बाइबल व्याख्या

प्रेरितों के काम 8:34

बाइबल
यह वचन SATYAVEDA MINISTRIES द्वारा समर्पित है

पाठ

रथ रुका नहीं है, पहिए चल रहे हैं, और एक ऊँचे ओहदे का आदमी, कूश की रानी का खजांची, अपनी गोद में खुली पुस्तक लिए बैठा है। उसने अभी-अभी यशायाह की वे पंक्तियाँ पढ़ी हैं जिनमें कोई भेड़ की तरह वध के लिए ले जाया जाता है और मुँह तक नहीं खोलता। और अब वह पढ़ना रोककर अपने बगल में बैठे अजनबी की ओर मुड़ता है और विनती करता है: "यह बता कि भविष्यद्वक्ता यह किसके विषय में कहता है, अपने या किसी दूसरे के विषय में?" यही पूरी आयत है। कोई भाषण नहीं, कोई दावा नहीं, सिर्फ एक प्रश्न, और उस प्रश्न के आगे झुका हुआ एक आदमी जो आदतन दूसरों को आदेश देता होगा, पर यहाँ विनती कर रहा है।

मर्म

यह प्रश्न बताता है कि पवित्रशास्त्र अपने आप में बंद दरवाज़ा नहीं, पर खुद-ब-खुद खुलने वाली खिड़की भी नहीं। खोजा पढ़ सकता है, शब्द समझ सकता है, पर पाठ का केंद्र उससे ओझल है: यह "कौन" है? और यहीं परमेश्वर के काम करने का तरीका दिखता है। वे पुस्तक देते हैं, और फिर पुस्तक को खोलने वाला व्यक्ति भी भेजते हैं। स्वर्गदूत ने फिलिप्पुस को रेगिस्तानी मार्ग पर भेजा, पवित्र आत्मा ने उसे रथ के पास जाने को कहा, क्योंकि एक आदमी के भीतर एक अनुत्तरित प्रश्न पक रहा था। परमेश्वर उस प्रश्न को नज़रअंदाज़ नहीं करते। और जवाब कोई सिद्धांत नहीं, कोई व्यवस्था नहीं, बल्कि एक नाम है: यीशु। शास्त्र का असली विषय कोई विचार नहीं, एक व्यक्ति है, और उस व्यक्ति से मिलाए बिना कोई व्याख्या पूरी नहीं होती।

सूत्र

खोजा जिस पन्ने पर रुका है, वह पूरे पवित्रशास्त्र का सबसे काँटेदार मोड़ है। यशायाह ने एक ऐसे सेवक का चित्र खींचा जो चुप रहकर मारा जाता है, जिसका न्याय छीन लिया जाता है, और जिसका प्राण पृथ्वी से उठा लिया जाता है। सदियों तक यहूदी पाठकों ने यही पूछा जो खोजा पूछ रहा है: यह कौन है? भविष्यद्वक्ता खुद? इस्राएल? कोई आने वाला? परमेश्वर ने यह प्रश्न जानबूझकर खुला छोड़ा था, जैसे कोई ताला जिसकी चाबी बाद में भेजी जाएगी। फिलिप्पुस "इसी शास्त्र से आरम्भ करके" जवाब देता है, और इसमें पूरी सुसमाचार-विधि छिपी है: मसीह कोई नया अध्याय नहीं जोड़ते, वे पुराने अध्यायों का अर्थ खोलते हैं। और ध्यान दीजिए किसके लिए यह ताला खुलता है: एक खोजे के लिए, जिसे व्यवस्था मंदिर की सभा से बाहर रखती थी, पर जिससे यशायाह ने आगे चलकर वादा किया था कि उसे पुत्रों से उत्तम नाम मिलेगा। कटा हुआ आदमी उस कटे हुए सेवक में अपना घर पाता है।

दर्पण

आप शायद वर्षों से बाइबल पढ़ रहे हैं। हो सकता है आप समूह चलाते हों, रविवार को कुछ बोलते हों, लोग आपसे पूछते हों। और शायद इसीलिए आपने बहुत समय से वह वाक्य नहीं कहा जो इस खोजे ने कहा: "जब तक कोई मुझे न समझाए तो मैं कैसे समझूँ?" हम में से बहुतों के पास पढ़ी हुई आयतें हैं और भीतर एक चुपचाप दबा हुआ प्रश्न, जिसे पूछने में डर लगता है क्योंकि पूछने से यह खुल जाएगा कि हम उतना नहीं जानते जितना दूसरे मानते हैं। यह आदमी रानी का खजांची है, रथ उसका है, पुस्तक उसकी है, और फिर भी वह एक भगोड़े प्रचारक के आगे झुककर विनती करता है। उसके ओहदे ने उसकी जिज्ञासा को नहीं मारा; हमारे छोटे-मोटे ओहदे अक्सर मार देते हैं।

आज यह कीजिए: जो अंश आपने इस हफ्ते पढ़ा और जिसका एक हिस्सा आपको सच में समझ नहीं आया, उसे कागज़ पर लिखिए, नीचे अपना असली प्रश्न लिखिए, और वह प्रश्न किसी एक भरोसेमंद विश्वासी को आज ही भेज दीजिए।

बारीकी

"अपने या किसी दूसरे के विषय में" यह सिर्फ़ व्याख्या का सवाल नहीं लगता, अगर आप पूछने वाले को देखें। वह व्यक्ति पढ़ रहा है कि किसी का न्याय छीन लिया गया और उसके वंश का वर्णन करने वाला कोई नहीं, क्योंकि उसका प्राण पृथ्वी से उठा लिया जाता है। और वह स्वयं एक खोजा है: जिसका शरीर काट दिया गया, जिसकी कोई संतान नहीं होगी, जिसका नाम उसके बाद कोई नहीं लेगा। संभव है उसका प्रश्न ठंडा शैक्षिक जिज्ञासा नहीं, बल्कि एक काँपती हुई उम्मीद था। क्या यह पन्ना मेरे जैसे किसी के बारे में है? कोई और भी है जिसका भविष्य कटा हुआ है? फिलिप्पुस का उत्तर उस दर्द को नकारता नहीं, वह उसे एक नाम देता है: यीशु, वह जो हमारे कटे हुए हिस्सों में उतरे।

मुख्य पात्र

यह आदमी यरूशलेम आराधना करने आया था। सोचिए उसने कितना सफ़र तय किया, कितना खर्च किया, और फिर मंदिर के किस दरवाज़े तक पहुँचकर रुक गया होगा, क्योंकि उसके जैसे शरीर वाले को भीतर जाने की अनुमति नहीं थी। वह लौट रहा है, खाली हाथ नहीं, पर संतुष्ट भी नहीं: उसके पास एक महँगी पुस्तक है और एक अधूरा हृदय। और वह लौटते हुए भी पढ़ रहा है, ज़ोर से, रथ के हिलते-डुलते। यह आदमी ऐसा है जो ठुकराए जाने के बाद भी खोजना नहीं छोड़ता। उसकी भूख उसके अपमान से बड़ी है। यही उसे पूरे अध्याय का सबसे साफ़ दिल बनाता है, शमौन के ठीक उलट, जो चमत्कार देखकर शक्ति ख़रीदना चाहता था, जबकि यह आदमी सिर्फ़ समझ माँगता है।

प्रश्न

अगर परमेश्वर इतनी बारीकी से काम करते हैं, स्वर्गदूत भेजते हैं, आत्मा से रास्ता बताते हैं, तो वे सीधे खोजे के मन को रोशन क्यों नहीं कर देते? एक अदृश्य परमेश्वर को एक पसीने से भीगे, रथ के पीछे दौड़ते आदमी की ज़रूरत क्यों? और इससे भी असहज बात: आज कितने लोग अपने-अपने रथों में बैठे पढ़ रहे हैं और कोई उनके पास दौड़ कर नहीं आया? इसका कोई सुंदर उत्तर मेरे पास नहीं। बस यह दिखता है कि परमेश्वर ने अपने वचन को समझाने का काम मनुष्यों के हाथ में रखा है, और यह सम्मान भी है और भारी ज़िम्मेदारी भी। जो प्रश्न पूछता है, उसे परमेश्वर अनसुना नहीं करते। पर वे अक्सर उत्तर किसी के पैरों से भेजते हैं, और वे पैर हमारे हो सकते हैं।

चिंतन

वह कौन सा प्रश्न है जो आप वर्षों से भीतर लिए घूम रहे हैं पर पूछने में झिझकते हैं, और किससे आप वाकई पूछ सकते थे?

आपके आसपास कौन इस समय अपने "रथ" में अकेला पढ़ रहा है, और क्या आप उसके पास दौड़कर जाने को तैयार हैं, बिना यह जाने कि बातचीत कहाँ पहुँचेगी?

Acts में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Acts

John Stott

Stott's classic on how the gospel crossed every boundary on earth.

Acts For Everyone, Part 1

N.T. Wright

The church's explosive beginnings, explained with energy and care.

Acts: An Introduction and Commentary

I. Howard Marshall

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Acts

Ajith Fernando

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Acts 8:34 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

प्रेरितों के काम 8:34 का क्या अर्थ है?
रथ रुका नहीं है, पहिए चल रहे हैं, और एक ऊँचे ओहदे का आदमी, कूश की रानी का खजांची, अपनी गोद में खुली पुस्तक लिए बैठा है। उसने अभी-अभी यशायाह की वे पंक्तियाँ पढ़ी हैं जिनमें कोई भेड़ की तरह वध के लिए ले जाया जाता है और मुँह तक नहीं खोलता। और अब वह पढ़ना रोककर अपने बगल में बैठे अजनबी की ओर मुड़ता है और विनती करता है: "यह बता कि भविष्यद्वक्ता यह किसके विषय में कहता है, अपने या किसी दूसरे के विषय में?
प्रेरितों के काम 8:34 किस विषय में है?
खोजा जिस पन्ने पर रुका है, वह पूरे पवित्रशास्त्र का सबसे काँटेदार मोड़ है। यशायाह ने एक ऐसे सेवक का चित्र खींचा जो चुप रहकर मारा जाता है, जिसका न्याय छीन लिया जाता है, और जिसका प्राण पृथ्वी से उठा लिया जाता है। सदियों तक यहूदी पाठकों ने यही पूछा जो खोजा पूछ रहा है: यह कौन है? भविष्यद्वक्ता खुद?
प्रेरितों के काम 8:34 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज यह कीजिए: जो अंश आपने इस हफ्ते पढ़ा और जिसका एक हिस्सा आपको सच में समझ नहीं आया, उसे कागज़ पर लिखिए, नीचे अपना असली प्रश्न लिखिए, और वह प्रश्न किसी एक भरोसेमंद विश्वासी को आज ही भेज दीजिए।
प्रेरितों के काम 8:34 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह आदमी यरूशलेम आराधना करने आया था। सोचिए उसने कितना सफ़र तय किया, कितना खर्च किया, और फिर मंदिर के किस दरवाज़े तक पहुँचकर रुक गया होगा, क्योंकि उसके जैसे शरीर वाले को भीतर जाने की अनुमति नहीं थी। वह लौट रहा है, खाली हाथ नहीं, पर संतुष्ट भी नहीं: उसके पास एक महँगी पुस्तक है और एक अधूरा हृदय। और वह लौटते हुए भी पढ़ रहा है, ज़ोर से, रथ के हिलते-डुलते। यह आदमी ऐसा है जो ठुकराए जाने के बाद भी खोजना नहीं छोड़ता। उसकी भूख उसके अपमान से बड़ी है। यही उसे पूरे अध्याय का सबसे साफ़ दिल बनाता है, शमौन के ठीक उलट, जो चमत्कार देखकर शक्ति ख़रीदना चाहता था, जबकि यह आदमी सिर्फ़ समझ माँगता है।
प्रेरितों के काम 8:34 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
वह कौन सा प्रश्न है जो आप वर्षों से भीतर लिए घूम रहे हैं पर पूछने में झिझकते हैं, और किससे आप वाकई पूछ सकते थे?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Acts 8 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 18

पिता, धन्यवाद कि आपका पवित्र आत्मा बिकाऊ नहीं है। शमौन रुपये लेकर आया, पर आपका वरदान मोल से नहीं, आपकी करुणा से मिलता है। धन्यवाद कि मेरी खाली जेब और कमज़ोर हाथ आपको पाने में कभी बाधा नहीं बने, क्योंकि आपने इसे मुफ़्त में दिया।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 27

पिता, धन्यवाद कि फिलिप्पुस उठकर चल दिया और आपने उसे ठीक उसी राह पर पहुँचाया जहाँ कूश देश का वह खोजा जा रहा था। धन्यवाद कि आप दूर देश से आराधना करने आए एक मन की प्यास देखते हैं, और अपने जन को भेजकर उसे उत्तर देते हैं।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 39

पिता, कभी कभी जो लोग मेरी राह में आपके प्रेम को दिखाते हैं, वे थोड़े समय के लिए ही रहते हैं। मुझे उनके जाने पर उदास होने के बजाय आनंद से आगे बढ़ना सिखाइए, क्योंकि आप मेरे साथ बने रहते हैं। मेरा रास्ता आपके साथ खुशी से भरा रहे।

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