मत्ती 16:18
पाठ
पतरस के मुँह से निकले उस स्वीकार के ठीक बाद, कि "तू जीविते परमेश्वर का पुत्र मसीह है," यीशु उसके नाम पर एक शब्द-खेल करते हैं और उसे वादे में बदल देते हैं। वे कहते हैं, "तू पतरस है, और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊँगा।" और फिर वह वाक्य जो सदियों से थके हुए विश्वासियों को सँभालता आया है: "अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।" एक ही साँस में तीन बातें हैं: एक आदमी को नया नाम, एक समुदाय की नींव, और मृत्यु की सत्ता के विरुद्ध एक टिकाऊ प्रतिज्ञा। यह वचन किसी संस्था के उद्घाटन की घोषणा नहीं, बल्कि मसीह का अपने काम पर हस्ताक्षर है।
मूल बात
ध्यान दीजिए कि क्रिया किसकी है। "मैं बनाऊँगा।" पतरस नहीं बनाता, चेले नहीं बनाते, कोई समिति नहीं बनाती। और यह "अपनी कलीसिया" है, यीशु की, किसी और की नहीं। यहीं इस वचन का धर्मशास्त्रीय केंद्र है: परमेश्वर की प्रजा मनुष्यों के उद्यम से नहीं, मसीह के कार्य से खड़ी होती है, और जो वे खड़ा करते हैं उसे वे ही सँभालते भी हैं। जिस चट्टान पर यह इमारत टिकी है, वह पतरस का व्यक्तित्व नहीं, क्योंकि कुछ ही पंक्तियों बाद वही पतरस "हे शैतान, मेरे सामने से दूर हो" सुनता है। चट्टान वह सत्य है जो पिता ने स्वर्ग से प्रकट किया, कि यह यीशु ही मसीह हैं। और "अधोलोक के फाटक" का अर्थ यह नहीं कि कलीसिया किसी किले में छिपी बचती रहेगी; फाटक बचाव के लिए होते हैं। मृत्यु का किला घेरा जा रहा है, और वह टिकेगा नहीं।
सूत्र
इस वादे को समझने के लिए अगली ही पंक्तियाँ पढ़िए। वचन 21 में यीशु बताने लगते हैं कि उन्हें यरूशलेम जाकर दुःख उठाना, मारा जाना और तीसरे दिन जी उठना है। यानी "मैं अपनी कलीसिया बनाऊँगा" कोई संगठनात्मक योजना नहीं, बल्कि क्रूस और खाली कब्र की ओर इशारा है। जिस चट्टान पर यह इमारत खड़ी होगी, वह मसीह का वही कार्य है।
पुराने नियम में परमेश्वर दाऊद से कहते हैं कि तू मेरे लिए घर नहीं बनाएगा, मैं तेरा घर बनाऊँगा। वही उलटफेर यहाँ दोहराया जाता है। मनुष्य परमेश्वर के लिए मंदिर खड़ा करना चाहता है; परमेश्वर स्वयं अपने लिए जीवित पत्थरों की प्रजा खड़ी करते हैं। और मृत्यु के फाटकों को तोड़ने वाला पहला व्यक्ति स्वयं वही है जो यह वादा कर रहा है।
दर्पण
यह वचन उस डर को छूता है जिसे हम प्रार्थना में भी स्वीकार नहीं करते। आपकी मंडली में पिछले साल से कम लोग आ रहे हैं। आपका बेटा अब विश्वास की बातों पर हँसता है। आपके छोटे समूह में दो लोगों की नौकरी गई और एक का कैंसर लौट आया, और आपको लगने लगा है कि सब कुछ आपके प्रयास पर टिका है, कि अगर आपने हार मानी तो यह सब बिखर जाएगा। यह गर्व और भय का वही मिश्रण है जो पतरस में भी था, जिसने थोड़ी देर बाद प्रभु को रास्ता दिखाने की कोशिश की।
यीशु आपको इस बोझ से मुक्त करते हैं: इमारत उनकी है। आज एक काम कीजिए: काग़ज़ पर उस एक व्यक्ति या स्थिति का नाम लिखिए जिसके बारे में आप हार मान चुके हैं, और उस नाम के ऊपर ज़ोर से बोलिए, "अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।"
अंतर्पाठ
यशायाह 28 में परमेश्वर कहते हैं कि वे सिय्योन में एक परखा हुआ कोने का पत्थर, एक स्थिर नींव रखेंगे, और जो उस पर विश्वास करेगा वह घबराएगा नहीं। यीशु का "इस पत्थर पर" उसी भविष्यवाणी की गूँज है: नींव परमेश्वर रखते हैं, मनुष्य नहीं।
दूसरी गूँज इसी अध्याय में है। वचन 4 में यीशु कहते हैं कि इस पीढ़ी को "योना के चिन्ह को छोड़ कोई और चिन्ह उन्हें न दिया जाएगा।" योना तीन दिन गहराई में रहा और जीवित निकला। यही वह चिन्ह है जिस पर कलीसिया टिकी है। मृत्यु के फाटक इसलिए प्रबल नहीं होंगे क्योंकि मसीह उनके भीतर गए और बाहर निकल आए। इफिसियों 2 इसी को खोलता है: प्रेरितों की नींव, पर कोने का पत्थर स्वयं मसीह।
संदर्भ
यह बातचीत कैसरिया फिलिप्पी में होती है, गलील की परिचित ज़मीन से उत्तर में, एक ऐसे इलाक़े में जहाँ यहूदी कम और अन्यजाति अधिक थे। वहाँ एक विशाल चट्टान की दीवार है जिसके नीचे एक गहरी गुफा से पानी फूटता था; स्थानीय लोग उसे पाताल का द्वार मानते थे और वहाँ पान देवता की पूजा होती थी। पास ही हेरोदेस फिलिप्पुस ने सम्राट के सम्मान में मंदिर बनवाया था।
इस दृश्य की कल्पना कीजिए: एक घुमंतू रब्बी, बारह साधारण आदमी, मूर्तियों और साम्राज्य की ताक़त के बीच खड़े होकर कहते हैं, मैं अपनी कलीसिया बनाऊँगा। यह उस समय किसी को भी हास्यास्पद लगता। और यही इस वचन की धार है।
एक बारीकी
"कलीसिया" के लिए यूनानी शब्द है एक्लेसिया, जिसका अर्थ है बुलाई हुई सभा। यह शब्द यीशु के सुननेवालों के लिए नया नहीं था: यूनानी पुराने नियम में यही शब्द इस्राएल की उस मंडली के लिए इस्तेमाल होता है जो सीनै पर्वत के सामने इकट्ठी हुई थी।
इसलिए यीशु कोई नई संस्था की घोषणा नहीं कर रहे। वे कह रहे हैं कि परमेश्वर की वही पुरानी, बुलाई हुई प्रजा अब उनके चारों ओर नए सिरे से इकट्ठी हो रही है, और इस बार इकट्ठा करनेवाली आवाज़ पर्वत से नहीं, बल्कि उस व्यक्ति से आती है जो उनके सामने खड़ा है। जो मूसा के ज़माने में परमेश्वर करते थे, वह यीशु अपने हाथ में ले रहे हैं। "अपनी कलीसिया" इसलिए एक छिपा हुआ दावा है कि वे कौन हैं।
चिंतन
आपके विश्वास की नींव इस समय वास्तव में किस पर टिकी है: उस सत्य पर जो पिता ने मसीह के विषय में प्रकट किया, या आपके अपने प्रयास, अनुशासन और सफलता पर?
अगर मृत्यु के फाटक सचमुच प्रबल नहीं होंगे, तो आपके जीवन की कौन-सी एक चिंता आज थोड़ी छोटी हो जानी चाहिए?
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Matthew 16:18 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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मत्ती 16:18 का क्या अर्थ है?
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Matthew 16 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
हे प्रभु, मेरे मन को सतर्क रख। छोटी छोटी बुरी बातें, गलत सोच और झूठी शिक्षाएँ चुपके से भीतर आ जाती हैं और सब कुछ बदल देती हैं। मुझे विवेक दे कि पहचान सकूँ क्या मुझे भीतर लेना है और क्या नहीं। तेरी सच्चाई में मुझे थामे रख।
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