यिर्मयाह 1:5
पाठ स्वयं
यिर्मयाह के मुँह से निकलने वाला पहला वचन उसका अपना नहीं है, बल्कि परमेश्वर का है, और वह वचन उसके जन्म से भी पीछे जाकर शुरू होता है: "गर्भ में रचने से पहले ही मैंने तुझ पर चित्त लगाया, और उत्पन्न होने से पहले ही मैंने तुझे अभिषेक किया; मैंने तुझे जातियों का भविष्यद्वक्ता ठहराया।" तीन क्रियाएँ, तीनों में कर्ता परमेश्वर हैं और यिर्मयाह केवल कर्म: जाना गया, अलग किया गया, ठहराया गया। और ध्यान दीजिए कि यह नियुक्ति केवल यहूदा तक सीमित नहीं है, बल्कि "जातियों" तक फैली है, यानी उस अनातोत के याजक-परिवार के एक युवक को साम्राज्यों के आमने-सामने खड़ा किया जा रहा है। अगली ही आयत में वह घबराकर कहता है, "मैं तो बोलना भी नहीं जानता", और यही उसकी पहली प्रतिक्रिया इस वचन के भार को माप देती है।
मूल बात
यहाँ सबसे पहले यह नहीं कहा जा रहा कि यिर्मयाह कितना विशेष है, बल्कि यह कि परमेश्वर कितने पहले से कार्य कर रहे हैं। इब्रानी क्रिया यादा ("जानना") केवल जानकारी रखना नहीं, बल्कि संबंध में खींच लेना है, जैसे पति-पत्नी एक-दूसरे को जानते हैं। यानी यिर्मयाह के अस्तित्व से पहले ही परमेश्वर का मन उस पर लगा हुआ था। यह अनुग्रह का शुद्धतम रूप है: बुलाहट योग्यता का पुरस्कार नहीं, बल्कि योग्यता से पहले का निर्णय। पर सावधान रहिए, यह कोई कोमल सांत्वना नहीं है। जिस व्यक्ति को गर्भ से पहले अलग किया गया, उसे आयत दस के अनुसार "गिराने और ढा देने" के लिए भेजा जा रहा है, और वह जीवन भर अकेला, ठुकराया हुआ, बिना संतान का रहेगा। परमेश्वर का पूर्वज्ञान सुरक्षा का वादा नहीं, उपस्थिति का वादा है: "बचाने के लिये मैं तेरे साथ हूँ।"
जोड़ने वाला सूत्र
यिर्मयाह की बुलाहट अकेली खड़ी नहीं है, वह एक शृंखला की कड़ी है। मूसा ने जलती झाड़ी के सामने यही आपत्ति की थी कि वह बोलने में निपुण नहीं, और परमेश्वर ने वहाँ भी योग्यता पर नहीं, अपनी उपस्थिति पर भरोसा दिलाया। यशायाह की उस रहस्यमय "दास" की कविता में भी बुलाहट गर्भ से पहले होती है और उसका दायरा इस्राएल से बड़ा, जातियों तक फैला हुआ है। यह वही नक्शा है जो यिर्मयाह 1:5 खींचता है। और यह रेखा अंततः उस एक तक जाती है जिसका नाम जन्म से पहले स्वर्गदूत ने बताया था, जिसका वचन मन्दिर को ढा देता है और तीन दिन में उठा देता है, ठीक वैसे ही जैसे यिर्मयाह को "गिराने और ढा देने" तथा "बनाने और रोपने" दोनों के लिए ठहराया गया। बुलाहट का यह ढाँचा मसीह में पूरा होता है, और उसी से कलीसिया की बुलाहट निकलती है।
दर्पण
हम अपनी कीमत आमतौर पर पीछे की ओर देखकर नापते हैं: क्या मैंने कुछ बनाया, कमाया, साबित किया। यह आयत उस हिसाब-किताब को उलट देती है। आपके पहले रिपोर्ट कार्ड से पहले, आपकी पहली गलती से पहले, आपके माता-पिता की उम्मीदों और निराशाओं से पहले, परमेश्वर का मन आप पर लगा हुआ था। पर इसे सस्ती तसल्ली मत बनाइए। यिर्मयाह को यह जानकर आराम नहीं मिला, बल्कि एक ऐसा काम मिला जिसने उसे तोड़ डाला। "मैं कम उम्र का हूँ" हमारी भी सबसे ईमानदार प्रार्थना है: मैं इस कक्षा के लिए, इस बीमार माँ के लिए, इस टूटते रिश्ते के लिए बहुत छोटा हूँ। परमेश्वर उस डर को झुठलाते नहीं, वे उसके साथ खड़े हो जाते हैं। आज यह कीजिए: एक कागज़ पर अपना नाम लिखिए, उसके नीचे वह एक वाक्य लिखिए जिसमें आप अपनी असमर्थता कहते हैं, और फिर ज़ोर से बोलकर वह कागज़ परमेश्वर के सामने पढ़ दीजिए।
पहले सुननेवाले
पहली तीन आयतें तारीखें गिनाती हैं और फिर एक भारी वाक्य पर रुकती हैं: यरूशलेम के निवासी बँधुआई में चले गए। यानी जो लोग यह पुस्तक पहली बार पढ़ रहे थे, वे अंत पहले से जानते थे। शहर गिर चुका था, मन्दिर राख था, और वे बाबेल में बैठकर पूछ रहे थे कि क्या वह आदमी सचमुच परमेश्वर की ओर से बोलता था जिसे उन्होंने देशद्रोही कहकर कुएँ में डाला था। आयत पाँच उसी प्रश्न का उत्तर है। यिर्मयाह स्वयंभू उपदेशक नहीं था; उसे गर्भ से पहले नियुक्त किया गया था। और यह बात अनातोत के एक हाशिए पर पड़े याजक-घराने के लड़के के बारे में कही जा रही है, यरूशलेम के प्रभावशाली धार्मिक तंत्र के बारे में नहीं। निर्वासितों के लिए यह दोहरी चोट थी और दोहरी आशा भी।
मुख्य पात्र
इस आयत का असली पात्र यिर्मयाह नहीं, बोलनेवाले परमेश्वर हैं। वे पहल करते हैं, वे संबंध बनाते हैं, और वे किसी की सहमति की प्रतीक्षा नहीं करते। उनका "जानना" ठंडी जानकारी नहीं है; यह वही निकटता है जो एक माँ को गर्भ के बच्चे से जोड़ती है, सिवाय इसके कि यहाँ जाननेवाला रचनेवाला भी है। पर इन्हीं परमेश्वर का एक और पहलू है जिसे हम छिपाना चाहते हैं: वे अपने प्रिय जन को आराम की जगह नहीं, युद्धभूमि पर भेजते हैं। आयत बारह में वे कहते हैं कि वे अपने वचन को पूरा करने के लिए "जागृत" हैं, यानी सोए हुए नहीं, ढीले नहीं। यही जागृति यिर्मयाह के लिए सुरक्षा और बोझ, दोनों है। ऐसे परमेश्वर से प्रेम करना आसान नहीं, पर उन पर भरोसा किया जा सकता है।
अन्य वचनों की गूँज
भजन 139 में यही भाषा है, पर वहाँ वह हर विश्वासी की है: गर्भ में गढ़ा जाना, पहले से जाना जाना। इससे एक उपयोगी तनाव खड़ा होता है। यिर्मयाह 1:5 सबको भविष्यद्वक्ता नहीं बनाता; यह एक विशिष्ट पद की नियुक्ति है। फिर भी भजन बताता है कि उस पूर्व-जानने का स्वभाव सबके लिए एक ही है। पौलुस ने इसे पकड़ा: गलातियों 1:15 में वह अपनी बुलाहट का वर्णन लगभग इन्हीं शब्दों में करता है, क्योंकि वह भी एक झिझकते, अयोग्य, विरोध झेलते संदेशवाहक के रूप में जातियों के पास भेजा गया। और एक और गूँज: जैसे यिर्मयाह को परमेश्वर ने मुँह छूकर वचन दिए, वैसे ही यशायाह के होंठ अंगारे से शुद्ध किए गए। परमेश्वर का वचन कभी हमारी क्षमता से नहीं, हमेशा उनके स्पर्श से निकलता है।
चिंतन के प्रश्न
अगर परमेश्वर का निर्णय आपके जन्म से पहले हो चुका था, तो आज आप किस चीज़ से अपनी कीमत साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, और उसे छोड़ना कैसा लगेगा?
यिर्मयाह को उपस्थिति का वादा मिला, सुरक्षा का नहीं। आपके जीवन में इस समय कौन-सी परिस्थिति है जहाँ आप बचाव माँग रहे हैं, जबकि परमेश्वर संग चलने की पेशकश कर रहे हैं?
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Jeremiah 1:5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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यिर्मयाह 1:5 किस विषय में है?
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Jeremiah 1 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि आप चुप रहकर विपत्ति आने नहीं देते। उत्तर दिशा से आनेवाली आपदा के विषय आपने यिर्मयाह से पहले ही कह दिया। धन्यवाद कि आज भी आप हमें समय रहते चेतावनी देते हैं, ताकि हम लौट आएँ और सँभल जाएँ। आपकी यह चेतावनी भी आपका प्रेम ही है।
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