2 राजाओं 21
पाठ
मनश्शे बारह साल की उम्र में गद्दी पर बैठता है और पचपन वर्ष राज करता है, यहूदा के इतिहास का सबसे लंबा शासन और सबसे अंधकारमय। वह अपने पिता हिजकिय्याह का सारा सुधार उलट देता है, मंदिर के आँगनों में तारागणों की वेदियाँ खड़ी करता है, अशेरा की मूर्ति उसी भवन में रखता है जहाँ परमेश्वर ने अपना नाम रखा था, अपने बेटे को आग में होम चढ़ाता है और यरूशलेम को निर्दोषों के खून से भर देता है। भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा परमेश्वर न्याय की घोषणा करते हैं; फिर आमोन दो साल उसी राह चलता है, अपने ही कर्मचारियों के हाथ मारा जाता है, और योशिय्याह राजा बनाया जाता है।
मूल बात
यह अध्याय एक असहज सच्चाई सामने रखता है: परमेश्वर का नाम जिस जगह टिका है, वहीं सबसे गहरा अपमान हो सकता है। वचन 7 में परमेश्वर की प्रतिज्ञा दोहराई जाती है, "इस भवन में और यरूशलेम में… मैं सदैव अपना नाम रखूँगा", और ठीक उसी वाक्य के बगल में अशेरा की मूर्ति खड़ी है। यहाँ धर्म की कमी नहीं, धर्म की अधिकता है: वेदियाँ, मुहूर्त्त, टोना, ओझे, सब कुछ उपलब्ध। मनश्शे ने उपासना बंद नहीं की, उसने उपासना को फैलाकर बेमानी कर दिया। पाप यहाँ नास्तिकता नहीं, मिलावट है। और परमेश्वर की प्रतिक्रिया ठंडी उपेक्षा नहीं, क्रोध है, क्योंकि जहाँ प्रेम की वाचा है वहाँ विश्वासघात पर चुप्पी नहीं होती।
जोड़ने वाला धागा
दो चित्र सीधे मसीह की ओर इशारा करते हैं। पहला, वचन 6: मनश्शे अपने बेटे को आग में चढ़ाता है, ताकि देवता खुश हों और वह बच जाए। यह उल्टी दिशा में चलता हुआ सुसमाचार है। असली कहानी में पिता अपने पुत्र को देते हैं, किसी क्रोधी देवता को मनाने के लिए नहीं, बल्कि अपने ही प्रेम से, दोषियों को बचाने के लिए। मनश्शे का बेटा व्यर्थ जला; परमेश्वर का पुत्र व्यर्थ नहीं मरा। दूसरा, वचन 16: "उसने यरूशलेम को एक सिरे से दूसरे सिरे तक खून से भर दिया।" उसी शहर में सदियों बाद एक और निर्दोष का खून बहा, पर वह खून न्याय की पुकार नहीं, क्षमा की पुकार बना। और जिस भवन को मनश्शे ने अपवित्र किया, उसकी जगह अंततः एक देह खड़ी हुई जिसमें परमेश्वर का नाम सचमुच स्थायी रूप से बसा।
दर्पण
आपके जीवन में शायद कोई अशेरा नहीं है, पर मिलावट की आदत हमारी भी है। हम रविवार को आराधना करते हैं और सोमवार को उसी गंभीरता से अपनी नौकरी की सुरक्षा, अपने बच्चों की सफलता या अपने बैंक बैलेंस की पूजा करते हैं। मनश्शे ने यहोवा को हटाया नहीं, उन्हें सूची में एक नाम बना दिया। यही सबसे सभ्य किस्म की मूर्तिपूजा है। और ध्यान दीजिए, वचन 9 कहता है कि उसने "उनको यहाँ तक भटका दिया" कि लोग उससे भी आगे निकल गए। हमारे समझौते कभी निजी नहीं रहते; बच्चे, टीम, छोटा समूह, सब देखते और सीखते हैं। आज एक काम कीजिए: कागज़ पर वह एक चीज़ लिखिए जिसे खोने से आप परमेश्वर से ज़्यादा डरते हैं, और उसे ज़ोर से बोलकर परमेश्वर के हाथ में सौंप दीजिए।
मुख्य पात्र
मनश्शे बारह साल का था जब राज मिला, एक बच्चा जिसके पिता ने अभी-अभी अश्शूर के सामने विश्वास का बड़ा जोखिम उठाया था। शायद उसने वही जोखिम फिर कभी नहीं लेना चाहा। उसकी हर हरकत में एक ही बात दिखती है: नियंत्रण की भूख। मुहूर्त्त देखना, टोना करना, ओझों से पूछना, ये सब भविष्य को अपने हाथ में रखने की कोशिशें हैं। जो परमेश्वर पर भरोसा नहीं करता, वह अंधविश्वास का गुलाम बन जाता है। और पचपन वर्ष का राज्य! परमेश्वर का धीरज इतना लंबा कि वह लापरवाही जैसा दिखने लगे। यह अध्याय उसके पश्चाताप की बात नहीं करता, पर वह लंबी चुप्पी अपने आप में अनुग्रह का एक अनसुना निमंत्रण थी।
श्रोताओं का चेहरा
यह विवरण उन लोगों के लिए लिखा गया जो बेबीलोन में बैठे थे, मंदिर जल चुका था, शहर उजड़ चुका था, और वे पूछ रहे थे: क्या परमेश्वर हार गए? यह अध्याय उन्हें जवाब देता है। परमेश्वर हारे नहीं; उन्होंने चेतावनी दी थी, बहुत पहले, "अपने दास भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा"। निर्वासन दुर्घटना नहीं, घोषित न्याय था। यह सुनना दर्दनाक था, पर राहत भी देता था, क्योंकि जो परमेश्वर अपनी बात रखते हैं वे दंड में भी विश्वसनीय हैं और इसलिए वापसी की प्रतिज्ञा में भी भरोसेमंद होंगे। साथ ही अंत में योशिय्याह का नाम आता है, और पाठक जानता है कि दाऊद का दीपक अब भी बुझा नहीं।
एक बारीकी
वचन 13 का चित्र ठहरकर देखने लायक है: "मैं यरूशलेम को ऐसा पोछूँगा जैसे कोई थाली को पोंछता है और उसे पोंछकर उलट देता है।" मापने की डोरी और साहुल राजमिस्त्री के औजार हैं, बनाने के लिए; यहाँ परमेश्वर उन्हीं से नापकर ढहाते हैं। पर असली चोट थाली वाली उपमा में है। रसोई का सबसे मामूली काम। कोई नाटकीय तबाही नहीं, बस पोंछकर उलट देना, जैसे अब इसमें परोसने को कुछ बचा ही न हो। परमेश्वर का चुना हुआ शहर एक खाली बर्तन। और फिर भी, वही खाली थाली बाद में एक मेज़ पर लौटती है, जहाँ एक और यरूशलेम की रात में रोटी तोड़ी जाती है और कटोरा भरा हुआ आगे बढ़ाया जाता है।
चिंतन
आपकी ज़िंदगी में कौन सी वेदी आपने परमेश्वर के आँगन के भीतर ही खड़ी कर रखी है, यानी कौन सी चीज़ आप विश्वास के नाम पर ही पूजते हैं?
अगर परमेश्वर का पचपन साल का धीरज मनश्शे के लिए निमंत्रण था, तो आपके साथ उनका धीरज किस बात का निमंत्रण है?
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2 Kings 21 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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2 राजाओं 21 किस विषय में है?
2 राजाओं 21 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
2 राजाओं 21 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
2 राजाओं 21 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
2 Kings 21 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
परमेश्वर कहते हैं, "मैं यरूशलेम को ऐसा पोंछ डालूँगा जैसे कोई थाली को पोंछता, और उसे पोंछकर उलट देता है।" मापने की डोरी और साहुल तो बनाने के औज़ार हैं, पर यहाँ वे गिराने के लिए उठाए गए। सोचिए, जिस थाली में परमेश्वर ने खिलाया था, वही उलटी रखी जा रही है। क्या आप उसी नाप पर खरे उतरेंगे जो आपके लिए रखा गया है?
मनश्शे का पाप उसके महल में बंद नहीं रहा। परमेश्वर की शिकायत यही है कि उसने "यहूदा को अपनी मूरतों के द्वारा पाप में फँसाया है।" जिन एमोरियों को परमेश्वर ने इस देश से निकाला था, उनसे भी बढ़कर बुराई अब उसी के लोगों में थी।
सोच, तेरा छिपा समझौता किसे अपने पीछे खींच रहा है? घर में कोई तुझे देखकर सीख रहा है।
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