स्थिर रहो · बुधवार, अक्टूबर 28, 2026

परमेश्वर की देखभाल और वफादार सुनना

देखभाल और वफादारी

आज 2 मिनट का पठन 4 बाइबिल के अंश

शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए यशायाह 5:2, प्रेरितों के काम 17:21, यूहन्ना 14:16 and यहेजकेल 33:7.

☀ सुबह का पल

उसने उसकी मिट्टी खोदी और उसके पत्थर बीनकर उसमें उत्तम जाति की एक दाखलता लगाई; उसके बीच में उसने एक गुम्मट बनाया, और दाखरस के लिये एक कुण्ड भी खोदा; तब उसने दाख की आशा की, परन्तु उसमें निकम्मी दाखें ही लगीं।

यशायाह 5:2

एक शब्द पर रुकिए: 'मध्य में।' मीनार खेत के किनारे नहीं, ठीक बीचोंबीच बनाई गई। क्यों? क्योंकि किनारे से पूरा खेत नहीं दिखता, हर कोना नहीं दिखता। अंगूर पकने के मौसम में चोर और सियार रात में भी आ सकते थे, इसलिए मालिक ने ऐसी जगह मीनार बनवाई जहाँ से एक नज़र में सब कुछ दिखे। यह कोई आलीशान इमारत नहीं थी, पत्थरों और लकड़ी से बना साधारण ऊँचा मचान, जहाँ कोई रातभर जागकर बैठता।

यशायाह बताता है कि मालिक ने यह सब खुद किया, पत्थर चुने, सबसे अच्छी बेल लगाई, कोल्हू खोदा, और फिर मीनार बनाई। हर काम में मेहनत और उम्मीद थी। मरकुस 12 में यीशु यही तस्वीर लेते हैं, वहाँ मालिक है परमेश्वर, और वह खेत बीच में नहीं छोड़ता, वह देखभाल के लिए ऊँचाई बनाता है।

आज सुबह यह जान लीजिए, परमेश्वर किसी कोने से नहीं, आपके जीवन के ठीक बीच से देख रहे हैं। जो हिस्सा आपको सबसे असुरक्षित लगता है, वही हिस्सा उनकी नज़र से छिपा नहीं।

आज
एक कागज़ पर उस एक चिंता या व्यक्ति का नाम लिखिए जिसकी आज सबसे ज़्यादा फिक्र है, और उस कागज़ को अपनी मेज़ के ठीक बीचोंबीच रख दीजिए, ताकि दिनभर नज़र पड़े और आप उसके लिए प्रार्थना करते रहें।

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✦ दोपहर का पल

(इसलिए कि सब एथेंस वासी और परदेशी जो वहाँ रहते थे नई-नई बातें कहने और सुनने के सिवाय और किसी काम में समय नहीं बिताते थे।)

प्रेरितों के काम 17:21

पत्थर पैरों के नीचे चिकना था, सदियों की सैंडलों से घिसा हुआ। एरियोपागुस की चट्टान एथेंस के बाज़ार, अगोरा के ऊपर उठी हुई थी, जहाँ से नीचे संगमरमर की मूर्तियाँ, धूप की गंध, और सौदेबाज़ी का शोर साफ़ उठता था।

यह कोई मामूली जगह नहीं थी। एरियोपागुस का नाम युद्ध के देवता एरेस से आया है, रोमी भाषा में मार्स। यह एथेंस की सबसे बड़ी परिषद थी, जहाँ स्तोइक और एपीक्यूरियन दार्शनिक नई शिक्षाओं और विचारों की परख करते थे। जब पौलुस को वहाँ लाया गया, तो यह कोई हल्की-फुल्की बातचीत नहीं थी, यह गंभीर जाँच थी।

पर एथेंस के लोगों की आदत ठीक वही थी जो आज की दोपहर में हमारी है, कुछ नया सुनने और बताने की भूख। एक विचार पुराना पड़ते ही अगला चाहिए। कोई ठहराव नहीं, कोई जड़ नहीं, बस नयापन।

पौलुस ने इसी भीड़ के बीच खड़े होकर जीवित परमेश्वर की बात कही, न कि किसी नए विचार के रूप में, बल्कि उस सत्य के रूप में जो हमेशा से था। एरियोपागुस की चहल-पहल के ठीक बीच, एक ऐसी बात कही गई जो बदलती नहीं।

आज
आज दोपहर जब काम से उठकर फोन हाथ में आए, उसे दस मिनट के लिए रख दीजिए और एक पन्ने पर वह एक बात लिख दीजिए जिसे आप परमेश्वर के बारे में पहले से सच मानते हैं, किसी नई खबर की तलाश किए बिना।

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◐ दोपहर का पल

औरमैं पिता से विनती करूँगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।

यूहन्ना 14:16

दूसरा. यीशु यह शब्द कहते हैं और हम उसे पढ़कर आगे बढ़ जाते हैं, जैसे वह कोई मामूली शब्द हो। पर रुको। यीशु कह रहे हैं कि पिता एक और वही देगा जो यीशु अभी तक थे। यूनानी भाषा में जो शब्द यहाँ है, उसका शाब्दिक चित्र है किसी को अपने पास, अपने पक्ष में बुलाना। अदालत की भाषा है यह। जब कोई आरोपी अकेला खड़ा होता, तो कोई उसके पास आकर खड़ा हो जाता, उसकी ओर से बोलता, उसे सहारा देता, गवाही देता।

हमारे अनुवाद इसे सहायक, दिलासा देनेवाला, या वकील कहते हैं, और हर शब्द कुछ पकड़ता है, पर पूरी तस्वीर कोई नहीं देता। असल चित्र सलाह देनेवाला किसी दूर के बुद्धिमान का नहीं है, बल्कि किसी ऐसे का है जो शारीरिक रूप से तुम्हारे बगल में आकर खड़ा हो गया है, उस वक्त जब तुम अकेले खड़े होने के लायक नहीं रहे।

और फिर भी दोपहर का सन्नाटा अक्सर यही सवाल खड़ा कर देता है, अगर कोई सच में साथ खड़ा है, तो यह खालीपन कहाँ से आता है जो तीन बजे घेर लेता है। यूहन्ना इसका जवाब तुरंत नहीं देता। वह बस यह कहता है कि यह साथ होना हमेशा के लिए है, पल भर का नहीं।

आज
आज किसी एक कठिन बात को, एक मीटिंग, एक फोन कॉल, एक निर्णय को कागज़ पर लिखो, और फिर ज़ोर से बोलो, आइए, मेरे पास आकर खड़े हो जाइए।

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☾ संध्या का क्षण

“इसलिए, हे मनुष्य के सन्तान, मैंने तुझे इस्राएल के घराने का पहरुआ ठहरा दिया है; तू मेरे मुँह से वचन सुन-सुनकर उन्हें मेरी ओर से चिता दे।

यहेजकेल 33:7

बाबेल की नदी किबार के किनारे बसे बंधुओं के बीच यहेजकेल बैठा है, और उस पर एक भारी ज़िम्मेदारी रखी गई है। उसे विनाश की भविष्यवाणी करने के लिए नहीं, बल्कि किसी ऐसे की तरह जागते रहने के लिए बुलाया गया है जो शहर की दीवार पर रात भर आंखें खुली रखता है।

प्राचीन इस्राएली नगरों की शहरपनाह पर पहरुए तैनात होते थे। वे ऊँचे बुर्जों पर खड़े रहकर अंधेरे में दूर तक देखते, कि कहीं दुश्मन की तलवार तो नहीं चमक रही। जैसे ही खतरा दिखाई देता, वे नरसिंगा फूंक देते। पूरे नगर की नींद और सुरक्षा उस एक जागते हुए व्यक्ति पर निर्भर थी। यदि उसने चेतावनी दी और लोगों ने नहीं सुनी, तो दोष उन पर; यदि वह चुप रहा, तो उसका खून उसी के सिर पर।

परमेश्वर यहेजकेल को ठीक यही भूमिका देते हैं, न डराने के लिए, बल्कि मौका देने के लिए कि लोग समय रहते फिर जाएं। यह दिखाता है कि परमेश्वर किसी को अंधेरे में अकेला भटकने नहीं देना चाहते; वे पहले से आवाज़ भेजते हैं।

आज की शाम, जब दिन का शोर थम गया है, यह सोचना अच्छा है कि कोई हमारे लिए भी जागता रहा है, स्वयं परमेश्वर। हम आंखें मूंद सकते हैं क्योंकि वे नहीं सोते।

आज
सोने से पहले एक कागज़ पर उस व्यक्ति का नाम लिखिए जिसे आप लंबे समय से कोई ज़रूरी, प्रेम भरी बात कहने से बचते आए हैं, और परमेश्वर से मांगिए कि वे सही शब्द और सही समय दें।

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