उत्पत्ति 25:2
पाठ
सारा की कब्र पर मिट्टी अभी ठीक से बैठी भी नहीं थी कि वृद्ध अब्राहम फिर से एक स्त्री को अपने तम्बू में लाता है, कतूरा। और फिर वह होता है जो हम इस बुज़ुर्ग से अब उम्मीद नहीं करते थे: छह बेटे, एक के बाद एक। "उससे जिम्रान, योक्षान, मदना, मिद्यान, यिशबाक, और शूह उत्पन्न हुए।" बस इतना ही। न कोई कहानी, न कोई वादा, न कोई स्वर्गदूत, न कोई हँसी जैसी इसहाक के जन्म पर हुई थी। केवल छह नाम, कतार में खड़े, जैसे किसी बही-खाते में दर्ज किए गए हों। पर ये नाम खाली नहीं हैं। ये आगे चलकर रेगिस्तान के काफ़िले, ऊँटों के व्यापारी और इस्राएल के पड़ोसी बनेंगे।
मर्म
जो पहला श्रोता यह सूची सुनता था, वह इन नामों पर सिर हिलाता होगा, क्योंकि वह उन्हें जानता था। मिद्यान वही है जिसके काफ़िलों ने यूसुफ़ को खरीदा, जिसकी बेटी से मूसा ने ब्याह किया, और जिसके योद्धाओं ने बाद में गिदोन के दिनों में इस्राएल की फ़सलें उजाड़ीं। शेबा और ददान का नाम सुनते ही धूप, लोबान और सोने से लदे ऊँटों की गंध याद आती थी। यानी परमेश्वर की आशीष अब्राहम के तम्बू की चारदीवारी में क़ैद नहीं रही; वह अरब के रेगिस्तानों तक फैल गई। और साथ ही पद 5 निर्ममता से कहता है कि सब कुछ केवल इसहाक को मिला। यही तनाव इस आयत का मर्म है: परमेश्वर का चुनाव संकीर्ण है, पर उनकी उदारता चौड़ी। वे एक को वाचा देते हैं और बाक़ियों को भी जीवन, संतान और भूमि देते हैं। चुनाव कंजूसी नहीं, दिशा है।
सूत्र
रेगिस्तान की उन सड़कों को याद रखिए जिन पर ये नाम बसे। शेबा और ददान लोबान और सोने के व्यापारी बने, और सदियों बाद यशायाह गाएगा कि ऊँटों के काफ़िले शेबा से सोना और लोबान लेकर सिय्योन आएँगे। यह वही धारा है जो अंत में बैतलहम के एक घर के दरवाज़े पर पहुँचती है, जब पूर्व से आए लोग सोना और लोबान रखकर झुक जाते हैं। जिन बेटों को अब्राहम ने "पूर्व देश में" भेज दिया था, उनके देश से भेंट लौट आती है, इसहाक के वंशज उस बालक के पास। परमेश्वर ने जिन्हें वाचा की मुख्य पंक्ति से बाहर रखा, उन्हें भूला नहीं; वे उसी उद्धार की कहानी में लौट आते हैं, दूसरी ओर से।
दर्पण
हम सब इसहाक नहीं होते। कुछ लोग वे होते हैं जिन्हें "कुछ कुछ देकर" पूर्व की ओर भेज दिया जाता है: वह भाई जिसे पिता की दुकान नहीं मिली, वह बेटी जिसकी शादी की चर्चा घर में कभी उत्सव नहीं बनी, वह कर्मचारी जिसका नाम धन्यवाद-सूची में छूट गया। छह नाम, कोई कहानी नहीं। यह चुभता है, और चुभना चाहिए। पर ध्यान दीजिए: बाइबल ने उनके नाम लिखे। जिसे परिवार ने किनारे किया, परमेश्वर ने अपनी पुस्तक में दर्ज किया। आपकी उपेक्षा परमेश्वर की उपेक्षा नहीं है। आज ही एक कागज़ पर अपने परिवार या मंडली के उस व्यक्ति का नाम लिखिए जिसकी कहानी कोई नहीं सुनाता, और उस नाम को ज़ोर से बोलकर परमेश्वर के सामने रख दीजिए।
एक बारीकी
छह नामों में एक ऐसा है जो कान खींचता है: मिद्यान। इब्रानी में इसकी जड़ दीन है, जिसका अर्थ है झगड़ा, मुक़दमा, फ़ैसला। नाम में ही तनाव गुँथा हुआ है। और इतिहास ने उसे सच कर दिखाया: मिद्यानी व्यापारियों ने यूसुफ़ को खरीदा, मिद्यान के एक याजक ने भागे हुए मूसा को बेटी और आश्रय दिया, और मिद्यान के लुटेरों ने गिदोन के दिनों में इस्राएल की फ़सलें रौंद डालीं। एक ही नाम, कभी शरण कभी तलवार। पहला श्रोता जानता था कि पड़ोसी होना कितना दो-धारी होता है, और यह आयत उसे याद दिलाती थी कि वह दुश्मन भी उसका ही खून है।
पहले श्रोता
कल्पना करें उन इस्राएलियों को जो यह सूची पहली बार सुन रहे हैं, संभवतः तम्बुओं के बीच, जहाँ पूर्व से आते काफ़िलों की घंटियाँ सुनाई देती थीं। उनके लिए वंशावली सूखा दस्तावेज़ नहीं थी, वह नक़्शा थी। हर नाम एक क़बीला, एक चरागाह, एक व्यापार-मार्ग, एक पुरानी लड़ाई। जब वे "मिद्यान" सुनते, उनके मन में ऊँटों की धूल और युद्ध की स्मृति एक साथ उठती। और तब यह आयत उन्हें एक असहज सच्चाई थमा देती: ये अजनबी नहीं, चचेरे भाई हैं। अब्राहम का परमेश्वर उन जातियों का भी उत्पन्न करनेवाला है जिनसे इस्राएल को डर लगता था।
मुख्य पात्र
और अब्राहम स्वयं? एक अत्यंत वृद्ध व्यक्ति, जिसने अभी अपनी पत्नी को मकपेला की गुफ़ा में रखा है, और जो जीवन को वहीं से आगे बढ़ा देता है जहाँ वह टूटा था। इसमें न कोई नाटक है, न कोई दर्शन, न कोई प्रतिज्ञा। सिर्फ़ जीवन, जो बहता रहता है। यही उस मनुष्य की परिपक्वता है जिसने सीख लिया कि वाचा उसकी कोशिश से नहीं चलती। इसीलिए वह अब बिना घबराहट के बेटे जन्मा सकता है और बिना कड़वाहट के उन्हें विदा कर सकता है। जो व्यक्ति एक बार हाजिरा के मामले में परमेश्वर की मदद करने निकला था, वह अब शांत है। यह शांति विश्वास का फल है, उदासीनता नहीं।
चिंतन
आपके जीवन में कौन "पूर्व देश में भेजा गया" व्यक्ति है, और आपने उसकी कहानी कब से नहीं सुनी?
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