मरकुस 10
पाठ
यरदन के पार भीड़ के बीच फरीसी एक फंदा लेकर आते हैं: क्या पुरुष अपनी पत्नी को त्याग सकता है? यीशु उन्हें मूसा की रियायत से हटाकर सृष्टि के आरम्भ तक ले जाते हैं, "जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न करे।" इसके बाद पूरा अध्याय एक ही दिशा में बहता है: चेले बालकों को डाँटते हैं और यीशु क्रुद्ध होकर उन्हें गोद में उठाते हैं; एक धनी व्यक्ति दौड़ता हुआ आता है और उदास होकर लौट जाता है; यरूशलेम के रास्ते पर यीशु अपनी मृत्यु की बात कहते हैं, और उसी क्षण याकूब और यूहन्ना दाहिने-बाएँ की कुर्सियाँ माँग बैठते हैं। अन्त में यरीहो के किनारे बैठा अन्धा बरतिमाई अपना बाहरी वस्त्र फेंककर उठता है और देखता हुआ यीशु के पीछे चल पड़ता है।
मर्म
यह अध्याय पूछता है कि सत्ता किसकी है, और उसका उपयोग कैसे होता है। विवाह में पुरुष के पास त्याग-पत्र लिखने की ताकत थी; यीशु उस ताकत को "मन की कठोरता" कहकर बेनकाब करते हैं। बालकों के पास कोई सामाजिक वजन नहीं था; यीशु कहते हैं कि राज्य ऐसों ही का है। धनी के पास साधन थे, इतने कि वह ऊँट की तरह सूई के नाके पर अटक गया। याकूब और यूहन्ना के पास महत्वाकांक्षा थी, और उन्हें सुनना पड़ा कि बड़ा वही है जो सबका दास बने। परमेश्वर का राज्य कोई बेहतर ढंग से चलाई गई पुरानी व्यवस्था नहीं है, जिसमें वही लोग ऊपर रहें, बस अधिक धार्मिक होकर। यह उलटी गिनती है, और उसका माप वचन 45 में खुद यीशु हैं: जो सेवा करवाने नहीं, सेवा करने और बहुतों के छुटकारे के लिये अपना प्राण देने आए। इसलिए उद्धार कमाई नहीं, बल्कि खाली हाथ लेना है, क्योंकि "मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है।"
सूत्र
ध्यान दीजिए कि यीशु फरीसियों को व्यवस्थाविवरण से हटाकर उत्पत्ति तक पीछे ले जाते हैं। मूसा की आज्ञा गिर चुके संसार के लिए एक बाँध थी, पर परमेश्वर का मूल इरादा वचन 6 से 8 में खड़ा है: "वे अब दो नहीं, पर एक तन हैं।" मसीह टूटी हुई व्यवस्था को थोड़ा सुधारने नहीं आए, वे आरम्भ को बहाल करने आए। और यह बहाली मुफ्त नहीं है, इसका दाम वचन 45 में लिखा है: "बहुतों के छुटकारे के लिये अपना प्राण दे।" जिस शब्द का अनुवाद "छुटकारा" है, वह ग्रीक में लित्रोन है, वह कीमत जो दास या बन्दी को छुड़ाने के लिए चुकाई जाती थी। यही पूरे बाइबल की धारा है: मिस्र से निकाला गया इस्राएल, और अब क्रूस पर चुकाई गई कीमत। बरतिमाई इसीलिए "दाऊद की सन्तान" पुकारता है, वह अनजाने में सही पते पर चिल्ला रहा है।
दर्पण
यह अध्याय हमारी सबसे सम्मानित आदतों पर हाथ रखता है। फरीसियों की तरह हम भी पूछते हैं, "कितना छूट सकता है और फिर भी उचित रहे?" रिश्ते में, अनुबंध में, टैक्स में, वादे में। यीशु का उत्तर वह छूट छीन लेता है और पूछता है कि आपका मन कहाँ कठोर हुआ है। धनी व्यक्ति डरावना इसलिए है क्योंकि वह बुरा नहीं है; वह लड़कपन से आज्ञाएँ मानता आया है, जैसे आप रविवार को नियम से जाते हैं। उसकी कमी नैतिक नहीं, पकड़ की है। और चेले बालकों को डाँटते हैं, जैसे हम उन लोगों को चुप कराते हैं जो हमारे समय के लायक नहीं लगते: फोन पर बहन, दफ्तर का चपरासी, वह रिश्तेदार जो हमेशा माँगता है।
आज शाम वह एक काम चुपचाप कर दीजिए जो आपके घर या दफ्तर में "आपका काम नहीं" माना जाता है, दस मिनट का कोई छोटा काम, और किसी को मत बताइए।
मुख्य पात्र
इस अध्याय में यीशु का भीतरी मौसम खुलकर दिखता है। वे चेलों पर "क्रुद्ध" होते हैं, मरकुस यह शब्द छिपाता नहीं। वे धनी व्यक्ति पर "दृष्टि करके उससे प्रेम" करते हैं और फिर भी उसे वह बात कहते हैं जो उसे तोड़ देगी, क्योंकि प्रेम झूठी तसल्ली नहीं देता। वे यरूशलेम की ओर सबसे आगे-आगे चलते हैं, जबकि पीछे चलनेवाले डरे हुए हैं; उन्हें ठीक-ठीक मालूम है कि थूक, कोड़े और मृत्यु सामने है। और इसी हालत में, अपनी मौत की ओर बढ़ता हुआ आदमी, यरीहो की सड़क पर एक भिखारी की आवाज़ सुनकर ठहर जाता है। सत्ता का यही चेहरा वे हमें सौंपते हैं: ताकत जो अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए खर्च होती है।
एक बारीकी
वचन 50 का एक छोटा वाक्य आसानी से फिसल जाता है: "वह अपना बाहरी वस्त्र फेंककर शीघ्र उठा।" भिखारी के लिए वह चादर केवल कपड़ा नहीं थी। उसे सड़क पर बिछाकर वह सिक्के इकट्ठा करता था, और रात को वही उसका बिस्तर और कम्बल थी। वह उसकी पूरी सम्पत्ति और उसका कारोबार, दोनों थी। बरतिमाई उसे फेंक देता है, बिना यह जाने कि वह चंगा होगा या नहीं। कुछ ही घंटे पहले एक धनी व्यक्ति अपनी सम्पत्ति बेचने की बात सुनकर उदास लौट गया था। अन्धा भिखारी वह कर देता है जो देखनेवाला धनी नहीं कर सका। मरकुस इन दोनों दृश्यों को एक-दूसरे के आमने-सामने रखता है, और पाठक को खुद तय करने देता है कि असली गरीबी किसकी थी।
पृष्ठभूमि
यीशु यरदन के पार हैं, हेरोदेस अन्तिपास के इलाके में, ठीक उस जगह जहाँ विवाह पर बोलने के कारण यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाले का सिर कटा था। तलाक का सवाल इसलिए निर्दोष नहीं, खतरनाक है। उस समाज में त्याग-पत्र पुरुष का अधिकार था; त्यागी गई स्त्री के पास न आमदनी थी, न सुरक्षा, केवल पिता के घर लौटने की शर्मिंदगी। यीशु का उत्तर पत्नी की ढाल है। फिर रास्ता यरीहो से यरूशलेम की चढ़ाई पकड़ता है, फसह के पहले, जब सड़कें तीर्थयात्रियों से भरी होतीं और मसीहा की उम्मीदें गरम रहतीं। इसी माहौल में याकूब और यूहन्ना मंत्रिमंडल की कुर्सियाँ बुक करा रहे हैं, और भीड़ एक भिखारी को चुप कराती है, क्योंकि जुलूस में उसकी जगह नहीं।
चिंतन
वह कौन सी "उचित" छूट है जिसे आप अपने किसी रिश्ते या हिसाब में इसलिए बचाए हुए हैं क्योंकि नियम उसकी इजाज़त देता है, जबकि आपका मन जानता है कि वह कठोरता है?
यदि यीशु आज आपसे पूछें, "तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिये करूँ?", तो आपका ईमानदार उत्तर याकूब-यूहन्ना जैसा होगा या बरतिमाई जैसा?
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Mark 10 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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मरकुस 10 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मरकुस 10 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Mark 10 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, पतरस की तरह कभी मेरे मन में भी हिसाब चलता है कि मैंने तेरे लिए क्या क्या छोड़ा। पर तू जानता है कि जो कुछ मैंने छोड़ा, वह तेरे प्यार के सामने कुछ भी नहीं। मेरे दिल से गिनती मिटा दे, और बस तेरे पीछे चलने की खुशी भर दे।
यीशु यरूशलेम की ओर आगे आगे चल रहे थे, और पीछे चलनेवाले डर रहे थे। "वे अचम्भित हुए और जो पीछे-पीछे चलते थे वे डरने लगे।" ध्यान दे, उसने उनका डर मिटने तक इंतज़ार नहीं किया, वह चलता रहा और फिर से बताने लगा कि आगे क्या होगा। तेरे रास्ते पर भी वह पहले से चल चुका है। डरते हुए ही सही, तू बस पीछे चलता रह।
यीशु आगे आगे चल रहे थे, और शिष्य डरे हुए पीछे। तब उन्होंने कहा, "देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं, और मनुष्य का पुत्र प्रधान याजकों और शास्त्रियों के हाथ पकड़वाया जाएगा।" वे जानते थे कि आगे क्या है, फिर भी कदम नहीं रुके। तुम्हारे लिए यह रास्ता उन्होंने आँखें खोलकर चुना, अनजाने में नहीं।
चेले अचम्भित थे, और यीशु ने उन्हें डाँटा नहीं। उसने कहा, "हे बालको," जैसे कोई पिता घबराए हुए बच्चे को गोद में लेता है। फिर कठोर सच्चाई: "जो धन पर भरोसा रखते हैं, उनके लिए परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!" समस्या पैसा नहीं, भरोसा है। आज तेरी सुरक्षा किस पर टिकी है?
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