यहेजकेल 37:9
पाठ
घाटी में अब भी सन्नाटा है। हड्डियाँ जुड़ चुकी हैं, नसें तन गई हैं, माँस चढ़ गया है, चमड़ी ने सब ढाँप दिया है, पर कोई छाती ऊपर-नीचे नहीं हो रही। पूरी घाटी लाशों से भरी है, और इस बार वे भरी-पूरी, सम्पूर्ण लाशें हैं, जो कहीं अधिक भयावह दृश्य है। तभी परमेश्वर यहेजकेल को दूसरी बार बोलने को कहते हैं, इस बार हड्डियों से नहीं, बल्कि साँस से: "हे साँस, परमेश्वर यहोवा यह कहता है कि चारों दिशाओं से आकर इन घात किए हुओं में समा जा कि ये जी उठें।" नबी को उस पर भविष्यद्वाणी करनी है जिसे वह न देख सकता है, न पकड़ सकता है, न बुला सकता है, केवल परमेश्वर के वचन के बल पर।
मूल मर्म
ध्यान दीजिए कि परमेश्वर आधे काम पर क्यों रुके। वे एक ही झटके में सब कुछ कर सकते थे, पर उन्होंने दो चरणों में किया, और बीच का ठहराव ही संदेश है। ढाँचा, माँस, त्वचा, संगठन, बाहरी पूर्णता, यह सब लौट सकता है और फिर भी जीवन न हो। इस्राएल बाबेल से लौटकर दीवारें खड़ी कर सकता था और भीतर से मुर्दा रह सकता था। जीवन किसी आन्तरिक क्षमता से नहीं उठता; वह बाहर से आता है, "चारों दिशाओं से", यानी वहाँ से जहाँ तक इंसान की पहुँच नहीं। और यह साँस आज्ञा से आती है, अनुरोध से नहीं। परमेश्वर मृत्यु से बहस नहीं करते, वे उसे आदेश देते हैं। यही अनुग्रह का असली चेहरा है: वह हमारी संभावनाओं पर नहीं, परमेश्वर के वचन पर टिका है।
सूत्र
इस दृश्य के पीछे अदन का बग़ीचा साँस ले रहा है। उत्पत्ति 2:7 में परमेश्वर मिट्टी से एक देह गढ़ते हैं, पूरी देह, पर वह तब तक निर्जीव पड़ी रहती है जब तक नथनों में साँस नहीं फूँकी जाती। यहेजकेल जो देख रहा है, वह सृष्टि की उसी घड़ी का दोहराव है, केवल इस बार मिट्टी नहीं, बल्कि मारे गए लोगों की हड्डियाँ हैं। परमेश्वर वही करते हैं जो उन्होंने शुरुआत में किया था, और इसीलिए मृत्यु उनके लिए कोई अन्तिम दीवार नहीं। यही धारा आगे यूहन्ना 20:22 तक बहती है, जहाँ जी उठा हुआ मसीह बन्द कमरे में डरे हुए चेलों पर फूँकता है और कहता है, पवित्र आत्मा लो। वही साँस, वही आज्ञा, वही परिणाम: मुर्दा समूह खड़ा होकर सेना बन जाता है।
दर्पण
आपके जीवन में भी शायद कुछ ऐसा है जो आठवें पद की हालत में है: बाहर से पूरा, भीतर से बेदम। वह विवाह जिसमें सब कुछ ठीक चल रहा है, बिल चुकते हैं, बच्चे स्कूल जाते हैं, और रात को दो लोग एक ही बिस्तर पर अजनबियों की तरह लेटते हैं। वह नौकरी जिसमें आप सक्षम हैं पर मर चुके हैं। वह मण्डली जिसकी व्यवस्था बेहतरीन है और जिसकी प्रार्थना सभा में कोई नहीं रोता। हमारा स्वाभाविक इलाज यही होता है कि और माँस चढ़ाओ, और ढाँचा बनाओ, और योजना बनाओ। यह पद उस इलाज को नकारता है। साँस बाहर से आती है, और वह तब आती है जब कोई उसे परमेश्वर के वचन के बल पर पुकारता है। आज, दिन ढलने से पहले, उस एक स्थिति का नाम ज़ोर से बोलकर कहिए, "हे प्रभु, इसमें अपनी साँस भेजिए," और बोलिए सचमुच ऊँची आवाज़ में, मन ही मन नहीं।
बारीकी
जिस इब्रानी शब्द का अनुवाद यहाँ "साँस" हुआ है, वह है रूआख़, और वही शब्द हवा, श्वास और आत्मा, तीनों के लिए इस्तेमाल होता है। यहेजकेल इस खेल को जानबूझकर खेलता है: "चारों दिशाओं से आकर" वाक्यांश हवा की भाषा है, आकाश के चारों कोनों की, पर जो भीतर समाता है वह परमेश्वर का अपना आत्मा है, जैसा चौदहवें पद में साफ़ हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि बिखरे हुए इस्राएल को जो चीज़ इकट्ठा करेगी, वह वही है जो उन्हें जिलाएगी। जहाँ-जहाँ वे फेंके गए, उन्हीं दिशाओं से उनका जीवन लौटकर आएगा। परमेश्वर निर्वासन की हवाओं को ही अपनी साँस बना देते हैं।
मुख्य पात्र
यहाँ करने वाले परमेश्वर हैं, पर बोलने वाला एक आदमी है, और यही सबसे चौंकाने वाली बात है। परमेश्वर साँस को सीधे बुला सकते थे; इसके बजाय वे एक थके हुए, निर्वासित याजक के मुँह में अपना वचन डालते हैं और कहते हैं, तू बोल। यहेजकेल को उस पर आज्ञा चलानी है जो उसके हाथ में नहीं, और वह जानता है कि यदि कुछ न हुआ तो वह मूर्ख दिखेगा। तीसरे पद में उसने जो कहा था, "हे परमेश्वर यहोवा, तू ही जानता है," वह हार नहीं थी, वह ईमानदारी थी। और परमेश्वर उसी ईमानदारी वाले आदमी को अपना मुखपत्र बनाते हैं। जो नहीं जानता पर आज्ञा मानता है, वही परमेश्वर के काम में सबसे उपयोगी निकलता है।
सन्दर्भ
यह दर्शन 586 ईसा पूर्व के बाद का है, जब यरूशलेम गिर चुका था, मन्दिर जल चुका था, और यहेजकेल बाबेल में कबार नदी के किनारे निर्वासितों के बीच रह रहा था। वह एक याजक था जिसके पास अब कोई मन्दिर नहीं बचा था। जिन लोगों से वह बोल रहा था, वे ग्यारहवें पद में अपनी हालत खुद बताते हैं: "हमारी हड्डियाँ सूख गई, और हमारी आशा जाती रही।" यह धार्मिक उदासी नहीं, राजनीतिक मौत थी। राजा अन्धा होकर क़ैद में था, वंश टूट चुका था। और प्राचीन पूर्व में बिना दफ़नाए खुले मैदान में पड़ी हड्डियाँ सबसे बड़े अपमान का चिह्न थीं, पराजित सेना का कूड़ा। परमेश्वर उसी कूड़े के ढेर पर खड़े होकर सेना की बात करते हैं।
चिन्तन
आपके जीवन में वह कौन सी जगह है जहाँ सब कुछ "ठीक" है पर साँस नहीं, और आप अब तक उसमें और माँस चढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं?
यहेजकेल को उस पर बोलना पड़ा जो सुन नहीं सकता था। क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति या स्थिति के लिए प्रार्थना करना छोड़ चुके हैं क्योंकि वहाँ कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखती?
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Ezekiel 37:9 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यहेजकेल 37:9 का क्या अर्थ है?
यहेजकेल 37:9 किस विषय में है?
यहेजकेल 37:9 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यहेजकेल 37:9 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यहेजकेल 37:9 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Ezekiel 37 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
दो अलग लकड़ियाँ, दो टूटे राज्य, सदियों की दुश्मनी। और परमेश्वर कहता है, "उन्हें एक ही लकड़ी कर दूँगा; और वे मेरे हाथ में एक ही रहेंगी।" ध्यान दे, जुड़ना उनके हाथ में नहीं, उसके हाथ में होता है। जिस रिश्ते को तू जोड़ने की कोशिश में थक गया है, उसे उसके हाथ में रख दे। वहीं एकता टिकती है।
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