2 राजाओं 11
पाठ
अहज्याह की मृत्यु के बाद उसकी माता अतल्याह ने दाऊद के घराने के बचे हुए वारिसों को कटवा दिया और छह वर्ष यहूदा पर राज किया। परन्तु एक बच्चा बच गया: योआश, जिसे उसकी बुआ यहोशेबा ने दाई के साथ मन्दिर में छिपा दिया। सातवें वर्ष यहोयादा याजक ने शतपतियों के साथ वाचा बाँधी, बालक को मुकुट और साक्षीपत्र देकर अभिषेक किया, अतल्याह घोड़ों के मार्ग पर मारी गई, बाल का भवन ढाया गया, और "नगर में शान्ति हुई।"
मर्म
यह अध्याय एक ही प्रश्न के चारों ओर घूमता है: क्या परमेश्वर का वचन तलवार से बड़ा है? अतल्याह के पास सेना थी, सिंहासन था, समय था; उसने "पूरे राजवंश को नाश कर डाला।" और फिर भी दाऊद से की गई प्रतिज्ञा एक बिछौने रखने की कोठरी में साँस लेती रही। परमेश्वर यहाँ आकाश से नहीं गरजते, न कोई भविष्यद्वक्ता आग बरसाता है। वे एक स्त्री के साहस, एक दाई की चुप्पी और एक याजक की धीरज भरी योजना के भीतर काम करते हैं। अनुग्रह का स्वभाव यही है: वह शक्ति से होड़ नहीं लेता, वह शक्ति के नीचे से बचा लेता है। और ध्यान दें कि जो बचा वह योग्य नहीं था, बस सात वर्ष का था। वाचा योग्यता पर नहीं, परमेश्वर की सत्यता पर टिकी है।
सूत्र
बाइबल की पूरी कहानी में यह क्षण एक पतली डोर है जो टूटने से बच जाती है। दाऊद के घराने से मसीह आना था; यहाँ वह वंश एक बच्चे तक सिकुड़ जाता है, और वह बच्चा मन्दिर में छिपा है। कई सदियों बाद एक और राजा, हेरोदेस, बैतलहम के बच्चों को मरवाएगा, और एक और बालक छिपकर बच जाएगा। परमेश्वर की प्रतिज्ञा बार-बार ऐसे ही बचती है: शरणार्थी की तरह, गोद में, रात में। जो मुकुट योआश के सिर पर रखा गया वह अस्थायी था, क्योंकि वह भी अन्त में बिगड़ गया। परन्तु वह मुकुट उस राजा की ओर इशारा करता है जिसका राज्य किसी अतल्याह से नहीं छीना जा सकता, और जिसका अभिषेक तेल से नहीं, आत्मा से हुआ।
दर्पण
हम अकसर परमेश्वर के काम को आकार से नापते हैं। जब कार्यालय में बेईमान आदमी पदोन्नति पाता है, जब परिवार का सबसे कठोर सदस्य हर बैठक का स्वर तय करता है, जब मण्डली में राजनीति करने वाला जीत जाता है, तो मन कहता है कि सच्चाई हार चुकी है। यह अध्याय कहता है: छह वर्ष ऐसे ही लगते हैं। अतल्याह ने राज किया, और परमेश्वर का उत्तर एक कोठरी में सो रहा था। यह पाठ हमारे धैर्य को छूता है और हमारे अहंकार को भी, क्योंकि यहोशेबा और यहोयादा को इतिहास में नाम कमाने का मौका नहीं मिला; उन्होंने छह वर्ष चुपचाप एक बच्चे को जीवित रखा। आज एक काम कीजिए: उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसे आप चुपचाप सम्भाल रहे हैं, बिना किसी पहचान के, और उसके लिए दो मिनट प्रार्थना करके वह कागज़ अपनी बाइबल में रख दीजिए।
पृष्ठभूमि
यह लगभग नौवीं शताब्दी ईसा पूर्व की बात है, यरूशलेम में। अतल्याह उत्तरी राज्य के आहाब और ईजेबेल के घराने से थी, और विवाह के द्वारा यहूदा के राजवंश में आई थी। यह विवाह राजनीतिक गठबंधन था, परन्तु उसके साथ बाल की उपासना दक्षिण में गहरी जड़ पकड़ चुकी थी, यहाँ तक कि यरूशलेम में "बाल के भवन" का अपना याजक था। जब उसका पुत्र अहज्याह मारा गया, तो वह रानी-माता के अधिकार से सत्ता में आ गई, जो इस्राएल के इतिहास में अनोखी बात है। उसके पास सैनिक शक्ति थी; यहोयादा के पास मन्दिर था, शतपतियों का भरोसा था, और "राजा दाऊद के बर्छे, और ढालें जो यहोवा के भवन में थीं।" पुराने हथियार, पुरानी प्रतिज्ञा, नई लड़ाई।
श्रोता
राजाओं की यह पुस्तक उन लोगों के लिए लिखी गई जो निर्वासन में थे या उसकी छाया में जी रहे थे। उनके लिए सबसे जलता हुआ प्रश्न यही था: क्या दाऊद का घराना खत्म हो गया? बाबेल ने मन्दिर ढा दिया, राजा को अंधा करके ले गए, और वंश बुझ गया लगता था। इस अध्याय को सुनते हुए उन्होंने वह चीज़ पहचानी जो हम आसानी से चूक जाते हैं: परमेश्वर ने पहले भी वंश को एक बच्चे तक सिमटने दिया, और फिर उसे सिंहासन पर बैठाया। "नगर में शान्ति हुई" उनके लिए भावुक वाक्य नहीं था, वह एक आशा थी। जहाँ मूर्तियाँ तोड़ी जाती हैं और वाचा नई की जाती है, वहाँ शान्ति लौट सकती है।
बारीकी
पद 12 में एक शब्द चुपचाप बहुत कुछ कहता है: मुकुट के साथ बालक के सिर पर "साक्षीपत्र" भी रखा गया, अर्थात् व्यवस्था की पुस्तक या वाचा का दस्तावेज़। यहूदा में राजा बनने का अर्थ केवल शक्ति पाना नहीं था, बल्कि एक लिखित शर्त के नीचे आना था। मुकुट अधिकार देता है, साक्षीपत्र उस अधिकार की सीमा खींचता है। अतल्याह ने बिना साक्षीपत्र के राज किया, और वही उसका पतन था। यही कारण है कि पद 17 में वाचा दो बार बाँधी जाती है, पहले परमेश्वर और प्रजा के बीच, फिर राजा और प्रजा के बीच। परमेश्वर के राज्य में कोई भी इतना ऊँचा नहीं होता कि वचन के ऊपर हो जाए। जो नेता साक्षीपत्र उतार देता है, वह मुकुट भी खो देता है।
चिन्तन
आपके जीवन में वे कौन से "छह वर्ष" हैं जहाँ परमेश्वर का काम आपको दिखाई नहीं दे रहा, और क्या आप वहाँ यहोशेबा की तरह चुपचाप कुछ बचाए रखने को तैयार हैं?
आपके हाथ में जो भी अधिकार है, घर में, काम में, मण्डली में, उसके साथ कौन सा "साक्षीपत्र" रखा है, और आपने पिछली बार उसे कब पढ़ा था?
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2 Kings 11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
2 राजाओं 11 का क्या अर्थ है?
2 राजाओं 11 किस विषय में है?
2 राजाओं 11 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
2 राजाओं 11 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
2 राजाओं 11 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
2 Kings 11 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि आपने छोटे योआश के चारों ओर पहरेदार खड़े किए, ताकि वह सुरक्षित रहे। आप आज भी अपने लोगों को घेरे रहते हैं और अपनी प्रतिज्ञा टूटने नहीं देते। धन्यवाद कि जहाँ हम कमज़ोर हैं, वहाँ आप अपने हाथों से हमें थामे रहते हैं।
पिता, जिसे तूने छिपाकर बचाए रखा, उसे तूने समय आने पर उसके स्थान पर बिठाया। मेरे जीवन के छिपे हुए सालों को भी तू व्यर्थ न जाने दे। जहाँ डर और शोर है, वहाँ तू शांति ला, और मेरे मन को इस भरोसे पर टिका रख कि तेरा समय सही है।
तब याजक ने शतपतियों को राजा दाऊद के बर्छे और ढालें जो यहोवा के भवन में थीं, दे दीं।" सोचो, वे हथियार वर्षों से मन्दिर में पड़े थे। किसी ने उन्हें भुला दिया होगा। पर जिस दिन दाऊद के वंश का आखिरी बचा हुआ बालक सिंहासन पर बैठने वाला था, उसी दिन वे काम आए। परमेश्वर जो सम्भालकर रखता है, वह बेकार नहीं। तेरे जीवन का वह हिस्सा जो अभी धूल में पड़ा लगता है, उसका भी एक नियत दिन है।
छह साल तक वह बच्चा मन्दिर के किसी कोने में छिपा रहा। बाहर अतल्याह राज करती रही, और लगा कि दाऊद का वंश मिट गया। पर सातवें वर्ष यहोयादा ने अगुवों को बुलाकर "राजकुमार को दिखाया।" परमेश्वर की प्रतिज्ञा मरी नहीं थी, बस छिपी हुई थी। तेरे जीवन में भी जो अभी दिखाई नहीं देता, वह खत्म नहीं हुआ। सही समय पर वह सामने लाया जाएगा।
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