बाइबल व्याख्या

नहेम्याह 7

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

दीवार खड़ी है

शहरपनाह अब खड़ी है। बावन दिनों की धूल, पसीना, तलवार एक हाथ में और करनी दूसरे हाथ में, सब कुछ पीछे छूट गया है। फाटक अपनी जगह पर हैं। और नहेम्याह, जो एक साम्राज्य के राजा का प्याऊ था, अब यरूशलेम की ठंडी शाम में खड़ा है और देखता है कि जो शहर उसने बचाया है, वह भीतर से खाली है। "नगर तो लम्बा चौड़ा था, परन्तु उसमें लोग थोड़े थे, और घर नहीं बने थे।" पत्थर हैं, लोग नहीं। दीवारें हैं, जीवन नहीं। और तब वह एक अजीब काम करता है, जो पहली नज़र में उबाऊ लगता है: वह एक पुरानी सूची निकालता है और नाम गिनने लगता है।

पाठ

दीवार बनने के बाद नहेम्याह यरूशलेम की सुरक्षा का प्रबन्ध करता है और अपने भाई हनानी तथा हनन्याह को नगर का अधिकारी नियुक्त करता है। फिर परमेश्वर उसके मन में यह विचार डालता है कि वह लोगों को उनकी वंशावली के अनुसार गिने। उसे बँधुआई से लौटे पहले लोगों की सूची मिलती है, और वह उसी को दर्ज करता है, नाम दर नाम, परिवार दर परिवार, याजक, लेवीय, द्वारपाल, गवैये, और नतीन।

मर्म

यह अध्याय इस बात पर टिका है कि परमेश्वर के लिए संख्याएँ नहीं, नाम मायने रखते हैं। नहेम्याह कह सकता था, "बयालीस हजार लोग लौटे," और आगे बढ़ सकता था। पर वह ऐसा नहीं करता। परोश की सन्तान, शपत्याह की सन्तान, आरह की सन्तान, हर घराना अलग से लिखा गया है। क्यों? क्योंकि बँधुआई ने पहचान मिटाने की कोशिश की थी। बाबेल में लोग संख्या बन जाते हैं, गुलाम बन जाते हैं, "फ़लाँ का दास।" पर परमेश्वर की मण्डली में हर व्यक्ति अपने पिता के नाम से पहचाना जाता है। यह अध्याय दिखाता है कि छुटकारा केवल भौगोलिक नहीं होता, वह पहचान की बहाली भी होता है। तुम कोई नहीं थे, अब तुम फिर से कोई हो।

सामान्य सूत्र

यह गिनती एक और बड़ी गिनती की ओर इशारा करती है। प्रकाशितवाक्य में हम पढ़ते हैं कि मेम्ने की जीवन की पुस्तक में नाम लिखे गए हैं। बँधुआई से लौटने वाले हर घराने का नाम दर्ज है, ठीक वैसे ही जैसे मसीह के लोगों के नाम स्वर्ग में लिखे हैं। और एक कड़वा क्षण भी है: पद 64 में कुछ याजक अपनी वंशावली नहीं ढूँढ़ पाते और याजकपद से निकाल दिए जाते हैं। पुराने नियम में तुम्हारी पहचान तुम्हारे रक्त से आती थी। नए नियम में मसीह का लहू यही करता है, वह हमें एक ऐसी वंशावली देता है जो कोई खो नहीं सकता। "तुम पहले प्रजा ही न थे, परन्तु अब परमेश्वर की प्रजा हो," पतरस लिखता है, और यहीं यह अध्याय अपनी पूर्णता पाता है।

दर्पण

हम बड़ी परियोजनाओं के लोग हैं। दीवारें उठाना हमें आता है, सुरक्षा प्रबन्ध, कार्यक्रम, ढाँचे। पर क्या हम लोगों को नाम से जानते हैं? आपके चर्च में, आपके छोटे समूह में, आपके मोहल्ले में, वह व्यक्ति जो हर रविवार पिछली पंक्ति में बैठता है, क्या आप उसका नाम जानते हैं? नहेम्याह ने दीवार पूरी करने के बाद यह नहीं कहा कि "काम खत्म।" उसने कहा कि अब असली काम शुरू हुआ, लोगों को गिनना, बसाना, जोड़ना। हमारे जीवन में भी यही धोखा है: हम बाहरी सफलता को पूर्णता समझ लेते हैं, जबकि परमेश्वर पूछता है कि भीतर कौन बसा है। आपका घर बड़ा है पर क्या उसमें कोई है? आपकी कलीसिया सुन्दर है पर क्या उसमें कोई पहचाना जाता है?

अन्तर्पाठ

यह अध्याय एज्रा 2 से लगभग शब्दशः मेल खाता है। दो बार यही सूची क्यों? क्योंकि परमेश्वर की स्मृति में कुछ खोता नहीं। जो नाम एज्रा के समय दर्ज हुए, वे नहेम्याह के समय भी दर्ज हैं। और लूका 3 में यीशु की वंशावली इसी परम्परा का चरम है, आदम तक जाती हुई एक ऐसी सूची जो दिखाती है कि परमेश्वर इतिहास के हर धागे को याद रखता है। पद 65 में ऊरीम और तुम्मीम का उल्लेख भी मार्मिक है, वह पुरानी व्यवस्था जो अब चुप हो गई है, पर विश्वास बना हुआ है कि एक दिन उत्तर आएगा।

सन्दर्भ

समय लगभग 445 ईसा पूर्व। फ़ारसी साम्राज्य का दौर। यरूशलेम लगभग डेढ़ सौ साल से खण्डहर था, और जो लोग लौटे थे, वे अल्पसंख्यक थे, चारों ओर से शत्रुओं से घिरे, सम्बल्लत और तोबियाह जैसे लोग हर कदम पर काम रोकने की कोशिश में। दीवार तो बन गई, पर शहर की जनसंख्या इतनी कम थी कि रात को फाटक बन्द रखना और पहरा बिठाना ज़रूरी था। यह विजय का अध्याय नहीं, नाजुक शुरुआत का अध्याय है। एक छोटा समुदाय, एक बड़ा शहर, और एक भारी ज़िम्मेदारी: कैसे इस खाली शहर को फिर से परमेश्वर की प्रजा का घर बनाया जाए।

विवरण

पद 2 पर रुकिए। नहेम्याह अपने भाई हनानी को अधिकारी बनाता है, और साथ में हनन्याह को, क्योंकि वह "सच्चा पुरुष और बहुतेरों से अधिक परमेश्वर का भय माननेवाला था।" यह वाक्य साधारण नहीं है। नहेम्याह भाई-भतीजावाद से बच सकता था, पर वह हनानी को इसलिए नहीं चुनता कि वह भाई है, बल्कि इसलिए जोड़ी बना

Nehemiah में और गहराई से जानें

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The Message of Nehemiah

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Ezra and Nehemiah: An Introduction and Commentary

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Nehemiah 7 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

नहेम्याह 7 का क्या अर्थ है?
शहरपनाह अब खड़ी है। बावन दिनों की धूल, पसीना, तलवार एक हाथ में और करनी दूसरे हाथ में, सब कुछ पीछे छूट गया है। फाटक अपनी जगह पर हैं। और नहेम्याह, जो एक साम्राज्य के राजा का प्याऊ था, अब यरूशलेम की ठंडी शाम में खड़ा है और देखता है कि जो शहर उसने बचाया है, वह भीतर से खाली है। "नगर तो लम्बा चौड़ा था, परन्तु उसमें लोग थोड़े थे, और घर नहीं बने थे।" पत्थर हैं, लोग नहीं। दीवारें हैं, जीवन नहीं। और तब वह एक अजीब काम करता है, जो पहली नज़र में उबाऊ लगता है: वह एक पुरानी सूची निकालता है और नाम गिनने लगता है।
नहेम्याह 7 किस विषय में है?
दीवार बनने के बाद नहेम्याह यरूशलेम की सुरक्षा का प्रबन्ध करता है और अपने भाई हनानी तथा हनन्याह को नगर का अधिकारी नियुक्त करता है। फिर परमेश्वर उसके मन में यह विचार डालता है कि वह लोगों को उनकी वंशावली के अनुसार गिने। उसे बँधुआई से लौटे पहले लोगों की सूची मिलती है, और वह उसी को दर्ज करता है, नाम दर नाम, परिवार दर परिवार, याजक, लेवीय, द्वारपाल, गवैये, और नतीन।
नहेम्याह 7 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यह अध्याय इस बात पर टिका है कि परमेश्वर के लिए संख्याएँ नहीं, नाम मायने रखते हैं। नहेम्याह कह सकता था, "बयालीस हजार लोग लौटे," और आगे बढ़ सकता था। पर वह ऐसा नहीं करता। परोश की सन्तान, शपत्याह की सन्तान, आरह की सन्तान, हर घराना अलग से लिखा गया है। क्यों? क्योंकि बँधुआई ने पहचान मिटाने की कोशिश की थी। बाबेल में लोग संख्या बन जाते हैं, गुलाम बन जाते हैं, "फ़लाँ का दास।" पर परमेश्वर की मण्डली में हर व्यक्ति अपने पिता के नाम से पहचाना जाता है। यह अध्याय दिखाता है कि छुटकारा केवल भौगोलिक नहीं होता, वह पहचान की बहाली भी होता है। तुम कोई नहीं थे, अब तुम फिर से कोई हो।
नहेम्याह 7 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह गिनती एक और बड़ी गिनती की ओर इशारा करती है। प्रकाशितवाक्य में हम पढ़ते हैं कि मेम्ने की जीवन की पुस्तक में नाम लिखे गए हैं। बँधुआई से लौटने वाले हर घराने का नाम दर्ज है, ठीक वैसे ही जैसे मसीह के लोगों के नाम स्वर्ग में लिखे हैं। और एक कड़वा क्षण भी है: पद 64 में कुछ याजक अपनी वंशावली नहीं ढूँढ़ पाते और याजकपद से निकाल दिए जाते हैं। पुराने नियम में तुम्हारी पहचान तुम्हारे रक्त से आती थी। नए नियम में मसीह का लहू यही करता है, वह हमें एक ऐसी वंशावली देता है जो कोई खो नहीं सकता। "तुम पहले प्रजा ही न थे, परन्तु अब परमेश्वर की प्रजा हो," पतरस लिखता है, और यहीं यह अध्याय अपनी पूर्णता पाता है।
नहेम्याह 7 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
हम बड़ी परियोजनाओं के लोग हैं। दीवारें उठाना हमें आता है, सुरक्षा प्रबन्ध, कार्यक्रम, ढाँचे। पर क्या हम लोगों को नाम से जानते हैं? आपके चर्च में, आपके छोटे समूह में, आपके मोहल्ले में, वह व्यक्ति जो हर रविवार पिछली पंक्ति में बैठता है, क्या आप उसका नाम जानते हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Nehemiah 7 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 24

हारीफ की सन्तान, एक सौ बारह।" बस इतना ही। न कोई कहानी, न कोई करतब। फिर भी परमेश्वर ने इन एक सौ बारह लोगों को गिना और उनका नाम अपनी किताब में लिखवा दिया। लौटने वालों की भीड़ में वे खो नहीं गए। तुम भी सोचते हो कि तुम्हारा जीवन बहुत साधारण है, किसी को दिखता नहीं। पर जो गिनती करता है, उसकी नज़र में तुम एक संख्या नहीं, एक नाम हो।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 34

पिता, धन्यवाद कि "दूसरे एलाम की सन्तान बारह सौ चौवन" जैसी सूची भी आपके लिए मायने रखती है। बंधुआई से लौटे हर घराने को आपने गिना और सम्भाला। धन्यवाद कि आज भी हमारा परिवार आपकी दृष्टि से ओझल नहीं, हर नाम आपकी पुस्तक में लिखा है।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 52

पिता, तेरी किताब में उन नामों की भी जगह है जिन्हें कोई नहीं जानता, जो चुपचाप मंदिर की सेवा करते रहे। मुझे भी यही भरोसा दे कि मेरा छोटा सा काम तेरी नज़र से छिपा नहीं है। नाम की भूख नहीं, तेरे साथ रहने की चाह मेरे मन में बढ़ा दे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 64

निर्वासन से लौटे कुछ याजकों के साथ ऐसा हुआ: "इन्होंने अपनी-अपनी वंशावली का पत्र और वंशावलियों में ढूँढ़ा, परन्तु न पाया, इसलिए वे अशुद्ध ठहरकर याजकपद से निकाले गए।" नाम था, पर प्रमाण खो गया था। कितनी बार तुम भी भीतर से ऐसा ही महसूस करते हो, कि तुम्हारा होना साबित नहीं हो पाता। पर ध्यान दो, उन्हें लोगों में से नहीं निकाला गया, सिर्फ सेवा रुकी, और वह भी तब तक जब तक सही याजक न आए। वह याजक आ चुका है, और तुम्हारा नाम उसकी किताब में है।

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