बाइबल व्याख्या

न्यायियों 14

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

शिमशोन तिम्नाह में एक पलिश्ती स्त्री को देखता है और माता पिता की आपत्ति के बावजूद उससे विवाह की मांग करता है: "उसी से मेरा विवाह करा दे; क्योंकि मुझे वही अच्छी लगती है।" रास्ते में वह खाली हाथ एक सिंह को फाड़ डालता है, बाद में उसी लोथ में मधु पाता है, और उस अनुभव से एक पहेली बनाकर विवाह भोज में दाँव लगाता है। पहेली धोखे से खुल जाती है, शिमशोन का क्रोध भड़कता है, वह अश्कलोन में तीस पुरुषों को मार डालता है, और उसकी पत्नी दूसरे को दे दी जाती है।

मर्म

पद 4 इस पूरे अध्याय की चाबी है और साथ ही उसका सबसे असहज वाक्य: "उसके माता पिता न जानते थे कि यह बात यहोवा की ओर से है।" कथावाचक शिमशोन की वासना को पवित्र नहीं ठहराता; वह उसे "मुझे वही अच्छी लगती है" कहकर ही छोड़ देता है, यानी आँख की भूख। फिर भी परमेश्वर उसी टेढ़ी इच्छा के भीतर से पलिश्तियों के विरुद्ध अपना दाँव निकाल लेते हैं। यह पाठ हमें एक ऐसे परमेश्वर से मिलाता है जो शुद्ध साधनों की प्रतीक्षा नहीं करते। वे इतिहास को केवल संतों के आज्ञापालन से नहीं, बल्कि पापियों की मूर्खता के बीच से भी अपने उद्धार की दिशा में मोड़ते हैं। यह सांत्वना है, परन्तु डरावनी सांत्वना: परमेश्वर की प्रभुता मेरे चरित्र पर निर्भर नहीं है, और यही मुझे मेरे चरित्र के लिए बहाना भी नहीं देती।

सूत्र

शिमशोन की पहेली, "खानेवाले में से खाना, और बलवन्त में से मीठी वस्तु निकली", उद्धार के इतिहास का सूत्र वाक्य है। जो निगलने आया था, उसी की देह में से भोजन निकलता है; जो सबसे बलवन्त था, उसी की मौत मिठास बन जाती है। यह पैटर्न बाइबल में बार बार लौटता है और क्रूस पर अपने शिखर तक पहुँचता है: मृत्यु, जो सब कुछ निगलती है, स्वयं निगल ली जाती है, और उस कब्र से जीवन का मधु बहता है। शिमशोन मसीह की सुन्दर छवि नहीं है; वह अपनी भूख का दास है, अपने क्रोध का बंधक। परन्तु उसका जीवन एक खाली जगह बनाता है, एक ऐसे छुड़ानेवाले की आवश्यकता जो आत्मा से भरा हो और अपने ऊपर संयम भी रखे, जो शत्रु को मारने के लिए नहीं, उसके हाथों मरने के लिए आए।

दर्पण

आपने भी कभी वह वाक्य कहा है, चाहे शब्दों में नहीं तो निर्णयों में: मुझे यही अच्छी लगती है। वह नौकरी, वह रिश्ता, वह खरीदारी जिसके लिए आपने अपने माता पिता की चिंता, दोस्तों की चेतावनी और अपने भीतर की बेचैनी को एक तरफ रख दिया। शिमशोन का अध्याय आपको दो बातें साथ में देता है, और दोनों को पकड़े रखना कठिन है। पहली: आपकी आँख का चुनाव आपको वह कीमत चुकाने पर मजबूर करता है जो आपने नहीं गिनी थी, यहाँ तक कि तीस लाशें और एक टूटा विवाह। दूसरी: परमेश्वर आपके बिगड़े फैसलों के मलबे में भी काम करना जानते हैं, और उनका काम आपकी शर्म से रुकता नहीं। आज एक कागज़ पर उस नुकसान का नाम लिखिए जो अब भी आपके भीतर मरा पड़ा है, और उसके नीचे लिखिए: "बलवन्त में से मीठी वस्तु निकली", फिर उसे परमेश्वर के सामने ऊँची आवाज़ में पढ़िए।

प्रश्न

क्या परमेश्वर ने शिमशोन को पाप में उकसाया? पाठ यह नहीं कहता। वह कहता है कि यह "बात" यहोवा की ओर से थी, यानी वह अवसर, वह टकराव, वह दरार जिससे इस्राएल की छुड़ौती शुरू हो सकती थी। परन्तु ईमानदारी यह है कि पाठ हमें साफ रेखा नहीं देता जहाँ परमेश्वर की इच्छा खत्म होती है और शिमशोन की भूख शुरू होती है। और अश्कलोन के वे तीस लोग? उन्हें कथावाचक नाम नहीं देता, न शोक। यहाँ हम एक ऐसे न्यायी के युग में हैं जहाँ छुड़ौती खून से लथपथ आती है और लागत का हिसाब कोई नहीं रखता। इस असहजता को चिकना कर देना बेईमानी होगी। न्यायियों की पुस्तक जानबूझकर हमें ऐसे उद्धारकर्ताओं के साथ छोड़ती है जिनसे हम प्रेम नहीं कर सकते, ताकि हम एक और की प्रतीक्षा करें।

श्रोता

पहले सुननेवाले वे इस्राएली थे जो अपने आसपास के लोगों के बीच अपनी पहचान खोते जा रहे थे: विवाह, व्यापार, भाषा, देवता, सब मिल रहे थे। पद 3 का प्रश्न, "क्या तेरे भाइयों की बेटियों में, या हमारे सब लोगों में कोई स्त्री नहीं है", उनके लिए घरेलू बहस नहीं थी, यह अस्तित्व का सवाल था। और पद 4 का यह वाक्य, "उस समय तो पलिश्ती इस्राएल पर प्रभुता करते थे", उनके कानों में अपमान की तरह बजा होगा। वे यह कहानी उस स्थिति से सुनते हैं जहाँ शक्ति किसी और के हाथ में है और उनका सबसे बड़ा नायक भी शत्रु की मेज़ पर भोज कर रहा है। यह विजय गाथा नहीं है; यह एक कब्ज़े में जीती जा रही कौम का आत्म चित्र है।

अन्तर्पाठ

पद 7 के साथ जुड़ा संकेत इब्रानियों 11:33 है, जहाँ विश्वास के लोगों में उन्हें गिना जाता है जिन्होंने सिंहों के मुँह बन्द किए। यह चौंकाता है: शिमशोन विश्वास की सूची में है, अपने चरित्र के बल पर नहीं, बल्कि उस आत्मा के बल पर जो "उस पर बल से उतरा"। दूसरी गूँज यूसुफ की कहानी है, जहाँ भाइयों की बुराई परमेश्वर के हाथ में जीवन बचाने का साधन बन जाती है। दोनों जगह एक ही व्याकरण है: मनुष्य की नीयत और परमेश्वर का उद्देश्य एक ही घटना में बुने हुए, पर एक दूसरे में घुलते नहीं। और इसी व्याकरण की सबसे गहरी पंक्ति गोलगोथा पर लिखी गई, जहाँ मनुष्य का सबसे बड़ा अन्याय परमेश्वर का सबसे मीठा वरदान बना।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन सी "मरी हुई सिंह की लोथ" है जिसके पास से आप अब तक मुड़कर देखने से बचते रहे हैं?

आप अपनी इच्छाओं को कैसे परखते हैं, केवल इससे कि वे आपको अच्छी लगती हैं, या इससे भी कि वे किसे कीमत चुकाने पर मजबूर करेंगी?

Judges में और गहराई से जानें

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Judges For You

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Judges: Such a Great Salvation

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Brings the judges to life without taming the rough edges of the text.

The Message of Judges

Michael Wilcock

Steady guidance through the darkest chapters of Israel's story.

Judges and Ruth: An Introduction and Commentary

Arthur Cundall

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Judges, Ruth

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Judges 14 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

न्यायियों 14 का क्या अर्थ है?
शिमशोन तिम्नाह में एक पलिश्ती स्त्री को देखता है और माता पिता की आपत्ति के बावजूद उससे विवाह की मांग करता है: "उसी से मेरा विवाह करा दे; क्योंकि मुझे वही अच्छी लगती है।" रास्ते में वह खाली हाथ एक सिंह को फाड़ डालता है, बाद में उसी लोथ में मधु पाता है, और उस अनुभव से एक पहेली बनाकर विवाह भोज में दाँव लगाता है। पहेली धोखे से खुल जाती है, शिमशोन का क्रोध भड़कता है, वह अश्कलोन में तीस पुरुषों को मार डालता है, और उसकी पत्नी दूसरे को दे दी जाती है।
न्यायियों 14 किस विषय में है?
शिमशोन की पहेली, "खानेवाले में से खाना, और बलवन्त में से मीठी वस्तु निकली", उद्धार के इतिहास का सूत्र वाक्य है। जो निगलने आया था, उसी की देह में से भोजन निकलता है; जो सबसे बलवन्त था, उसी की मौत मिठास बन जाती है। यह पैटर्न बाइबल में बार बार लौटता है और क्रूस पर अपने शिखर तक पहुँचता है: मृत्यु, जो सब कुछ निगलती है, स्वयं निगल ली जाती है, और उस कब्र से जीवन का मधु बहता है। शिमशोन मसीह की सुन्दर छवि नहीं है; वह अपनी भूख का दास है, अपने क्रोध का बंधक। परन्तु उसका जीवन एक खाली जगह बनाता है, एक ऐसे छुड़ानेवाले की आवश्यकता जो आत्मा से भरा हो और अपने ऊपर संयम भी रखे, जो शत्रु को मारने के लिए नहीं, उसके हाथों मरने के लिए आए।
न्यायियों 14 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
क्या परमेश्वर ने शिमशोन को पाप में उकसाया? पाठ यह नहीं कहता। वह कहता है कि यह "बात" यहोवा की ओर से थी, यानी वह अवसर, वह टकराव, वह दरार जिससे इस्राएल की छुड़ौती शुरू हो सकती थी। परन्तु ईमानदारी यह है कि पाठ हमें साफ रेखा नहीं देता जहाँ परमेश्वर की इच्छा खत्म होती है और शिमशोन की भूख शुरू होती है। और अश्कलोन के वे तीस लोग?
न्यायियों 14 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पद 7 के साथ जुड़ा संकेत इब्रानियों 11:33 है, जहाँ विश्वास के लोगों में उन्हें गिना जाता है जिन्होंने सिंहों के मुँह बन्द किए। यह चौंकाता है: शिमशोन विश्वास की सूची में है, अपने चरित्र के बल पर नहीं, बल्कि उस आत्मा के बल पर जो "उस पर बल से उतरा"। दूसरी गूँज यूसुफ की कहानी है, जहाँ भाइयों की बुराई परमेश्वर के हाथ में जीवन बचाने का साधन बन जाती है। दोनों जगह एक ही व्याकरण है: मनुष्य की नीयत और परमेश्वर का उद्देश्य एक ही घटना में बुने हुए, पर एक दूसरे में घुलते नहीं। और इसी व्याकरण की सबसे गहरी पंक्ति गोलगोथा पर लिखी गई, जहाँ मनुष्य का सबसे बड़ा अन्याय परमेश्वर का सबसे मीठा वरदान बना।
न्यायियों 14 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आप अपनी इच्छाओं को कैसे परखते हैं, केवल इससे कि वे आपको अच्छी लगती हैं, या इससे भी कि वे किसे कीमत चुकाने पर मजबूर करेंगी?
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Judges 14 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

शिमशोन उस रास्ते पर था जो उसके माँ बाप को अच्छा नहीं लगा था, फिर भी "यहोवा का आत्मा उस पर बलपूर्वक उतरा।" पर ध्यान दे, जीत के तुरंत बाद लिखा है कि उसने अपने माता पिता को नहीं बताया कि उसने क्या किया। यहीं से छिपाने की आदत शुरू हुई, जो आगे चलकर उसे ले डूबी। परमेश्वर तुझे सामर्थ्य दे, तो उसे अकेले में छिपाकर मत रख। जो जीत किसी के साथ बाँटी नहीं जाती, वह धीरे धीरे घमंड बन जाती है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

शिमशोन का पहला दर्ज किया गया वाक्य है, "तिम्ना में मैंने एक पलिश्ती स्त्री को देखा है; इसलिए अब उससे मेरा ब्याह करा दो।" न कोई प्रार्थना, न कोई सवाल। बस देखा, और चाहा। और कहानी के अंत में पलिश्ती उसी की आँखें निकाल लेते हैं। जो आँख परमेश्वर से नहीं पूछती, वही आँख एक दिन सबसे महँगी पड़ती है। आज तेरी चाहत कहाँ से जन्म ले रही है, देखने से या माँगने से?

धन्यवाद संपादकीय पर पद 4

पिता, धन्यवाद कि जो बात शिमशोन के माता-पिता की समझ से बाहर थी, वह "यहोवा की ओर से" थी। आज भी जब हमारी परिस्थितियाँ उलझी हुई लगती हैं, तू चुपचाप अपना काम कर रहा है। धन्यवाद कि पलिश्तियों की प्रभुता के दिनों में भी तेरी योजना नहीं रुकी, और हमारे कठिन दिनों में भी नहीं रुकेगी।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

शिमशोन की पत्नी के सामने कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया था। "हम तुझे तेरे पिता के घराने समेत आग में जला देंगे।" जो लोग पहेली नहीं बूझ सके, उन्होंने अपनी हार का बोझ एक डरी हुई स्त्री पर डाल दिया। सोचो, तुम्हारे ऊपर जो दबाव आज पड़ रहा है, कहीं वह किसी और की नाकामी का बोझ तो नहीं? और जो दबाव तुम किसी पर डाल रहे हो, वह किसका है?

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