इफिसियों 3:3
पाठ
पौलुस बीच वाक्य में रुककर अपनी बात का स्रोत बताते हैं: जो मैं तुम्हें सुना रहा हूँ, वह मेरी खोज नहीं है। "वह भेद मुझ पर प्रकाश के द्वारा प्रगट हुआ, जैसा मैं पहले संक्षेप में लिख चुका हूँ।" एक छिपी हुई बात थी, परमेश्वर ने उसे खोला, और वह खुलना पौलुस के साथ हुआ, उसके सोचने-समझने से नहीं। साथ ही वे पाठकों को याद दिलाते हैं कि इस विषय पर वे पहले भी थोड़े शब्दों में लिख चुके हैं, यानी यह कोई नई सनक नहीं, बल्कि वही बात है जिसे वे बार-बार दोहराते आए हैं। कल्पना कीजिए: इफिसुस के किसी आँगन में, तेल के दीये की काँपती रोशनी में, एक बंदी आदमी का पत्र ऊँची आवाज़ में पढ़ा जा रहा है, और सुनने वाले समझ रहे हैं कि उन्हें किसी गुप्त बात में शामिल किया जा रहा है।
मर्म
इफिसुस में "भेद" शब्द खाली नहीं गूँजता था। यह अर्तिमिस के विशाल मन्दिर का शहर था, जहाँ रहस्यमय पंथों की दीक्षाएँ चलती थीं: शुल्क, शपथ, रात की रस्में, धुएँ और धूप की गंध, और अंत में वह ज्ञान जो केवल भीतर वालों को मिलता था। भेद वहाँ एक सीढ़ी थी, ऊपर चढ़ने का रास्ता, और उसका पूरा आकर्षण इसी में था कि बाहर वाले उससे वंचित रहें। पौलुस वही शब्द उठाते हैं और उसका ढाँचा उलट देते हैं। परमेश्वर का भेद खरीदा नहीं जाता, कमाया नहीं जाता, किसी अंदरूनी घेरे में छिपाकर नहीं रखा जाता। वह "प्रकाश के द्वारा" खुलता है, यानी परमेश्वर स्वयं पर्दा हटाते हैं, और फिर उसे चिट्ठी में लिखकर सबके सामने पढ़वा दिया जाता है। यहीं अनुग्रह का असली स्वाद है: जिसे जानना सबसे ज़रूरी था, वह देने वाले की पहल पर मुफ़्त आया।
सूत्र
आयत 3 अपने आप में अधूरी है; वह एक दरवाज़ा है जो आयत 6 पर खुलता है। भेद यह है कि अन्यजाति लोग विरासत में सहभागी, एक ही देह के और प्रतिज्ञा के भागी हैं। यानी परमेश्वर ने अपना मन नहीं बदला; पौलुस साफ़ कहते हैं कि यह "सनातन मनसा" थी, आदि से उसी में गुप्त। इब्राहीम से कहा गया था कि उसके द्वारा पृथ्वी के सब कुल आशीष पाएँगे, पर किसी ने अंदाज़ा नहीं लगाया था कि वह आशीष इस रूप में आएगी: एक क्रूस पर चढ़ाया गया यहूदी मसीहा, और उसके इर्द-गिर्द एक ऐसी मंडली जिसमें खतनारहित यूनानी बराबरी के वारिस हैं। पुराने नियम में यह वादा जड़ों की तरह ज़मीन के नीचे था; मसीह में वह फूटकर बाहर आया। भेद खुलने का मतलब यही है: जो हमेशा परमेश्वर के मन में था, वह अब इतिहास में देखा जा सकता है।
दर्पण
भीतर वालों के घेरे का आकर्षण आज भी ज़िंदा है। वह उस समिति में है जिसकी बैठक के बाद ही असली फ़ैसले पता चलते हैं; उस बाइबल अध्ययन समूह में जहाँ आप चुपचाप संतुष्ट होते हैं कि आप बाक़ियों से ज़्यादा जानते हैं; उस रिश्तेदार के साथ बातचीत में जिसे आपने मन ही मन "अभी तैयार नहीं" लिखकर बाहर रख दिया है। ज्ञान को दर्जा बना लेना बहुत आसान है, ख़ासकर जब वह ज्ञान धार्मिक हो। पौलुस के पास हर कारण था कि वे इसे अपने पास रखते, क्योंकि यह उन्हें सीधे दिया गया था। उन्होंने उसे लिख दिया, डाक में भेज दिया, आँगन में पढ़वा दिया। आज एक काम कीजिए: कागज़ पर तीन वाक्यों में लिखिए कि मसीह के बारे में वह कौन सी बात है जो आपने अपनी अक्ल से नहीं निकाली, बल्कि आपको दी गई थी, और उसे ज़ोर से पढ़िए।
संदर्भ
पत्र लिखने वाला जंजीर में है, संभवतः रोम में नज़रबंद, एक पहरेदार साथ बँधा हुआ। रोमी दुनिया में बंदी होना इज़्ज़त का नहीं, अपमान का चिह्न था; कैदी की बात का वज़न कम होता था। ऐसा आदमी दावा करता है कि उसे स्वयं परमेश्वर ने पर्दा हटाकर कुछ दिखाया है, यह सुनने वालों के कानों में विरोधाभास जैसा बजा होगा। दूसरी ओर इफिसुस: बंदरगाह का शहर, जहाज़ों की गंध, अर्तिमिस के मन्दिर से चलती चाँदी की मूर्तियों की अर्थव्यवस्था, यहूदी सभा-घर और उसके किनारे खड़े श्रद्धालु अन्यजाति। इन्हीं "बाहर वालों" को अब बताया जा रहा है कि वे किराए के मेहमान नहीं, घर के वारिस हैं। और पत्र पढ़ा जा रहा है एक ही कमरे में खड़े दास और स्वतंत्र, स्त्री और पुरुष के सामने, सबके सामने, बिना दीक्षा-शुल्क के।
अंतर्पाठ
गलातियों के पहले अध्याय में पौलुस लगभग वही बात कहते हैं: सुसमाचार उन्हें किसी मनुष्य से नहीं, यीशु मसीह के प्रकाशन से मिला। वहाँ यह बात बचाव में कही गई है, क्योंकि उन पर आरोप था कि उन्होंने सुसमाचार को सस्ता कर दिया; यहाँ वही बात स्तुति के लहजे में आती है। दूसरा गूँजता स्वर दानिय्येल के दूसरे अध्याय का है, जहाँ बाबेल के ज्ञानी हार जाते हैं और दानिय्येल कहता है कि स्वर्ग में एक परमेश्वर है जो भेद खोलता है। बाबेल के दरबार से लेकर इफिसुस के आँगन तक एक ही ढाँचा दिखता है: राज़ मनुष्य की चतुराई से नहीं टूटते, परमेश्वर उन्हें अपनी मर्ज़ी से खोलते हैं, और अक्सर सबसे कमज़ोर स्थिति में खड़े आदमी के हाथ में सौंप देते हैं।
प्रश्न
तो हमारा क्या? पौलुस को प्रकाशन मिला; हमें नहीं मिला। दमिश्क के रास्ते पर कोई ज्योति हमें नहीं गिराती, और सुबह की चुप्पी में परमेश्वर की आवाज़ कोई नई बात नहीं बताती। क्या इससे प्रेरित और पाठक के बीच एक ऐसी खाई नहीं बन जाती जिसे पार करना असंभव है? पौलुस का अपना उत्तर अगली आयत में छिपा है: "तुम पढ़कर जान सकते हो।" प्रकाशन पन्ने में उतर आया, और पवित्र आत्मा उसी पन्ने के ज़रिए काम करते हैं। यह सच्चा उत्तर है, पर यह उस तड़प को पूरी तरह शांत नहीं करता जो हममें से कई महसूस करते हैं: काश परमेश्वर मुझसे सीधे बोलते। इस चुनाव का कारण, कि क्यों वे, क्यों तब, क्यों मैं नहीं, टेक्स्ट नहीं बताता। हमें दिया गया है कि हम जानें कि क्या खोला गया; क्यों वह इस तरह खोला गया, यह परमेश्वर के पास रह जाता है।
चिंतन
आपके विश्वास में कौन सी बात आपने वाकई सीखी है, और कौन सी बात आपको दी गई थी? इस फ़र्क को शब्दों में रख पाना आपके लिए कितना आसान या कठिन है?
आपके अपने मंडली-जीवन में वह "भीतरी घेरा" कहाँ बनता है, और आप उसकी दीवार को इस हफ़्ते किस एक ठोस तरीके से नीची कर सकते हैं?
Ephesians में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
God's new society: Stott at his very best on church and calling.
Paul For Everyone: The Prison Letters
Ephesians, Philippians, Colossians and Philemon in short daily readings.
Grace, church and spiritual battle made wonderfully practical.
Ephesians: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Ephesians 3:3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
इफिसियों 3:3 का क्या अर्थ है?
इफिसियों 3:3 किस विषय में है?
इफिसियों 3:3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इफिसियों 3:3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इफिसियों 3:3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Ephesians 3 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
इसी कारण मैं उस पिता के सामने घुटने टेकता हूँ," पौलुस यह जंजीरों में लिखता है। कैदखाने से वह न शिकायत करता है, न बहस। वह घुटने टेकता है। उस समय लोग अक्सर खड़े होकर प्रार्थना करते थे, घुटने टेकना गहरे बोझ की निशानी था। तेरे मन का बोझ आज कहाँ जा रहा है? पिता के सामने झुकना कमजोरी नहीं, वही सबसे सही जगह है।
पिता, मैं जानता हूँ कि जो कुछ भी मेरे हाथों से होता है, वह मेरी योग्यता से नहीं, आपके मुफ्त दिए हुए अनुग्रह से होता है। मुझे अपनी सामर्थ्य से भर दीजिए, ताकि मैं डर और झिझक छोड़कर आपके लोगों की सेवा कर सकूँ।
पिता, मेरे मन में आकर बस जा, वहीं रह जहाँ मैं किसी को नहीं आने देता। मेरी जड़ें तेरे प्रेम में गहरी कर दे, ताकि जब सब कुछ हिले, मैं टिका रहूँ। विश्वास कमज़ोर पड़े तो तू थाम लेना।
जिससे स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है।" पौलुस घुटनों पर है, और जिस पिता के सामने झुका है, उसी से हर परिवार को उसका नाम मिला है। तेरा घर टूटा हो, तेरा उपनाम तुझे चुभता हो, या तू अकेला महसूस करता हो, फिर भी तेरी पहचान किसी इंसान के रजिस्टर में नहीं, पिता के मुँह से निकली है। वह तुझे नाम लेकर जानता है।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें