इफिसियों 6
पाठ
पौलुस पहले घर की चारदीवारी में उतरते हैं: बच्चे माता-पिता की आज्ञा मानें, पिता अपने बच्चों को कड़वाहट से न भरें, दास मन की सिधाई से सेवा करें, और स्वामी धमकियाँ छोड़ दें, क्योंकि "उनका और तुम्हारा दोनों का स्वामी स्वर्ग में है।" इसके बाद वे अचानक युद्धभूमि खोल देते हैं: परमेश्वर के सारे हथियार बाँधो, क्योंकि लड़ाई लहू और माँस से नहीं। और अंत में यह पत्र एक कैदी के हाथ से बंद होता है, जो खुद को "जंजीर से जकड़ा हुआ राजदूत" कहता है और प्रार्थना माँगता है कि वह साहस से बोल सके।
हृदय की बात
ध्यान दीजिए, हथियार किसके हैं। पौलुस "अपने" हथियार नहीं देते, वे "परमेश्वर के सारे हथियार" देते हैं। यही इस अध्याय की धुरी है। हमें मसीही जीवन के लिए कोई आत्म-सुधार का किट नहीं थमाया जाता, बल्कि परमेश्वर का अपना कवच पहनाया जाता है। सत्य, धार्मिकता, उद्धार, विश्वास, आत्मा की तलवार, ये सब गुण नहीं हैं जो हम अभ्यास से उगा लें; ये दान हैं जो पहले हम पर उतरते हैं और तब हमें खड़ा रखते हैं। और लक्ष्य भी विजय-यात्रा नहीं, बल्कि "स्थिर रह सको" है। तीन बार खड़े रहने की बात आती है। हमला हो चुका है, मैदान जीत लिया गया है, हमारा काम मोर्चा छोड़ना नहीं है।
पूरे शास्त्र का सूत्र
इस कवच का हर टुकड़ा यशायाह से उठाया गया है, और वहाँ यह किसी सैनिक का नहीं, स्वयं परमेश्वर और उनके मसीह का पहनावा है। यशायाह में जिस दास की कमर सत्य से कसी है, जिसने धार्मिकता की झिलम और उद्धार का टोप पहना है, जिसका मुँह तेज तलवार है, वह मसीह है। पौलुस उसी मसीह के युद्ध-वस्त्र उतारकर मंडली को पहना देते हैं। यह अलंकार नहीं, यह सुसमाचार का ढाँचा है: जो कवच मसीह ने पहनकर अंधकार की शक्तियों से लड़ा और क्रूस पर उन्हें नंगा किया, वही अब उनके शरीर, कलीसिया, को दिया गया है। हम मसीह के हथियारों में लड़ते हैं, इसलिए हम उनकी विजय के भीतर लड़ते हैं।
दर्पण
यह अध्याय बड़ी शालीनता से हमारे सबसे छोटे कमरों में घुस आता है। पिता जो घर लौटकर थकान बच्चों पर उतारता है, बॉस जो टीम को धमकी से चलाता है, कर्मचारी जो केवल तब मन लगाकर काम करता है जब कोई देख रहा हो, ये सब यहाँ पकड़े जाते हैं। और पौलुस का तर्क कभी "अच्छे बनो" नहीं होता, वह हमेशा "प्रभु में" होता है। जिस स्वामी के सामने आप और आपका अधीनस्थ बराबर खड़े हैं, वे "किसी का पक्ष नहीं करते।" यह वाक्य दफ्तर की सीढ़ी को हिला देता है। और हाँ, वह अदृश्य लड़ाई अक्सर ठीक इन्हीं जगहों पर लड़ी जाती है, रसोई और दफ्तर में, आकाश में नहीं।
आज ही अपने घर या काम की एक व्यक्ति का नाम लिखिए जिससे आपने पिछले हफ्ते कड़वे या धमकी भरे स्वर में बात की, और उससे कहिए: "मैंने जो कहा, वह गलत था।"
शास्त्र की गूँज
यशायाह 52:7 में जो पैर पहाड़ों पर शान्ति का सुसमाचार लेकर दौड़ते हैं, वे यहाँ जूते पहनकर मोर्चे पर खड़े हैं। यह जोड़ बताता है कि यह युद्ध किस तरह का है: हमारा आक्रमण शान्ति की खबर है, हमारा शस्त्र वचन है। और इसी पत्र के दूसरे अध्याय की गूँज सुनिए, जहाँ मसीह ने दो को एक करके शान्ति का प्रचार किया। जिस दीवार को मसीह ने गिराया, शैतान उसे घर और मंडली में फिर खड़ा करना चाहता है; इसलिए पिता-पुत्र, स्वामी-दास की बात करने के तुरंत बाद पौलुस युद्ध की बात करते हैं। टूटे रिश्ते संयोग नहीं होते, वे मोर्चे होते हैं।
पृष्ठभूमि
इफिसुस रोमी एशिया का बड़ा शहर था, जादू-टोने और आत्मिक शक्तियों के भय से भरा। "प्रधानों और अधिकारियों" की भाषा उन पाठकों के लिए काल्पनिक नहीं थी। साथ ही यह एक ऐसा समाज था जहाँ घर का पुरुष मुखिया पत्नी, बच्चों और दासों पर लगभग असीम अधिकार रखता था; बच्चे और दास कानूनी रूप से संपत्ति के करीब थे। पौलुस उस ढाँचे को तोड़ते नहीं, वे उसे भीतर से खोखला कर देते हैं। सारे समाज में बच्चों को नहीं, बल्कि बच्चों को सीधे संबोधित करना ही असाधारण था। और दासों के मालिक को याद दिलाना कि उसका भी एक स्वामी है, वह भी बिना पक्षपात वाला, रोमी घर की नींव पर चोट थी।
एक बारीकी
"जंजीर से जकड़ा हुआ राजदूत।" इन दो शब्दों में विरोधाभास पूरे अध्याय को खोल देता है। राजदूत अछूत होता था, उसे बाँधना युद्ध की घोषणा थी। पौलुस बँधे हुए हैं, और फिर भी वे कवच और तलवार की बात कर रहे हैं। वे यह प्रार्थना नहीं माँगते कि जंजीर टूटे, बल्कि कि "मैं साहस से बोलूँ।" यहाँ मसीह की छाया साफ है: वह राजा जो बँधकर, नंगा होकर, क्रूस पर शक्तियों को हराया। पौलुस उसी तरीके से लड़ते हैं। इसलिए इस कवच में हारने और जीतने की परिभाषा बदल जाती है। जंजीर में पड़ा हुआ आदमी अगर बोलता रहे, तो मोर्चा उसके पास है।
चिंतन के प्रश्न
आपके जीवन का कौन सा रिश्ता आपको "मल्लयुद्ध" जैसा लगता है, और उसमें आप लहू-माँस से लड़ रहे हैं या परमेश्वर के हथियारों से?
अगर मसीह का कवच दान है और अभ्यास नहीं, तो आज सुबह आपने उसका कौन सा टुकड़ा पहनना भूल गया था?
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Ephesians 6 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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Ephesians 6 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
अन्त में, प्रभु में और उसकी शक्ति के सामर्थ्य में बलवन्त होते जाओ।" ध्यान दे, पौलुस यह नहीं कहता कि अपने भीतर से ताकत निकाल। वह कहता है, प्रभु में बलवन्त हो। यह उधार की शक्ति है, अपनी नहीं। शायद तू आज इसलिए थक गया है क्योंकि तू अकेले लड़ रहा है। उसमें बने रहना ही तेरा कवच है।
पिता, मेरे मुँह में सही शब्द रख दीजिए। जब बोलने का समय आए, तो डर मुझे चुप न करा दे। आपकी खुशखबरी को साफ और साहस के साथ कहने की हिम्मत दीजिए। और जो लोग आपके नाम के लिए कठिन जगहों में खड़े हैं, उन्हें भी यही ताकत दीजिए।
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