मत्ती 6:16
पाठ
यीशु उपवास को रद्द नहीं करते, वे उसे मानकर चलते हैं: "जब तुम उपवास करो" कहते हैं, "यदि" नहीं। सवाल यह नहीं कि आप भूखे रहेंगे या नहीं, सवाल यह है कि वह भूख किसे दिखाई देनी चाहिए। कपटी लोग अपना चेहरा उतार लेते हैं, मुँह बनाए रखते हैं, बाल बिखरे रखते हैं, ताकि गली में चलते हुए हर कोई समझ जाए कि यह व्यक्ति परमेश्वर के लिए कुछ त्याग रहा है। यीशु उस पूरे प्रदर्शन पर एक ठंडा, व्यापारिक वाक्य रख देते हैं: उन्हें उनका प्रतिफल मिल चुका है। हिसाब बराबर हो गया। दर्शकों की सराहना ही पूरी मजदूरी थी, और अब परमेश्वर की ओर कुछ बकाया नहीं बचा।
मूल
जिस शब्द का अनुवाद "पा चुके" हुआ है, वह यूनानी में अपेखूसिन है, वही शब्द जो रसीदों पर लिखा जाता था: "पूरा भुगतान प्राप्त हुआ।" यही इस वचन की चुभन है। यीशु यह नहीं कहते कि दिखावटी उपवास बेअसर है; वे कहते हैं कि वह बहुत असरदार है, बस उसका फल छोटा है। आपने जो माँगा, वही मिला। यहाँ परमेश्वर एक ऐसे पिता के रूप में सामने आते हैं जो गुप्त में देखते हैं, यानी जिनके सामने भक्ति का प्रदर्शन करने की कोई आवश्यकता नहीं, क्योंकि वे पहले से ही देख रहे हैं। मानव हृदय की त्रासदी यह है कि वह इतनी कम कीमत पर बिक जाता है: परमेश्वर की निगाह उपलब्ध थी, और हमने पड़ोसी की सराहना चुन ली।
सूत्र
पुराने नियम में उपवास प्रायः शोक और पश्चाताप की भाषा थी: राख, फटे कपड़े, खाली पेट, ताकि शरीर वही कहे जो हृदय कह रहा है। समस्या तब शुरू हुई जब चिह्न ही लक्ष्य बन गया और भीतर कुछ नहीं बदला। भविष्यद्वक्ता इसी पर चिल्लाते रहे। यीशु उसी धारा में खड़े हैं, पर एक नई बात जोड़ते हैं: वे उपवास को पिता के साथ के एक गुप्त रिश्ते में रख देते हैं। और यह वही यीशु हैं जिन्होंने चालीस दिन जंगल में उपवास किया, बिना किसी दर्शक के, और जो अंततः क्रूस पर वह सब खो देंगे जो दिखावे से पाया जा सकता था। उद्धार का पूरा तर्क यही है: मसीह ने सार्वजनिक सम्मान छोड़कर हमें पिता के सामने एक ऐसी स्थिति दी जिसे किसी की सराहना से कमाना नहीं पड़ता।
दर्पण
यह वचन उपवास से कहीं आगे तक काटता है। आप देर तक दफ्तर में रुकते हैं और चाहते हैं कि कोई देख ले कि आप अब तक रुके हैं। आप घर पर थके हुए हैं और थकान को थोड़ा बढ़ाकर दिखाते हैं, ताकि पत्नी या पति समझें कि आपने कितना किया। आप कोई खर्च कम करते हैं, कोई सेवा करते हैं, किसी बीमार से मिलने जाते हैं, और लौटते ही वह बात किसी न किसी तरह बातचीत में डाल देते हैं। मुँह बनाए रखने के आजकल कई रूप हैं, और उनमें से एक सबसे सूक्ष्म रूप है हल्की-सी शिकायत: "बहुत व्यस्त हूँ, बहुत थका हूँ।" यीशु आपकी सेवा पर सवाल नहीं उठा रहे, वे रसीद पर सवाल उठा रहे हैं। किसकी सराहना आपके खाते में जमा हो रही है?
आज यही करें: पिछले चौबीस घंटों में आपने जो एक अच्छा काम किया है और जिसका ज़िक्र आप किसी से करना चाहते थे, उसे लिखकर उस कागज़ को फाड़ दें, और परमेश्वर से कहें कि यह अब केवल उनके सामने है। किसी को मत बताइए।
मुख्य पात्र
इस वचन के केंद्र में वह पिता हैं "जो गुप्त में देखते हैं।" ध्यान दीजिए, यीशु यह नहीं कहते कि परमेश्वर गुप्त बातों की जाँच करते हैं, जैसे कोई निरीक्षक। वे कहते हैं कि परमेश्वर स्वयं गुप्त में हैं, यानी वहीं रहते हैं जहाँ कोई कैमरा नहीं पहुँचता, जहाँ आपकी सबसे ईमानदार भूख और सबसे शर्मनाक कमजोरी दोनों पड़ी हैं। यह डरावना भी है और अत्यंत राहत भरा भी। डरावना, क्योंकि दिखावा वहाँ काम नहीं करता। राहत भरा, क्योंकि आपकी सबसे छोटी, अनदेखी वफादारी वहाँ खो नहीं जाती। एक ऐसा परमेश्वर जो अँधेरे में देखते हैं, वही परमेश्वर है जिसके सामने अकेले, बिना गवाह के रोया जा सकता है।
श्रोतागण
पहली सदी के गलील और यहूदिया में धार्मिकता सार्वजनिक थी। गाँव छोटे थे, सब एक-दूसरे को जानते थे, और आराधनालय ही सामाजिक जीवन का केंद्र था। किसने कितना दान दिया, कौन कितनी देर प्रार्थना में खड़ा रहा, किसका चेहरा उपवास से पीला है, यह सब बिना कहे भी सबको पता चल जाता था। सम्मान वहाँ पैसे जितनी असली मुद्रा था। इसलिए यीशु की बात उनके कानों में सिर्फ़ नैतिक सलाह नहीं थी, वह आर्थिक झटका था: तुम जिस मुद्रा में कमा रहे हो, वह स्वर्ग में नहीं चलती। और वह "कोठरी" जिसका ज़िक्र ऊपर हुआ, आम घर में शायद भंडार का एक छोटा कमरा था। यीशु ग़रीबों को यह नहीं कह रहे कि प्रार्थना-कक्ष बनाओ; वे कह रहे हैं कि दरवाज़ा बंद करना सीखो।
अंतर्पाठ
यशायाह 58 में परमेश्वर उन लोगों से बात करते हैं जो उपवास करके शिकायत करते हैं कि उन्हें कुछ नहीं मिला, और उत्तर मिलता है कि जिस उपवास की उन्हें चाहत है वह अन्याय के बंधन खोलना और भूखे को रोटी देना है। यीशु उसी बात को दूसरी दिशा से पकड़ते हैं: वहाँ उपवास का फल पड़ोसी तक न पहुँचना समस्या थी, यहाँ उपवास का प्रदर्शन पड़ोसी तक पहुँच जाना समस्या है। दोनों जगह हृदय ही निशाना है। और इसी अध्याय में आगे यीशु कहते हैं, "जहाँ तेरा धन है वहाँ तेरा मन भी लगा रहेगा।" दिखावटी उपवास इसी वचन का जीवित उदाहरण है: जिसका धन दूसरों की नज़रों में है, उसका मन भी वहीं अटका रहेगा।
चिंतन
आपकी किस आध्यात्मिक आदत के बारे में आपके सबसे करीबी लोग भी नहीं जानते, और यदि कोई भी नहीं है, तो यह किस ओर इशारा करता है?
जब आपके किसी अच्छे काम की किसी ने सराहना नहीं की, तब आपके भीतर जो कड़वाहट उठी, वह किस बात की रसीद माँग रही थी?
पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें
आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।
अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।
चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।
परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास
रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।
नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।
प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।
एक Amazon Associate के रूप में, Faith.network योग्य खरीदारी से आय अर्जित करता है। इससे मंच निःशुल्क बना रहता है।
Matthew 6:16 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
मत्ती 6:16 का क्या अर्थ है?
मत्ती 6:16 किस विषय में है?
मत्ती 6:16 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
मत्ती 6:16 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मत्ती 6:16 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Matthew 6 में आपको क्या स्पर्श करता है?
इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें