बाइबल व्याख्या

निर्गमन 20:10

बाइबल
यह वचन Episcopal Missionary church of India द्वारा समर्पित है

पाठ

आदेश की सूची में सातवाँ दिन अचानक सबका दिन बन जाता है। छह दिन काम के बाद परमेश्वर कहते हैं: "परन्तु सातवाँ दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है।" और फिर वह सूची आती है जो सुनने में लगभग बेचैन कर देनेवाली है, क्योंकि वह घर के मालिक पर रुकती नहीं। बेटा, बेटी, दास, दासी, पशु, और वह परदेशी भी जो "तेरे फाटकों के भीतर" रहता है, सब पर यह विश्राम फैल जाता है। आज्ञा का पता सिर्फ़ उसे लिखा गया है जिसके पास अधिकार है, पर उसका फल उन तक पहुँचता है जिनके पास कोई अधिकार नहीं। चक्की का पत्थर चुप, बैल गोशाला में खड़ा, दासी के हाथ खाली। एक पूरा घराना ठहर जाता है।

मर्म

इस आज्ञा का धार्मिक केंद्र यह है कि परमेश्वर उत्पादन को मनुष्य के मूल्य का माप नहीं मानते। मिस्र में इस्राएल की पहचान उसकी ईंटों की गिनती थी; अब उनकी पहचान उस परमेश्वर के साथ संबंध है जो उन्हें "दासत्व के घर" से निकाल लाए। इसलिए विश्रामदिन केवल आराम की छुट्टी नहीं, वह एक धर्मशास्त्रीय घोषणा है: तू मशीन नहीं, तू दास नहीं, तू परमेश्वर की प्रजा है। और चूँकि यह सत्य ईश्वर की ओर से आता है, न कि सामाजिक हैसियत से, यह उन पर भी लागू होता है जिन्हें उस समय की दुनिया में गिना ही नहीं जाता था। जो व्यक्ति दूसरों को थकाकर अपनी सुरक्षा बनाता है, वह असल में इस बात से इनकार करता है कि सुरक्षा परमेश्वर देते हैं। छुड़ाया गया मनुष्य दूसरों को नहीं छुड़ाए, यह असंभव है; कृपा पाकर कठोर बने रहना अनुग्रह को झूठा कहना है।

सूत्र

पद ग्यारह इस आज्ञा को सृष्टि से जोड़ देता है: छह दिन में परमेश्वर ने सब बनाया और सातवें दिन विश्राम किया। यानी विश्रामदिन कोई बाद में जोड़ा गया नियम नहीं, वह दुनिया के ताने-बाने में बुना हुआ है। इस्राएल जब हल छोड़कर बैठता है, तो वह सृष्टि की उस लय में लौटता है जिसे मिस्र की ईंट-भट्ठी ने तोड़ दिया था। और यहीं एक धागा आगे बढ़ता है: जो परमेश्वर एक दिन के लिए बोझ उतारते हैं, वे अंततः बोझ स्वयं उठा लेंगे। यीशु मसीह ने कहा कि विश्रामदिन मनुष्य के लिए बनाया गया, मनुष्य विश्रामदिन के लिए नहीं; और उन्होंने थके-मांदों को अपने पास बुलाया। सातवें दिन की चुप्पी उस विश्राम की पहली आहट है जो मसीह में मिलता है।

दर्पण

यह पद उस जगह चुभता है जहाँ हमारा अधिकार है। आपका फ़ोन रविवार को भी उस कर्मचारी के पास पहुँचता है जिसे आप "बस एक छोटा काम" भेजते हैं। घर में काम करनेवाली बहन को छुट्टी मिलती है या केवल तब जब आप बाहर जाते हैं? ड्राइवर, चौकीदार, दुकान का लड़का, वह सब आपके "फाटकों के भीतर" हैं। हम विश्राम को अपना अधिकार मानते हैं और दूसरों की थकान को व्यवस्था का हिस्सा। यह आज्ञा उस सुविधाजनक बँटवारे पर हाथ रखती है। साथ ही यह हमारे भीतर के डर को भी खोलती है: अगर मैं रुक गया तो पिछड़ जाऊँगा। परमेश्वर कहते हैं, तुझे बाहर मैं लाया था, तेरी मेहनत नहीं। आज ही उस एक व्यक्ति को, जो आपके लिए काम करता है, संदेश भेजिए या कहिए कि इस सप्ताह वह पूरा एक दिन बिना कटौती के छुट्टी ले।

प्रसंग

सीनै का दृश्य याद कीजिए: धुआँ उठता पर्वत, नरसिंगे का शब्द, और नीचे खड़े काँपते लोग जो कुछ ही महीने पहले मिस्र में मिट्टी और भूसे के बीच जीते थे। उनके शरीर पर अभी भी उस श्रम की छाप थी जिसका कोई अंत नहीं था; फ़िरौन की व्यवस्था में विश्राम का दिन नहीं होता, केवल गिनती होती है। उस समय के आसपास के किसी भी राष्ट्र की कानून-सूची में हर सातवें दिन दासों और पशुओं के लिए अनिवार्य छुट्टी नहीं मिलती। मौसम के त्योहार थे, अशुभ दिन थे, पर मज़दूर का साप्ताहिक अधिकार नहीं। "फाटकों के भीतर" शब्द बताता है कि यह आज्ञा रेगिस्तान से आगे देखती है, उन बसे हुए नगरों की ओर जहाँ इस्राएल एक दिन ज़मीन का मालिक होगा और तब उसके पास सत्ता होगी।

अंतर्पाठ

व्यवस्थाविवरण की दोहराई गई दस आज्ञाओं में यही विश्रामदिन एक और कारण से जुड़ता है: याद रख कि तू मिस्र में दास था और यहोवा तुझे वहाँ से निकाल लाए। निर्गमन सृष्टि की ओर देखता है, व्यवस्थाविवरण छुटकारे की ओर; दोनों मिलकर कहते हैं कि जो स्वयं छुड़ाया गया है, वह दूसरों को जोत में नहीं रख सकता। दूसरी ओर आमोस भविष्यद्वक्ता उन व्यापारियों पर गरजता है जो विश्रामदिन के बीत जाने की प्रतीक्षा करते थे ताकि फिर से तराजू में धोखा कर सकें। बाहर से आज्ञा मानी जा रही थी, भीतर लालच घड़ी गिन रहा था। यही चेतावनी हमारे लिए है: नियम का पालन और हृदय की भूख दो अलग चीज़ें हो सकती हैं।

पहचान

पहले सुननेवाले वे लोग थे जिनके लिए "दास" कोई सैद्धांतिक शब्द नहीं था; वे स्वयं दास रह चुके थे और अब उनके अपने घरों में दास होंगे। जब उन्होंने सुना कि दासी भी उसी दिन विश्राम करेगी जिस दिन मालकिन, तो यह उनके कानों में सामाजिक ढाँचे की हल्की-सी दरार जैसा लगा होगा। पशु का नाम भी सूची में है, यह उस किसान के लिए आर्थिक जोखिम था जिसकी फ़सल एक दिन की देरी से बिगड़ सकती थी। और परदेशी, जिसका कोई कुल, कोई ज़मीन, कोई सुरक्षा नहीं थी, उसे भी वही ठहराव मिला। वे समझ गए होंगे: यह परमेश्वर ऊपर से नहीं, नीचे से गिनती शुरू करते हैं।

चिंतन

आपके "फाटकों के भीतर" कौन-कौन है, यानी किनकी थकान आपके निर्णयों से तय होती है, और क्या वे आपके साथ विश्राम पाते हैं?

आप रुकने से किस बात के छूट जाने का डर रखते हैं, और वह डर परमेश्वर के बारे में आपकी असली धारणा के विषय में क्या बताता है?

पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें

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Exodus 20:10 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

निर्गमन 20:10 का क्या अर्थ है?
आदेश की सूची में सातवाँ दिन अचानक सबका दिन बन जाता है। छह दिन काम के बाद परमेश्वर कहते हैं: "परन्तु सातवाँ दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है।" और फिर वह सूची आती है जो सुनने में लगभग बेचैन कर देनेवाली है, क्योंकि वह घर के मालिक पर रुकती नहीं। बेटा, बेटी, दास, दासी, पशु, और वह परदेशी भी जो "तेरे फाटकों के भीतर" रहता है, सब पर यह विश्राम फैल जाता है। आज्ञा का पता सिर्फ़ उसे लिखा गया है जिसके पास अधिकार है, पर उसका फल उन तक पहुँचता है जिनके पास कोई अधिकार नहीं। चक्की का पत्थर चुप, बैल गोशाला में खड़ा, दासी के हाथ खाली। एक पूरा घराना ठहर जाता है।
निर्गमन 20:10 किस विषय में है?
पद ग्यारह इस आज्ञा को सृष्टि से जोड़ देता है: छह दिन में परमेश्वर ने सब बनाया और सातवें दिन विश्राम किया। यानी विश्रामदिन कोई बाद में जोड़ा गया नियम नहीं, वह दुनिया के ताने-बाने में बुना हुआ है। इस्राएल जब हल छोड़कर बैठता है, तो वह सृष्टि की उस लय में लौटता है जिसे मिस्र की ईंट-भट्ठी ने तोड़ दिया था। और यहीं एक धागा आगे बढ़ता है: जो परमेश्वर एक दिन के लिए बोझ उतारते हैं, वे अंततः बोझ स्वयं उठा लेंगे। यीशु मसीह ने कहा कि विश्रामदिन मनुष्य के लिए बनाया गया, मनुष्य विश्रामदिन के लिए नहीं; और उन्होंने थके-मांदों को अपने पास बुलाया। सातवें दिन की चुप्पी उस विश्राम की पहली आहट है जो मसीह में मिलता है।
निर्गमन 20:10 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
सीनै का दृश्य याद कीजिए: धुआँ उठता पर्वत, नरसिंगे का शब्द, और नीचे खड़े काँपते लोग जो कुछ ही महीने पहले मिस्र में मिट्टी और भूसे के बीच जीते थे। उनके शरीर पर अभी भी उस श्रम की छाप थी जिसका कोई अंत नहीं था; फ़िरौन की व्यवस्था में विश्राम का दिन नहीं होता, केवल गिनती होती है। उस समय के आसपास के किसी भी राष्ट्र की कानून-सूची में हर सातवें दिन दासों और पशुओं के लिए अनिवार्य छुट्टी नहीं मिलती। मौसम के त्योहार थे, अशुभ दिन थे, पर मज़दूर का साप्ताहिक अधिकार नहीं। "फाटकों के भीतर" शब्द बताता है कि यह आज्ञा रेगिस्तान से आगे देखती है, उन बसे हुए नगरों की ओर जहाँ इस्राएल एक दिन ज़मीन का मालिक होगा और तब उसके पास सत्ता होगी।
निर्गमन 20:10 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पहले सुननेवाले वे लोग थे जिनके लिए "दास" कोई सैद्धांतिक शब्द नहीं था; वे स्वयं दास रह चुके थे और अब उनके अपने घरों में दास होंगे। जब उन्होंने सुना कि दासी भी उसी दिन विश्राम करेगी जिस दिन मालकिन, तो यह उनके कानों में सामाजिक ढाँचे की हल्की-सी दरार जैसा लगा होगा। पशु का नाम भी सूची में है, यह उस किसान के लिए आर्थिक जोखिम था जिसकी फ़सल एक दिन की देरी से बिगड़ सकती थी। और परदेशी, जिसका कोई कुल, कोई ज़मीन, कोई सुरक्षा नहीं थी, उसे भी वही ठहराव मिला। वे समझ गए होंगे: यह परमेश्वर ऊपर से नहीं, नीचे से गिनती शुरू करते हैं।
निर्गमन 20:10 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आप रुकने से किस बात के छूट जाने का डर रखते हैं, और वह डर परमेश्वर के बारे में आपकी असली धारणा के विषय में क्या बताता है?
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Exodus 20 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना।" यह आज्ञा अदालत की भाषा में दी गई थी, जहाँ एक झूठे शब्द से किसी का जीवन छिन सकता था। आज वह अदालत तुम्हारे फोन में बैठी है। बिना पूरी बात जाने जो संदेश तुमने आगे भेजा, जो अधूरा सच तुमने कहा, उससे किसी का नाम मरा। सोचो, कल किसके बारे में तुम चुप रह सकते थे?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

छ: दिन तो तू परिश्रम करके अपना सब काम-काज करना।" ध्यान दे, आज्ञा केवल विश्राम की नहीं, परिश्रम की भी है। परमेश्वर तेरे सोमवार को भी उतनी ही गंभीरता से देखता है जितना सब्त को। और "सब काम-काज" कहकर वह तुझसे कहता है, अपना काम पूरा कर, ताकि सातवें दिन तू उसे मन में ढोता न फिरे। थका नहीं, हल्का होकर उसके सामने आ।

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