निर्गमन 4:11
पाठ
मूसा ने अभी-अभी अपनी सबसे ईमानदार आपत्ति रखी है: "मैं बोलने में निपुण नहीं… मैं तो मुँह और जीभ का भद्दा हूँ।" यह कोई बहाना गढ़ना नहीं, बल्कि अपनी कमज़ोरी का खुला स्वीकार है, और वह भी जलती झाड़ी के सामने खड़े होकर। परमेश्वर इस पर कोई सांत्वना नहीं देते, न ही मूसा की योग्यता की तारीफ़ करते हैं। वे उल्टा एक प्रश्न लौटाते हैं, और वह प्रश्न सीधे सृष्टि की जड़ तक जाता है: "मनुष्य का मुँह किसने बनाया है? और मनुष्य को गूँगा, या बहरा, या देखनेवाला, या अंधा, मुझ यहोवा को छोड़ कौन बनाता है?" एक ही वाक्य में परमेश्वर बोलने की क्षमता और बोल न पाने की अक्षमता, दोनों को अपने हाथ में बताते हैं। उत्तर नहीं दिया जाता; प्रश्न ही उत्तर है।
मूल मर्म
यह आयत आराम देने के लिए नहीं लिखी गई, यह ज़मीन खिसकाने के लिए लिखी गई है। परमेश्वर यह नहीं कहते कि "तेरी हकलाहट कोई बड़ी बात नहीं" या "मैं तुझे चंगा कर दूँगा।" वे कहते हैं कि गूँगापन और बहरापन भी उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं हैं। यहाँ सृष्टिकर्ता केवल उजाले और सुंदरता का मालिक नहीं, बल्कि उस जीवन का भी स्वामी है जो अधूरा और सीमित महसूस होता है। इसका धार्मिक अर्थ गहरा है: बुलाहट कभी क्षमता पर खड़ी नहीं होती, वह बुलानेवाले पर खड़ी होती है। मूसा अपनी कमी को प्रमाण की तरह पेश करता है कि वह गलत आदमी है; परमेश्वर उसी कमी को अपने हाथ की कारीगरी बताकर मूसा के तर्क की नींव ही हटा देते हैं। अनुग्रह यहाँ सीमा को मिटाता नहीं, उसे अपने काम में शामिल कर लेता है।
जोड़ने वाला सूत्र
ध्यान दीजिए कि परमेश्वर इस प्रश्न के तुरंत बाद क्या कहते हैं: "अब जा, मैं तेरे मुख के संग होकर जो तुझे कहना होगा वह तुझे सिखाता जाऊँगा।" यही वह धागा है जो पूरे बाइबल में चलता है। परमेश्वर अपना वचन हमेशा किसी मनुष्य के मुँह से भेजते हैं, और लगभग हमेशा ऐसे मुँह से जो खुद को अयोग्य कहता है। यिर्मयाह कहता है मैं बालक हूँ, यशायाह कहता है मेरे होंठ अशुद्ध हैं। यह शृंखला उस एक पर जाकर पूरी होती है जिसे यूहन्ना "वचन" कहता है, जो देह बनकर हमारे बीच बसा। मसीह में परमेश्वर ने केवल किसी के मुँह का इस्तेमाल नहीं किया, उन्होंने स्वयं मनुष्य का मुँह, मनुष्य की जीभ, मनुष्य की थकान और प्यास अपना ली। और यूहन्ना 9 में, जब शिष्य जन्म से अंधे व्यक्ति के बारे में दोष खोजते हैं, यीशु वही रुख लेते हैं जो यहाँ जलती झाड़ी में है: यह पाप का हिसाब नहीं, यह परमेश्वर के काम का स्थान है।
दर्पण
आप जानते हैं न, वह एक चीज़ जिसे आप अपने बारे में कभी बदल नहीं सके? बैठक में बोलते समय आवाज़ का काँपना। वह चेहरा जो आपको आईने में पसंद नहीं। वह बच्चा जो दूसरों की तरह नहीं बोलता। वह बीमारी जिसका नाम लेना आपने छोड़ दिया क्योंकि लोग बस सहानुभूति दिखाते हैं। या वह शिक्षा, वह पृष्ठभूमि, वह अटकी हुई जीभ जिसके कारण आपने चुपचाप तय कर लिया है कि परमेश्वर के काम में आगे की पंक्ति आपके लिए नहीं है।
मूसा की बात पूरी तरह सच थी। और परमेश्वर ने उसे झुठलाया नहीं। उन्होंने बस कहा: यह भी मेरी बनाई हुई चीज़ है, और यह तेरे इनकार का आधार नहीं बन सकती। यहाँ दर्पण चुभता है, क्योंकि हमारी कमज़ोरी अक्सर हमारी सबसे आरामदायक पनाह होती है। जब तक मैं अयोग्य हूँ, मुझसे कुछ माँगा नहीं जा सकता। परमेश्वर वही पनाह छीन लेते हैं, और उसकी जगह अपनी उपस्थिति रख देते हैं।
आज दस मिनट अकेले बैठिए और ज़ोर से, अपनी आवाज़ में, परमेश्वर से उस एक कमी का नाम लीजिए जिसके पीछे आप छिपते आए हैं। फिर यह वाक्य कहिए: "यह भी आपके हाथ की बनाई हुई है; इसी के साथ मुझे भेजिए।"
कठिन प्रश्न
पर क्या परमेश्वर सचमुच किसी को गूँगा या अंधा बनाते हैं? यह आयत आराम से निगली नहीं जाती। हर उस माँ-बाप के लिए जो जाँच रिपोर्ट हाथ में लिए अस्पताल के गलियारे में खड़े रहे हैं, यह वाक्य पत्थर जैसा लगता है। इसे नरम करने की कोशिश बेईमानी होगी: पाठ यह नहीं कहता कि परमेश्वर ने बस "अनुमति दी"। वह उन्हें कर्ता बताता है।
पर ध्यान दीजिए कि यह कहा किससे जा रहा है। यह कोई सिद्धांत नहीं है जो दुख के बारे में बहस में उछाला जाए; यह एक आदमी से कही गई बात है जो अपनी सीमा को बहाना बना रहा है। और वही बाइबल अंधों की आँखें खोलने को परमेश्वर के राज्य का चिन्ह कहती है, यानी सीमा उनकी मंज़िल नहीं। हमारे पास पूरा उत्तर नहीं है। हमारे पास इतना है: कुछ भी उनके हाथ से बाहर नहीं गिरा, और जो हाथ इसे थामे है वह क्रूस पर छिदा हुआ हाथ है।
पहले सुननेवाले
जिन्होंने यह कहानी पहली बार सुनी, वे मिस्र से निकले हुए लोग थे, या उनके बच्चे। गुलामों की एक पीढ़ी, जिनके पास कोई आवाज़ नहीं थी। मिस्र में शब्द की ताकत सब कुछ थी: लिखनेवाले शास्त्री, दरबार के वक्ता, जादूगरों के मंत्र, और फ़िरौन जिसका बोलना ही कानून था। और उनका परमेश्वर कहता है कि मुँह बनाना उनका काम है। यह राजनीतिक वाक्य है। जिस फ़िरौन की वाणी को दैवी माना जाता था, उसका मुँह भी यहोवा का बनाया हुआ है। और जिन दासों को बोलने का अधिकार नहीं था, उनमें से एक हकलाते आदमी को भेजकर परमेश्वर साम्राज्य से बात करेंगे। वे इसमें अपनी ही कहानी सुनते थे।
पृष्ठभूमि
मूसा अस्सी साल का है। चालीस साल मिस्र के महल में, फिर चालीस साल मिद्यान के जंगल में भेड़ें चराते हुए। जो वाक्पटुता दरबार में सीखी थी, वह रेत में दब चुकी है। इब्रानी में वह खुद को कहता है "केवद पेह", यानी "मुँह का भारी", एक ऐसा मुहावरा जो हकलाहट भी हो सकता है और भाषा की जंग लगी जीभ भी।
यह उसकी चौथी आपत्ति है। पहले तीन का उत्तर परमेश्वर ने नाम, वादे और चिन्हों से दिया: लाठी जो सर्प बनी, हाथ जो कोढ़ी हुआ और फिर चंगा। अब आपत्ति खुद उसके शरीर पर आ टिकी है, और परमेश्वर चिन्ह नहीं, एक प्रश्न देते हैं। अगली आयत में मूसा फिर भी कहेगा, "कृपया तू किसी अन्य व्यक्ति को भेज", और तब परमेश्वर का कोप भड़केगा। कमज़ोरी स्वीकारना अपराध नहीं; बुलाहट से भागना है।
चिंतन के प्रश्न
आपकी कौन-सी सीमा धीरे-धीरे आपका सबसे सुरक्षित बहाना बन गई है, और पिछली बार कब आपने उसे परमेश्वर के सामने नाम लेकर रखा था?
"मैं तेरे मुख के संग होकर" का वादा मिलने पर भी मूसा ने किसी और को भेजने को कहा। आपकी ज़िंदगी में वह "कोई और" कौन है जिसके पीछे आप खड़े हो जाते हैं?
Exodus में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Traces how God rescues a people for himself, from slavery to Sinai.
An accessible chapter by chapter guide that keeps pointing to Jesus.
Exodus: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Rich, sermon shaped exposition of the whole exodus story.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Exodus 4:11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
निर्गमन 4:11 का क्या अर्थ है?
निर्गमन 4:11 किस विषय में है?
निर्गमन 4:11 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
निर्गमन 4:11 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
निर्गमन 4:11 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Exodus 4 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
मूसा के हाथ में कोई राजदण्ड नहीं था, बस भेड़ चराने की साधारण लाठी थी। चालीस साल से वही लकड़ी उसके साथ थी, और परमेश्वर कहता है, "यह लाठी भी अपने हाथ में लिये जा।" जो तेरे पास पहले से है, वही ले। तू सोचता है तेरे पास कुछ खास नहीं, पर परमेश्वर तेरी उसी छोटी सी चीज़ से मिस्र हिला सकता है।
पिता, मेरे शब्द अक्सर अटक जाते हैं और डर मुझे चुप करा देता है। पर तू ही है जो बोलने के लिए बातें देता है और सिखाता भी है कि कब क्या कहना है। मेरे मुँह पर अपना हाथ रख, और जहाँ मैं अकेला कमजोर हूँ, वहाँ किसी साथी को भेज।
मूसा फ़िरौन के सामने खड़ा होने जा रहा था, पर अपने ही घर में परमेश्वर की वाचा का चिह्न अधूरा पड़ा था। सिप्पोरा ने वही किया जो टाला जा रहा था, और लिखा है, "तब उसने उसे छोड़ दिया।" बड़ी बुलाहट छोटी आज्ञाकारिता की जगह नहीं ले सकती। तेरे घर में ऐसी कौन सी बात है, जिसे तू सेवा के नाम पर टालता आ रहा है?
मूसा उस साँप से भागा, और परमेश्वर ने कहा कि उसे पूँछ से पकड़। जिस चीज़ से तू डरकर भागा, उसी को हाथ में उठाना पड़ेगा, "यह इसलिए होगा कि वे विश्वास करें कि तेरे पूर्वजों का परमेश्वर... तुझे दिखाई दिया है।" तेरे डर पर परमेश्वर का हाथ रखना दूसरों के लिए गवाही बन जाता है। आज तू किस चीज़ से भाग रहा है?
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें