गिनती 21
पाठ
अराद के कनानी राजा से भिड़ंत के बाद इस्राएल एदोम के चारों ओर घूमकर चलता है, और रास्ते की लम्बाई उनके मुँह से कड़वाहट निकाल लाती है: न रोटी, न पानी, और जो मन्ना है वह "निकम्मी रोटी" है। परमेश्वर विषैले साँप भेजते हैं, लोग अपना पाप मानते हैं, और मूसा को पीतल का साँप खम्भे पर लटकाने का आदेश मिलता है; जो डसा हुआ उसकी ओर देखता है, वह जीवित बचता है। फिर अध्याय अचानक स्वर बदलता है: पड़ावों की सूची, कुएँ का एक गीत, और सीहोन तथा ओग पर विजय, जिससे यह भटकती पीढ़ी पहली बार किसी देश की अधिकारी बनती है।
मूल बात
ध्यान दीजिए कि परमेश्वर साँपों को हटाते नहीं। लोग यही माँगते हैं, "यहोवा से प्रार्थना कर कि वह साँपों को हम से दूर करे," और उत्तर में मिलता है एक खम्भे पर लटका हुआ साँप। डंक बना रहता है, जहर बना रहता है, बस देखने भर से जीवन मिलता है। यह अनुग्रह का सबसे नग्न रूप है: जो चीज मार रही थी, उसी की छवि में चंगाई रखी गई, और मनुष्य के हाथ में करने को कुछ नहीं बचा, केवल आँख उठाना। पौलुस इसी घटना को याद करते हुए कहते हैं कि इस्राएल ने मसीह की परीक्षा की (1 कुरिन्थियों 10:9); यानी उनकी शिकायत केवल भोजन की शिकायत नहीं थी, वह उस दान के प्रति तिरस्कार था जिससे वे रोज जीते थे।
जोड़ने वाला सूत्र
यूहन्ना 3:14 में यीशु नीकुदेमुस से इस कहानी को अपने ऊपर लगाते हैं: जैसे मूसा ने साँप को ऊँचे पर चढ़ाया, वैसे ही मनुष्य के पुत्र को ऊँचे पर चढ़ाया जाना अवश्य है। यह तुलना चौंकाने वाली है। यीशु स्वयं को चंगे हुए लोगों से नहीं, बल्कि उस शापित वस्तु से जोड़ते हैं जो खम्भे पर टँगी थी। क्रूस पर वे हमारे जहर की छवि बन जाते हैं, और जो देखता है वह जीता है। अध्याय का दूसरा भाग भी सूत्र में बँधा है: सीहोन और ओग पर विजय इस्राएल के गीतों में सदा के लिए बस गई, उस स्मृति के रूप में कि परमेश्वर ने एक भूमिहीन भीड़ को देश दिया। शिकायत करने वाली पीढ़ी को भी विरासत मिलती है, क्योंकि वादा उनकी योग्यता पर नहीं टिका।
दर्पण
"हमारे प्राण इस निकम्मी रोटी से दुःखित हैं।" यह वाक्य चुभता है, क्योंकि वह चमत्कार के बारे में कहा गया है। वही नौकरी जो दस साल से चल रही है, वही विवाह, वही छोटी कलीसिया, वही तनख्वाह जो पूरी पड़ जाती है पर कभी बचती नहीं; रोज का मन्ना आखिर में उबाऊ लगने लगता है, और उबाऊ चीजों को हम मन ही मन "निकम्मी" कह देते हैं। और एदोम के चारों ओर का घुमाव भी जाना-पहचाना है: वह रास्ता जो छोटा होने की जगह लम्बा हो गया, वह प्रार्थना जिसका उत्तर देर से आ रहा है। आज ही एक काम कीजिए: कागज पर वह एक चीज लिखिए जिसे आपने हाल में मन में "निकम्मी" ठहराया है, और उसका नाम लेकर ऊँची आवाज में परमेश्वर को धन्यवाद दीजिए।
संदर्भ
चालीस साल लगभग पूरे हो चुके हैं। हारून की मृत्यु अभी होर पहाड़ पर हुई है, मिस्र से निकली पीढ़ी लगभग समाप्त है, और एदोम ने रास्ता देने से इनकार कर दिया है। इस्राएल एक भूमिहीन भीड़ है जो दूसरों के देश से गुजरने की अनुमति माँगती है, और मरुभूमि में पानी तथा खेतों के अधिकार जीवन-मरण का प्रश्न हैं; इसीलिए सीहोन को भेजा गया संदेश इतना सावधान है: "न किसी कुएँ का पानी पीएँगे; और… सड़क ही से चले जाएँगे।" अध्याय में दो पुराने काव्य-अंश उद्धृत हैं, "यहोवा के संग्राम नामक पुस्तक" और हेशबोन पर बना व्यंग्य-गीत, जो दिखाते हैं कि यह वृत्तांत उस समय की जीवित स्मृति और गीतों से बुना गया है। मन्नत में माँगा गया "सत्यानाश" भी उसी युग की कठोर युद्ध-भाषा है।
एक बारीकी
बैर के कुएँ का गीत आसानी से छूट जाता है। "हे कुएँ, उमड़ आ" गाते हुए लोग खुद खोदते हैं, "अपने सोंटों और लाठियों से।" इसी पुस्तक में कुछ ही पहले पानी के लिए झगड़ा हुआ था, जहाँ मूसा ने क्रोध में लाठी से चट्टान पर मारा और उसका मूल्य चुकाया। वही लाठी, वही जरूरत, पर यहाँ स्वर बदला हुआ है: मारना नहीं, खोदना; बड़बड़ाना नहीं, गाना। परमेश्वर कहते हैं, "मैं उन्हें पानी दूँगा," और लोग गाते-गाते मिट्टी हटाते हैं। दान और परिश्रम यहाँ एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। साँपों वाले प्रसंग के ठीक बाद यह छोटा गीत बताता है कि चंगाई पाई हुई मंडली कैसी दिखती है।
कठिन प्रश्न
सबसे असहज बात यह है कि साँप भी परमेश्वर ने भेजे और चंगाई भी उन्होंने दी। एक ही हाथ से घाव और मरहम। पाठ इसे समझाने की कोशिश नहीं करता, और हमें भी इसे चिकना नहीं करना चाहिए: परमेश्वर का न्याय काल्पनिक नहीं है, और उनकी करुणा न्याय के बावजूद नहीं बल्कि न्याय के बीच से आती है। इससे जुड़ी एक और कड़वी बात है: सदियों बाद यही पीतल का साँप इस्राएल में मूर्ति बन गया और राजा हिजकिय्याह को उसे तोड़ना पड़ा। जो चिह्न एक दिन जीवन देता है, वही अगले युग में ताबीज बन सकता है, यदि हम उसकी ओर देखना छोड़कर उसे अपने हाथ में पकड़ लें। क्रूस के साथ भी यह हो सकता है, और होता है।
चिंतन
आपके जीवन का कौन-सा मन्ना आपको इस समय "निकम्मी रोटी" लगता है, और यह तिरस्कार आपके बारे में क्या बताता है?
आपकी आस्था में क्या कुछ ऐसा है जो कभी जीवन देता था, पर अब आपके हाथ का ताबीज बन गया है?
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Numbers 21 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
फिर इस्राएलियों ने कूच किया, और ओबोत में डेरे खड़े किए।" ताँबे के साँप के उस बड़े चमत्कार के तुरन्त बाद यही एक छोटी सी पंक्ति। न कोई आवाज़, न कोई चिन्ह, बस तम्बू उखाड़ना और आगे चलना। तेरे जीवन के वे साधारण दिन भी परमेश्वर की किताब में लिखे हैं। हर कदम गिना गया है, चाहे तुझे कुछ खास महसूस न हो।
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