निर्गमन 18:19
पाठ
यित्रो अपनी सलाह की शुरुआत एक आदेश से नहीं, बल्कि एक विनती और एक आशीष से करता है: "इसलिए अब मेरी सुन ले, मैं तुझको सम्मति देता हूँ, और परमेश्वर तेरे संग रहे।" फिर वह मूसा के काम को दो हिस्सों में बाँटता है। पहला हिस्सा ऐसा है जिसे कोई और नहीं ले सकता: "तू तो इन लोगों के लिये परमेश्वर के सम्मुख जाया कर।" मूसा को परमेश्वर के सामने खड़े होकर लोगों का प्रतिनिधित्व करना है, और उनके झगड़ों, उनकी उलझनों, उनके मुकद्दमों को परमेश्वर तक पहुँचाना है। बाकी सब, यानी रोज़मर्रा के छोटे फैसले, दूसरों के कंधों पर डाले जा सकते हैं। यह आयत उस विभाजन की धुरी है जिस पर पूरा अध्याय घूमता है।
मर्म
ध्यान दीजिए कि यित्रो मूसा से यह नहीं कहता कि वह कम ज़िम्मेदारी उठाए, बल्कि यह कि वह सही ज़िम्मेदारी उठाए। और वह सही ज़िम्मेदारी है परमेश्वर के सम्मुख लोगों के लिए खड़ा होना। यहाँ बाइबल का एक बुनियादी ढाँचा दिखाई देता है: परमेश्वर अपने लोगों के साथ किसी मध्यस्थ के ज़रिए व्यवहार करते हैं। इस्राएल सीनै के पास डेरा डाले हुए है, वही पर्वत जहाँ थोड़ी देर बाद वे आग और धुएँ से डरकर कहेंगे कि तू ही हमसे बात कर। मनुष्य पवित्र परमेश्वर के सामने अकेला खड़ा नहीं हो सकता, और इसलिए परमेश्वर एक व्यक्ति को नियुक्त करते हैं जो उनका बोझ ऊपर ले जाए। साथ ही यित्रो की चेतावनी सुनिए: "तू इसे अकेला नहीं कर सकता।" मूसा मध्यस्थ तो है, पर थकने वाला, सीमित, नश्वर मध्यस्थ। यह कमी ही आगे की कहानी का बीज है।
सूत्र
"तू तो इन लोगों के लिये परमेश्वर के सम्मुख जाया कर" — यह वाक्य पूरी बाइबल में एक धारा की तरह बहता है। मूसा के बाद हारून का याजकपन आता है, फिर भविष्यद्वक्ता, फिर राजा, और हर बार वही ढाँचा दोहराया जाता है: कोई एक है जो लोगों को परमेश्वर तक और परमेश्वर को लोगों तक पहुँचाता है। पर हर मध्यस्थ थकता है, मरता है, कभी-कभी खुद ही पाप में गिरता है। यित्रो की बात कि "तू इसे अकेला नहीं कर सकता" सच है, और यह सच पूरे पुराने नियम पर मँडराता रहता है। इब्रानियों की पत्री इसी कमी को उठाकर कहती है कि यीशु मसीह का याजकपन इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि वे सदा जीवित हैं और कभी थकते नहीं। मूसा को साँझ होते-होते बैठना पड़ा; मसीह अब भी हमारे लिए परमेश्वर के सम्मुख खड़े हैं।
दर्पण
यह आयत उस आदमी या औरत को चुभती है जो ना कहना नहीं सीख पाया। शायद आप वह अगुवा हैं जिसके फोन पर रात ग्यारह बजे भी संदेश आते हैं, या वह माता-पिता जो घर के हर छोटे झगड़े का न्यायाधीश बन बैठा है, या वह कर्मचारी जो मानता है कि दफ्तर उसके बिना ढह जाएगा। यित्रो आपको आलसी नहीं बुला रहा; वह कह रहा है कि आप गलत बोझ ढो रहे हैं। और अक्सर इसके नीचे एक चुपचाप घमंड छिपा होता है: अगर मैं छोड़ दूँ तो कौन करेगा? पर ध्यान दीजिए, मूसा का असली काम वह था जो सबसे कम दिखाई देता था — लोगों को परमेश्वर के पास पहुँचाना। आज ही एक नाम चुनिए, उस व्यक्ति का जिसका झगड़ा या दुख आप महीनों से अपने भीतर ढो रहे हैं, और ऊँची आवाज़ में परमेश्वर से कहिए: "इसे मैं आपके सम्मुख पहुँचा रहा हूँ।"
श्रोता
पहले सुननेवालों के लिए यह दृश्य चौंकाने वाला था। सलाह देनेवाला कोई इस्राएली नहीं, बल्कि मिद्यान का याजक है, एक बाहरी व्यक्ति, जिसने अभी-अभी कहा है कि "अब मैंने जान लिया है कि यहोवा सब देवताओं से बड़ा है"। परमेश्वर की बुद्धि इस्राएल के डेरे के बाहर से आकर डेरे के भीतर काम करती है। साथ ही, जो पाठक बाद की पीढ़ियों में यह कहानी सुनते थे, वे न्यायियों और राजाओं के दौर में जी रहे थे, जहाँ अदालतें भ्रष्ट थीं और अगुवे अन्याय के लाभ से घृणा नहीं, प्रेम करते थे। उनके कानों में यह आयत एक नाप थी: असली अगुवा वह है जो पहले परमेश्वर के सम्मुख जाता है, फिर लोगों के सामने बैठता है। उलटा क्रम कभी काम नहीं करता।
शास्त्र की गूँज
गिनती की पुस्तक में यही मूसा टूटकर शिकायत करता है कि इन सब लोगों का बोझ उसके लिए बहुत भारी है, और परमेश्वर सत्तर पुरनियों पर अपना आत्मा उंडेलते हैं। यित्रो की सलाह वहाँ परमेश्वर की अपनी योजना बन जाती है, पर बोझ फिर भी पूरी तरह नहीं उठता। दूसरी ओर, इब्रानियों में लिखा है कि मसीह इसलिए पूरी तरह उद्धार कर सकते हैं क्योंकि वे सदा विनती करने के लिए जीवित हैं। दोनों पाठ मिलकर एक ही बात कहते हैं: मूसा का कंधा अच्छा था पर छोटा; मसीह का कंधा इतना चौड़ा है कि उस पर पूरी कलीसिया के मुकद्दमे रखे जा सकते हैं, और वे साँझ को थककर उठते नहीं।
बारीकी
यित्रो की छोटी सी आशीष को जल्दी में मत पढ़िए: "परमेश्वर तेरे संग रहे।" यह केवल शिष्टाचार नहीं है। मूसा सीनै के नीचे खड़ा है, उसी जलती झाड़ी के पर्वत पर, जहाँ परमेश्वर ने उसे भेजते समय यही वचन दिया था कि मैं तेरे संग रहूँगा। मूसा का सारा अधिकार इसी एक बात पर टिका है, उसकी योग्यता पर नहीं। और यही शब्द सदियों बाद एक बच्चे का नाम बन जाता है: इम्मानुएल, परमेश्वर हमारे साथ। जो बात मूसा के लिए एक आशीष थी, मसीह में देह बन गई। इसलिए जब आप किसी ज़िम्मेदारी के नीचे दबे हों, तो सबसे पहले यह मत पूछिए कि मैं यह कैसे करूँगा, बल्कि यह कि क्या वे मेरे संग हैं।
मनन
आप जो बोझ ढो रहे हैं, उसका कौन सा हिस्सा वाकई आपका है, और कौन सा हिस्सा आपने डर या गर्व से पकड़ रखा है?
यदि मसीह इस क्षण आपके लिए परमेश्वर के सम्मुख खड़े हैं, तो इससे आपके आज के सबसे कठिन काम का बोझ कैसे बदलता है?
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Exodus 18:19 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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निर्गमन 18:19 का क्या अर्थ है?
निर्गमन 18:19 किस विषय में है?
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निर्गमन 18:19 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Exodus 18 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
यित्रो मूसा का ससुर था, मिद्यानी याजक, इस्राएल का कोई नहीं। पर मूसा की कहानी सुनकर उसके मुँह से निकला, "धन्य है यहोवा, जिसने तुम को मिस्रियों और फ़िरौन के हाथ से छुड़ाया।" तेरी छुड़ाए जाने की कहानी किसी और के होठों पर स्तुति बन सकती है। तू उसे चुपचाप अपने भीतर क्यों दबा रखता है?
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