बाइबल व्याख्या

प्रेरितों के काम 11

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

यरूशलेम की कलीसिया में शिकायत यह नहीं थी कि पतरस ने अन्यजातियों को सुसमाचार सुनाया, बल्कि यह: "तूने खतनारहित लोगों के यहाँ जाकर उनके साथ खाया।" पतरस जवाब में कोई धर्मशास्त्रीय तर्क नहीं देता, वह केवल क्रम से बताता है कि क्या हुआ: याफा में दर्शन, आकाश से उतरी चादर, तीन बार दोहराई गई आवाज, कैसरिया से आए तीन आदमी, और कुरनेलियुस के घर पर पवित्र आत्मा का उतरना। सुनने वाले चुप हो जाते हैं और परमेश्वर की बड़ाई करते हैं। इसके बाद कहानी अन्ताकिया चली जाती है, जहाँ बिखरे हुए विश्वासी यूनानियों से भी बोलते हैं, बरनबास आकर अनुग्रह को पहचानता है, शाऊल को ढूँढ़ लाता है, और अकाल की भविष्यवाणी सुनकर वही कलीसिया यहूदिया के भाइयों के लिये पैसा भेजती है।

मर्म

ध्यान दें कि पतरस का निर्णायक वाक्य कोई सिद्धांत नहीं, एक प्रश्न है: "तो मैं कौन था जो परमेश्वर को रोक सकता था?" यानी शुद्धता की लड़ाई अब स्वच्छता की नहीं, अधिकार की लड़ाई है। परमेश्वर किसे स्वीकार करते हैं, यह तय करने का हक किसी के पास नहीं। और परमेश्वर का फैसला सुनाने का तरीका भी देखिए: वे पवित्र आत्मा को उन लोगों पर उतारते हैं जिन्हें कलीसिया ने अभी मेज पर भी नहीं बैठाया था। अनुग्रह यहाँ प्रक्रिया से आगे निकल जाता है। इसका व्यवहारिक अर्थ कड़वा है: हमारी धार्मिक सीमाएँ अक्सर परमेश्वर की नहीं, हमारी सुविधा की होती हैं, और परमेश्वर उन्हें हमसे पूछे बिना तोड़ देते हैं।

सूत्र

जिस चादर में चौपाए, रेंगनेवाले जन्तु और पक्षी थे, वह लैव्यव्यवस्था की उन सूचियों को उलट देती है जिनसे इस्राएल की पहचान बनी थी। परमेश्वर उस दीवार को नहीं गिरा रहे जो उन्होंने नहीं बनाई; वे उस दीवार को हटा रहे हैं जो उन्होंने स्वयं एक समय के लिये खड़ी की थी, क्योंकि अब उसका काम पूरा हो गया। मसीह के क्रूस पर जो शुद्ध किया गया, उसे फिर अशुद्ध कहना उस बलिदान का अपमान है। इसलिये पतरस को यीशु का वचन याद आता है: "यूहन्ना ने तो पानी से बपतिस्मा दिया, परन्तु तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे।" पिन्तेकुस्त का वादा अब कुरनेलियुस के आँगन तक पहुँच गया है, और यही वह धारा है जो अन्ताकिया से लेकर आज तक बहती है।

आरसी

अब ईमानदारी से: आपकी मेज पर कौन नहीं बैठता? ऑफिस की कैंटीन में वह सहकर्मी जिसकी जीवनशैली आपको असहज करती है; वह रिश्तेदार जिसने दूसरी जाति में शादी की और जिससे आपका परिवार अब कम बोलता है; वह पड़ोसी जो दूसरे धर्म का है और जिसके घर का पानी आप पीने से बचते हैं। हम इन दूरियों को "सिद्धांत" कहते हैं, पर अक्सर ये डर हैं, या विरासत में मिली शुद्धता की आदत। पतरस की आलोचना करने वाले बुरे लोग नहीं थे, वे गंभीर विश्वासी थे। यही बात डराती है। और अन्ताकिया का जवाब देखिए: वही कलीसिया, जिसे यरूशलेम से शक की नजर मिली थी, अकाल सुनकर "अपनी-अपनी पूँजी के अनुसार" यहूदिया के भाइयों को पैसा भेजती है। स्वीकृति का सबूत भावना नहीं, बैंक खाता बना।

आज ही करें: उस एक व्यक्ति का नाम लिखें जिसे आपने चुपचाप "हमारे जैसा नहीं" मान लिया है, और उसे आज खाने पर बुलाने का संदेश भेजें, तारीख के साथ।

चेहरे

लूका जिनके लिये लिख रहा है, उनमें से कई अन्यजाति पृष्ठभूमि के मसीही थे, और उनके मन में एक चुभता सवाल था: क्या हम दूसरे दर्जे के विश्वासी हैं? यरूशलेम की असली कलीसिया और हम, बाद में जोड़े गए लोग? अध्याय 11 उनका उत्तर है। पहली पीढ़ी के यहूदी अगुवों ने स्वयं स्वीकार किया: "तब तो परमेश्वर ने अन्यजातियों को भी जीवन के लिये मन फिराव का दान दिया है।" यह दस्तावेज़ है, सहानुभूति नहीं। साथ ही उन्हें यह भी सुनाई दिया कि यह मेल सस्ता नहीं था; इसमें वाद-विवाद था, दर्शन की जरूरत पड़ी, तीन बार आवाज आई, और छः गवाह साथ ले जाने पड़े। कलीसिया ने यह दीवार आसानी से नहीं तोड़ी।

बारीकी

पद 26 का एक शब्द आसानी से छूट जाता है: चेले "सबसे पहले अन्ताकिया ही में मसीही कहलाए।" यह नाम उन्होंने खुद नहीं चुना, बाहर के लोगों ने दिया। और वह ठीक उस शहर में दिया गया जहाँ यहूदी और यूनानी एक ही मंडली में थे। जब तक कलीसिया केवल यहूदी थी, बाहरी लोग उसे यहूदी धर्म का एक पंथ समझते रहे। जैसे ही मेज मिली-जुली हुई, शहर को नया शब्द गढ़ना पड़ा, क्योंकि ऐसा समुदाय पहले देखा नहीं गया था। सोचिए: हमारी पहचान का नाम ही हमारी मिली-जुली संगति से निकला। जहाँ हम दीवारें बनाए रखते हैं, वहाँ हम अपने ही नाम को झूठा साबित करते हैं।

मुख्य पात्र

बरनबास इस अध्याय का शांत नायक है। वह जाँच करने भेजा गया था, पर आया और "परमेश्वर के अनुग्रह को देखकर आनन्दित हुआ"। वह पहले कमियाँ नहीं गिनता, पहले अनुग्रह पहचानता है; यह दृष्टि का अनुशासन है, स्वभाव की ढिलाई नहीं, क्योंकि फिर वह उन्हें दृढ़ता से उपदेश देता है कि "तन मन लगाकर प्रभु से लिपटे रहें"। और सबसे बड़ी बात: वह अकेले यह काम चलाने की कोशिश नहीं करता, तरसुस जाकर शाऊल को ढूँढ़ लाता है, उस आदमी को जिस पर अब भी कलीसिया को शक था। लूका कहता है वह "भला मनुष्य था; और पवित्र आत्मा और विश्वास से परिपूर्ण था।" भलाई यहाँ उदारता है: जगह देने की, श्रेय बाँटने की, दूसरे को आगे बढ़ाने की उदारता।

चिंतन

मैं किस दूरी को "सिद्धांत" कहकर बचाता हूँ, जबकि असल में वह डर या आदत है?

अगर मेरी स्वीकृति का सबूत मेरे खर्च और मेरे खाने की मेज से मापा जाए, तो आज का हिसाब क्या कहेगा?

Acts में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Acts

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Stott's classic on how the gospel crossed every boundary on earth.

Acts For Everyone, Part 1

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Acts: An Introduction and Commentary

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Acts 11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

प्रेरितों के काम 11 का क्या अर्थ है?
यरूशलेम की कलीसिया में शिकायत यह नहीं थी कि पतरस ने अन्यजातियों को सुसमाचार सुनाया, बल्कि यह: "तूने खतनारहित लोगों के यहाँ जाकर उनके साथ खाया।" पतरस जवाब में कोई धर्मशास्त्रीय तर्क नहीं देता, वह केवल क्रम से बताता है कि क्या हुआ: याफा में दर्शन, आकाश से उतरी चादर, तीन बार दोहराई गई आवाज, कैसरिया से आए तीन आदमी, और कुरनेलियुस के घर पर पवित्र आत्मा का उतरना। सुनने वाले चुप हो जाते हैं और परमेश्वर की बड़ाई करते हैं। इसके बाद कहानी अन्ताकिया चली जाती है, जहाँ बिखरे हुए विश्वासी यूनानियों से भी बोलते हैं, बरनबास आकर अनुग्रह को पहचानता है, शाऊल को ढूँढ़ लाता है, और अकाल की भविष्यवाणी सुनकर वही कलीसिया यहूदिया के भाइयों के लिये पैसा भेजती है।
प्रेरितों के काम 11 किस विषय में है?
जिस चादर में चौपाए, रेंगनेवाले जन्तु और पक्षी थे, वह लैव्यव्यवस्था की उन सूचियों को उलट देती है जिनसे इस्राएल की पहचान बनी थी। परमेश्वर उस दीवार को नहीं गिरा रहे जो उन्होंने नहीं बनाई; वे उस दीवार को हटा रहे हैं जो उन्होंने स्वयं एक समय के लिये खड़ी की थी, क्योंकि अब उसका काम पूरा हो गया। मसीह के क्रूस पर जो शुद्ध किया गया, उसे फिर अशुद्ध कहना उस बलिदान का अपमान है। इसलिये पतरस को यीशु का वचन याद आता है: "यूहन्ना ने तो पानी से बपतिस्मा दिया, परन्तु तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे।" पिन्तेकुस्त का वादा अब कुरनेलियुस के आँगन तक पहुँच गया है, और यही वह धारा है जो अन्ताकिया से लेकर आज तक बहती है।
प्रेरितों के काम 11 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही करें: उस एक व्यक्ति का नाम लिखें जिसे आपने चुपचाप "हमारे जैसा नहीं" मान लिया है, और उसे आज खाने पर बुलाने का संदेश भेजें, तारीख के साथ।
प्रेरितों के काम 11 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पद 26 का एक शब्द आसानी से छूट जाता है: चेले "सबसे पहले अन्ताकिया ही में मसीही कहलाए।" यह नाम उन्होंने खुद नहीं चुना, बाहर के लोगों ने दिया। और वह ठीक उस शहर में दिया गया जहाँ यहूदी और यूनानी एक ही मंडली में थे। जब तक कलीसिया केवल यहूदी थी, बाहरी लोग उसे यहूदी धर्म का एक पंथ समझते रहे। जैसे ही मेज मिली-जुली हुई, शहर को नया शब्द गढ़ना पड़ा, क्योंकि ऐसा समुदाय पहले देखा नहीं गया था। सोचिए: हमारी पहचान का नाम ही हमारी मिली-जुली संगति से निकला। जहाँ हम दीवारें बनाए रखते हैं, वहाँ हम अपने ही नाम को झूठा साबित करते हैं।
प्रेरितों के काम 11 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
मैं किस दूरी को "सिद्धांत" कहकर बचाता हूँ, जबकि असल में वह डर या आदत है?

Acts 11 में आपको क्या स्पर्श करता है?

इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।

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