लूका 11
पाठ
एक साफ-सुथरा, सजा-सजाया, खाली घर। यीशु मसीह इसी छवि से चेतावनी देते हैं, और यही अध्याय की धड़कन है: भीतर कौन रहता है? अध्याय शुरू होता है प्रार्थना की एक माँग से, "हे प्रभु, जैसे यूहन्ना ने अपने चेलों को प्रार्थना करना सिखाया वैसे ही हमें भी तू सीखा दे।" उत्तर में मिलती है एक छोटी, नंगी प्रार्थना और आधी रात को दरवाज़ा पीटते मित्र की कहानी। फिर एक गूँगे व्यक्ति की छुड़ौती, और उस पर लगा घिनौना आरोप कि यह शैतान की सहायता से हो रहा है। अंत में एक फरीसी की मेज़ पर भोजन, जो छह बार दोहराए गए "हाय तुम पर" में बदल जाता है, और शत्रुता के साथ अध्याय बंद होता है।
मूल बात
लूका इस अध्याय में एक ही सवाल के दो पहलू रखता है: परमेश्वर कैसे पिता हैं, और मनुष्य भीतर से कैसा है। पिता के बारे में यीशु मसीह बेहद ठोस बात कहते हैं: जो बुरे पिता भी अपने बच्चों को साँप या बिच्छू नहीं थमाते, वे स्वर्गीय पिता माँगनेवालों को पवित्र आत्मा देंगे। ध्यान दें, वादा रोटी का नहीं, आत्मा का है; प्रार्थना का सबसे बड़ा उत्तर परमेश्वर स्वयं हैं। और मनुष्य के बारे में? भूत निकल जाना पर्याप्त नहीं। खाली, स्वच्छ, धार्मिक जीवन भी उतना ही असुरक्षित है। परमेश्वर का राज्य इसलिए आया है कि "उससे बढ़कर कोई और बलवन्त" घर पर कब्ज़ा करे और उसमें बसे।
मुख्य सूत्र
यीशु मसीह अपने बारे में दो पुराने चिह्न उठाते हैं: योना और सुलैमान। नीनवे के लोग एक अनिच्छुक भविष्यद्वक्ता के प्रचार पर पश्चाताप कर बैठे; दक्षिण की रानी पृथ्वी की छोर से ज्ञान सुनने आई। दोनों बाहरी थे, गैर-इस्राएली, और दोनों ने वही किया जो परमेश्वर के लोग करने से इनकार कर रहे थे। "यहाँ वह है जो सुलैमान से भी बड़ा है" इस पूरे इतिहास को एक व्यक्ति में समेट देता है। योना का चिह्न कब्र और तीसरे दिन की ओर इशारा करता है: अंतिम प्रमाण कोई आकाशीय तमाशा नहीं, बल्कि मरा और जी उठा मसीह होगा। जो इससे संतुष्ट नहीं, उसे कोई और चिह्न नहीं मिलेगा।
दर्पण
आपने कभी प्रार्थना में शालीनता ओढ़ी है? यीशु मसीह उस मित्र की सराहना करते हैं जो "लज्जा छोड़कर" माँगता है, आधी रात को, सोए हुए घर के दरवाज़े पर, अपने लिए नहीं बल्कि मेहमान के लिए। हमारी प्रार्थनाएँ अक्सर इतनी सलीकेदार होती हैं कि उनमें कोई ज़रूरत नहीं बचती। और फिर मेज़ का दृश्य आता है। "तुम कटोरे और थाली को ऊपर-ऊपर तो माँजते हो" यह वाक्य उस पर लगता है जो चर्च में समय पर पहुँचता है, दशमांश देता है, समूह चलाता है, और घर में पत्नी या बच्चों से ठंडे स्वर में बात करता है। पोदीने का हिसाब सही, "न्याय को और परमेश्वर के प्रेम को टाल देते हो।" यह आपकी दानशीलता पर नहीं, आपके भीतर के अंधेरे कोने पर उँगली रखता है, वह कोना जिसे आपने रोशनी में लाना कभी ज़रूरी नहीं समझा।
मुख्य पात्र
इस अध्याय का यीशु मसीह असहज करने वाले हैं। वही व्यक्ति जो चेलों को "हे पिता" कहना सिखाता है, कुछ ही पंक्तियों बाद अपने मेज़बान के घर में उसे "निर्बुद्धि" कहता है। यह विरोधाभास नहीं; यही उनकी करुणा का ढंग है। जो गूँगे को बोलना दिलाता है, वही उन शिक्षकों पर क्रोधित होता है जिन्होंने "ज्ञान की कुँजी ले तो ली" और दरवाज़ा दूसरों के लिए बंद कर दिया। उनकी नाराज़गी अपमान का बदला नहीं है; उनका आरोप है कि धार्मिक अगुवे लोगों पर बोझ लादते हैं और स्वयं उँगली भी नहीं लगाते। और जब उनकी माता को धन्य कहा जाता है, वे कहते हैं, "धन्य वे हैं, जो परमेश्वर का वचन सुनते और मानते हैं।" खून के रिश्ते से बढ़कर सुनने का रिश्ता।
प्रश्न
अगर पिता माँगनेवालों को साँप नहीं देते, तो हमारे हाथ में कभी-कभी पत्थर जैसा क्यों आता है? जिस माँ ने बच्चे के लिए महीनों प्रार्थना की और कब्र पर खड़ी रही, वह इस पद को कैसे पढ़े? पाठ इस सवाल को टालता नहीं, मगर वह उसे मोड़ देता है। जिस बात की गारंटी दी गई है, वह पवित्र आत्मा है, न कि हर इच्छा की पूर्ति; और उसी प्रार्थना में यह पंक्ति भी है, "हमें परीक्षा में न ला।" यानी शिष्य के जीवन में परीक्षा की संभावना मान ली गई है। यह उत्तर घाव नहीं भरता। मगर यह झूठ भी नहीं बोलता: परमेश्वर हमें अपनी उपस्थिति देते हैं, दुख से छूट नहीं। इसे मानना आसान नहीं, केवल संभव है।
श्रोता
पहले सुननेवाले वे यहूदी थे जिनके लिए हाथ धोना स्वच्छता नहीं, पहचान थी: रोमी कब्ज़े के बीच शुद्धता ही यह घोषित करने का तरीका था कि हम परमेश्वर के लोग हैं। इसलिए यीशु मसीह का बिना धोए बैठना केवल असभ्यता नहीं, एक बयान था। "छिपी कब्रों के समान" कहना उनके लिए सबसे कड़वा वार था, क्योंकि कब्र अशुद्धता की चरम सीमा थी; जो शुद्धता के रक्षक थे, वे ही अनजाने अशुद्ध करने वाले ठहरे। और आधी रात के मित्र की कहानी उन गाँववालों को तुरंत समझ आती थी, जहाँ मेहमान को खाली हाथ लौटाना पूरे मोहल्ले की बदनामी थी। इसलिए दरवाज़ा खुलना निश्चित था, केवल कब खुलेगा यह अनिश्चित था।
चिंतन
आपकी प्रार्थना में आखिरी बार कब आपने शालीनता छोड़कर, बिना सजाए शब्दों में कुछ माँगा था, और क्यों आपने उसके बाद वैसा माँगना बंद कर दिया?
आपके जीवन का कौन सा कोना बाहर से माँजा हुआ है, मगर अगर वहाँ दीया रखा जाए तो आपको शर्म आएगी?
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Luke 11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
और हमारे पाप क्षमा कर, क्योंकि हम भी अपने हर एक अपराधी को क्षमा करते हैं।" यीशु ने इस प्रार्थना में एक छोटा सा शब्द रखा, "क्योंकि।" यानी जब तू क्षमा माँगने घुटनों पर बैठता है, तेरे मन में किसी का चेहरा भी आता है। वह नाम जो तू आज तक पकड़े बैठा है, उसे भी प्रार्थना में ला। परमेश्वर तेरा हाथ खाली देखना चाहता है, ताकि उसमें क्षमा रख सके।
प्रभु, मेरा मन कई बार बीच में अटका रहता है, न पूरी तरह तेरे साथ, न पूरा समर्पित। मुझे साफ दिल दे कि मैं तेरे साथ खड़ा रहूँ। जो तू जोड़ता है उसे मैं बिखेरूँ नहीं, बल्कि तेरे काम में तेरे साथ बटोरने वाला बनूँ।
पिता, मेरे भीतर जो जगह मैंने साफ की है, उसे खाली मत छोड़िए। सिर्फ बुरी आदतें छोड़ देना काफी नहीं, आप खुद आकर वहाँ बसिए। मेरा मन आपकी उपस्थिति से भर दीजिए, ताकि जो पुराना गया, वह लौटकर घर न बना ले।
हे पिता, कभी-कभी मेरे पास किसी की मदद करने के लिए कुछ नहीं होता। न सही शब्द, न ताकत, न समाधान। जैसे वह आधी रात को अपने मित्र के लिए रोटी माँगने गया, वैसे ही मैं भी तेरे पास आता हूँ। जो मेरे पास नहीं है, वह तू मुझे दे, ताकि मैं दूसरों को दे सकूँ।
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