यशायाह 51
पाठ
यशायाह 51 एक थकी हुई, टूटी हुई प्रजा के कानों में परमेश्वर की आवाज़ है, जो बार-बार कहती है: "सुनो, ध्यान दो, जागो।" वे लोग जिन्होंने निर्वासन का कड़वा प्याला पिया है, उन्हें याद दिलाया जाता है कि जिस चट्टान से वे खोदे गए, वह अब्राहम और सारा हैं, और जिस परमेश्वर ने समुद्र को सुखाया, वह अब भी जीवित है। अध्याय के अंत में, वह क्रोध का कटोरा उनके हाथ से लेकर उनके सतानेवालों के हाथ में रखने की प्रतिज्ञा करता है।
केंद्रीय बात
कल्पना कीजिए: बाबेल की गलियों में बिखरे हुए यहूदी, जिनका मंदिर राख हो चुका है, जिनके बच्चे "महाजाल में फँसे हुए हिरन के समान" सड़कों के सिरों पर पड़े हैं। और उस टूटन के बीच परमेश्वर की आवाज़ आती है, कोमल नहीं, बल्कि लगभग हिलाकर जगाने वाली: "हे धार्मिकता पर चलनेवालों, कान लगाकर मेरी सुनो।"
यह अध्याय का धार्मिक हृदय है: परमेश्वर की धार्मिकता और उद्धार अनन्त हैं, जबकि सब कुछ जो हमें डराता है, वह "कपड़े के समान" घुन खा जाएगा। सम्राट मरते हैं, साम्राज्य गिरते हैं, आकाश तक धुएँ की तरह लोप हो जाएगा। पर उसका छुटकारा ठहरा रहता है। यह सिर्फ़ आशावाद नहीं है, यह ब्रह्मांड की बुनियादी संरचना के बारे में एक दावा है।
सामान्य सूत्र
जब परमेश्वर कहते हैं, "मेरा छुटकारा निकट है; मेरा उद्धार प्रगट हुआ है," तो वह अब्राहम की एक अकेली, बुज़ुर्ग जोड़ी से शुरू हुई कहानी को उसके चरम की ओर बढ़ा रहे हैं। एक व्यक्ति से एक जाति, एक जाति से "देश-देश के लोगों की ज्योति", और अंततः एक ऐसा उद्धार जो द्वीपों तक पहुँचता है।
यह वह रेखा है जो सीधे यीशु मसीह तक जाती है। क्योंकि जो "जलजलाहट का कटोरा" यहाँ यरूशलेम के हाथ से लिया जाता है, वही कटोरा गतसमनी में एक दूसरे यहूदी के हाथ में रखा जाता है, जो प्रार्थना करता है, "यदि हो सके तो यह कटोरा मुझसे टल जाए।" वह पीता है, ताकि उसकी प्रजा फिर कभी न पीए।
दर्पण
यह अध्याय उन लोगों के लिए लिखा गया है जो "मनुष्यों की नामधराई से" डरते हैं। यानी हमारे लिए। जब कोई सहकर्मी हँसता है कि आप अब भी बाइबल पढ़ते हैं, जब परिवार में आपकी आस्था को पिछड़ापन कहा जाता है, जब समाचार आपको बताते हैं कि विश्वास करना बुद्धिमानी नहीं है, तब यह पद आपके सामने रखा जाता है: "घुन उन्हें कपड़े के समान खाएगा।"
यह क्रूर लगता है, पर यह मुक्तिदायक है। जिन आवाज़ों से आप डरते हैं, वे नश्वर हैं। आपका बॉस, आपकी सास, ट्विटर की भीड़, वे सब घास हैं। यह उन्हें तुच्छ नहीं बनाता, यह उन्हें उनकी सही जगह पर रखता है। डर तब घटता है जब हम मापदंड बदलते हैं।
अंतर-पाठ
पद 9 में एक चौंकाने वाली बात होती है: प्रजा परमेश्वर को झिंझोड़ती है। "हे यहोवा की भुजा, जाग! जाग और बल धारण कर।" यह वही आवाज़ है जो भजन 44 में सुनाई देती है, "हे प्रभु, जाग! तू क्यों सोता है?" बाइबल प्रार्थना को केवल विनम्र फुसफुसाहट नहीं मानती; वह पवित्र निर्लज्जता को भी जगह देती है।
और फिर पद 12 में परमेश्वर का उत्तर: "मैं, मैं ही तेरा शान्तिदाता हूँ।" वे सोए नहीं थे। पर जब उनकी प्रजा उन्हें जगाने की हिम्मत करती है, वे बुरा नहीं मानते, वे कोमलता से उत्तर देते हैं। यही वह परमेश्वर हैं जिन्हें यीशु ने प्रकट किया, जो हठी विधवा की सुनते हैं।
विवरण
पद 1 पर रुकिए: "जिस चट्टान में से तुम खोदे गए और जिस खदान में से तुम निकाले गए, उस पर ध्यान करो।" यह चित्र कठोर है, लगभग हिंसक। खोदा जाना, तराशा जाना, खदान से निकाला जाना, यह कोमल जन्म नहीं है। यह पत्थर तोड़ने का काम है।
और तुरंत बाद: "अपने मूलपुरुष अब्राहम और अपनी माता सारा पर ध्यान करो; जब वह अकेला था, तब ही से मैंने उसको बुलाया।" चट्टान और खदान, वे अब्राहम और सारा हैं। एक अकेला बूढ़ा आदमी, एक बांझ पत्नी। इसी अनुत्पादक पत्थर से परमेश्वर ने एक पूरी जाति काटी। जब आपको लगे कि आपकी परिस्थिति में कुछ नहीं निकल सकता, तो याद रखिए: वे बांझ चट्टान से जातियाँ काटते हैं।
प्रश्न
पर एक कठिन बात रह जाती है। पद 23 कहता है कि क्रोध का कटोरा अब उन "दुःख देनेवालों" के हाथ में रखा जाएगा, जिन्होंने कहा था, "लेट जा, कि हम तुझ पर पाँव धरकर आगे चलें।" क्या यह केवल भूमिकाओं का बदल जाना है? क्या यही न्याय है, कि पीड़ित अब पीड़क बनें, और पीड़क अब कुचले जाएँ?
यहाँ पाठ हमें सांत्वना नहीं देता। वह हिंसा के चक्र को नकारता नहीं है, वह उसे परमेश्वर के हाथ में रखता है। मनुष्य को बदला लेने से मना किया गया है, पर परमेश्वर स्वयं न्याय करते हैं। यह हमें सहज नहीं लगता, और शायद लगना भी नहीं चाहिए। पर मसीह के क्रूस पर वह कटोरा फिर प्रकट होता है, और वहाँ न्याय और दया एक दू
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Isaiah 51 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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यशायाह 51 का क्या अर्थ है?
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यशायाह 51 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Isaiah 51 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
जब वह अकेला था, तब ही मैंने उसको बुलाया और आशीष देकर बहुत कर दिया।" (यशायाह 51:2)
निर्वासन में बैठे लोग खुद को गिनती में बहुत कम समझ रहे थे। परमेश्वर उन्हें अब्राहम की याद दिलाता है, एक अकेला आदमी, जिससे पूरी जाति निकली।
तुम्हारा अकेलापन परमेश्वर के लिए रुकावट नहीं है। वह अकसर एक ही से शुरू करता है।
प्रभु, धन्यवाद कि तू मेरा सृजनहार है, जिसने आकाश तान दिया और पृथ्वी की नींव डाली। तेरी इतनी बड़ी सामर्थ्य के सामने मेरे सताने वाले की जलजलाहट कुछ भी नहीं। तूने मुझे याद दिलाया कि तुझे भूलकर मैं क्यों दिन भर डरता रहूँ। तेरी शांति के लिए हृदय से आभारी हूँ।
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