मत्ती 9
पाठ
कफरनहूम की एक गली में चार आदमी एक खाट उठाए चले आ रहे हैं, और उस पर पड़ा आदमी हिल भी नहीं सकता। यीशु उससे पहला वाक्य चंगाई का नहीं, क्षमा का कहते हैं: "हे पुत्र, धैर्य रख; तेरे पाप क्षमा हुए।" यहीं से यह पूरा अध्याय खुलता है, जिसमें एक चुंगी लेनेवाला बुलाया जाता है, पापियों के साथ भोजन होता है, उपवास पर बहस छिड़ती है, बारह साल से लहू बहती स्त्री चुपचाप वस्त्र का कोना छूती है, एक सरदार की मरी हुई बेटी उठ खड़ी होती है, दो अंधे "दाऊद की सन्तान" पुकारते हैं, और एक गूँगा बोलने लगता है। अंत में यीशु भीड़ को देखकर तरस खाते हैं, क्योंकि वे बिना चरवाहे की भेड़ों जैसे भटके हुए थे।
मूल बात
इस अध्याय का धड़कता हुआ केंद्र यह है कि परमेश्वर का राज्य किसी शुद्ध, सजे हुए दायरे में नहीं, बल्कि टूटे हुए शरीरों और बदनाम मेजों के बीच आ रहा है। लकवे के मारे हुए को क्षमा देकर यीशु वह अधिकार अपने हाथ में लेते हैं जो केवल परमेश्वर का था, और चंगाई उस दावे का दृश्य प्रमाण बन जाती है। फिर वे होशे का वाक्य उद्धृत करते हैं, "मैं बलिदान नहीं परन्तु दया चाहता हूँ", और इससे साफ हो जाता है कि धार्मिकता का पैमाना अनुष्ठान की सफाई नहीं, बल्कि दया है। यीशु स्वयं को वैद्य कहते हैं, दूल्हा कहते हैं, नया दाखरस लाने वाला कहते हैं। तीनों चित्र एक ही बात कहते हैं: यह मरम्मत नहीं, नई सृष्टि है। और वह नई सृष्टि उन्हीं से शुरू होती है जिन्हें धार्मिक व्यवस्था ने बाहर छोड़ रखा था।
सूत्र जो पूरे शास्त्र में चलता है
यीशु होशे का वाक्य यूँ ही नहीं उद्धृत करते। होशे ने यह बात उस इस्राएल से कही थी जिसकी वेदी धुएँ से भरी थी पर जिसका हृदय खाली था। सदियों बाद वही वाक्य उसी जाति के धर्मगुरुओं पर लौट आता है, और अब उसे कहने वाला वह है जो स्वयं दया की देह है। अध्याय के अंत में मत्ती वह चित्र उठाते हैं जो पुराने नियम में बार-बार लौटता है, बिना चरवाहे की भटकी भेड़ें, और परमेश्वर की प्रतिज्ञा थी कि वे स्वयं अपनी भेड़ों को ढूँढ़ने आएँगे। मत्ती कह रहे हैं: वह आना शुरू हो चुका है। दो अंधों की पुकार "हे दाऊद की सन्तान" इसी सूत्र की गाँठ है, क्योंकि दाऊद की गद्दी का वारिस चरवाहा-राजा ही होना था।
दर्पण
ध्यान दीजिए, इस अध्याय में यीशु पर कोई आरोप उनके चमत्कारों को लेकर नहीं लगता; आरोप इस बात पर लगते हैं कि वे किसके साथ मेज पर बैठते हैं। यह हमारे लिए असुविधाजनक है, क्योंकि हममें से अधिकांश की धार्मिकता ठीक वहीं टिकी है जहाँ फरीसियों की टिकी थी: संगति के चुनाव में। आप किसे रविवार के बाद चाय पर बुलाते हैं और किसका नंबर आप देखकर फोन नहीं उठाते? वह पड़ोसी जिसके घर की कहानियाँ मोहल्ले में बदनाम हैं, वह रिश्तेदार जिसने पैसे को लेकर परिवार तोड़ा, वह सहकर्मी जिसकी जीवनशैली आपको खटकती है। और दूसरी ओर, यदि आप स्वयं वही खाट पर पड़े आदमी हैं, बीमार शरीर, चुकता न हो सकने वाला कर्ज, बारह साल पुरानी कोई शर्म, तो पहला वाक्य आपके लिए है: धैर्य रख।
पहले सुनने वाले
मत्ती जिनके लिए लिख रहे थे, वे मुख्यतः यहूदी विश्वासी थे जो आराधनालय से या तो निकाले जा चुके थे या निकाले जाने के कगार पर थे। उनके कानों में "यह तो परमेश्वर की निन्दा करता है" कोई पुराना ताना नहीं, बल्कि वही आरोप था जो अब उन पर लग रहा था। जब वे पढ़ते कि यीशु ने चुंगी लेनेवाले को बुलाया और उसके घर की मेज पर बैठे, तो उन्हें अपनी मिली-जुली कलीसिया दिखती, जहाँ अन्यजाति और संदिग्ध पृष्ठभूमि के लोग एक साथ रोटी तोड़ रहे थे, और बाहर से लोग वही सवाल पूछ रहे थे: तुम्हारा गुरु ऐसा क्यों करता है? पुरानी मशकों वाली बात उनके लिए सैद्धांतिक नहीं थी। वे स्वयं वह फटी हुई मशक देख चुके थे।
कठिन प्रश्न
"तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है" और "तुम्हारे विश्वास के अनुसार तुम्हारे लिये हो" इस अध्याय के सबसे मीठे और सबसे खतरनाक वाक्य हैं। खतरनाक इसलिए कि हर वह व्यक्ति जो विश्वास से प्रार्थना करता रहा और चंगा नहीं हुआ, इन्हें अपने विरुद्ध सुन सकता है। मैं इसे चिकना नहीं करूँगा। पर ध्यान दीजिए, लकवे के मारे हुए का अपना विश्वास दर्ज ही नहीं है, दूसरों का है; और मरी हुई लड़की के पास कोई विश्वास बचा ही नहीं था। यीशु विश्वास को कीमत की तरह नहीं, हाथ बढ़ाने की तरह देखते हैं, और कभी-कभी वह हाथ किसी और का होता है। जो चंगा नहीं हुआ, उसका विश्वास छोटा नहीं; उसकी सुबह अभी आनी बाकी है।
पृष्ठभूमि
कफरनहूम झील के किनारे बसा बड़ा गाँव था, मछली की गंध, जालों की मरम्मत, और दमिश्क की ओर जाने वाली सड़क पर एक चुंगी की चौकी। वहाँ बैठा मत्ती हेरोदेस अन्तिपास के लिए वसूली करता था, यानी वह अपने ही लोगों की जेब से सत्ता का पेट भरता था; ऐसे आदमी को गवाही देने लायक नहीं माना जाता था। जिस स्त्री का लहू बारह वर्ष से बहता था, वह हर उस व्यक्ति को अशुद्ध कर देती थी जिसे वह छूती, इसीलिए वह पीछे से आई, चुपचाप। सरदार के घर में बाँसुरी बजाने वाले किराए के शोक-कर्मी थे, मृत्यु की सार्वजनिक घोषणा। और शव को छूना सबसे गहरी अशुद्धता थी। यीशु उन तीनों सीमाओं को लाँघते हैं और अशुद्ध नहीं होते; उलटे, शुद्धता उनसे बहकर बाहर आती है।
चिंतन
आपकी मेज पर पिछले छह महीनों में कौन बैठा, और वह सूची आपके बारे में क्या कहती है?
किसकी खाट आप उठा सकते हैं, जब उसका अपना विश्वास फिलहाल काम नहीं कर रहा?
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