भजन संहिता 142
गुफा की दीवारें
एक आदमी अंधेरे में बैठा है। बाहर धूप है, पर उसके चारों ओर पत्थर है, नमी है, चमगादड़ों की गंध है। उसके पीछे शाऊल की सेना है, जो हर घाटी में उसे ढूँढ़ रही है। यही दाऊद है, इस्राएल का भावी राजा, जो इस समय अपने ही देश में भगोड़ा है। शीर्षक कहता है: "गुफा में रहते समय की प्रार्थना।" यह भजन उसी नमी, उसी अकेलेपन, उसी पथरीली चुप्पी से निकला है।
पाठ
दाऊद ऊँची आवाज़ में परमेश्वर के सामने अपना दुख उंडेल रहा है। वह कहता है कि उसकी आत्मा भीतर से थक चुकी है, रास्ते में उसके लिए फंदे बिछाए गए हैं, दाहिनी ओर देखने पर कोई मित्र नहीं दिखता। फिर वह पुकारता है: "तू मेरा शरणस्थान है, मेरे जीते जी तू मेरा भाग है," और बंदीगृह से छुड़ाए जाने की विनती करता है ताकि वह फिर से परमेश्वर के नाम का धन्यवाद कर सके।
मर्म
यह भजन एक बात को नंगा करके सामने रखता है: जब सब कुछ छिन जाए, तब भी परमेश्वर "भाग" है। इब्रानी शब्द खेलेक़ का अर्थ है "हिस्सा," वह ज़मीन का टुकड़ा जो हर इस्राएली को कनान में मिला था, उसकी विरासत, उसकी पहचान। दाऊद के पास इस समय न घर है, न ज़मीन, न सुरक्षा, न सहचर। और ठीक इसी क्षण वह कहता है, "तू मेरा भाग है।" यह भावुक कविता नहीं है, यह धर्मशास्त्र है जो दर्द की भट्ठी में तपकर निकला है। जब बाहरी सब कुछ ढह जाता है, तब पता चलता है कि नींव क्या थी।
सूत्र
एक और व्यक्ति भी अपने लोगों के बीच अकेला था, दाहिनी ओर देखकर कोई साथी नहीं पाया, और उसने भी पुकारा: "मेरे परमेश्वर, मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?" गतसमनी और गुलगुता में यीशु ने वही अकेलापन झेला जो दाऊद ने गुफा में झेला था, पर उससे कहीं गहरा। दाऊद कहता है, "मुझको बंदीगृह से निकाल," और यीशु ने तीन दिन कब्र के बंदीगृह से निकलकर इस प्रार्थना का अंतिम उत्तर दिया। भजन का सातवाँ पद, जहाँ धर्मी लोग चारों ओर इकट्ठे होते हैं, पुनरुत्थान के बाद की कलीसिया की झलक है, वह समुदाय जो छुड़ाए गए व्यक्ति के साथ धन्यवाद करने आता है।
दर्पण
"मैंने दाहिनी ओर देखा, परन्तु कोई मुझे नहीं देखता।" यह वाक्य आज भी उतना ही चुभता है। शादी टूटने के बाद का पहला रविवार, जब चर्च में लोग नज़रें फेर लेते हैं। नौकरी जाने के बाद पुराने सहकर्मियों की चुप्पी। बीमारी के लंबे महीने, जब शुरू में सब पूछते थे और अब कोई फ़ोन नहीं करता। दाऊद यहाँ हमें एक बात सिखाता है: अपनी शिकायत को दबाओ मत, उसे परमेश्वर के सामने "खोलकर" रखो। पद 2 का इब्रानी शब्द है शफ़ख़, "उंडेलना," जैसे बर्तन को उल्टा कर देना। अधूरी, सज़ाई हुई प्रार्थना नहीं, बल्कि पूरी तरह खाली हो जाना उसके सामने।
मुख्य पात्र
दाऊद यहाँ राजा नहीं है, योद्धा नहीं है, वीणा बजानेवाला कवि नहीं है। वह एक थका हुआ आदमी है जो अपनी आत्मा की व्याकुलता स्वीकार करता है। ध्यान दीजिए, वह परमेश्वर से यह नहीं कहता कि "मैं ठीक हूँ।" वह कहता है, "मेरी बड़ी दुर्दशा हो गई है।" यह ईमानदारी बाइबल के भक्तों का चिह्न है। पर उसकी ईमानदारी निराशा में नहीं गिरती। पद 3 में एक मोड़ है: "तब तू मेरी दशा को जानता था।" यह वाक्य पूरे भजन का मेरुदंड है। दाऊद यह नहीं कहता कि परमेश्वर ने तुरंत बचाया, वह कहता है कि परमेश्वर जानता था। कभी-कभी यही काफ़ी है, यह जानना कि हमारी अंधेरी गुफा में कोई और भी है जो देख रहा है।
अंतर्पाठ
भजन 57 भी "गुफा में" लिखा गया है, पर उसका स्वर ऊँचा है, विजय की भविष्यवाणी से भरा। भजन 142 उसका छोटा भाई है, ज़्यादा टूटा हुआ, कम आत्मविश्वासी। दोनों को साथ पढ़ना सिखाता है कि एक ही परिस्थिति में विश्वासी कभी उठता है, कभी गिरता है, और परमेश्वर दोनों प्रार्थनाओं को कबूल करता है। और यिर्मयाह, जिसे कुएँ में डाल दिया गया था, उसने भी पद 7 की भाषा में पुकारा था, "बंदीगृह से निकाल।" बाइबल के भक्त एक-दूसरे की भाषा उधार लेते हैं क्योंकि दर्द की शब्दावली सीमित है।
प्रोफ़ाइल
पहले श्रोता, इस्राएली उपासक, जब मंदिर में यह भजन गाते थे, तो उनके मन में एक चित्र उभरता था: अदुल्लाम की गुफा, जहाँ दाऊद अपने चार सौ हताश साथियों के साथ छिपा था। कर्ज़दार, असंतुष्ट, हारे हुए लोग उसके पास इकट्ठा हुए थे। इस्राएल जानता था कि उनका महानतम राजा एक भगोड़े के रूप में शुरू हुआ था। यह भजन उन्हें याद दिलाता था कि परमेश्वर सिंहासन पर बैठे राजा के साथ ही नहीं, गुफा के फ़र्श पर पड़े राजा के साथ भी था। बेबीलोन के निर्वासन में जब यह भजन गाया गया, तो यह और भी सच लगा: पूरी क़ौम गुफा में थी, और फिर भी परमेश्वर "उनका भाग" बना रहा।
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
जब मेरी आत्मा मेरे भीतर व्याकुल हो रही थी, तब तू मेरी दशा जानता था।" दाऊद यह गुफा में छिपकर लिख रहा है, शाऊल से भागते हुए। चारों ओर अंधेरा, कोई साथी नहीं, कोई रास्ता नहीं दिखता। पर एक बात वह जानता है, परमेश्वर उसकी राह जानता है।
आज जब तेरा मन थक जाए और शब्द भी न मिलें, याद रख, तुझे किसी को समझाने की ज़रूरत नहीं। वह पहले से जानता है।
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