मत्ती 26:15
पाठ
यहूदा इस्करियोती, बारह में से एक, प्रधान याजकों के पास जाता है और सौदे की भाषा में बात करता है: "यदि मैं उसे तुम्हारे हाथ पकड़वा दूँ, तो मुझे क्या दोगे?" कोई शर्त नहीं, कोई कीमत तय नहीं; वह दाम पूछता है, जैसे कोई बाजार में मोल-भाव करता हो। और याजक उसे तीस चाँदी के सिक्के "तौलकर" दे देते हैं। ध्यान दीजिए, गिनकर नहीं, तौलकर। तराजू निकलता है, बाट रखे जाते हैं, और परमेश्वर के पुत्र का मूल्य पलड़े पर स्थिर हो जाता है। दो पद पहले एक स्त्री ने बहुमूल्य इत्र उँडेलकर उसका मोल चुकाने से इनकार किया था; यहाँ बारह में से एक उसका ठीक-ठीक मोल लगा देता है।
मर्म
तीस चाँदी के सिक्के कोई मनमानी संख्या नहीं हैं। व्यवस्था में यही वह रकम है जो उस दास के स्वामी को दी जाती थी जिसे किसी के बैल ने मार डाला हो (निर्गमन 21:32): एक मरे हुए दास का मुआवजा। और जकर्याह 11 में परमेश्वर का ठुकराया हुआ चरवाहा अपनी मजदूरी माँगता है, और उसे यही तीस चाँदी के टुकड़े तौलकर दिए जाते हैं, एक ऐसी रकम जिसे भविष्यद्वक्ता व्यंग्य से "बड़ा मोल" कहता है और कुम्हार के आगे फेंक देता है। मत्ती जानबूझकर यह गूँज सुनाता है। बात केवल यहूदा के लालच की नहीं है, बात इसकी है कि परमेश्वर का सच्चा चरवाहा अपने ही लोगों के बीच एक दास की लाश के बराबर आँका गया। पाप का असली रूप यही है: मसीह से घृणा नहीं, बल्कि उन्हें कम आँकना, उन्हें तौल लेना, उन्हें किसी और चीज़ के बदले में भुना लेना।
सूत्र
एक भाई जो अपने ही भाई को चाँदी के बदले बेच देता है: यह कहानी पवित्रशास्त्र में नई नहीं है। यूसुफ को उसके सगे भाइयों ने गड्ढे से निकालकर व्यापारियों के हाथ चाँदी में बेचा था, और वही विश्वासघात अंततः उस अकाल में जीवन का साधन बना। मत्ती उस पुराने ढर्रे को यहाँ अपने चरम पर पहुँचाता हुआ दिखाता है। यहूदा का सौदा परमेश्वर की योजना को तोड़ता नहीं, उसे पूरा करता है; यीशु स्वयं कह चुके हैं कि "मनुष्य का पुत्र क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिये पकड़वाया जाएगा।" तराजू पर रखे वे सिक्के उसी रात उस कटोरे तक ले जाते हैं जिसके बारे में वे कहेंगे, "यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिये पापों की क्षमा के लिए बहाया जाता है।" जिस मूल्य को मनुष्य ने घटाकर तीस सिक्के किया, परमेश्वर ने उसी को बहुतों की छुड़ौती बना दिया।
दर्पण
यहूदा का पाप हमें इसलिए असहज करता है क्योंकि उसकी भाषा हमारी रोज़मर्रा की भाषा है: "मुझे क्या दोगे?" यही सवाल हम नौकरी बदलते समय पूछते हैं, रिश्तों को निभाते समय पूछते हैं, चर्च की सेवा में भी चुपचाप पूछते हैं। और अक्सर हिसाब सही भी बैठ जाता है। खतरा यह नहीं कि हम मसीह से मुकर जाएँ, बल्कि यह कि हम उन्हें अपने जीवन की बही में एक मद बना दें, जिसे ज़रूरत पड़ने पर घाटे में बेचा जा सकता है: सच बोलने की कीमत ज़्यादा लगी, तो चुप रह गए; रविवार से बड़ा सौदा मिल गया, तो टाल दिया। तौलना शुरू होते ही भक्ति खत्म हो जाती है। आज एक कागज़ पर वह एक चीज़ लिखिए जिसके बदले इस सप्ताह आपने मसीह के प्रति निष्ठा को पीछे रखा, उसे परमेश्वर के सामने ज़ोर से पढ़िए, और फिर कागज़ फाड़ दीजिए।
प्रश्न
यदि सब कुछ "जैसा उसके विषय में लिखा है" होना ही था, तो यहूदा दोषी क्यों? यीशु दोनों बातें एक ही साँस में कहते हैं: मनुष्य का पुत्र जाता ही है, "परन्तु उस मनुष्य के लिये शोक है जिसके द्वारा मनुष्य का पुत्र पकड़वाया जाता है।" पवित्रशास्त्र यहाँ कोई समाधान नहीं देता, वह दोनों सिरे कसकर पकड़े रहता है। परमेश्वर की योजना मनुष्य की ज़िम्मेदारी को खत्म नहीं करती, और मनुष्य का चुनाव परमेश्वर की योजना को पटरी से नहीं उतारता। जो इस तनाव को हल करने की जल्दी करता है, वह या तो परमेश्वर को पाप का रचयिता बना देता है या यहूदा को बेचारा। दोनों गलत हैं। यहाँ हमें रहस्य के सामने चुप होना सीखना पड़ता है, और साथ ही अपने ही दिल से पूछना पड़ता है, "हे गुरु, क्या वह मैं हूँ?"
मुख्य पात्र
यहूदा के बारे में मत्ती हमें उसका मनोविज्ञान नहीं बताता, केवल उसकी क्रियाएँ। वह जाता है, पूछता है, लेता है, और फिर "उसी समय से उसे पकड़वाने का अवसर ढूँढ़ने लगा।" यह क्षणिक आवेश नहीं, यह धैर्यपूर्वक पकाया गया निर्णय है। सबसे भयावह बात उसकी शालीनता है: मेज़ पर वह बाकी सबके साथ पूछता है, "हे रब्बी, क्या वह मैं हूँ?" और बगीचे में चुम्बन के साथ कहता है, "हे रब्बी, नमस्कार!" वह कभी विरोधी नहीं दिखता, हमेशा शिष्य दिखता है। ध्यान दीजिए कि वह यीशु को "रब्बी" कहता है, "प्रभु" कभी नहीं। और उस मुँह पर यीशु का उत्तर आता है, "हे मित्र, जिस काम के लिये तू आया है, उसे कर ले।" विश्वासघात करते हुए भी वह मित्र कहलाता है; यही वह अनुग्रह है जिसे यहूदा ने कभी स्वीकार नहीं किया।
पहले सुननेवाले
मत्ती के पहले पाठक ऐसे यहूदी विश्वासी थे जिन्होंने जकर्याह का वह अजीब अध्याय आराधनालय में बार-बार सुना था। तीस चाँदी के सिक्कों का ज़िक्र सुनते ही उनके कान खड़े हो जाते: यह वही ठुकराए गए चरवाहे की मजदूरी है, और मन्दिर का खज़ाना इस लेनदेन में शामिल है। वे यह भी जानते थे कि व्यवस्था में यह एक दास का मोल है, यानी अपमान की एक सटीक नाप। पर इससे भी गहरा घाव कुछ और था: उनमें से कई ऐसे समुदायों में रहते थे जहाँ सताव के दिनों में अपने ही लोग अपनों को अधिकारियों के हाथ "पकड़वा" देते थे। यहूदा उनके लिए दूर का खलनायक नहीं था, बल्कि वह चेहरा था जो उनकी अपनी सभा में बैठा हो सकता था, और शायद उनके अपने आईने में भी।
मनन
आपके जीवन में वह कौन-सा क्षेत्र है जहाँ आप मसीह के प्रति निष्ठा को लाभ-हानि के तराजू पर तौलने लगे हैं?
यीशु यहूदा को "मित्र" कहते हैं, यह जानते हुए भी कि वह क्या करने आया है। इस अनुग्रह के सामने आपका पहला जवाब क्या है?
Matthew में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Short, fresh readings that make Matthew feel newly written.
The King and his kingdom, traced through the whole Gospel.
Matthew: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
The Message of the Sermon on the Mount
Stott's classic on Matthew 5-7, the charter of the kingdom.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Matthew 26:15 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
मत्ती 26:15 का क्या अर्थ है?
मत्ती 26:15 किस विषय में है?
मत्ती 26:15 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
मत्ती 26:15 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मत्ती 26:15 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Matthew 26 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
कुछ ही घंटे पहले पतरस ने कहा था कि वह मरने तक साथ देगा। और अब लिखा है, "तब सब चेले उसे छोड़कर भाग गए।" सब, एक भी नहीं बचा। यीशु यह जानते थे, फिर भी उन्होंने इन्हीं लोगों को चुना था, इन्हीं के पाँव धोए थे। तुम्हारा भागना उसे चौंकाता नहीं। वह उस रात अकेला इसीलिए खड़ा रहा, ताकि तुम्हें अकेला न छोड़ना पड़े।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें