बाइबल व्याख्या

लूका 20

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

मूल पाठ

मन्दिर के आँगन में यीशु सिखा रहे हैं, और यरूशलेम के सबसे शक्तिशाली लोग उनसे पूछते हैं कि वे यह सब किस अधिकार से कर रहे हैं। यीशु उत्तर देने के बजाय यूहन्ना के बपतिस्मा के बारे में प्रतिप्रश्न करते हैं, फिर दाख की बारी का वह दृष्टान्त सुनाते हैं जिसमें किसान स्वामी के पुत्र को मार डालते हैं। इसके बाद तीन जाल बिछाए जाते हैं, कर का, पुनरुत्थान का, और अन्त में यीशु स्वयं एक प्रश्न पूछते हैं जिसका उत्तर कोई नहीं दे पाता, और शास्त्रियों के पाखण्ड पर चेतावनी देते हैं।

केन्द्रीय बात

यह अध्याय अधिकार के प्रश्न पर खड़ा है। धर्मगुरु पूछते हैं, "तू इन कामों को किस अधिकार से करता है," और यीशु पूरे अध्याय में उस प्रश्न का उत्तर देने से इनकार करते हुए भी उसे हर बार और गहरा करते जाते हैं। दृष्टान्त में वे स्वयं को "प्रिय पुत्र" कहते हैं, भजन में स्वयं को कोने का सिरा, और दाऊद के वचन में स्वयं को दाऊद का प्रभु। अर्थात् अधिकार का प्रश्न किसी प्रमाणपत्र का नहीं, पहचान का है। परमेश्वर दाख की बारी के स्वामी हैं जो न्याय करने में धीमे हैं और भेजने में अथक; उनका धैर्य बार-बार दास भेजता है, पर वह धैर्य अनन्त नहीं। जो पत्थर ठुकराया गया, वही अन्त में माप का पैमाना बन जाता है।

समग्र धागा

दाख की बारी इस्राएल की सबसे पुरानी तस्वीर है। यशायाह ने उसी छवि से इस्राएल के विरुद्ध गीत गाया था: परमेश्वर ने बारी लगाई, पर फल खट्टे निकले। यीशु उस गीत को उठाते हैं और एक निर्णायक मोड़ देते हैं। अब दोष अंगूरों का नहीं, ठेकेदारों का है, अर्थात् उन अगुवों का जिन्हें बारी सौंपी गई थी। और भेजे गए दासों की पंक्ति, पीटे गए, अपमानित किए गए, घायल किए गए, पूरे भविष्यद्वक्ताओं के इतिहास को एक वाक्य में समेट देती है। फिर आता है पुत्र, और उसे "दाख की बारी से बाहर निकालकर" मारा जाता है, ठीक वैसे ही जैसे यीशु नगर के बाहर क्रूस पर चढ़ाए जाएँगे। उद्धार का धागा यही है: परमेश्वर अन्ततः दास नहीं, पुत्र भेजते हैं।

दर्पण

इस अध्याय का सबसे असहज हिस्सा वे ठेकेदार हैं जो सोचते हैं, "यह तो वारिस है; आओ, हम उसे मार डालें, कि विरासत हमारी हो जाए।" यह केवल पहली सदी के याजकों की कहानी नहीं। जब आप अपनी सेवा, अपने समूह, अपनी कक्षा, अपने परिवार को ऐसे सँभालते हैं मानो वह आपकी सम्पत्ति है, मानो हिसाब देने का दिन कभी नहीं आएगा, तब वही तर्क आपके भीतर काम कर रहा है। और शास्त्रियों की वह तस्वीर, लम्बे वस्त्र, बाजार में नमस्कार, लम्बी प्रार्थनाएँ, और साथ ही विधवाओं के घर खा जाना, बताती है कि धार्मिक प्रतिष्ठा और आर्थिक शोषण एक ही आदमी में आराम से रह सकते हैं। आज यह करें: अपनी जेब से कोई सिक्का या नोट निकालकर हाथ में लें, उस पर छपा नाम देखें, और ऊँचे स्वर में कहें कि आपके जीवन पर किसकी छाप है और वह हिस्सा आप आज परमेश्वर को लौटा रहे हैं।

पृष्ठभूमि

यह यीशु का अन्तिम सप्ताह है, और स्थान मन्दिर है, मन्दिर का वह आँगन जहाँ कुछ ही दिन पहले उन्होंने व्यापारियों की मेजें उलटी थीं। प्रधान याजक, शास्त्री और प्राचीन मिलकर महासभा बनाते थे, यानी यहूदी समाज की पूरी धार्मिक और कानूनी सत्ता। वे यीशु को मारना चाहते हैं पर "वे लोगों से डरे," क्योंकि पर्व के दिनों में यरूशलेम तीर्थयात्रियों से भरा था और भीड़ का क्रोध रोम को भी महँगा पड़ता। इसलिए वे भेदिए भेजते हैं, "कि धर्मी का भेष धरकर उसकी कोई न कोई बात पकड़ें।" कर का प्रश्न जानलेवा था: हाँ कहने पर जनता की नफरत, ना कहने पर राजद्रोह का आरोप।

श्रोताओं का चेहरा

लूका जिनके लिए लिख रहा है, वे मुख्यतः गैर-यहूदी विश्वासी हैं जो एक चुभती हुई सच्चाई के साथ जी रहे थे: मसीह को उनके अपने लोगों ने ठुकराया, और बारी "दूसरों को" सौंपी गई। यह सुनकर उनके भीतर राहत नहीं, काँपन उठनी चाहिए थी, क्योंकि नए ठेकेदारों से भी वही फल माँगा जाएगा। भीड़ ने दृष्टान्त का अन्त सुनकर कहा, "परमेश्वर ऐसा न करे," और यह प्रतिक्रिया बताती है कि वे समझ गए थे कि बात उनके ही घर की है। सदूकी, जो केवल मूसा की पाँच पुस्तकों को प्रमाण मानते थे, यह सुनकर निरुत्तर हुए कि पुनरुत्थान का प्रमाण स्वयं मूसा की झाड़ी में छिपा है।

अन्तर्पाठ

यीशु इस अध्याय में तीन बार पुराने नियम को हथियार की तरह नहीं, कुंजी की तरह उठाते हैं। भजन 118 से: "जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया," यानी ठुकराया जाना ही उनकी नियुक्ति का चिह्न है। फिर दानिय्येल की उस मूर्ति की ओर इशारा, जिसे बिना हाथ लगाए कटा पत्थर चूर कर देता है; राज्य आएगा, और साम्राज्य टूटेंगे। और सबसे सुन्दर, निर्गमन 3 की जलती झाड़ी: परमेश्वर स्वयं को "अब्राहम का परमेश्वर" कहते हैं, और यीशु इससे निष्कर्ष निकालते हैं, "परमेश्वर तो मुर्दों का नहीं परन्तु जीवितों का परमेश्वर है।" वाचा मृत्यु से बड़ी है। अन्त में भजन 110, "प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा," जहाँ दाऊद का पुत्र दाऊद का स्वामी निकलता है, और अधिकार का प्रश्न अपने उत्तर तक पहुँच जाता है।

चिंतन के प्रश्न

दाख की बारी का कौन-सा हिस्सा आपको सौंपा गया है, और क्या आप उसे ठेकेदार की तरह सँभालते हैं या मालिक की तरह?

"परमेश्वर तो मुर्दों का नहीं परन्तु जीवितों का परमेश्वर है" यह वाक्य आपके किसी खोए हुए प्रियजन के बारे में आज क्या कहता है?

Luke में और गहराई से जानें

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Luke For Everyone

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Warm, readable commentary on the Gospel for outsiders and doubters.

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Luke 20 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

लूका 20 का क्या अर्थ है?
मन्दिर के आँगन में यीशु सिखा रहे हैं, और यरूशलेम के सबसे शक्तिशाली लोग उनसे पूछते हैं कि वे यह सब किस अधिकार से कर रहे हैं। यीशु उत्तर देने के बजाय यूहन्ना के बपतिस्मा के बारे में प्रतिप्रश्न करते हैं, फिर दाख की बारी का वह दृष्टान्त सुनाते हैं जिसमें किसान स्वामी के पुत्र को मार डालते हैं। इसके बाद तीन जाल बिछाए जाते हैं, कर का, पुनरुत्थान का, और अन्त में यीशु स्वयं एक प्रश्न पूछते हैं जिसका उत्तर कोई नहीं दे पाता, और शास्त्रियों के पाखण्ड पर चेतावनी देते हैं।
लूका 20 किस विषय में है?
दाख की बारी इस्राएल की सबसे पुरानी तस्वीर है। यशायाह ने उसी छवि से इस्राएल के विरुद्ध गीत गाया था: परमेश्वर ने बारी लगाई, पर फल खट्टे निकले। यीशु उस गीत को उठाते हैं और एक निर्णायक मोड़ देते हैं। अब दोष अंगूरों का नहीं, ठेकेदारों का है, अर्थात् उन अगुवों का जिन्हें बारी सौंपी गई थी। और भेजे गए दासों की पंक्ति, पीटे गए, अपमानित किए गए, घायल किए गए, पूरे भविष्यद्वक्ताओं के इतिहास को एक वाक्य में समेट देती है। फिर आता है पुत्र, और उसे "दाख की बारी से बाहर निकालकर" मारा जाता है, ठीक वैसे ही जैसे यीशु नगर के बाहर क्रूस पर चढ़ाए जाएँगे। उद्धार का धागा यही है: परमेश्वर अन्ततः दास नहीं, पुत्र भेजते हैं।
लूका 20 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यह यीशु का अन्तिम सप्ताह है, और स्थान मन्दिर है, मन्दिर का वह आँगन जहाँ कुछ ही दिन पहले उन्होंने व्यापारियों की मेजें उलटी थीं। प्रधान याजक, शास्त्री और प्राचीन मिलकर महासभा बनाते थे, यानी यहूदी समाज की पूरी धार्मिक और कानूनी सत्ता। वे यीशु को मारना चाहते हैं पर "वे लोगों से डरे," क्योंकि पर्व के दिनों में यरूशलेम तीर्थयात्रियों से भरा था और भीड़ का क्रोध रोम को भी महँगा पड़ता। इसलिए वे भेदिए भेजते हैं, "कि धर्मी का भेष धरकर उसकी कोई न कोई बात पकड़ें।" कर का प्रश्न जानलेवा था: हाँ कहने पर जनता की नफरत, ना कहने पर राजद्रोह का आरोप।
लूका 20 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यीशु इस अध्याय में तीन बार पुराने नियम को हथियार की तरह नहीं, कुंजी की तरह उठाते हैं। भजन 118 से: "जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया," यानी ठुकराया जाना ही उनकी नियुक्ति का चिह्न है। फिर दानिय्येल की उस मूर्ति की ओर इशारा, जिसे बिना हाथ लगाए कटा पत्थर चूर कर देता है; राज्य आएगा, और साम्राज्य टूटेंगे। और सबसे सुन्दर, निर्गमन 3 की जलती झाड़ी: परमेश्वर स्वयं को "अब्राहम का परमेश्वर" कहते हैं, और यीशु इससे निष्कर्ष निकालते हैं, "परमेश्वर तो मुर्दों का नहीं परन्तु जीवितों का परमेश्वर है।" वाचा मृत्यु से बड़ी है। अन्त में भजन 110, "प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा," जहाँ दाऊद का पुत्र दाऊद का स्वामी निकलता है, और अधिकार का प्रश्न अपने उत्तर तक पहुँच जाता है।
लूका 20 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
"परमेश्वर तो मुर्दों का नहीं परन्तु जीवितों का परमेश्वर है" यह वाक्य आपके किसी खोए हुए प्रियजन के बारे में आज क्या कहता है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Luke 20 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 28

सदूकी यीशु के पास शास्त्र लेकर आते हैं, "हे गुरु, मूसा ने हमारे लिये लिखा है..." पर उनका मन सीखने का नहीं, फँसाने का था। वचन उनके हाथ में था, पर उनके दिल में नहीं। सोच कर देख, तू बाइबल किस इरादे से खोलता है? अपनी बात सही साबित करने को, या उसकी आवाज़ सुनने को जो तुझसे बात करना चाहता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

दाख की बारी का स्वामी नौकरों की पिटाई के बाद सेना नहीं भेजता। वह ठहरकर पूछता है, "मैं क्या करूँ?" और जवाब देता है, "मैं अपने प्रिय पुत्र को भेजूँगा, क्या जाने वे उसका आदर करें।" सोचो, जिसके पास सब अधिकार था, उसने सबसे कीमती चीज़ जोखिम में डाल दी। परमेश्वर तुम्हारे ठुकराने का उत्तर सज़ा से नहीं, अपने बेटे से देता है। यह प्रेम तुम्हें डराता है या पिघलाता है?

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