बाइबल व्याख्या

1 राजाओं 17

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

अहाब के दरबार में एक अनजान आदमी खड़ा होकर कहता है कि अब आकाश बंद है: "इन वर्षों में मेरे बिना कहे, न तो मेंह बरसेगा, और न ओस पड़ेगी।" इसके बाद परमेश्वर उसी भविष्यद्वक्ता को छिपा देते हैं, पहले करीत नाले के किनारे जहाँ कौवे उसे रोटी और माँस लाते हैं, फिर सीदोन के सारफत में एक विधवा के घर जहाँ मुट्ठी भर मैदा और थोड़ा सा तेल कभी समाप्त नहीं होता। और अंत में, जब उस स्त्री का बेटा मर जाता है, एलिय्याह उसे अटारी पर ले जाकर परमेश्वर से झगड़ते हुए प्रार्थना करता है, और बालक जीवित होकर माँ की गोद में लौटता है।

मर्म

ध्यान दीजिए, परमेश्वर अकाल को रोकते नहीं; वे उसके भीतर से अपने लोगों को जिलाते हैं। बाल को बारिश का देवता माना जाता था, और यहोवा ठीक उसी क्षेत्र पर हाथ रखते हैं। पर जो बात और गहरी चुभती है वह यह है कि परमेश्वर एलिय्याह को अकाल से बाहर नहीं निकालते, उसे अकाल के भीतर एक नाले पर टिका देते हैं, और फिर वह नाला भी सूख जाता है। यहाँ विश्वास का अर्थ सुरक्षा नहीं, बल्कि अगली आज्ञा सुनने की तैयारी है। परमेश्वर रोज़ का प्रबंध करते हैं, महीने भर का भंडार नहीं। यह हमारी उस धारणा को तोड़ता है कि आज्ञाकारिता का इनाम स्थिरता है। यहाँ इनाम उपस्थिति है, और बस आज के लिए पर्याप्त रोटी।

जोड़ने वाला सूत्र

यीशु ने अपने पहले उपदेश में इसी कहानी को उठाया और नासरत के लोगों को भड़का दिया: अकाल इस्राएल में था, पर भविष्यद्वक्ता सीदोन की एक विधवा के पास भेजा गया, यानी ईज़ेबेल के अपने देश में, एक गैर-इस्राएली स्त्री के पास। परमेश्वर की कृपा वहाँ जाती है जहाँ धर्म के ठेकेदार उसे नहीं भेजते। और वह स्त्री जो अपने बेटे के साथ मरने की तैयारी कर रही थी, उसी का बेटा मृत्यु से लौटता है, और वह कहती है, "देख तेरा बेजा जीवित है" के शब्द सुनती है। मसीह में यही पैटर्न पूरा होता है: परदेसी को रोटी, विधवा को पुत्र, और मृत्यु पर अधिकार रखनेवाला परमेश्वर जो अपने पुत्र को भी लौटा देता है।

दर्पण

यह पाठ हमारी सबसे सम्मानित आदत पर उँगली रखता है: बचाकर रखना। एलिय्याह उस स्त्री से जो माँगता है वह अश्लील लगता है, "पहले मेरे लिये एक छोटी सी रोटी बनाकर मेरे पास ले आ।" पहले? उसके पास जो है वह आख़िरी भोजन है। हमारे पास भी एक घड़ा है जिसे हम छूने नहीं देते: वह बचत जो "बुरे दिनों के लिए" है, वह शनिवार की दोपहर जो किसी के लिए नहीं बचती, वह ऊर्जा जो परिवार के बाद किसी और के लिए नहीं रहती। हम उदारता को अतिरिक्त में से करना चाहते हैं, परमेश्वर उसे कमी में से माँगते हैं। और ध्यान दें, घड़ा तब नहीं भरा जब उसने गिना, बल्कि तब जब उसने दिया।

आज यह कीजिए: अपनी रसोई या अलमारी में जाकर एक ऐसी चीज़ उठाइए जो आपने "ज़रूरत पड़ने पर" के लिए रखी है, और आज ही उसे उस एक व्यक्ति तक पहुँचा दीजिए जिसका नाम अभी आपके मन में आया है।

मुख्य पात्र

एलिय्याह अचानक प्रकट होता है, बिना वंशावली, बिना परिचय, गिलाद के किसी गाँव से। उसकी पहचान एक ही वाक्य में है: "यहोवा जिसके सम्मुख मैं उपस्थित रहता हूँ।" वह राजा के सामने नहीं, परमेश्वर के सामने खड़ा रहता है, और इसीलिए राजा के सामने खड़ा हो सकता है। पर यह आदमी पत्थर नहीं है। जब बालक मरता है, वह शिष्टाचार छोड़ देता है और परमेश्वर से लड़ पड़ता है: "क्या तू इस विधवा का बेटा मार डालकर जिसके यहाँ मैं टिका हूँ, इस पर भी विपत्ति ले आया है?" यह शिकायत अविश्वास नहीं, घनिष्ठता है। वह बालक पर तीन बार पसर जाता है, अपना शरीर लगाकर प्रार्थना करता है। सच्ची आध्यात्मिकता साफ़-सुथरी नहीं होती; वह पसीने और सवालों से भरी होती है।

कठिन प्रश्न

स्त्री का आरोप खुला छोड़ दिया गया है: "क्या तू इसलिए मेरे यहाँ आया है कि मेरे बेटे की मृत्यु का कारण हो और मेरे पाप का स्मरण दिलाए?" पाठ यह नहीं कहता कि वह गलत थी, और यह भी नहीं कहता कि उसका कोई पाप था। एलिय्याह उसे धर्मशास्त्र नहीं समझाता; वह बच्चा उठाकर ऊपर चला जाता है। यहाँ एक काँटा रह जाता है: चमत्कारी प्रबंध के बाद भी बीमारी आई, और परमेश्वर ने उसे रोका नहीं। जो लोग विश्वासयोग्य रूप से देते हैं, उनके घर में भी बच्चे बीमार पड़ते हैं। पाठ इसका कारण नहीं बताता। वह केवल दिखाता है कि ऐसे क्षण में क्या करना है: प्रश्न को परमेश्वर के पास ले जाना, उससे दूर नहीं।

पहले सुनने वाले

यह कहानी उन इस्राएलियों के लिए लिखी गई जो निर्वासन में थे या उसकी छाया में जी रहे थे: वे लोग जिनके राजा असफल हो गए थे, जिनकी भूमि छिन गई थी, जिनके पास मुट्ठी भर से ज़्यादा कुछ नहीं था। उनके कानों में "कौवे" का अर्थ अशुद्ध पक्षी था, और "सारफत" का अर्थ दुश्मन का इलाका। यानी परमेश्वर ने अपने जन को अशुद्ध चोंच और परदेसी हाथ से खिलाया। जो सुन रहे थे, वे समझ गए: जब मंदिर, फसल और राजा सब विफल हो जाएँ, तब भी यहोवा का वचन काम करता है। और घड़े का मैदा उस राजा से अधिक टिकाऊ निकला जिसके महल में अकाल आया था।

चिंतन के प्रश्न

आपका "घड़ा और कुप्पी" क्या है, वह आख़िरी चीज़ जिसे आप किसी भी हालत में देने को तैयार नहीं हैं, और आप उसे क्यों पकड़े हुए हैं?

जब आपका "नाला सूख गया", तब आपने उसे परमेश्वर की असफलता समझा या अगली आज्ञा का संकेत? आज पीछे देखकर आप क्या कहेंगे?

1 Kings में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

1 Kings: The Wisdom and the Folly

Dale Ralph Davis

From Solomon's glory to Elijah's fire, told with pastoral punch.

The Message of Kings

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Keeps the many kings straight and the one true King in view.

1 and 2 Kings: An Introduction and Commentary

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1 and 2 Kings

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1 Kings 17 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 राजाओं 17 का क्या अर्थ है?
अहाब के दरबार में एक अनजान आदमी खड़ा होकर कहता है कि अब आकाश बंद है: "इन वर्षों में मेरे बिना कहे, न तो मेंह बरसेगा, और न ओस पड़ेगी।" इसके बाद परमेश्वर उसी भविष्यद्वक्ता को छिपा देते हैं, पहले करीत नाले के किनारे जहाँ कौवे उसे रोटी और माँस लाते हैं, फिर सीदोन के सारफत में एक विधवा के घर जहाँ मुट्ठी भर मैदा और थोड़ा सा तेल कभी समाप्त नहीं होता। और अंत में, जब उस स्त्री का बेटा मर जाता है, एलिय्याह उसे अटारी पर ले जाकर परमेश्वर से झगड़ते हुए प्रार्थना करता है, और बालक जीवित होकर माँ की गोद में लौटता है।
1 राजाओं 17 किस विषय में है?
यीशु ने अपने पहले उपदेश में इसी कहानी को उठाया और नासरत के लोगों को भड़का दिया: अकाल इस्राएल में था, पर भविष्यद्वक्ता सीदोन की एक विधवा के पास भेजा गया, यानी ईज़ेबेल के अपने देश में, एक गैर-इस्राएली स्त्री के पास। परमेश्वर की कृपा वहाँ जाती है जहाँ धर्म के ठेकेदार उसे नहीं भेजते। और वह स्त्री जो अपने बेटे के साथ मरने की तैयारी कर रही थी, उसी का बेटा मृत्यु से लौटता है, और वह कहती है, "देख तेरा बेजा जीवित है" के शब्द सुनती है। मसीह में यही पैटर्न पूरा होता है: परदेसी को रोटी, विधवा को पुत्र, और मृत्यु पर अधिकार रखनेवाला परमेश्वर जो अपने पुत्र को भी लौटा देता है।
1 राजाओं 17 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज यह कीजिए: अपनी रसोई या अलमारी में जाकर एक ऐसी चीज़ उठाइए जो आपने "ज़रूरत पड़ने पर" के लिए रखी है, और आज ही उसे उस एक व्यक्ति तक पहुँचा दीजिए जिसका नाम अभी आपके मन में आया है।
1 राजाओं 17 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
स्त्री का आरोप खुला छोड़ दिया गया है: "क्या तू इसलिए मेरे यहाँ आया है कि मेरे बेटे की मृत्यु का कारण हो और मेरे पाप का स्मरण दिलाए?" पाठ यह नहीं कहता कि वह गलत थी, और यह भी नहीं कहता कि उसका कोई पाप था। एलिय्याह उसे धर्मशास्त्र नहीं समझाता; वह बच्चा उठाकर ऊपर चला जाता है। यहाँ एक काँटा रह जाता है: चमत्कारी प्रबंध के बाद भी बीमारी आई, और परमेश्वर ने उसे रोका नहीं। जो लोग विश्वासयोग्य रूप से देते हैं, उनके घर में भी बच्चे बीमार पड़ते हैं। पाठ इसका कारण नहीं बताता। वह केवल दिखाता है कि ऐसे क्षण में क्या करना है: प्रश्न को परमेश्वर के पास ले जाना, उससे दूर नहीं।
1 राजाओं 17 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपका "घड़ा और कुप्पी" क्या है, वह आख़िरी चीज़ जिसे आप किसी भी हालत में देने को तैयार नहीं हैं, और आप उसे क्यों पकड़े हुए हैं?
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1 Kings 17 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 20

हे प्रभु, एलिय्याह की तरह मैं भी पूछता हूँ, क्यों? जिस घर में तूने मुझे पनाह दी, वहीं दुख क्यों आया? मेरे सवाल तुझसे छिपे नहीं हैं। मैं उन्हें तेरे सामने रख देता हूँ, क्योंकि जवाब सिर्फ तेरे पास है। मेरी पुकार सुन और इस टूटे दिल पर दया कर।

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