उत्पत्ति 12:2
पाठ
अब्राम को घर छोड़ने का आदेश मिला है, और उसके ठीक बाद परमेश्वर पाँच वादे रखते हैं: "मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊँगा, और तुझे आशीष दूँगा, और तेरा नाम महान करूँगा, और तू आशीष का मूल होगा।" एक बूढ़े, निःसंतान आदमी से कहा जा रहा है कि उससे एक पूरी जाति निकलेगी, उसका नाम इतिहास में गूँजेगा, और वह स्वयं दूसरों के लिए आशीष का स्रोत बनेगा। ध्यान दीजिए कि वाक्य के हर हिस्से में क्रिया परमेश्वर की है, और अब्राम केवल पाने वाला है; पर आखिरी टुकड़े में वही अब्राम अचानक एक माध्यम बन जाता है, कुछ ऐसा जो उसके पास रुकता नहीं, बल्कि उसमें से होकर आगे बहता है।
मूल बात
यहाँ आशीष की परिभाषा ही बदल जाती है। धार्मिक जीवन का सबसे आम रोग यह है कि हम आशीष को गंतव्य समझ लेते हैं: अच्छी नौकरी, स्वस्थ बच्चे, चुका हुआ कर्ज़, और फिर संतोष की आह। परमेश्वर यहाँ अब्राम को आशीष का गंतव्य नहीं, आशीष की नाली बनाते हैं। "तू आशीष का मूल होगा" कोई इनाम नहीं, यह एक ज़िम्मेदारी है जो वादे के भीतर छिपी है। इसका अर्थ यह भी है कि परमेश्वर का चुनाव कभी विशेषाधिकार का घेरा नहीं बनाता; वे एक को चुनते हैं ताकि सबके पास पहुँच सकें। और ध्यान दीजिए कि "तेरा नाम महान करूँगा" उस बाबेल की मीनार के ठीक बाद आता है जहाँ लोग अपना नाम खुद बड़ा करना चाहते थे। जो नाम खुद बनाया जाता है वह बिखरता है; जो नाम दिया जाता है वह दूसरों को जीवन देता है। यही अंतर आपके करियर, आपकी सेवकाई और आपके पैसे पर सीधा लागू होता है।
सूत्र
यह वादा बाइबल की पूरी कहानी का बीज है। तीसरे पद में परमेश्वर इसे खोलकर कहते हैं, "भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएँगे", और पौलुस गलातियों में इसी वाक्य को पकड़ता है: वह "वंश" अंततः मसीह है। यानी अब्राम को दिया गया वचन एक जाति की सीमा में बंद रहने वाला नहीं था; वह एक ऐसी नदी थी जिसका मुहाना क्रूस पर खुलता है। और ध्यान दीजिए कि मसीह इस पैटर्न को दोहराते नहीं, पूरा करते हैं: उन्होंने आशीष को अपने पास रोका नहीं, अपना नाम खुद ऊँचा नहीं किया, बल्कि खुद को खाली किया, और परमेश्वर ने उन्हें वह नाम दिया जो सब नामों से ऊँचा है। जो कुछ अब्राम से शुरू हुआ, वह आप तक इसी रास्ते से पहुँचा है। आप इस वादे के अंतिम छोर पर खड़े नहीं हैं; आप इसकी अगली कड़ी हैं।
दर्पण
तो पूछिए: आपके जीवन में आशीष कहाँ आकर रुक गई है? वह वेतन वृद्धि जिसे आपने पूरी तरह अपने लिए घेर लिया, वह हुनर जिसे आप केवल अपनी पदोन्नति के लिए इस्तेमाल करते हैं, वह घर जिसमें कोई अनजान मेहमान वर्षों से नहीं आया। यह पद हमारे भीतर की उस गहरी इच्छा को उघाड़ता है कि परमेश्वर हमें आशीष दें और हिसाब वहीं बंद हो जाए। पर यहाँ आशीष एक ऐसा पानी है जो जमा होते ही सड़ जाता है। और यह डर भी उघड़ता है: अगर मैंने बाँटा, तो कम पड़ जाएगा। अब्राम के पास तो जमीन भी नहीं थी, सिर्फ वचन था, और उसी हालत में उसे माध्यम कहा गया।
आज ही करिए यह: उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जिसे आपके पास जो है उसकी सचमुच ज़रूरत है, और आज ही उसे भेज दीजिए, पैसे नहीं तो समय, सलाह या एक फोन कॉल।
बारीकी
"मूल" शब्द पर रुकिए। इब्रानी में यहाँ जो कहा गया है उसका सीधा अर्थ है: तू स्वयं आशीष होगा। परमेश्वर यह नहीं कहते कि तेरे पास आशीष होगी, या तू आशीष बाँटेगा, बल्कि तेरा अस्तित्व ही दूसरों के लिए आशीष का रूप ले लेगा। यह वस्तु से व्यक्ति की ओर छलाँग है। इसका मतलब है कि आपकी उदारता आपके दान की रसीदों से नहीं, आपकी उपस्थिति से नापी जाएगी: दफ्तर में आपके होने से लोगों को राहत मिलती है या तनाव? घर में आपके लौटने पर हवा हल्की होती है या भारी? अब्राम को दी गई पहचान कोई काम की सूची नहीं थी, बल्कि एक नया स्वभाव था, और यही सबसे कठिन हिस्सा है।
मुख्य पात्र
इस पद में असली पात्र परमेश्वर हैं, क्योंकि हर क्रिया उन्हीं की है: बनाऊँगा, दूँगा, करूँगा। अब्राम इस वाक्य में कुछ नहीं करता; वह केवल सुनता है। और परमेश्वर का यह स्वभाव पूरी बाइबल में एक जैसा रहता है: वे शून्य से शुरू करते हैं। एक बाँझ स्त्री, एक बूढ़ा आदमी, एक ऐसा देश जो अभी दिखाया भी नहीं गया। परमेश्वर संभावनाओं में निवेश नहीं करते, वे वादों से सृष्टि करते हैं। यह हमारे लिए दो तरफ़ काटता है: आपकी योग्यता आपकी उपयोगिता की शर्त नहीं है, पर आपकी उपलब्धियाँ भी आपके गर्व का आधार नहीं रह जातीं। जो कुछ आपके पास है, वह उन्हीं का दिया हुआ है, इसलिए उसे मुट्ठी में भींचना असल में अविश्वास है।
प्रश्न
पर क्या यह वादा सचमुच पूरा हुआ? अब्राम इसे सुनने के कुछ ही पदों बाद अकाल में मिस्र भाग जाता है और डर के मारे अपनी पत्नी को बहन बताकर फ़िरौन के महल में जाने देता है। आशीष का मूल बनने वाला आदमी एक पूरे घराने पर विपत्ति ले आता है। पवित्रशास्त्र इसे छिपाता नहीं, और न ही तुरंत कोई नैतिक सबक जोड़ता है। शायद यही ईमानदारी हमारे लिए राहत है: यह वादा अब्राम की चरित्र-गुणवत्ता पर टिका नहीं था, वरना पहले ही अध्याय में टूट जाता। परमेश्वर अपने वचन के प्रति वफ़ादार रहते हैं, तब भी जब उनका चुना हुआ व्यक्ति नहीं रहता। यह हमें लापरवाह नहीं बनाता, पर यह हमें ढहने से बचाता है।
चिंतन
पिछले महीने में मुझे जो सबसे बड़ी आशीष मिली, क्या उसमें से कुछ भी किसी और तक बहा, या वह मेरे पास ही रुक गई?
अगर मेरे आसपास के लोगों से पूछा जाए कि मेरी उपस्थिति उनके लिए आशीष है या बोझ, तो वे सच में क्या कहेंगे?
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Genesis 12:2 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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उत्पत्ति 12:2 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
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