बाइबल व्याख्या

योएल 2:21

बाइबल

पाठ

भस्म हुई ज़मीन से परमेश्वर बात करते हैं। टिड्डियों ने खेत चट कर दिए, अंजीर के पेड़ ठूँठ बन गए, और अब उसी उजड़ी मिट्टी को सम्बोधन मिलता है: "हे देश, तू मत डर; तू मगन हो और आनन्द कर, क्योंकि यहोवा ने बड़े-बड़े काम किए हैं!" तीन आज्ञाएँ एक साँस में, और तीनों भावनाओं के बारे में हैं: डरना बन्द करो, मगन हो जाओ, आनन्द करो। और इनका आधार कोई आने वाली सम्भावना नहीं, बल्कि एक पूरा हो चुका काम है। पद 20 में परमेश्वर ने उत्तर की उस सेना को दूर खदेड़ा है; पद 21 में उसी कार्रवाई का परिणाम घोषित होता है। खलिहान अभी खाली हैं, पर आदेश पहले ही आ चुका है।

मूल मर्म

ध्यान दीजिए कि आनन्द यहाँ सुझाव नहीं, आज्ञा है। यह हमारी समझ को खरोंचता है, क्योंकि हम मानते हैं कि पहले हालात बदलें, फिर मन बदलेगा। परमेश्वर उल्टा क्रम रखते हैं: उन्होंने जो किया है वही आनन्द का आधार है, चाहे आपकी आँखें अभी वही सूखी ज़मीन देख रही हों। "बड़े-बड़े काम किए हैं" भूतकाल में है। यानी विश्वास का काम कल्पना करना नहीं, बल्कि याद रखना है। और दूसरी बात उतनी ही चुभने वाली: परमेश्वर सबसे पहले देश से, मिट्टी से बोलते हैं, मनुष्य से नहीं। उनका उद्धार आत्माओं तक सीमित नहीं; वे उस सृष्टि को भी सम्बोधित करते हैं जिसे मनुष्य के पाप और न्याय ने तोड़ा। जहाँ परमेश्वर काम करते हैं, वहाँ डर का कोई वैध अधिकार नहीं बचता।

जोड़ने वाला सूत्र

जिस मिट्टी को यहाँ "मत डर" कहा जाता है, वह वही मिट्टी है जो वाचा का चिह्न थी। इस्राएल को देश दिया गया था, और उजड़ा हुआ देश इसका गवाह था कि रिश्ता टूटा है। इसलिए ज़मीन की बहाली केवल खेती की खबर नहीं, क्षमा का दृश्य रूप है। और योएल यहीं नहीं रुकते। उसी अध्याय के अन्त में बारिश अनाज से आगे बढ़कर आत्मा बन जाती है: "मैं सब प्राणियों पर अपना आत्मा उण्डेलूँगा।" पिन्तेकुस्त के दिन पतरस ने यही पद उद्धृत किया, क्योंकि वहाँ वही "बड़े-बड़े काम" हुए जिनकी ओर यह पद इशारा करता है। मसीह के क्रूस और पुनरुत्थान में परमेश्वर ने वह काम कर दिया है जिसके आधार पर डर का हुक्म रद्द होता है। और पौलुस के शब्दों में सारी सृष्टि आज भी उसी छुटकारे की प्रतीक्षा में कराह रही है, जिसकी पहली झलक योएल की हरी होती चराई है।

दर्पण

आप जानते हैं आपकी टिड्डियाँ क्या हैं। वह साल जिसमें काम छूट गया और बचत खत्म हो गई। वह रिश्ता जो धीरे-धीरे कुतरा गया, पत्ता-पत्ता, और एक दिन ठूँठ रह गया। वह शरीर जो पहले जैसा नहीं रहा, और वह रिपोर्ट जिसका इन्तज़ार आपको रात तीन बजे जगाए रखता है। इस पद का आदेश वहीं चुभता है, क्योंकि आपके भीतर एक आवाज़ कहती है कि डर ही समझदारी है, कि आनन्द उन लोगों का शौक है जिनके खेत अभी बचे हुए हैं। उस आवाज़ को हम अक्सर "यथार्थवाद" कहकर सम्मान दे देते हैं। पर परमेश्वर उसे अविश्वास कहते हैं, क्योंकि वह केवल खालीपन गिनती है और किए हुए कामों को गिनना भूल जाती है।

आज यह कीजिए: अपनी उजड़ी ज़मीन के किसी एक ठोस टुकड़े के सामने जाकर खड़े हों, बैंक का वह मैसेज खोलकर, या उस खाली कुर्सी के पास, और ज़ोर से बोलिए, "यहोवा ने बड़े-बड़े काम किए हैं," और उसके बाद एक ऐसा काम नाम लेकर कहिए जो वे आपके जीवन में पहले ही कर चुके हैं।

कठिन प्रश्न

पर उन लोगों का क्या जिनका देश कभी हरा नहीं हुआ? जिनकी बीमारी वापस आई, जिनका बच्चा लौटा नहीं, जिनके "टिड्डियों के खाए हुए वर्ष" किसी ने नहीं भरे? यह पद उन्हें भी आनन्द की आज्ञा देता है, और यह सुनने में कठोर लगता है। ईमानदारी यही है कि योएल इसका कोई चिकना जवाब नहीं देते। वे आनन्द का आधार हालात में नहीं, बल्कि परमेश्वर के किए हुए काम में रखते हैं, और यह एक बड़ी माँग है, टाल देने वाली सान्त्वना नहीं। कभी-कभी आज्ञाकारिता का अर्थ होता है आँसुओं के साथ यह कहना कि परमेश्वर भले हैं, जबकि आँखें इसका प्रमाण नहीं देख रहीं। यह कम विश्वास नहीं, ज़्यादा विश्वास है। और इसका पूरा उत्तर इस जीवन में नहीं मिलता।

एक बारीकी

पद 20 और पद 21 में मूल इब्रानी में एक ही मुहावरा है: हिग्दील ला'असोत, "उसने बड़े काम किए।" पद 20 में यह टिड्डी-सेना के बारे में कहा गया है, जिसे हिन्दी में "उसने बहुत बुरे काम किए हैं" अनुवाद किया गया, और ठीक अगले वाक्य में वही शब्द परमेश्वर के लिए: "यहोवा ने बड़े-बड़े काम किए हैं।" योएल जानबूझकर दो बड़ाइयों को आमने-सामने रखते हैं। शत्रु ने बड़ा किया, परमेश्वर ने उससे बड़ा किया। जो चीज़ आपके जीवन में सबसे विशाल लग रही है, वह अन्तिम विशालता नहीं है। एक ही तराज़ू पर दोनों रखे गए हैं, और पलड़ा एक ही तरफ झुकता है।

पृष्ठभूमि

योएल यहूदा के उस समाज में बोलते हैं जहाँ जीवन पूरी तरह फसल पर टिका था। टिड्डियों का दल आया और अनाज, दाखरस, तेल सब खा गया, और इसका असर केवल पेट पर नहीं पड़ा: मन्दिर में अन्नबलि और अर्घ बन्द हो गए, यानी आराधना की धारा ही सूख गई। साथ ही इज़्ज़त का सवाल था। आसपास की जातियाँ ताना मारती थीं, "उनका परमेश्वर कहाँ रहा?" इसलिए पद 17 में याजक परमेश्वर से उनके अपने नाम की दुहाई देते हैं। इस दुहाई के बाद पद 18 में मोड़ आता है, और पद 21 उसी मोड़ की पहली घोषणा है। पहले उपवास और चीरे हुए मन, फिर उसी सभा के सामने आनन्द की आज्ञा।

मनन के लिए

आपके जीवन की कौन-सी "बड़ी" चीज़ इस समय परमेश्वर से बड़ी दिखाई दे रही है, और उसे पद 20 और 21 के तराज़ू पर रखने से क्या बदलता है?

जब आपके खलिहान अभी खाली हैं, तब आनन्द करना आज्ञाकारिता कैसे बन सकता है, दिखावा कैसे नहीं?

Joel में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Joel, Micah and Habakkuk

David Prior

Three minor prophets, one big vision of judgment and restoration.

Joel and Amos: An Introduction and Commentary

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Joel, Obadiah, Malachi

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Joel 2:21 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

योएल 2:21 का क्या अर्थ है?
भस्म हुई ज़मीन से परमेश्वर बात करते हैं। टिड्डियों ने खेत चट कर दिए, अंजीर के पेड़ ठूँठ बन गए, और अब उसी उजड़ी मिट्टी को सम्बोधन मिलता है: "हे देश, तू मत डर; तू मगन हो और आनन्द कर, क्योंकि यहोवा ने बड़े-बड़े काम किए हैं!" तीन आज्ञाएँ एक साँस में, और तीनों भावनाओं के बारे में हैं: डरना बन्द करो, मगन हो जाओ, आनन्द करो। और इनका आधार कोई आने वाली सम्भावना नहीं, बल्कि एक पूरा हो चुका काम है। पद 20 में परमेश्वर ने उत्तर की उस सेना को दूर खदेड़ा है; पद 21 में उसी कार्रवाई का परिणाम घोषित होता है। खलिहान अभी खाली हैं, पर आदेश पहले ही आ चुका है।
योएल 2:21 किस विषय में है?
जिस मिट्टी को यहाँ "मत डर" कहा जाता है, वह वही मिट्टी है जो वाचा का चिह्न थी। इस्राएल को देश दिया गया था, और उजड़ा हुआ देश इसका गवाह था कि रिश्ता टूटा है। इसलिए ज़मीन की बहाली केवल खेती की खबर नहीं, क्षमा का दृश्य रूप है। और योएल यहीं नहीं रुकते। उसी अध्याय के अन्त में बारिश अनाज से आगे बढ़कर आत्मा बन जाती है: "मैं सब प्राणियों पर अपना आत्मा उण्डेलूँगा।" पिन्तेकुस्त के दिन पतरस ने यही पद उद्धृत किया, क्योंकि वहाँ वही "बड़े-बड़े काम" हुए जिनकी ओर यह पद इशारा करता है। मसीह के क्रूस और पुनरुत्थान में परमेश्वर ने वह काम कर दिया है जिसके आधार पर डर का हुक्म रद्द होता है। और पौलुस के शब्दों में सारी सृष्टि आज भी उसी छुटकारे की प्रतीक्षा में कराह रही है, जिसकी पहली झलक योएल की हरी होती चराई है।
योएल 2:21 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज यह कीजिए: अपनी उजड़ी ज़मीन के किसी एक ठोस टुकड़े के सामने जाकर खड़े हों, बैंक का वह मैसेज खोलकर, या उस खाली कुर्सी के पास, और ज़ोर से बोलिए, "यहोवा ने बड़े-बड़े काम किए हैं," और उसके बाद एक ऐसा काम नाम लेकर कहिए जो वे आपके जीवन में पहले ही कर चुके हैं।
योएल 2:21 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पद 20 और पद 21 में मूल इब्रानी में एक ही मुहावरा है: हिग्दील ला'असोत, "उसने बड़े काम किए।" पद 20 में यह टिड्डी-सेना के बारे में कहा गया है, जिसे हिन्दी में "उसने बहुत बुरे काम किए हैं" अनुवाद किया गया, और ठीक अगले वाक्य में वही शब्द परमेश्वर के लिए: "यहोवा ने बड़े-बड़े काम किए हैं।" योएल जानबूझकर दो बड़ाइयों को आमने-सामने रखते हैं। शत्रु ने बड़ा किया, परमेश्वर ने उससे बड़ा किया। जो चीज़ आपके जीवन में सबसे विशाल लग रही है, वह अन्तिम विशालता नहीं है। एक ही तराज़ू पर दोनों रखे गए हैं, और पलड़ा एक ही तरफ झुकता है।
योएल 2:21 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन की कौन-सी "बड़ी" चीज़ इस समय परमेश्वर से बड़ी दिखाई दे रही है, और उसे पद 20 और 21 के तराज़ू पर रखने से क्या बदलता है?
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Joel 2 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

टिड्डियों ने सब चट कर लिया, खेत उजड़ गए, और तब परमेश्वर कहता है, "तौभी, यहोवा की यह वाणी है, अब भी तुम उपवास के साथ रोते-पीटते अपने पूरे मन से फिरकर मेरे पास आओ।"

ध्यान दे, वह यह नहीं कहता कि पहले अपनी हालत सुधारो, फिर आना। वह कहता है, मेरे पास आओ। टूटी हुई हालत में ही।

तेरा "अब भी" आज कौन सा है?

प्रार्थना पर पद 17

मेरा नाम ईश्वर सिंह है। मेरे ऊपर कर्ज़ बहुत ज्यादा है। दिन रात बैचेनी लगीं रहती हैं। कर्ज़ लेने वाले दिन रात बोलते रहते हैं कि आज ही हमारा पैसा दे दो। पहले से ही मैं heart patient हूं। बेचैनी के होते हुए प्रार्थना भी उचित रीति से कर नहीं पाता हूँ। मेरी सरकारी नौकरी और अपना मकान भी कर्ज चुकता करने में चला गया। अब मैं किराए के मकान में हूं । कृपा मेरे लिए प्रार्थना करना कि परमेश्वर आपकी दुआओं प्रार्थनाओं के द्वारा मेरा कर्ज़ चुकता करने में मेरी सहायता मदद करें
ताकि मै निश्चित होकर प्रभु की सेवा में लग जाऊं।
मुझे पूरा विश्वास है कि परमेश्वर आपकी दुआओं प्रार्थनाओं को जरूर सुनेगाऔर आपको इसके बदले बहुत आशीष देगा। आमीन।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 23

टिड्डियों ने सब कुछ चट कर लिया था। खेत सूखे, मन टूटे। और उसी उजड़ी मिट्टी पर खड़े लोगों से परमेश्वर कहता है, "मगन हो, और आनन्द करो।" वह पहली बरसात देता है ताकि बीज जड़ पकड़े, और पिछली बरसात ताकि फल पक सके। तेरे जीवन में भी कोई अधूरा काम पड़ा है? जिसने शुरू करने की बारिश दी थी, वही पकाने की बारिश भी भेजेगा।

प्रार्थना पर पद 17

वीना और उसके बेटे रोहित, बेटी नेहा, बेटी शिवानी, पूरे परिवार के लिए प्रार्थना करे। क्योंकि परिवार गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है। साथ ही ना कोई संपत्ति जैसे घर, प्लाट, पैसे आदि। ना ही किसी के पास रोजगार है। बेटा रोहित 26-27 साल का हो गया है। रोहित ने बी ए की डिग्री की हुई है। कई सालों से centre Government or state government job की तैयारी कर रहा है, इससे संबंधित समय समय पर परीक्षा दे रहा है।हर बार 1 या 2 अंको से नौकरी लगने से रह जाता है।
बेटे रोहित के लिए प्रार्थना करे कि जल्दी बेटे रोहित को आपकी दुआओं, प्रार्थनाओं से और परमेश्वर के अनुग्रह से एक उत्तम सरकारी नौकरी मिल जाए।
बेटी नेहा की वर्ष 2023 में मसीही परिवार में शादी की थी। ससुराल वाले ने परमेश्वर का डर भय नहीं माना, गाड़ी की माँग करने लग गए इसी कारण से बेटी नेहा को अप्रत्यक्ष रूप से प्रताड़ित करते रहे। बेटी नेहा उनकी सारी बातों को सहती रही। जब उनकी भारी माँग पूरी नहीं हुईं तो उन्होंने नेहा को तलाक दे दिया। बेटी नेहा के लिए प्रार्थना करे कि जल्दी ही नेहा को एक सम्पन्न mashi परिवार मिले।

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