परमेश्वर की अटूट सुरक्षा
सुरक्षा और सातत्य
शांत मन से मनन करने योग्य छोटे विचार, इन बाइबल अंशों से लिए गए यिर्मयाह 36:28, गिनती 35:15, निर्गमन 27:20-21 and 2 राजा 22:19.
☀ सुबह का पल
“फिर एक और पुस्तक लेकर उसमें यहूदा के राजा यहोयाकीम की जलाई हुई पहली पुस्तक के सब वचन लिख दे।
यिर्मयाह 36:28
सर्दी की उस शाम अंगीठी की आग कमरे को गरम कर रही है, और यहूदी एक के बाद एक पंक्ति धीमी, स्थिर आवाज़ में पढ़ता जा रहा है। राजा यहोयाकीम सामने बैठा सुनता है, हाथ में चाकू लिए हुए।
यह कोई साधारी पत्रिका नहीं थी। महीनों तक बारूक ने यिर्मयाह के मुँह से सुनकर, स्तम्भ दर स्तम्भ, चमड़े पर यह शब्द लिखे थे, यहोवा की चेतावनी, मन फिराव का बुलावा, ताकि लोग समय रहते लौट आएं। इसे मंदिर में पढ़ा जाना था, सबके सामने।
पर राजा ने दुःख से वस्त्र नहीं फाड़े। उसने हर पढ़ी गई पंक्ति को चाकू से काटा और आग में डाल दिया, एक के बाद एक, जब तक पूरी पत्रिका राख नहीं हो गई। जो आग गरमाहट के लिए जलाई गई थी, उसी में उसने परमेश्वर का वचन जलाने की कोशिश की।
पर यहोवा ने बहस नहीं की। उसने यिर्मयाह से कहा कि एक और पत्रिका ले और वही बातें फिर से लिख, और उसमें और भी जोड़ दे। आग चमड़े को खा सकती थी, पर जो वचन उस चमड़े ने उठाया था उसे नहीं।
शायद आज कुछ ऐसा लगे जो कट कर जल चुका है, कोई योजना रद्द हुई, कोई बात अनसुनी रह गई, कोई मेहनत बेकार गई। राख जैसी, लौटाई न जा सके ऐसी। पर यह कहानी कुछ और कहती है।
आज
एक कागज़ और कलम लें। जो वचन या वादा आपको लगता है कि कहीं खो गया या नकार दिया गया, उसे एक वाक्य में फिर से लिख दें, और उसे आज कहीं दिखने वाली जगह पर रख दें।
✦ दोपहर का पल
ये छहों नगर इस्राएलियों के और उनके बीच रहनेवाले परदेशियों के लिये भी शरणस्थान ठहरें, कि जो कोई किसी को भूल से मार डाले वह वहीं भाग जाए।
गिनती 35:15
थाली एक तरफ रख दीजिए। हाथ कुछ देर के लिए खाली रहने दीजिए।
पुराने इस्राएल में छह शहर थे, जिनका नाम ही था शरण का स्थान। जो कोई बिना इरादे के, गलती से किसी की जान ले बैठता, वह वहाँ भाग सकता था। वहाँ पहुँचते ही उसका खून बदला लेने वालों से सुरक्षित हो जाता था, जब तक कि न्यायसभा मामले की जाँच नहीं कर लेती। यह व्यवस्था हत्यारे को बचाने के लिए नहीं थी, बल्कि सच को जगह देने के लिए थी, ताकि गुस्से में लिया गया बदला न्याय की जगह न ले ले।
इसमें परमेश्वर का स्वभाव झलकता है। वह जल्दबाजी में सब कुछ एक तराजू पर नहीं तौलता। वह इरादे और दुर्घटना में फर्क करता है, और दोनों पक्षों को, पीड़ित को भी और भागे हुए को भी, एक जगह देता है जहाँ सच्चाई सामने आ सके।
काम के बीच कभी ऐसा पल आता है जब कोई बात, कोई शब्द भीतर गुस्सा भड़का देता है। उस वक्त तुरंत जवाब देना उतना ही खतरनाक है जितना रास्ते में बदला लेना।
आज
आज दोपहर, जवाब भेजने से पहले दस मिनट के लिए फोन या मेल से दूर हट जाइए, किसी शांत कोने में जाकर बैठिए, और वहाँ लिख लीजिए कि आप असल में क्या कहना चाहते हैं, जवाब बाद में भेजेंगे।
◐ दोपहर का पल
“फिर तू इस्राएलियों को आज्ञा देना, कि मेरे पास दीवट के लिये कूट के निकाला हुआ जैतून का निर्मल तेल ले आना, जिससे दीपक नित्य जलता रहे। मिलापवाले तम्बू में, उस बीचवाले पर्दे से बाहर जो साक्षीपत्र के आगे होगा, हारून और उसके पुत्र दीवट साँझ से भोर तक यहोवा के सामने सजा कर रखें। यह विधि इस्राएलियों की पीढ़ियों के लिये सदैव बनी रहेगी।
निर्गमन 27:20-21
तीन बज चुके हैं, डेस्क पर चाय ठंडी पड़ी है, और सुबह जिस काम को आप ज़रूरी समझते थे, अब वह टाला जा सकता है, ऐसा मन कहता है। रात को कौन देखेगा, यह सवाल चुपचाप अंदर उठता है।
मिलापवाले तम्बू में एक दीपक था जो हर रात जलता रहता था। वह तेल साधारण नहीं था, कूटकर निकाला हुआ शुद्ध जैतून का तेल, जिसे बनाने में साधारण दबाए हुए तेल से कहीं अधिक मेहनत लगती थी। और यह दीपक अपने आप नहीं जलता रहता था, हारून और उसके पुत्रों को हर शाम से भोर तक उसे ठीक करना पड़ता था।
यह कोई एक बार का काम नहीं था। पीढ़ी पीढ़ी, सदा की विधि, यह शब्द कठोर लगते हैं। कोई छुट्टी नहीं, कोई यह कह सकने का मौका नहीं कि आज रहने दो।
सवाल यह उठता है, क्या यहोवा को अंधेरे में देखने के लिए दीपक चाहिए था? शायद उत्तर उतना सीधा नहीं है जितना हम चाहते हैं। पर इतना साफ है, रात की ज्योति किसी तमाशे के लिए नहीं, बल्कि वफादारी के लिए जलती रहती थी, तब भी जब कोई देखने वाला नहीं था।
आज
आज वह एक काम याद करें जिसे आप अंधेरे में छोड़ने वाले थे, जहाँ कोई देखता नहीं। आज रात सोने से पहले एक दीया या मोमबत्ती जलाकर पाँच मिनट बैठें और उस काम का नाम ज़ोर से बोलें।
☾ संध्या का क्षण
क्योंकि तेरा मन कोमल हो गया, और जब तू ने मेरे ये वचन सुने, कि यह स्थान और इसके निवासी उजाड़ और श्राप के विषय ठहरेंगे, तब तू ने मेरे सम्मुख दीन होकर अपने वस्त्र फाड़े, और मेरे सामने रोया; इसलिये मैं ने भी तेरी सुन ली है, यहोवा की यही वाणी है।
2 राजा 22:19
योशिय्याह राजा अपने कक्ष में खड़ा है, और जैसे ही मन्दिर में मिली हुई व्यवस्था की पुस्तक उसके सामने पढ़ी जाती है, वह अपने वस्त्र फाड़ देता है। एक राजा, रात के किसी पहर में, अपने ही लोगों पर आने वाले न्याय का भार महसूस करते हुए रो पड़ता है।
राजा के अधिकारी याहवे से पूछने के लिए किसी पुरुष भविष्यद्वक्ता के पास नहीं, बल्कि हुल्दा नबिया के पास जाते हैं। वह यरूशलेम के दूसरे मोहल्ले में रहती थी, उसका पति शल्लूम वस्त्रशाला का रखवाला था। यह छोटा सा विवरण बताता है कि उस समय के यरूशलेम में उसकी वाणी पर भरोसा किया जाता था, एक स्त्री की, जब राज्य का भविष्य दांव पर था।
हुल्दा का उत्तर नगर के लिए कठोर था, पर योशिय्याह के लिए अलग था। क्योंकि उसका मन कोमल हुआ, क्योंकि वह दीन हुआ, क्योंकि वह रोया, यहोवा ने उसकी सुनी। आंसू और फटे वस्त्र व्यर्थ नहीं गए।
आज की शाम में शायद कोई बड़ा पाप या संकट न हो, बस दिन भर की छोटी चूकें, कठोर शब्द, अनदेखा किया गया कोई मौका। हुल्दा का यह वचन दिखाता है कि परमेश्वर दिखावे पर नहीं, मन की कोमलता पर ध्यान देता है। जो ईमानदारी से झुकता है, उसकी सुनी जाती है।
आज
एक कागज़ का टुकड़ा लो और आज की एक बात लिख दो जो तुम्हारे मन को भारी कर रही है, फिर उसे ज़ोर से परमेश्वर के सामने पढ़ो और कागज़ को मेज़ पर रख कर सो जाओ।
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28“फिर एक और पुस्तक लेकर उसमें यहूदा के राजा यहोयाकीम की जलाई हुई पहली पुस्तक के सब वचन लिख दे।
15ये छहों नगर इस्राएलियों के और उनके बीच रहनेवाले परदेशियों के लिये भी शरणस्थान ठहरें, कि जो कोई किसी को भूल से मार डाले वह वहीं भाग जाए।
20“फिर तू इस्राएलियों को आज्ञा देना, कि मेरे पास दीवट के लिये कूट के निकाला हुआ जैतून का निर्मल तेल ले आना, जिससे दीपक नित्य जलता रहे।
21मिलापवाले तम्बू में, उस बीचवाले पर्दे से बाहर जो साक्षीपत्र के आगे होगा, हारून और उसके पुत्र दीवट साँझ से भोर तक यहोवा के सामने सजा कर रखें। यह विधि इस्राएलियों की पीढ़ियों के लिये सदैव बनी रहेगी।
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