बाइबल व्याख्या

व्यवस्थाविवरण 21

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

एक खेत में लाश मिलती है, हत्यारे का कोई सुराग नहीं। कानून कहता है: बड़े-बूढ़े और न्यायी निकलें, नापें कि कौन नगर सबसे निकट है, और उस नगर के पुरनिये एक अनजोती तराई में एक बछिया का गला तोड़कर हाथ धोएँ और प्रार्थना करें। इसके बाद अध्याय चार और नियम देता है: युद्ध में बन्दी बनाई गई स्त्री से विवाह की शर्तें, दो पत्नियों के बीच जेठे बेटे का अधिकार, माता-पिता के सामने हठीले बेटे का मुकद्दमा, और लटकाए गए शव को उसी दिन दफनाने की आज्ञा। बिखरे हुए से लगते ये नियम एक ही चिंता से जुड़े हैं: खून, देह और घर को हल्के में न लिया जाए।

मूल बात

ध्यान दीजिए कि पहले नियम में कोई अपराधी नहीं है। कोई भी व्यक्ति दोषी नहीं ठहराया जाता, फिर भी कुछ करना पड़ता है। क्यों? क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि में निर्दोष खून ज़मीन पर पड़ा रह जाता है, चाहे किसी को याद हो या न हो। पाप केवल व्यक्तिगत खाता नहीं है; वह समाज के भीतर एक बोझ बन जाता है। इसीलिए पुरनिये हाथ धोकर कहते हैं, "यह खून हमने नहीं किया", और उसी साँस में प्रार्थना करते हैं कि परमेश्वर "निर्दोष खून का पाप अपनी इस्राएली प्रजा के सिर पर से" उतारें। यह आत्म-सफाई नहीं है, यह ज़िम्मेदारी लेना है। जिसने किया नहीं, वह भी झुककर क्षमा माँगता है, क्योंकि वह उस समाज का हिस्सा है जिसमें यह हुआ।

जोड़नेवाला सूत्र

अध्याय का अंत एक वाक्य पर आता है जो पूरे नए नियम में गूँजता है: "जो लटकाया गया हो वह परमेश्वर की ओर से श्रापित ठहरता है।" गोलगोथा पर यही वाक्य देह धारण करता है। और यह संयोग नहीं कि इसी अध्याय के आरम्भ में एक निर्दोष प्राणी की बलि दी जाती है ताकि जिस खून का दोषी नहीं मिला, उसका बोझ उठाया जाए। मसीह में दोनों चित्र मिलते हैं: वे निर्दोष हैं और वे श्रापित ठहरते हैं। पीलातुस भी हाथ धोता है, परन्तु उसके हाथ धोने में प्रार्थना नहीं है, केवल पल्ला झाड़ना है। यही अंतर है। बाइबल हाथ धोने के विरुद्ध नहीं है; वह प्रार्थना-रहित हाथ धोने के विरुद्ध है।

आइना

हम सब में पीलातुस बसा हुआ है। "मैंने यह नहीं किया" आज हमारा सबसे प्रिय वाक्य है। जिस कंपनी में आप काम करते हैं, उसके ठेके पर काम करनेवाले मज़दूर को कितना मिलता है, यह आपका विभाग नहीं। परिवार में वह पुराना अन्याय, वह चाचा जिसके साथ किसी ने अन्याय किया, वह आपकी पीढ़ी का मामला नहीं। जो कपड़ा आप पहनते हैं, जो सस्ता फ़ोन आप चलाते हैं, उसके पीछे किसका पसीना है, यह पता लगाना आपकी जिम्मेदारी नहीं। व्यवस्थाविवरण 21 कहता है: नापो। दूरी नापो। जो सबसे निकट है, वही ज़िम्मेदार है, चाहे उसने कुछ न किया हो। पुरनिये घर में बैठकर बहस नहीं करते, वे निकलते हैं।

आज एक काम कीजिए: एक कागज़ पर उस एक अन्याय या दुख का नाम लिखें जिसके बारे में आप अब तक कहते आए हैं "यह मेरा मामला नहीं", और उसी कागज़ पर आयत 8 की प्रार्थना अपने शब्दों में लिखकर ऊँची आवाज़ में परमेश्वर के सामने पढ़ें।

प्रश्न

आयत 18 से 21 को चिकना नहीं किया जा सकता। एक बेटे को नगर के पुरुष पथराव करके मार डालें, क्योंकि वह "उड़ाऊ और पियक्कड़" है। यह पढ़कर पेट में गाँठ बँधती है, और बँधनी चाहिए। थोड़ी राहत यह है कि माता-पिता स्वयं दण्ड नहीं देते, मामला पुरनियों के सामने जाता है, और "ताड़ना देने पर भी" शब्द बताते हैं कि यह वर्षों की चेतावनियों के बाद का अंतिम पड़ाव है। यह किसी किशोर की ढिठाई का नियम नहीं, एक ऐसे वयस्क का है जो अपने घर को नष्ट कर रहा है। फिर भी प्रश्न खुला रहता है: क्यों इतनी कठोरता? यहूदी परम्परा में भी यह दण्ड कभी लागू नहीं हुआ। मैं इसका हिसाब नहीं बैठा सकता। मैं केवल यह देखता हूँ कि परमेश्वर घर के टूटने को हँसी में नहीं लेते, और यह भी कि अंत में पत्थर उस बेटे पर नहीं पड़े जो हठीला था, बल्कि उस पुत्र पर जो पूर्ण आज्ञाकारी था।

श्रोता

ये लोग नदी पार करने के कगार पर खड़े थे। पीछे रेगिस्तान, आगे शहर, खेत, अदालतें, पड़ोसी। उनके आसपास की जातियों में लावारिस लाश पर कोई नहीं रुकता था, बन्दी स्त्री माल थी, और जेठे का हिस्सा पिता के मूड पर निर्भर करता था। इस पृष्ठभूमि में आयत 14 उनके कानों में क्रांतिकारी लगी होगी: उसे बेचना मना है, उसके साथ दासी जैसा व्यवहार मना है, क्योंकि "तेरा उससे शारीरिक सम्बंध था"। और आयत 17, कि अप्रिय पत्नी का बेटा भी अपना पूरा दो भाग पाएगा। उन्होंने सुना कि इस देश में शक्तिशाली की पसन्द कानून नहीं होगी। कमज़ोर का नाम लिखा हुआ है।

अन्तर्पाठ

मत्ती 27 में पीलातुस का हाथ धोना इस अध्याय का उलटा दर्पण है: वही क्रिया, परन्तु प्रार्थना के बिना, और इसलिए वह दोष नहीं उतारती। और गलातियों में पौलुस आयत 23 को सीधे उठाकर कहते हैं कि मसीह हमारे लिए श्राप बन गए, क्योंकि लिखा है कि हर एक जो काठ पर लटकाया जाता है श्रापित है। यूसुफ़ अरिमतियाई का उसी शाम शव माँगना केवल श्रद्धा नहीं था, वह इसी आज्ञा का पालन था: "अवश्य उसी दिन उसे मिट्टी देना।" व्यवस्था की अंतिम आयत क्रूस के अंतिम घंटे को आकार देती है।

चिंतन

किस बात के बारे में मैं सबसे अधिक कहता हूँ "यह मेरा मामला नहीं", और यह वाक्य मुझे किस असुविधा से बचाता है?

मेरे घर में कौन "अप्रिय" की श्रेणी में खिसक गया है, और क्या मैं उसका पूरा हिस्सा उसे दे रहा हूँ?

Deuteronomy में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Deuteronomy

Raymond Brown

Shows how Moses' farewell sermons beat with love for God and his people.

Deuteronomy

Christopher Wright

Reads the covenant renewal with an eye for its ethics and its heart.

Deuteronomy: An Introduction and Commentary

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Deuteronomy 21 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

व्यवस्थाविवरण 21 का क्या अर्थ है?
एक खेत में लाश मिलती है, हत्यारे का कोई सुराग नहीं। कानून कहता है: बड़े-बूढ़े और न्यायी निकलें, नापें कि कौन नगर सबसे निकट है, और उस नगर के पुरनिये एक अनजोती तराई में एक बछिया का गला तोड़कर हाथ धोएँ और प्रार्थना करें। इसके बाद अध्याय चार और नियम देता है: युद्ध में बन्दी बनाई गई स्त्री से विवाह की शर्तें, दो पत्नियों के बीच जेठे बेटे का अधिकार, माता-पिता के सामने हठीले बेटे का मुकद्दमा, और लटकाए गए शव को उसी दिन दफनाने की आज्ञा। बिखरे हुए से लगते ये नियम एक ही चिंता से जुड़े हैं: खून, देह और घर को हल्के में न लिया जाए।
व्यवस्थाविवरण 21 किस विषय में है?
अध्याय का अंत एक वाक्य पर आता है जो पूरे नए नियम में गूँजता है: "जो लटकाया गया हो वह परमेश्वर की ओर से श्रापित ठहरता है।" गोलगोथा पर यही वाक्य देह धारण करता है। और यह संयोग नहीं कि इसी अध्याय के आरम्भ में एक निर्दोष प्राणी की बलि दी जाती है ताकि जिस खून का दोषी नहीं मिला, उसका बोझ उठाया जाए। मसीह में दोनों चित्र मिलते हैं: वे निर्दोष हैं और वे श्रापित ठहरते हैं। पीलातुस भी हाथ धोता है, परन्तु उसके हाथ धोने में प्रार्थना नहीं है, केवल पल्ला झाड़ना है। यही अंतर है। बाइबल हाथ धोने के विरुद्ध नहीं है; वह प्रार्थना-रहित हाथ धोने के विरुद्ध है।
व्यवस्थाविवरण 21 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज एक काम कीजिए: एक कागज़ पर उस एक अन्याय या दुख का नाम लिखें जिसके बारे में आप अब तक कहते आए हैं "यह मेरा मामला नहीं", और उसी कागज़ पर आयत 8 की प्रार्थना अपने शब्दों में लिखकर ऊँची आवाज़ में परमेश्वर के सामने पढ़ें।
व्यवस्थाविवरण 21 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
ये लोग नदी पार करने के कगार पर खड़े थे। पीछे रेगिस्तान, आगे शहर, खेत, अदालतें, पड़ोसी। उनके आसपास की जातियों में लावारिस लाश पर कोई नहीं रुकता था, बन्दी स्त्री माल थी, और जेठे का हिस्सा पिता के मूड पर निर्भर करता था। इस पृष्ठभूमि में आयत 14 उनके कानों में क्रांतिकारी लगी होगी: उसे बेचना मना है, उसके साथ दासी जैसा व्यवहार मना है, क्योंकि "तेरा उससे शारीरिक सम्बंध था"। और आयत 17, कि अप्रिय पत्नी का बेटा भी अपना पूरा दो भाग पाएगा। उन्होंने सुना कि इस देश में शक्तिशाली की पसन्द कानून नहीं होगी। कमज़ोर का नाम लिखा हुआ है।
व्यवस्थाविवरण 21 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
किस बात के बारे में मैं सबसे अधिक कहता हूँ "यह मेरा मामला नहीं", और यह वाक्य मुझे किस असुविधा से बचाता है?
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Deuteronomy 21 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 1

पिता, जो लोग खेत में, सड़क पर, अनदेखे रह जाते हैं, उनका लहू आपसे छिपा नहीं है। जिन दुखों का कोई जिम्मेदार नहीं ठहरता, उन्हें आप देखते हैं। मुझे भी आंख मूंदकर निकल जाने वाला मत बनने दे। जहां मैं जिम्मेदारी ले सकता हूं, वहां मुझे खड़ा कर।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

किसी की लाश खेत में मिली, हत्यारा अनजान. फिर भी परमेश्वर ने पास के नगर के पुरनियों से कहा, हाथ धोकर कहो कि हमने यह खून नहीं किया. "इस रीति से जब तू वह करे जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है, तब तू निर्दोष के खून का दोष अपने बीच में से दूर करेगा."

जो खून कोई नहीं गिनता, उसे परमेश्वर गिनता है. तेरे आसपास जो दुख "मेरी गलती नहीं" कहकर तू छोड़ देता है, क्या वह सच में तेरा नहीं?

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