इफिसियों 3
पाठ
बेड़ियों में जकड़ा एक कैदी अपनी बात बीच वाक्य में छोड़ देता है। पौलुस लिखना शुरू करता है, "इसी कारण मैं पौलुस जो तुम अन्यजातियों के लिये मसीह यीशु का बन्दी हूँ", और फिर तेरह पदों के लिए भटक जाता है, क्योंकि उसे पहले वह "भेद" समझाना है जो उस पर प्रकट हुआ: अन्यजाति लोग अब मसीह में "विरासत में सहभागी, और एक ही देह के और प्रतिज्ञा के भागी हैं।" पद 14 में वह अपना वाक्य फिर से उठाता है और घुटने टेक देता है, यह प्रार्थना करते हुए कि इन नए विश्वासियों के भीतर मसीह बस जाएँ और वे उस प्रेम को जान सकें जो ज्ञान से परे है।
मर्म
यहाँ परमेश्वर की सबसे गुप्त योजना का पर्दा उठता है, और वह योजना कोई सिद्धांत नहीं, एक समुदाय है। सदियों से छिपा हुआ रहस्य यह नहीं था कि अन्यजातियाँ भी बचाई जाएँगी; वह तो भविष्यद्वक्ताओं ने कहा था। रहस्य यह था कि वे यहूदी विश्वासियों के साथ एक ही देह बनेंगी, बराबर के हिस्सेदार, बिना दूसरे दर्जे के दर्जे के। और इससे भी चौंकाने वाला पद 10 है: यह मिली-जुली, कमज़ोर, घरों में जमा होने वाली कलीसिया ही वह मंच है जिस पर परमेश्वर अपना "विभिन्न प्रकार का ज्ञान" स्वर्गीय शक्तियों के सामने प्रदर्शित करते हैं। परमेश्वर की बुद्धि का सबसे बड़ा सबूत कोई मंदिर या साम्राज्य नहीं, बल्कि पुराने दुश्मनों की एक मेज़ पर बैठी हुई संगति है।
सूत्र
अब्राहम से किया गया वादा हमेशा दोहरा था: एक वंश, और उस वंश के द्वारा सारी जातियों की आशीष। इस्राएल का इतिहास पहले आधे हिस्से पर टिका रहा; दूसरा आधा हिस्सा एक अनसुलझी गाँठ की तरह लटका रहा। यरूशलेम के मंदिर में एक पत्थर की दीवार खड़ी थी जिसके आगे अन्यजाति नहीं जा सकता था, मौत की सज़ा के चेतावनी-पत्थर के साथ। इफिसियों 2 में पौलुस कह चुका है कि मसीह ने उस "बीच की दीवार" को ढा दिया। अध्याय 3 उसका नतीजा है: क्रूस ने न केवल पापी को परमेश्वर से मिलाया, बल्कि दो अलग-अलग मानवताओं को एक नई मानवता बना दिया। मसीह वह जगह हैं जहाँ परमेश्वर की सारी योजना जुड़ती है।
दर्पण
आप जिस कलीसिया में जाते हैं, वहाँ शायद कोई है जिसकी जाति, भाषा, आर्थिक हालत या राजनीति आपको भीतर से खटकती है। पौलुस के अनुसार वही रिश्ता परमेश्वर की बुद्धि का प्रदर्शन है, न कि आपकी व्यक्तिगत भक्ति। यह असुविधाजनक है, क्योंकि हम आत्मिक परिपक्वता को अकेले नापना पसंद करते हैं। ध्यान दें, पद 18 में मसीह के प्रेम की चौड़ाई और गहराई "सब पवित्र लोगों के साथ" समझी जाती है, अकेले नहीं। और दूसरी बात: पौलुस जंजीरों में है और कहता है "साहस न छोड़ो"। जब आपकी नौकरी, आपका शरीर, आपका परिवार टूट रहा हो, तो यह पत्र यह नहीं सिखाता कि परिस्थिति बदलेगी, बल्कि यह कि भीतरी मनुष्यत्व बलवन्त हो सकता है।
बारीकी
पद 12 का शब्द जिसे "साहस" कहा गया है, यूनानी में पर्रेसिया है: खुलकर बोलने का अधिकार। रोमी दुनिया में यह एक राजनीतिक शब्द था। एक स्वतंत्र नागरिक सभा में खड़ा होकर बेझिझक बोल सकता था; एक दास चुप रहता था। और सम्राट के सामने? वहाँ तो नागरिक भी काँपते थे, शब्द तोल-तोल कर बोलते थे, गलत वाक्य जान ले सकता था। इफिसुस के उस कारीगर के लिए, जो अपनी ही नगर-सभा में कभी नहीं बोल पाया, यह वाक्य विस्फोटक था: ब्रह्मांड के सिंहासन तक उसे बेरोक-टोक बोलने का अधिकार मिला है। न सिफ़ारिश, न रिश्वत, न वंश। यही कारण है कि पौलुस अगले ही सांस में घुटने टेक देता है।
प्रश्न
पौलुस प्रार्थना करता है कि वे "परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण" हो जाएँ, और साथ ही कहता है कि मसीह का प्रेम "ज्ञान से परे" है। जिसे जाना नहीं जा सकता, उसे जानने की प्रार्थना का क्या अर्थ? यहाँ कोई सफ़ाई काम नहीं आती। पौलुस जानबूझकर एक ऐसी माँग रखता है जो कभी पूरी नहीं होगी, क्योंकि वह जिस चीज़ की बात कर रहा है वह सीमित नहीं है। यह वैसा ही है जैसे किसी को समुद्र पीने के लिए दिया जाए: हर घूँट असली है, और समुद्र कम नहीं होता। जो लोग सोचते हैं कि उन्होंने अनुग्रह को समझ लिया है, उन्होंने असल में उसे छुआ ही नहीं। यह अपूर्णता निराशा नहीं, बल्कि अनंत की गुंजाइश है।
छवि
कल्पना करें: इफिसुस की एक तंग गली, ऊपर के कमरे में तेल के दीये का धुआँ, बीस-पच्चीस लोग। इनमें एक यहूदी व्यापारी है जिसने जीवन भर मूर्तिपूजकों के बर्तन तक नहीं छुए; एक अन्यजाति दासी है जिसे अर्तिमिस के मंदिर की चमक के अलावा कोई पवित्रता नहीं मालूम थी। दोनों एक ही रोटी तोड़ते हैं। बाहर, नगर का गर्व अर्तिमिस का विशाल मंदिर है; उनका "मंदिर" यह छोटा कमरा है। जब यह पत्र ऊँची आवाज़ में पढ़ा गया और पद 10 आया, कि इसी सभा के द्वारा स्वर्गीय अधिकारियों को परमेश्वर की बुद्धि दिखाई जा रही है, तो उन्होंने अपने आसपास देखा होगा और सोचा होगा: हम? हाँ, वे। और इसीलिए महिमा "कलीसिया में, और मसीह यीशु में" है।
चिंतन
आपकी संगति में कौन ऐसा है जिसके साथ बैठना आपके लिए परमेश्वर की बुद्धि का प्रदर्शन बनेगा, और आप उससे बचते क्यों हैं?
यदि परमेश्वर के सामने खुलकर बोलने का अधिकार आपको पहले से मिल चुका है, तो आपकी प्रार्थना में अभी भी कौन-सी झिझक बची हुई है?
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Ephesians 3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
इफिसियों 3 का क्या अर्थ है?
इफिसियों 3 किस विषय में है?
इफिसियों 3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इफिसियों 3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इफिसियों 3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Ephesians 3 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
इसी कारण मैं उस पिता के सामने घुटने टेकता हूँ," पौलुस यह जंजीरों में लिखता है। कैदखाने से वह न शिकायत करता है, न बहस। वह घुटने टेकता है। उस समय लोग अक्सर खड़े होकर प्रार्थना करते थे, घुटने टेकना गहरे बोझ की निशानी था। तेरे मन का बोझ आज कहाँ जा रहा है? पिता के सामने झुकना कमजोरी नहीं, वही सबसे सही जगह है।
पिता, मैं जानता हूँ कि जो कुछ भी मेरे हाथों से होता है, वह मेरी योग्यता से नहीं, आपके मुफ्त दिए हुए अनुग्रह से होता है। मुझे अपनी सामर्थ्य से भर दीजिए, ताकि मैं डर और झिझक छोड़कर आपके लोगों की सेवा कर सकूँ।
पिता, मेरे मन में आकर बस जा, वहीं रह जहाँ मैं किसी को नहीं आने देता। मेरी जड़ें तेरे प्रेम में गहरी कर दे, ताकि जब सब कुछ हिले, मैं टिका रहूँ। विश्वास कमज़ोर पड़े तो तू थाम लेना।
जिससे स्वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है।" पौलुस घुटनों पर है, और जिस पिता के सामने झुका है, उसी से हर परिवार को उसका नाम मिला है। तेरा घर टूटा हो, तेरा उपनाम तुझे चुभता हो, या तू अकेला महसूस करता हो, फिर भी तेरी पहचान किसी इंसान के रजिस्टर में नहीं, पिता के मुँह से निकली है। वह तुझे नाम लेकर जानता है।
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