भजन संहिता 91
पाठ
भजन 91 एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ से शुरू होता है जो परमेश्वर की छाया में बैठा है: "जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।" फिर वह अपने विश्वास को शब्द देता है, परमेश्वर को शरणस्थान और गढ़ कहता है, और उसके बाद पूरा भजन एक दूसरे व्यक्ति को सम्बोधित करता है: तुझे बहेलिये के जाल से, महामारी से, रात के भय से, दिन में उड़ते तीर से बचाया जाएगा। अंत में परमेश्वर स्वयं बोलते हैं और छह वचन देते हैं: छुड़ाना, ऊँचा उठाना, सुनना, संकट में साथ रहना, महिमा बढ़ाना, और अपने उद्धार का दर्शन दिखाना।
मर्म
इस भजन का धर्मशास्त्रीय केंद्र वचन 14 में छिपा है, जहाँ परमेश्वर सुरक्षा का आधार बताते हैं: "उसने जो मुझसे स्नेह किया है… क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है।" यह सुरक्षा किसी जादुई कवच की तरह नहीं मिलती, न ही यह अच्छे कर्मों का पुरस्कार है। यह वाचा के रिश्ते से बहती है। "नाम को जान लेना" इब्रानी सोच में जानकारी नहीं, बल्कि भरोसे का सम्बन्ध है, वैसा ही जैसे परमेश्वर ने मूसा को अपना नाम बताया था। यहाँ अनुग्रह और वाचा एक साथ खड़े हैं: परमेश्वर पहले अपना नाम प्रकट करते हैं, फिर मनुष्य उससे लिपटता है, और उस लिपटने के भीतर ही सुरक्षा का वादा गूँजता है। सुरक्षा उपहार है, सौदा नहीं।
सूत्र
यह भजन उद्धार की बड़ी कहानी में गहराई से बँधा है। "वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा" वही चित्र है जो निर्गमन में मिस्र से निकाले गए इस्राएल के लिए इस्तेमाल हुआ, और "मरी" तथा "महामारी" के शब्द उन्हीं विपत्तियों की याद दिलाते हैं जिनके बीच से इस्राएल सुरक्षित निकला था। यानी यह कोई सामान्य आशावाद नहीं, बल्कि निर्गमन के परमेश्वर की पहचान है। और वचन 13 का "तू सिंह और नाग को कुचलेगा" उत्पत्ति 3 की उस प्रतिज्ञा की गूँज है जहाँ स्त्री का वंश साँप के सिर को कुचलेगा। भजन इस प्रकार मसीह की ओर इशारा करता है, जो शैतान की परीक्षा से गुज़रकर, क्रूस पर सबसे बड़ी असुरक्षा को भोगकर, हमारा असली शरणस्थान बना।
दर्पण
यह भजन उस जगह उंगली रखता है जहाँ हम सबसे ज़्यादा दर्द महसूस करते हैं: नियंत्रण की चाह। हम बीमा करवाते हैं, रिपोर्ट दोबारा पढ़ते हैं, बच्चों का फ़ोन ट्रैक करते हैं, बैंक बैलेंस देखकर सोते हैं। ये गलत नहीं, पर ये हमारे असली "गढ़" बन जाएँ तो हम भजन 91 को उलट देते हैं। और फिर एक और बात: जब किसी विश्वासी को कैंसर होता है या नौकरी जाती है, तो यह भजन झूठा लगने लगता है। ईमानदारी से कहूँ, पाठ इस तनाव को हल नहीं करता। पर ध्यान दीजिए, वचन 15 में परमेश्वर संकट को टालने का नहीं, "संकट में मैं उसके संग रहूँगा" का वादा करते हैं। सुरक्षा का अर्थ है: कुछ भी आपको उनके हाथ से नहीं छीन सकता।
संदर्भ
यह भजन उस दुनिया से निकला है जहाँ जीवन कमज़ोर धागे पर टँगा था। "बहेलिये का जाल" शिकारी का फंदा है, अचानक और अदृश्य। "रात का भय" डाकुओं और उन आत्माओं की ओर संकेत करता है जिनसे प्राचीन पूर्व काँपता था। दिन में उड़ता तीर युद्ध है, और महामारी वह मृत्यु है जिसका कोई इलाज नहीं था। आसपास के देश ऐसे खतरों के लिए ताबीज़ और मंत्रों का सहारा लेते थे। इस्राएल के इस गायक ने कोई ताबीज़ नहीं थमाया, केवल एक नाम: यहोवा। संभवतः यह भजन मन्दिर में गाया जाता था, जहाँ "छाए हुए स्थान" का अर्थ परमेश्वर की उपस्थिति के भीतर रहना था, बाहरी दीवारों के भीतर नहीं।
अंतर्पाठ
सबसे चुभने वाली गूँज मत्ती 4 में मिलती है, जहाँ शैतान इसी भजन के वचन 11 और 12 को यीशु के सामने रखता है, "वे तुझको हाथों हाथ उठा लेंगे", और उन्हें मन्दिर से कूदने के लिए उकसाता है। यीशु इनकार करते हैं। क्यों? क्योंकि यह भजन भरोसे का निमंत्रण है, परमेश्वर को आज़माने का लाइसेंस नहीं। शरण लेना एक बात है, परमेश्वर को अपनी शर्तों पर सिद्ध करने को कहना दूसरी। दूसरी गूँज रोमियों 8 में है, जहाँ पौलुस कहते हैं कि कोई भी वस्तु हमें मसीह के प्रेम से अलग नहीं कर सकती, और साथ ही स्वीकारते हैं कि तलवार और अकाल विश्वासियों पर आते हैं। नया नियम इस भजन को रद्द नहीं करता, वह उसे क्रूस के आर-पार पढ़ता है।
मुख्य पात्र
अंतिम तीन वचनों में परमेश्वर स्वयं बोलते हैं, और उनकी वाणी का स्वर आश्चर्यजनक रूप से कोमल है। वे न्यायी हैं, दुष्टों का अन्त उनके हाथ में है, पर यहाँ वे अपने भक्त के "स्नेह" का उत्तर देते हैं। यह वही परमेश्वर हैं जिनकी पवित्रता जलाती है, और जो फिर भी पक्षी की तरह अपने पंख फैलाते हैं। यह चित्र उनके स्वभाव का दिल खोलता है: शक्ति जो झुकती है। वे दूर से बचाने वाले सम्राट नहीं, बल्कि संकट के भीतर उतरने वाले साथी हैं। और उनका अंतिम वादा भौतिक सुरक्षा से आगे जाता है: "अपने किए हुए उद्धार का दर्शन दिखाऊँगा।" अंत में देखने को मिलती है कोई वस्तु नहीं, स्वयं उद्धारकर्ता।
चिंतन
आपके जीवन में वह कौन सा "गढ़" है जिस पर आप वास्तव में भरोसा करते हैं, जब रात को नींद नहीं आती?
वचन 15 कहता है कि परमेश्वर संकट में साथ रहते हैं, उसे हटा नहीं देते। क्या आप इस अंतर के साथ जीने को तैयार हैं, या आप उनसे कुछ और माँग रहे हैं?
पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें
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अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।
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Psalms 91 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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भजन संहिता 91 का क्या अर्थ है?
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भजन संहिता 91 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 91 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
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