बाइबल व्याख्या

गिनती 1:11

बाइबल
यह वचन SATYAVEDA MINISTRIES द्वारा समर्पित है

पाठ

सीनै के जंगल में, मिलापवाले तम्बू के भीतर, परमेश्वर मूसा को बारह नाम बोलकर गिनवाते हैं, और ग्यारहवीं पंक्ति में यह नाम आता है: "बिन्यामीन के गोत्र में से गिदोनी का पुत्र अबीदान।" बस इतना ही। एक गोत्र, एक पिता, एक बेटा। मनश्शे के गम्लीएल और दान के अहीएजेर के बीच खड़ा एक आदमी, जिसे जनगणना में मूसा और हारून के साथ खड़े होकर अपने गोत्र के पुरुषों को नाम लेकर गिनना है। कल्पना कीजिए उस क्षण की: तम्बू के परदे के पीछे से आवाज़ आती है, और बाहर खेमों में कहीं अबीदान अपने काम में लगा है, अनजान कि उसका नाम अभी-अभी स्वर्ग से पुकारा गया है।

मूल मर्म

यह सूची कोई दफ़्तरी काग़ज़ नहीं है। ध्यान दीजिए कि नाम मूसा ने नहीं चुने; परमेश्वर कहते हैं, "तुम्हारे उन साथियों के नाम ये हैं।" यानी परमेश्वर नाम जानते हैं। वे भीड़ को भीड़ की तरह नहीं देखते। छः लाख से ऊपर की गिनती होने वाली है, और फिर भी शुरुआत होती है एक-एक नाम से, पिता के नाम सहित, गोत्र के नाम सहित। "अबीदान" का अर्थ है "मेरा पिता न्यायी है", और यह नाम उस गोत्र का है जो याकूब का सबसे छोटा बेटा था, सबसे कमज़ोर, बाद में इतिहास में लगभग मिट चुका। फिर भी बिन्यामीन के पास भी वही एक प्रधान है जो यहूदा के पास है। परमेश्वर की गिनती में छोटे का स्थान घटता नहीं। यही अनुग्रह का गणित है: योग्यता नहीं, वाचा।

सूत्र

यह छोटी-सी पंक्ति एक लंबी रस्सी का एक रेशा है। परमेश्वर अपने लोगों को नाम से जानते हैं, और यह बात सीनै पर शुरू नहीं हुई और वहीं ख़त्म भी नहीं हुई। इसी सूची में ऊपर यहूदा का नहशोन खड़ा है, वही नाम जो मत्ती रचित वंशावली में दाऊद और अंततः यीशु मसीह तक पहुँचता है; यानी इस रजिस्टर में मसीह के पुरखे का नाम दर्ज है। और नीचे बिन्यामीन का अबीदान, जिस गोत्र से सदियों बाद पौलुस निकलेगा। परमेश्वर सूचियाँ बनाते हैं क्योंकि वे व्यक्तियों से काम लेते हैं। अच्छा चरवाहा अपनी भेड़ों को नाम लेकर बुलाता है, और अंत में मेम्ने की जीवन की पुस्तक में फिर नाम ही लिखे मिलते हैं। सीनै की यह धूल भरी नामावली उसी पुस्तक की पहली झलक है।

दर्पण

आप जानते हैं कि नंबर बन जाना कैसा लगता है। दफ़्तर में कर्मचारी कोड, अस्पताल में फ़ाइल नंबर, कलीसिया में वह व्यक्ति जो हर रविवार आता है पर जिसका नाम पादरी को याद नहीं। और उल्टा भी सच है: भीतर एक भूख है कि सूची में हमारा नाम थोड़ा ऊपर हो, पहले या दूसरे स्थान पर, ग्यारहवें पर नहीं। अबीदान ग्यारहवाँ है। उस पर कोई उपदेश नहीं होता। फिर भी परमेश्वर उसका नाम, उसके पिता का नाम और उसका काम ठीक-ठीक बोलते हैं। यह आपकी महत्त्वाकांक्षा का इलाज भी है और आपकी गुमनामी का मरहम भी। आज एक काम कीजिए: अपनी मण्डली या मोहल्ले के उस एक व्यक्ति का पूरा नाम, पिता या परिवार के नाम सहित, काग़ज़ पर लिखिए जिसे शायद ही कोई गिनता है, और उस नाम को ज़ोर से बोलकर उसके लिए प्रार्थना कीजिए।

श्रोता

जो लोग यह सूची पहली बार सुन रहे थे, वे कुछ ही महीने पहले मिस्र से निकले थे, जहाँ उन्हें ईंटों के कोटे से गिना जाता था, नाम से नहीं। फ़िरौन की गणना उत्पादन की गणना थी; यहोवा की गणना वाचा की गणना है, विरासत और युद्ध के लिए, यानी स्वतंत्र लोगों की गणना। एक बिन्यामीनी ने जब सुना कि उसके गोत्र का भी एक प्रधान वहाँ तम्बू के सामने खड़ा है, यहूदा और एप्रैम के बराबर, तो उसके सीने में कुछ सीधा हुआ होगा। बाद की पीढ़ियाँ, विशेषकर निर्वासन के बाद के पाठक, इस सूची को और भी गहरे सुनेंगे: हमारा गोत्र मिटा नहीं, हमारा नाम परमेश्वर की किताब में है। नामों का पाठ उनके लिए पहचान-पत्र था।

मुख्य पात्र

गिदोनी का पुत्र अबीदान पूरी बाइबल में कुल चार बार आता है, और एक बार भी बोलता नहीं। वह गिनती करता है, नौवें दिन अपनी भेंट लाता है, कूच के समय अपने गोत्र के आगे चलता है, और फिर चुप हो जाता है। न कोई चमत्कार, न कोई गिरावट, न कोई याद रखी गई ग़लती। वह उस किस्म का आदमी है जिससे कलीसियाएँ चलती हैं और जिसका नाम किसी पत्थर पर नहीं खुदता: भरोसेमंद, उपस्थित, गुमनाम। उसके नाम का अर्थ, "मेरा पिता न्यायी है", उसके जीवन का सारांश बन जाता है, क्योंकि उसकी पूरी पहचान इसी पर टिकी है कि किसने उसे बुलाया। परमेश्वर की नज़र में छिपी हुई वफ़ादारी अदृश्य नहीं होती; वह बस शोर नहीं मचाती।

कठिन प्रश्न

अब वह बात जो इस सूची को कड़वा बना देती है। अध्याय बताता है कि बिन्यामीन के "पैंतीस हजार चार सौ" पुरुष युद्ध के योग्य गिने गए। तेरह अध्याय बाद यही पीढ़ी विश्वास न करने के कारण जंगल में ही मरने की सज़ा पाएगी। यानी यह नामावली, जो इतनी गरिमा से शुरू हुई, बड़े हिस्से में क़ब्रों की सूची बन जाएगी। अबीदान ने शायद कनान कभी नहीं देखा। तो नाम से पुकारे जाने का क्या लाभ, अगर आप रास्ते में ही गिर जाएँ? पाठ इसका उत्तर नहीं देता, और मैं भी गढ़कर नहीं दूँगा। इतना ही कहा जा सकता है: नाम लिखा रहा, देह गिरी तो भी। परमेश्वर की स्मृति हमारी सफलता से लंबी है, और यही वह धागा है जिसे पुनरुत्थान बाद में खींचेगा।

चिंतन

अगर परमेश्वर आज आपका नाम आपके पिता के नाम सहित पुकारें, तो आप किस काम के बीच में पकड़े जाएँगे, और क्या वह काम उस बुलाहट के लायक है?

आपके आसपास कौन "ग्यारहवें स्थान" पर खड़ा है, और आप उसे गिने जाने का एहसास इस सप्ताह कैसे दे सकते हैं?

Numbers में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Numbers

Raymond Brown

Follows Israel through the wilderness and draws out lessons for the journey of faith.

Numbers: An Introduction and Commentary

Gordon Wenham

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Numbers: God's Presence in the Wilderness

Iain Duguid

Preaching the wilderness years with Christ always in view.

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Numbers 1:11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

गिनती 1:11 का क्या अर्थ है?
सीनै के जंगल में, मिलापवाले तम्बू के भीतर, परमेश्वर मूसा को बारह नाम बोलकर गिनवाते हैं, और ग्यारहवीं पंक्ति में यह नाम आता है: "बिन्यामीन के गोत्र में से गिदोनी का पुत्र अबीदान।" बस इतना ही। एक गोत्र, एक पिता, एक बेटा। मनश्शे के गम्लीएल और दान के अहीएजेर के बीच खड़ा एक आदमी, जिसे जनगणना में मूसा और हारून के साथ खड़े होकर अपने गोत्र के पुरुषों को नाम लेकर गिनना है। कल्पना कीजिए उस क्षण की: तम्बू के परदे के पीछे से आवाज़ आती है, और बाहर खेमों में कहीं अबीदान अपने काम में लगा है, अनजान कि उसका नाम अभी-अभी स्वर्ग से पुकारा गया है।
गिनती 1:11 किस विषय में है?
यह छोटी-सी पंक्ति एक लंबी रस्सी का एक रेशा है। परमेश्वर अपने लोगों को नाम से जानते हैं, और यह बात सीनै पर शुरू नहीं हुई और वहीं ख़त्म भी नहीं हुई। इसी सूची में ऊपर यहूदा का नहशोन खड़ा है, वही नाम जो मत्ती रचित वंशावली में दाऊद और अंततः यीशु मसीह तक पहुँचता है; यानी इस रजिस्टर में मसीह के पुरखे का नाम दर्ज है। और नीचे बिन्यामीन का अबीदान, जिस गोत्र से सदियों बाद पौलुस निकलेगा। परमेश्वर सूचियाँ बनाते हैं क्योंकि वे व्यक्तियों से काम लेते हैं। अच्छा चरवाहा अपनी भेड़ों को नाम लेकर बुलाता है, और अंत में मेम्ने की जीवन की पुस्तक में फिर नाम ही लिखे मिलते हैं। सीनै की यह धूल भरी नामावली उसी पुस्तक की पहली झलक है।
गिनती 1:11 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
जो लोग यह सूची पहली बार सुन रहे थे, वे कुछ ही महीने पहले मिस्र से निकले थे, जहाँ उन्हें ईंटों के कोटे से गिना जाता था, नाम से नहीं। फ़िरौन की गणना उत्पादन की गणना थी; यहोवा की गणना वाचा की गणना है, विरासत और युद्ध के लिए, यानी स्वतंत्र लोगों की गणना। एक बिन्यामीनी ने जब सुना कि उसके गोत्र का भी एक प्रधान वहाँ तम्बू के सामने खड़ा है, यहूदा और एप्रैम के बराबर, तो उसके सीने में कुछ सीधा हुआ होगा। बाद की पीढ़ियाँ, विशेषकर निर्वासन के बाद के पाठक, इस सूची को और भी गहरे सुनेंगे: हमारा गोत्र मिटा नहीं, हमारा नाम परमेश्वर की किताब में है। नामों का पाठ उनके लिए पहचान-पत्र था।
गिनती 1:11 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
अब वह बात जो इस सूची को कड़वा बना देती है। अध्याय बताता है कि बिन्यामीन के "पैंतीस हजार चार सौ" पुरुष युद्ध के योग्य गिने गए। तेरह अध्याय बाद यही पीढ़ी विश्वास न करने के कारण जंगल में ही मरने की सज़ा पाएगी। यानी यह नामावली, जो इतनी गरिमा से शुरू हुई, बड़े हिस्से में क़ब्रों की सूची बन जाएगी। अबीदान ने शायद कनान कभी नहीं देखा। तो नाम से पुकारे जाने का क्या लाभ, अगर आप रास्ते में ही गिर जाएँ?
गिनती 1:11 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके आसपास कौन "ग्यारहवें स्थान" पर खड़ा है, और आप उसे गिने जाने का एहसास इस सप्ताह कैसे दे सकते हैं?
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Numbers 1 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 35

मनश्शे के गोत्र में से बत्तीस हज़ार दो सौ गिने गए।" सब गोत्रों में यही सबसे छोटा निकला। फिर भी परमेश्वर ने उसे छोड़ा नहीं, बल्कि नाम लेकर गिना। याद रख, मनश्शे का अर्थ ही है, परमेश्वर ने मुझे मेरा सारा दुख भुला दिया। तू भीड़ में सबसे छोटा लग सकता है, पर उसकी सूची में तू गिना गया है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 49

केवल लेवी के गोत्र की गिनती न करना।" युद्ध के लिए तैयार पुरुषों की सूची में लेवी का नाम ही नहीं आया। बाहर से लगता है वे छूट गए, पर सच यह था कि परमेश्वर ने उन्हें अपने निवास की सेवा के लिए अलग रखा था। कभी तेरा नाम भी उस सूची में नहीं होता जिसमें सब गिने जाते हैं। पूछ: कहीं परमेश्वर ने तुझे किसी और, अधिक निकट काम के लिए अलग नहीं रखा?

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