कुलुस्सियों 3:4
पाठ
लुकुस घाटी के उस छोटे से शहर में, जहाँ ऊन रंगने की गंध हवा में बसी रहती थी, पौलुस का यह वाक्य पढ़ा गया: "जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे।" इससे ठीक पहले वे कह चुके हैं कि विश्वासियों का जीवन इस समय "मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है"। यानी अभी सब कुछ ढका हुआ है, आँखों से ओझल, प्रमाणहीन। पर एक दिन पर्दा हटेगा। मसीह सामने आएँगे, और उसी क्षण वे लोग भी सामने आ जाएँगे जो अब तक अनदेखे थे। छिपे रहना अंतिम अवस्था नहीं है; वह केवल मध्यांतर है। जो अभी गुप्त है, वह तब सार्वजनिक होगा, और महिमा के साथ होगा।
मर्म
ध्यान दीजिए कि पौलुस यह नहीं कहते कि मसीह हमारे जीवन को बेहतर बनाते हैं, या हमारे जीवन में कुछ जोड़ते हैं। वे कहते हैं: "मसीह जो हमारा जीवन है।" यह मालिकाना हक की भाषा है, अस्तित्व की भाषा। कुलुस्से के विश्वासियों में बहुत से दास थे, जिनका जीवन कानूनन किसी और की संपत्ति था; उनकी पहचान उनके स्वामी के घराने से तय होती थी। पौलुस उनसे कहते हैं कि तुम्हारा असली जीवन अब किसी घराने में नहीं, स्वयं मसीह में सुरक्षित है, और परमेश्वर के पास सुरक्षित रखा गया है। यहीं उद्धार का हृदय खुलता है: हमारी पहचान हमारे प्रदर्शन, पद या सफलता से नहीं, बल्कि उस व्यक्ति से बनी है जिसमें हम छिपे हैं। और जो छिपा है, वह चोरी नहीं हो सकता।
सूत्र
परमेश्वर की पूरी कहानी में एक ही ताल बार-बार सुनाई देती है: पहले छिपाव, फिर प्रकाशन। इस्राएल मिस्र में चार सौ साल तक एक भुला दिया गया दास-वर्ग था, जब तक परमेश्वर ने अपने आप को प्रगट न किया। यूसुफ कारागार में सड़ता रहा, और फिर एक ही दिन में फिरौन के सामने खड़ा किया गया। यीशु स्वयं तीस वर्ष तक नासरत की एक बढ़ईगीरी की दुकान में अनजान रहे, और क्रूस पर तो उनकी महिमा पूरी तरह ढक गई; तीसरे दिन वही ढका हुआ जीवन बाहर आया। पौलुस विश्वासियों को इसी लय में रख रहे हैं। मसीह के साथ मरना और जिलाया जाना (पद 1 और 3) कोई रूपक नहीं, बल्कि उसी कहानी में शामिल हो जाना है। इसलिए तुम्हारी वर्तमान अदृश्यता कोई विफलता नहीं; यह उस कहानी का वही अध्याय है जो शनिवार और रविवार के बीच पड़ता है।
दर्पण
यह वचन उस भूख को उघाड़ता है जिसे हम शायद ही स्वीकार करते हैं: देखे जाने की भूख। आप दफ्तर में वह काम करते हैं जिसका श्रेय किसी और को मिलता है। आप घर पर वर्षों से बीमार माता-पिता की सेवा करते हैं और कोई नहीं जानता कि रात दो बजे कौन उठता है। आप कलीसिया में कुर्सियाँ लगाते हैं और मंच पर कोई और खड़ा होता है। भीतर एक आवाज़ फुसफुसाती है कि जो दिखता नहीं, वह गिना भी नहीं जाता। पौलुस उस आवाज़ को झूठा ठहराते हैं। छिपा हुआ जीवन खोया हुआ जीवन नहीं है; वह परमेश्वर की तिजोरी में रखा जीवन है। और साथ ही यह वचन हमारे घमंड को भी काटता है, क्योंकि यदि महिमा तब प्रगट होगी, तो अभी उसे स्वयं ओढ़ने की जल्दबाज़ी हास्यास्पद है। आज एक काम कीजिए: कागज़ पर वह एक काम लिखिए जो आपने इस सप्ताह किया और जिसे किसी ने नहीं देखा, और उसके नीचे लिखिए, "यह मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है," फिर उसे ज़ोर से पढ़िए।
अंतर्पाठ
यूहन्ना अपनी पहली पत्री के तीसरे अध्याय में ठीक यही तनाव पकड़ते हैं: हम अभी परमेश्वर की सन्तान हैं, पर हम क्या होंगे यह अभी दिखाई नहीं देता, और जब वे प्रगट होंगे तब हम उनके समान होंगे। दो अलग लेखक, एक ही संरचना: वर्तमान वास्तविकता, भविष्य का अनावरण। दूसरी ओर रोमियों के आठवें अध्याय में पौलुस कहते हैं कि सारी सृष्टि परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है, मानो पूरा ब्रह्मांड साँस रोके खड़ा हो। इन दोनों को साथ रखने पर कुलुस्सियों 3:4 का दायरा बड़ा हो जाता है: यह केवल व्यक्तिगत सांत्वना नहीं, बल्कि सृष्टि के स्तर की घोषणा है। और यही कारण है कि अगला ही पद कहता है "अपने उन अंगों को मार डालो"; भविष्य की महिमा वर्तमान की पवित्रता को माँगती है, वरना अनावरण के दिन शर्मिंदगी होगी।
मुख्य पात्र
इस वाक्य के केंद्र में मसीह हैं, और उन्हें दो क्रियाओं से पहचाना जाता है: वे छिपाते हैं और वे प्रगट होते हैं। जो परमेश्वर के दाहिने हाथ विराजमान हैं, वे इस समय अपने लोगों को अपने भीतर ढके हुए हैं, जैसे कोई अपने अंगरखे के नीचे किसी को तूफ़ान से बचाता है। यह निष्क्रियता नहीं, सुरक्षा है। और उनका प्रगट होना कोई कोमल आभास नहीं होगा; रोमी दुनिया में "प्रगट होना" वही शब्द था जो सम्राट के किसी नगर में औपचारिक आगमन के लिए इस्तेमाल होता था, जब तुरहियाँ बजतीं, नागरिक शहर के बाहर उसे लेने जाते और उसके घराने के लोग सबके सामने सम्मानित होते। पौलुस यही चित्र दासों और रँगरेज़ों की उस छोटी मंडली के हाथ में रख देते हैं: तुम्हारा राजा आएगा, और वह अकेला नहीं आएगा।
संदर्भ
कुलुस्से लगभग साठ ईस्वी में एक ढलती हुई जगह थी। कभी व्यापार मार्ग पर महत्वपूर्ण, अब पड़ोसी लौदीकिया की चमक के नीचे दबा हुआ, ऊन और रंगाई के उद्योग पर टिका एक कस्बा, जहाँ फ्रूगिया की पुरानी देवी-पूजा, यहूदी आराधनालय और नई मसीही मंडली एक ही गलियों में साँस लेते थे। भूकंप इस घाटी की सामान्य घटना थी; ज़मीन सचमुच पैरों के नीचे हिलती थी। मंडली को इपफ्रास ने खड़ा किया था, पौलुस स्वयं वहाँ कभी गए नहीं, और अब वे बंदी अवस्था से लिख रहे हैं। शहर में एक शिक्षा फैल रही थी जो स्वर्गदूतों, उपवासों और गुप्त ज्ञान से "ऊपर" पहुँचने का वादा करती थी। इसी माहौल में पौलुस कहते हैं कि तुम्हें ऊपर चढ़ने की ज़रूरत नहीं; तुम्हारा जीवन पहले से ही ऊपर है, सुरक्षित, और सही समय पर वह नीचे आकर सबके सामने खुलेगा।
चिंतन
आपके जीवन का कौन-सा हिस्सा इस समय "छिपा हुआ" है, और आप उसे समय से पहले प्रगट करवाने की कोशिश किन तरीकों से करते हैं?
यदि आज शाम पर्दा हट जाए और आपका असली जीवन सबके सामने आ जाए, तो आपके किस काम या किस आदत को आप छिपाए रखना चाहेंगे?
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Colossians 3:4 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
कुलुस्सियों 3:4 का क्या अर्थ है?
कुलुस्सियों 3:4 किस विषय में है?
कुलुस्सियों 3:4 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
कुलुस्सियों 3:4 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
कुलुस्सियों 3:4 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Colossians 3 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, मेरे काम को सिर्फ़ लोगों की नज़रों से मत तौलने दे। जब कोई देख नहीं रहा होता, तब भी मेरा मन सीधा रहे। मुझे माफ़ कर जब मैं दिखावे के लिए मेहनत करता हूँ। आज जो भी ज़िम्मेदारी मेरे हाथ में है, उसे मैं तेरे सामने, सच्चे दिल से करूँ।
पिता, मेरे भीतर जो गुस्सा और कड़वाहट छिपी है, उसे तू जानता है। मुझे मदद कर कि मैं उसे पकड़े न रहूँ, बल्कि तेरे हाथों में रख दूँ। मेरी बातों से किसी का दिल न टूटे, बल्कि तेरी नरमी झलके।
हे पतियो, अपनी-अपनी पत्नी से प्रेम रखो और उनसे कठोरता न किया करो।" ध्यान दो, पौलुस ने पति को अधिकार जताने को नहीं कहा, प्रेम करने को कहा। और साथ में एक चेतावनी भी दी, क्योंकि प्रेम करते हुए भी आवाज़ कड़वी हो सकती है। घर में तुम्हारा लहज़ा भी तुम्हारी गवाही है। जिससे तुम सबसे ज़्यादा प्रेम करते हो, क्या उसी से सबसे कठोरता से बोलते हो?
मसीह का वचन तुम में बहुतायत से बसा रहे।" ध्यान दो, पौलुस ने यह नहीं कहा कि वचन तुमसे मिलने आए, बल्कि तुम में बस जाए। मेहमान की तरह नहीं, घर के सदस्य की तरह। और जो भीतर बसता है, वही बाहर निकलता है, सिखाने में, समझाने में, गीतों में। आज अपनी बातचीत सुनो। उससे पता चलेगा कि तुम्हारे भीतर कौन रहता है।
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