक जाती है। बोझ डालना विश्वास का कोई सजावटी अभ्यास नहीं, यह उस परमेश्वर पर भरोसा है जिसने खुद बोझ उठाना जानते हैं।
दर्पण
आप जानते हैं कि आपका बोझ क्या है, क्योंकि वही चीज़ है जो रात के दो बजे आपको जगाती है। वह बैंक का बकाया जिसका ज़िक्र आपने पत्नी से नहीं किया। दफ़्तर का वह सहकर्मी जिसकी बातें तेल से नरम हैं और जिसकी ईमेल की भाषा आप तीन बार पढ़ते हैं। बच्चा जो दूर होता जा रहा है। शरीर की वह रिपोर्ट जो अगले हफ़्ते आनी है। हम सब ने बोझ ढोने को एक गुण बना लिया है, जैसे अकेले उठाते रहना ही ज़िम्मेदारी हो। पर यह पद उस गर्व को काटता है: ढोते रहना वफ़ादारी नहीं, अक्सर अविश्वास है। डालना एक क्रिया है, इच्छा नहीं।
आज रात सोने से पहले एक कागज़ पर वह एक बोझ लिखिए जो आपने अब तक किसी को नहीं बताया, उसे ज़ोर से पढ़िए और कहिए: "यह अब मैं आपके हाथों में डालता हूँ।" फिर कागज़ मोड़कर अपनी बाइबिल में भजन 55 के पन्ने पर रख दीजिए।
प्रश्न
"वह धर्मी को कभी टलने न देगा।" पर धर्मी लोग गिरते हैं। ईमानदार व्यापारी दिवालिया होते हैं, प्रार्थना करनेवाली माँ कैंसर से मरती है, वफ़ादार पासबान बदनाम होकर सेवा छोड़ देता है। क्या दाऊद झूठ बोल रहा है? नहीं, पर वह वह नहीं कह रहा जो हम सुनना चाहते हैं। "टलना" का अर्थ यहाँ हिल जाना नहीं, बल्कि अपनी जगह से स्थायी रूप से खिसक जाना है। दाऊद खुद इस भजन में काँप रहा है, भाग जाना चाहता है, कबूतर के पंख माँग रहा है। हिलना मना नहीं है। वादा यह है कि परमेश्वर की पकड़ आपकी पकड़ से मज़बूत है। यह उत्तर हर कब्र के सामने संतोषजनक नहीं लगता, और मैं इसे संतोषजनक बनाने की कोशिश नहीं करूँगा।
बारीकी
"सम्भालेगा" शब्द पर रुकिए। इब्रानी में यहाँ जो क्रिया है, वह मुख्यतः पकड़ने की नहीं, पोषण देने की है; उसी शब्द से अकाल के दिनों में परिवार को अनाज देकर जीवित रखने की बात कही जाती है। यानी परमेश्वर आपको केवल गिरने से नहीं रोकते, वे आपको खिलाते हैं। यह अंतर छोटा नहीं। पकड़ना एक बार का काम है, पोषण रोज़ का। इसका मतलब है कि आपको एक ही बार में पूरे संकट के लिए ताकत नहीं मिलेगी; आपको आज के लिए आज की खुराक मिलेगी, कल के लिए कल। जो लोग शिकायत करते हैं कि परमेश्वर ने उन्हें अगले छह महीनों की हिम्मत नहीं दी, वे शायद इसीलिए निराश हैं कि वे राशन नहीं, गोदाम माँग रहे थे।
मुख्य पात्र
दाऊद इस भजन में कोई शांत संत नहीं है। वह काँपता है, भागना चाहता है, और पद 15 में अपने शत्रुओं के लिए ऐसी प्रार्थना करता है जिसे हम सभा में ज़ोर से पढ़ने में झिझकेंगे। यही उसकी सच्चाई है: वह अपना क्रोध भी परमेश्वर के सामने रखता है, दबाता नहीं। और फिर, पद 17 में, वह बताता है कि वह क्या करता रहा: साँझ, भोर, दोपहर, तीनों पहर पुकारना और कराहना। पद 22 उसी अभ्यास का फल है। यह वाक्य किसी सुखी आदमी का सिद्धांत नहीं, एक थके हुए आदमी की गवाही है जिसने बार-बार बोझ डाला और पाया कि नीचे हाथ थे। इसीलिए वह अंत में मुड़कर आपसे कहता है: तुम भी डाल दो।
चिंतन
कौन-सा बोझ आप इसलिए ढो रहे हैं क्योंकि उसे छोड़ना नियंत्रण छोड़ना होगा, न कि इसलिए कि वह वाकई आपका है?
अगर परमेश्वर पोषण रोज़ देते हैं, गोदाम भरकर नहीं, तो आपकी प्रार्थना में क्या बदलना चाहिए?
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Psalms 55:22 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 55:22 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 55:22 किस विषय में है?
भजन संहिता 55:22 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 55:22 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 55:22 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 55 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
दाऊद का दिल टूटा हुआ है, और उसके दुश्मन आराम से बैठे हैं। वह उनके बारे में कहता है, "उनमें कोई परिवर्तन नहीं होता, और वे परमेश्वर का भय नहीं मानते।" यही सबसे डरावनी बात है, वैसा ही रह जाना। कभी न हिलना, कभी न झुकना, कभी न रोना। आज तेरा टूटा हुआ मन तुझे परमेश्वर के पास खींच रहा है। यह श्राप नहीं, दया है।
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