बाइबल व्याख्या

1 शमूएल 31:11

बाइबल
यह वचन House of victory church द्वारा समर्पित है

पाठ

खबर पहाड़ों से उतरकर यरदन पार गई: बेतशान की शहरपनाह पर एक शव टँगा है, और उस शव का सिर कहीं और है, पलिश्तियों के देवालयों में घूमता हुआ एक विजय-संदेश। गिलाद के याबेश नगर में लोगों ने यह सुना। बस इतना ही कहता है यह वचन: "जब गिलादवाले याबेश के निवासियों ने सुना कि पलिश्तियों ने शाऊल से क्या-क्या किया है।" वाक्य अधूरा-सा लटका रहता है, जैसे साँस रोककर कोई अगला कदम सोच रहा हो। पूरे अध्याय में हार, भागना, आत्महत्या और लूट है; और फिर अचानक एक छोटा-सा नगर, जिसका नाम कोई सेना नहीं जानती, सुनता है। सुनना यहाँ कोई निष्क्रिय क्रिया नहीं है। यह वह क्षण है जिसमें कहानी की दिशा बदलने लगती है, इससे पहले कि अगली आयत में वे रातों-रात निकल पड़ें।

मूल बात

यह वचन परमेश्वर का नाम तक नहीं लेता, और फिर भी यहाँ कुछ गहरा धार्मिक घट रहा है। याबेश ने बहुत बरस पहले शाऊल से दया पाई थी, जब अम्मोनियों ने उनकी आँखें फोड़ने की धमकी दी थी और शाऊल की सेना ने उन्हें बचाया था। अब जो नगर कभी बचाया गया था, वह सुनता है कि उसका बचानेवाला दीवार पर कीलों से जड़ा है। कृतज्ञता की स्मृति यहाँ साहस बन जाती है। परमेश्वर के राज्य में अनुग्रह कभी एकतरफा लेन-देन नहीं रहता; वह पाने वाले के भीतर बैठकर उसे देनेवाला बना देता है। और दूसरी बात: शाऊल चाहे परमेश्वर से दूर हो गया हो, चाहे उसका अन्त अपनी ही तलवार पर हुआ हो, फिर भी उसका शरीर कचरा नहीं है। याबेश के लोग वही देखते हैं जो पलिश्ती नहीं देख पाते, कि यह लाश किसी समय अभिषिक्त था।

जोड़ने वाला सूत्र

इस्राएल में लटकती हुई लाश केवल अपमान नहीं थी, वह श्राप का चिह्न थी; व्यवस्था कहती है कि जो पेड़ पर लटकाया गया वह परमेश्वर की ओर से श्रापित है, और उसे उसी दिन उतार देना चाहिए। बेतशान की दीवार पर शाऊल इसी श्राप की तस्वीर बन गया, एक राजा जो अपने ही चुनाव के अन्त तक पहुँचा। और फिर कुछ लोग रात के अँधेरे में आते हैं और उस श्रापित शरीर को आदर देते हैं। सदियों बाद एक और शरीर लकड़ी पर लटकेगा, शत्रु की विजय-पट्टिका के नीचे, और फिर कुछ लोग हिम्मत करके उसे उतारेंगे और आदर से रखेंगे। याबेश के लोग उस बड़े दृश्य की धुँधली पूर्वछाया हैं: जहाँ संसार श्राप देखता है, वहाँ विश्वास मूल्य देखता है।

दर्पण

हम में से अधिकतर लोग गिरे हुए लोगों से दूरी बना लेते हैं। जिस सहकर्मी की बदनामी हुई, जिस रिश्तेदार का व्यापार डूबा, जिस पुराने पादरी का नाम अब कोई नहीं लेता, जिस मित्र ने अपनी शादी खुद तोड़ दी: हम उनका नाम बातचीत से चुपचाप हटा देते हैं, ठीक वैसे जैसे इस्राएली अपने नगर छोड़कर भाग गए। याबेश हमें असहज करता है क्योंकि उन्होंने हिसाब नहीं लगाया कि शाऊल इस आदर के योग्य है या नहीं; उन्होंने केवल याद रखा कि एक दिन इस आदमी ने उनके लिए कुछ किया था। कृतज्ञता की स्मृति डर से बड़ी निकली। आज ही उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसने कभी आपकी मदद की थी और जो अब गिर चुका है या भुला दिया गया है, और उसे एक छोटा संदेश भेजिए जिसमें केवल यह हो कि आप उसे याद करते हैं।

एक बारीकी

पूरी आयत एक ही क्रिया पर टिकी है: "सुना"। इब्रानी का शामा केवल कान का काम नहीं है; उसी शब्द से आज्ञा मानना भी कहा जाता है, क्योंकि सच्चा सुनना शरीर को हिला देता है। और ध्यान दीजिए कि उन्होंने क्या सुना: "पलिश्तियों ने शाऊल से क्या-क्या किया है।" यह "क्या-क्या" अपमानों की गिनती है, एक के बाद एक; सिर काटा, हथियार लूटे, देवालयों में प्रदर्शनी, दीवार पर शव। वाक्य जानबूझकर अधूरा छोड़ा गया है। लेखक हमें उस ठहराव में खड़ा रखता है जहाँ याबेश के लोग खड़े थे: खबर भीतर उतर रही है, और अभी तय होना बाकी है कि यह सुनना केवल दुख बनेगा या कदम।

श्रोता

पहले पाठक जानते थे कि बिना कब्र के पड़ा शरीर प्राचीन पूर्व में सबसे भारी अभिशाप था, हार से भी बुरा। वे यह भी जानते थे कि आयत 9 में पलिश्तियों ने अपने देवालयों में जो "शुभ समाचार" भेजा, वह उनके परमेश्वर के विरुद्ध दावा था: दागोन और अश्तोरेत जीत गए, यहोवा हार गया। और याबेश यरदन के पार था, उसी क्षेत्र में जिसके निवासी आयत 7 में अपने नगर छोड़कर भाग गए थे। जो पाठक बाद में दाऊद के राज्य में या निर्वासन की छाया में यह कहानी सुन रहे थे, उन्होंने यह पकड़ा: जब राजधानी चुप है और सेना बिखरी है, तब भी परमेश्वर की प्रजा में कहीं न कहीं वफ़ादारी बची रहती है, अक्सर सबसे छोटे नगर में।

मुख्य पात्र

इस आयत का नायक कोई व्यक्ति नहीं, एक समुदाय है। याबेश के लोग वर्षों से कर्ज़दार थे, और उस कर्ज़ का हिसाब उन्होंने कभी भुलाया नहीं। उनका भीतरी संसार आसान नहीं रहा होगा: वे उस राजा के लिए जोखिम उठा रहे हैं जो अन्त में परमेश्वर से टूट चुका था, जिसकी लड़ाइयाँ हार में बदल गई थीं, जिसका अपना हथियार ढोनेवाला भी डर गया था। उन्होंने राजनीति नहीं देखी, योग्यता नहीं तौली, अगले शासक की कृपा नहीं सोची। उन्होंने केवल यह देखा कि जो शरीर दीवार पर लटक रहा है, वह कभी उनके लिए लड़ा था। ऐसी वफ़ादारी तर्क से नहीं, स्मृति से जन्म लेती है, और वह मनुष्य में परमेश्वर की अपनी छवि की झलक है, जो अपने लोगों को उनके पतन में भी नहीं भूलते।

चिंतन

आपने हाल में किसके बारे में कोई भारी खबर "सुनी" है, और वह सुनना आपके भीतर रुक गया या आपके पैरों तक पहुँचा?

किस व्यक्ति का कर्ज़ आप पर है जिसे आपने चुकाना इसलिए टाल दिया क्योंकि अब उसका नाम लेना आपके लिए महँगा पड़ेगा?

1 Samuel में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

1 Samuel: Looking on the Heart

Dale Ralph Davis

Storytelling commentary at its best, from Hannah's prayer to David's rise.

The Message of Samuel

Mary Evans

One clear guide through both books of Samuel and their flawed kings.

1 Samuel For You

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1 and 2 Samuel: An Introduction and Commentary

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1 and 2 Samuel

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1 Samuel 31:11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 शमूएल 31:11 का क्या अर्थ है?
खबर पहाड़ों से उतरकर यरदन पार गई: बेतशान की शहरपनाह पर एक शव टँगा है, और उस शव का सिर कहीं और है, पलिश्तियों के देवालयों में घूमता हुआ एक विजय-संदेश। गिलाद के याबेश नगर में लोगों ने यह सुना। बस इतना ही कहता है यह वचन: "जब गिलादवाले याबेश के निवासियों ने सुना कि पलिश्तियों ने शाऊल से क्या-क्या किया है।" वाक्य अधूरा-सा लटका रहता है, जैसे साँस रोककर कोई अगला कदम सोच रहा हो। पूरे अध्याय में हार, भागना, आत्महत्या और लूट है; और फिर अचानक एक छोटा-सा नगर, जिसका नाम कोई सेना नहीं जानती, सुनता है। सुनना यहाँ कोई निष्क्रिय क्रिया नहीं है। यह वह क्षण है जिसमें कहानी की दिशा बदलने लगती है, इससे पहले कि अगली आयत में वे रातों-रात निकल पड़ें।
1 शमूएल 31:11 किस विषय में है?
इस्राएल में लटकती हुई लाश केवल अपमान नहीं थी, वह श्राप का चिह्न थी; व्यवस्था कहती है कि जो पेड़ पर लटकाया गया वह परमेश्वर की ओर से श्रापित है, और उसे उसी दिन उतार देना चाहिए। बेतशान की दीवार पर शाऊल इसी श्राप की तस्वीर बन गया, एक राजा जो अपने ही चुनाव के अन्त तक पहुँचा। और फिर कुछ लोग रात के अँधेरे में आते हैं और उस श्रापित शरीर को आदर देते हैं। सदियों बाद एक और शरीर लकड़ी पर लटकेगा, शत्रु की विजय-पट्टिका के नीचे, और फिर कुछ लोग हिम्मत करके उसे उतारेंगे और आदर से रखेंगे। याबेश के लोग उस बड़े दृश्य की धुँधली पूर्वछाया हैं: जहाँ संसार श्राप देखता है, वहाँ विश्वास मूल्य देखता है।
1 शमूएल 31:11 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पूरी आयत एक ही क्रिया पर टिकी है: "सुना"। इब्रानी का शामा केवल कान का काम नहीं है; उसी शब्द से आज्ञा मानना भी कहा जाता है, क्योंकि सच्चा सुनना शरीर को हिला देता है। और ध्यान दीजिए कि उन्होंने क्या सुना: "पलिश्तियों ने शाऊल से क्या-क्या किया है।" यह "क्या-क्या" अपमानों की गिनती है, एक के बाद एक; सिर काटा, हथियार लूटे, देवालयों में प्रदर्शनी, दीवार पर शव। वाक्य जानबूझकर अधूरा छोड़ा गया है। लेखक हमें उस ठहराव में खड़ा रखता है जहाँ याबेश के लोग खड़े थे: खबर भीतर उतर रही है, और अभी तय होना बाकी है कि यह सुनना केवल दुख बनेगा या कदम।
1 शमूएल 31:11 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इस आयत का नायक कोई व्यक्ति नहीं, एक समुदाय है। याबेश के लोग वर्षों से कर्ज़दार थे, और उस कर्ज़ का हिसाब उन्होंने कभी भुलाया नहीं। उनका भीतरी संसार आसान नहीं रहा होगा: वे उस राजा के लिए जोखिम उठा रहे हैं जो अन्त में परमेश्वर से टूट चुका था, जिसकी लड़ाइयाँ हार में बदल गई थीं, जिसका अपना हथियार ढोनेवाला भी डर गया था। उन्होंने राजनीति नहीं देखी, योग्यता नहीं तौली, अगले शासक की कृपा नहीं सोची। उन्होंने केवल यह देखा कि जो शरीर दीवार पर लटक रहा है, वह कभी उनके लिए लड़ा था। ऐसी वफ़ादारी तर्क से नहीं, स्मृति से जन्म लेती है, और वह मनुष्य में परमेश्वर की अपनी छवि की झलक है, जो अपने लोगों को उनके पतन में भी नहीं भूलते।
1 शमूएल 31:11 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
किस व्यक्ति का कर्ज़ आप पर है जिसे आपने चुकाना इसलिए टाल दिया क्योंकि अब उसका नाम लेना आपके लिए महँगा पड़ेगा?
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1 Samuel 31 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

इस प्रकार शाऊल, और उसके तीनों पुत्र, और उसका हथियार ढोनेवाला, और उसके समस्त जन उसी दिन एक संग मर गए।"

एक ही दिन, एक साथ। शाऊल का परमेश्वर से दूर जाना सालों तक चला, पर उसका अंजाम अकेले उसने नहीं भुगता। योनातान भी वहीं गिरा।

हमारे फैसले कभी अकेले हमारे नहीं होते। जो आपके साथ चलते हैं, वे आपके रास्ते का फल भी चखते हैं। आज आप किसे अपने पीछे ले जा रहे हैं?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 9

पिता, शाऊल का अंत पढ़कर मन भारी हो जाता है। जो जीवन आपकी बुलाहट से शुरू हुआ था, वह अपमान में खत्म हुआ। मुझे बचाइए कि मैं अपनी जिद में आपसे दूर न चला जाऊँ। मेरा नाम, मेरा सम्मान, मेरा अंत, सब आपके हाथों में सौंपता हूँ।

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