बाइबल व्याख्या

एज्रा 6

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

राजा दारा ने बाबेल के पुस्तकालय में खोज करवाई और कुस्रू का वह आदेश मिल गया जिसमें यरूशलेम के मन्दिर के पुनर्निर्माण की अनुमति दी गई थी। दारा ने न केवल विरोध करने वालों को रोका, बल्कि आज्ञा दी कि राजकीय कोष से ही निर्माण और बलिदानों का खर्च दिया जाए। मन्दिर बनकर तैयार हुआ, प्रतिष्ठा हुई, और लौटे हुए बन्दियों ने आनन्द के साथ फसह मनाया।

हृदय

यह अध्याय एक बात कहता है जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं: परमेश्वर का काम रुका हुआ नहीं लगता तब भी रुका नहीं होता। बीच के अध्यायों में विरोधियों ने काम बन्द करवा दिया था, चिट्ठियाँ लिखी गईं, षड्यन्त्र रचे गए। परन्तु जिस पुस्तकालय में शत्रुओं को उम्मीद थी कि कुछ नहीं मिलेगा, वहीं से वह आदेश निकल आया जो उनके विरुद्ध हो गया। परमेश्वर एक विदेशी राजा की कलम, एक भूली हुई अलमारी, एक पुरानी पोथी को अपने काम में लगा लेते हैं। यह "योजना" वाला घिसा-पिटा वाक्य नहीं है, यह एक ठोस दावा है: इतिहास की धीमी चालें, राजकीय दस्तावेज़, और प्रशासनिक देरी भी उनके हाथ में हैं।

सूत्र

नबूकदनेस्सर ने जो पात्र लूटे थे, वे वापस लौटाए जाते हैं (पद 5)। यह सिर्फ़ बर्तनों की वापसी नहीं है, यह उस बात का चिह्न है कि परमेश्वर अपनी उपस्थिति को उसके स्थान पर लौटाते हैं। पर यह मन्दिर भी अस्थायी है। हाग्गै और जकर्याह जिस भविष्य की ओर इशारा करते हैं, वह अन्ततः मसीह में पूरा होगा, जिन्होंने कहा कि इस मन्दिर को ढा दो और मैं तीन दिन में इसे उठा दूँगा। यहाँ जो पत्थर और लकड़ी से बन रहा है, वहाँ शरीर और आत्मा में बना। जो फसह पद 19 में मनाया जाता है, वही फसह अन्ततः क्रूस पर मेम्ने के लहू में अपना पूरा अर्थ पाएगा।

दर्पण

क्या आपने कभी वह लम्बी चुप्पी झेली है जब आपका "मन्दिर-निर्माण" रुका हुआ था? कोई प्रार्थना जिसका उत्तर वर्षों से नहीं मिला, कोई रिश्ता जो टूटा पड़ा है, कोई बुलाहट जो कागज़ी कार्रवाई और दूसरों की आपत्तियों में दब गई है। यह अध्याय आपके सामने एक कठिन प्रश्न रखता है: क्या आप विश्वास करते हैं कि परमेश्वर उस "बाबेल के पुस्तकालय" में भी काम कर रहे हैं जहाँ आप देख भी नहीं सकते? या आप सिर्फ़ उतना ही मानते हैं जितना आपकी आँखों के सामने हो रहा है? और एक दूसरा प्रश्न, जो शायद ज़्यादा चुभे: तत्तनै ने प्रामाणिक तरीक़े से पूछताछ की थी, विरोध नहीं किया था। कभी-कभी हम भी परमेश्वर के काम में "प्रक्रिया" और "सावधानी" के नाम पर अड़चन बन जाते हैं। आप किस तरफ़ खड़े हैं, बुज़ुर्गों के साथ जो निर्माण कर रहे थे, या पूछताछ करने वालों के साथ जो अपने-आप को तटस्थ समझते थे?

श्रोता

जो लोग यह वृत्तान्त पहली बार पढ़ रहे थे, वे बन्धुआई से लौटी हुई पीढ़ी के बच्चे और पोते थे। उनके दादा-दादी ने बाबेल की नदियों के किनारे बैठकर रोते हुए सिय्योन को याद किया था। अब वे उस भूमि में रह रहे थे जहाँ मन्दिर की दीवारें फिर से खड़ी थीं, पर वह पहले वाला वैभव नहीं था। यह अध्याय उनके लिए एक प्रमाणपत्र था: हाँ, यह छोटा मन्दिर भी असली है, यह भी परमेश्वर की योजना का हिस्सा है, यह कुस्रू, दारा और अर्तक्षत्र के आदेशों से जुड़ा हुआ इतिहास का दस्तावेज़ी सत्य है। उनकी पहचान संशय में थी, और यह पाठ उस पहचान को मज़बूत करता है।

पृष्ठभूमि

समय लगभग 516 ईसा पूर्व है, बन्धुआई से पहले जत्थे के लौटने के लगभग बीस वर्ष बाद। फ़ारसी साम्राज्य विशाल है, और उसकी नीति स्थानीय देवताओं और मन्दिरों को संरक्षण देने की थी, ताकि प्रजा शान्त रहे और साम्राज्य के लिए प्रार्थना करे (पद 10 इसी को दर्शाता है)। तत्तनै "महानद के पार" यानी फ़रात के पश्चिम का अधिपति था, यहूदा उसके अधिकार क्षेत्र में आता था। यह ध्यान देने योग्य है कि यहूदी "फुर्ती" (पद 13) से काम इसलिए नहीं कर रहे कि उन्हें विश्वास लौट आया, बल्कि इसलिए कि हाग्गै और जकर्याह ने उन्हें झकझोरा था। भविष्यवक्ता की आवाज़ और राजा का आदेश, दोनों एक साथ चलते हैं।

एक विवरण

पद 22 का अन्तिम वाक्यांश रुककर पढ़िए: "अश्शूर के राजा का मन उनकी ओर ऐसा फेर दिया।" अश्शूर का राजा? दारा तो फ़ारसी था। यह लेखक की भूल नहीं है। यह जानबूझकर की गई पुकार है। अश्शूर वह साम्राज्य था जिसने उत्तरी इस्राएल को तबाह किया था, जो इस्राएल के इतिहास में सबसे बड़े शत्रु का नाम था। लेखक कह रहा है: वही सिंहासन जो कभी हमें कुचलने के लिए इस्तेमाल हुआ, अब हमारी सहायता के लिए इस्तेमाल हो रहा है। परमेश्वर पुराने शत्रुओं के हृदय भी फेर सकते हैं। जिसे आपने अपने जीवन में "अश्शूर" मान लिया है, वह भी उनके हाथ में एक औज़ार बन सकता है।

चिन्तन

*आपके जीवन का

Ezra में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Ezra and Haggai

Robert Fyall

Rebuilding the temple and the people, read as one story of restoration.

Ezra and Nehemiah: An Introduction and Commentary

Derek Kidner

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

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Ezra 6 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

एज्रा 6 का क्या अर्थ है?
राजा दारा ने बाबेल के पुस्तकालय में खोज करवाई और कुस्रू का वह आदेश मिल गया जिसमें यरूशलेम के मन्दिर के पुनर्निर्माण की अनुमति दी गई थी। दारा ने न केवल विरोध करने वालों को रोका, बल्कि आज्ञा दी कि राजकीय कोष से ही निर्माण और बलिदानों का खर्च दिया जाए। मन्दिर बनकर तैयार हुआ, प्रतिष्ठा हुई, और लौटे हुए बन्दियों ने आनन्द के साथ फसह मनाया।
एज्रा 6 किस विषय में है?
यह अध्याय एक बात कहता है जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं: परमेश्वर का काम रुका हुआ नहीं लगता तब भी रुका नहीं होता। बीच के अध्यायों में विरोधियों ने काम बन्द करवा दिया था, चिट्ठियाँ लिखी गईं, षड्यन्त्र रचे गए। परन्तु जिस पुस्तकालय में शत्रुओं को उम्मीद थी कि कुछ नहीं मिलेगा, वहीं से वह आदेश निकल आया जो उनके विरुद्ध हो गया। परमेश्वर एक विदेशी राजा की कलम, एक भूली हुई अलमारी, एक पुरानी पोथी को अपने काम में लगा लेते हैं। यह "योजना" वाला घिसा-पिटा वाक्य नहीं है, यह एक ठोस दावा है: इतिहास की धीमी चालें, राजकीय दस्तावेज़, और प्रशासनिक देरी भी उनके हाथ में हैं।
एज्रा 6 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
नबूकदनेस्सर ने जो पात्र लूटे थे, वे वापस लौटाए जाते हैं (पद 5)। यह सिर्फ़ बर्तनों की वापसी नहीं है, यह उस बात का चिह्न है कि परमेश्वर अपनी उपस्थिति को उसके स्थान पर लौटाते हैं। पर यह मन्दिर भी अस्थायी है। हाग्गै और जकर्याह जिस भविष्य की ओर इशारा करते हैं, वह अन्ततः मसीह में पूरा होगा, जिन्होंने कहा कि इस मन्दिर को ढा दो और मैं तीन दिन में इसे उठा दूँगा। यहाँ जो पत्थर और लकड़ी से बन रहा है, वहाँ शरीर और आत्मा में बना। जो फसह पद 19 में मनाया जाता है, वही फसह अन्ततः क्रूस पर मेम्ने के लहू में अपना पूरा अर्थ पाएगा।
एज्रा 6 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
क्या आपने कभी वह लम्बी चुप्पी झेली है जब आपका "मन्दिर-निर्माण" रुका हुआ था? कोई प्रार्थना जिसका उत्तर वर्षों से नहीं मिला, कोई रिश्ता जो टूटा पड़ा है, कोई बुलाहट जो कागज़ी कार्रवाई और दूसरों की आपत्तियों में दब गई है। यह अध्याय आपके सामने एक कठिन प्रश्न रखता है: क्या आप विश्वास करते हैं कि परमेश्वर उस "बाबेल के पुस्तकालय" में भी काम कर रहे हैं जहाँ आप देख भी नहीं सकते?
एज्रा 6 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
जो लोग यह वृत्तान्त पहली बार पढ़ रहे थे, वे बन्धुआई से लौटी हुई पीढ़ी के बच्चे और पोते थे। उनके दादा-दादी ने बाबेल की नदियों के किनारे बैठकर रोते हुए सिय्योन को याद किया था। अब वे उस भूमि में रह रहे थे जहाँ मन्दिर की दीवारें फिर से खड़ी थीं, पर वह पहले वाला वैभव नहीं था। यह अध्याय उनके लिए एक प्रमाणपत्र था: हाँ, यह छोटा मन्दिर भी असली है, यह भी परमेश्वर की योजना का हिस्सा है, यह कुस्रू, दारा और अर्तक्षत्र के आदेशों से जुड़ा हुआ इतिहास का दस्तावेज़ी सत्य है। उनकी पहचान संशय में थी, और यह पाठ उस पहचान को मज़बूत करता है।
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Ezra 6 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

और यह भवन दारा राजा के राज्य के छठवें वर्ष के अदार महीने के तीसरे दिन को बन चुका।" एक तारीख, एक साधारण सा दिन। पर उस दिन तक पहुँचने में बीस साल लगे, विरोध, रुकावट, चिट्ठियाँ, ठहरा हुआ काम। परमेश्वर ने जो शुरू किया था, उसे भूला नहीं। तेरे जीवन का वह अधूरा काम भी उसकी नज़र में अभी बंद नहीं हुआ है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

बरसों पहले कुस्रू ने जो आज्ञा दी थी, वह किसी पुरानी पेटी में धूल खा रही थी। पर दारा ने कहा, "तब राजा दारा ने आज्ञा दी, और बाबेल के पुस्तकालय में जहाँ खजाने रखे जाते थे, जाँच की गई।" जो वादा तेरे लिए किया गया, वह भूला नहीं गया। परमेश्वर के यहाँ कोई फाइल गुम नहीं होती। जिस देरी को तू अनदेखी समझता है, वह शायद खोज का समय है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 20

लौटकर आए लोगों ने पहला पर्व मनाया, और लिखा है कि याजकों और लेवियों ने "एक मन होकर अपने आप को शुद्ध किया था।" ध्यान दो, लेवियों ने फसह पहले दूसरों के लिये बलि किया, अपने लिये सबसे अन्त में। सेवा का क्रम यही है। और शुद्धता अकेले नहीं, मिलकर आई। तुम किसके साथ मिलकर अपना मन परमेश्वर के सामने साफ़ कर रहे हो?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 21

इस्राएलियों ने फसह का भोजन उन लोगों के साथ खाया "जिन्होंने देश की जातियों की अशुद्धता से अपने आप को अलग करके उनका साथ छोड़ दिया था, कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की खोज में उनसे मिल जाएँ।"

सोचिए, जो लोग खून से इस्राएली नहीं थे, वे भी इस पवित्र भोजन में बैठे। बस एक शर्त थी, अशुद्धता छोड़कर यहोवा की खोज करना।

आज भी परमेश्वर की मेज़ पर तुम्हारी जाति या पिछला जीवन नहीं, तुम्हारा मुड़ना मायने रखता है। क्या तुमने सच में कुछ छोड़ा है उसे पाने के लिए?

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