बाइबल व्याख्या

भजन संहिता 144

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

यह पाठ

दाऊद उस परमेश्वर की स्तुति से शुरू करता है जो उसकी उँगलियों तक को लड़ाई का अभ्यास कराता है, और फिर अचानक ठिठककर पूछता है: "मनुष्य क्या है कि तू उसकी सुधि लेता है?" उत्तर कठोर है, मनुष्य साँस भर है, ढलती हुई छाया। इसी टूटी हुई हैसियत से वह पुकारता है कि परमेश्वर स्वर्ग को झुकाकर उतर आएँ, पहाड़ों को छुएँ, बिजली कड़काएँ, और उसे उन परदेशियों के हाथ से खींच निकालें जिनका दाहिना हाथ झूठ का दाहिना हाथ है। अंत में स्वर बदल जाता है: युद्ध की भाषा छूटकर घर की भाषा बन जाती है, बढ़ते हुए बेटे, महल के खम्भों जैसी बेटियाँ, भरे हुए खत्ते, हजारों हजार भेड़-बकरियाँ, और चौकों में रोना-पीटना नहीं। धन्य वह प्रजा जिसका परमेश्वर यहोवा है।

मूल बात

इस भजन का हृदय दो असमान चीज़ों की टक्कर में है: एक ओर वह जो चट्टान है, गढ़ है, ऊँचा स्थान है; दूसरी ओर वह जो साँस भर है। और आश्चर्य यह नहीं कि परमेश्वर बड़े हैं, आश्चर्य यह है कि वे झुकते हैं। दाऊद परमेश्वर की महिमा की गिनती इसलिए नहीं करता कि अपनी लघुता में डूब जाए, बल्कि इसलिए कि उसी लघुता से माँग सके। ध्यान दीजिए, वह अपने राजपद, अपने अभिषेक, अपनी सेना का हवाला नहीं देता; वह "अपने दास दाऊद" कहता है और बस। यही अनुग्रह की व्याकरण है। जहाँ हम अपनी योग्यता का ब्यौरा देना चाहते हैं, वहाँ भजनकार अपनी क्षणभंगुरता का ब्यौरा देता है, और उसी को प्रार्थना का आधार बना लेता है। परमेश्वर की करुणा नाप-तौल पर नहीं, उनके स्वभाव पर टिकी है।

सूत्र

पद 5 की प्रार्थना ठहरकर पढ़िए: "हे यहोवा, अपने स्वर्ग को नीचा करके उतर आ!" यह सीनै पर्वत की भाषा है, धुआँ उठते पहाड़, बिजली, तीर। दाऊद जिस उतरने की माँग करता है, वह आया, पर उस रूप में नहीं। स्वर्ग झुका, परन्तु पहाड़ धुआँ नहीं उठा; एक बच्चा जन्मा। परमेश्वर ने शत्रुओं को तितर-बितर करने के बजाय स्वयं शत्रुओं के हाथ में पड़ना चुना। यह भजन की माँग को रद्द नहीं करता, उसे गहरा करता है। और पद 9 का "नया गीत" इसी सूत्र का दूसरा सिरा है: प्रकाशितवाक्य में वही नया गीत मेम्ने के सामने गाया जाता है, उसके लिए जो वध किया गया। दाऊद दस तारवाली सारंगी पर जो गीत छेड़ता है, उसका पूरा राग सिंहासन के सामने ही सुनाई देगा।

दर्पण

यह भजन आपकी दो विपरीत आदतों को उजागर करता है। एक ओर वह भरोसा जो हम अपने प्रशिक्षित हाथों पर करते हैं, अपने अनुभव पर, उस कौशल पर जो बीस साल में कमाया, जबकि पद 1 कहता है कि अभ्यास कराने वाला कोई और है। दूसरी ओर वह डर जो रात में जागता है: शरीर ढल रहा है, नौकरी में कोई झूठ बोलकर आगे निकल गया, बच्चे बड़े हो रहे हैं और आप उन्हें बचा नहीं सकते। "मनुष्य तो साँस के समान है" इस डर को झूठा नहीं कहता, सच कहता है, और फिर भी प्रार्थना करने से नहीं रोकता। दाऊद अपनी क्षणभंगुरता को स्वीकारकर घर के लिए माँगने लगता है।

आज यह कीजिए: कागज़ पर अपने घर के लोगों के नाम लिखिए, हर नाम के आगे एक ठोस चीज़ जो आप उनके लिए चाहते हैं, और फिर पद 15 ऊँची आवाज़ में पढ़िए।

एक बारीकी

पद 1 में दो शब्द हैं, हाथ और उँगलियाँ। हाथ समझ में आता है, तलवार हाथ में पकड़ी जाती है। पर उँगलियाँ? धनुष की डोरी उँगलियों के पोरों से खींची जाती है, और सारंगी के तार भी उन्हीं से बजते हैं। भजनकार कहता है कि परमेश्वर की शिक्षा सिर्फ बड़े निर्णयों तक नहीं जाती, वह जोड़ों तक, नसों तक, उस बारीक हुनर तक उतरती है जिसे हम "अपनी" कुशलता कहते हैं। और यही परमेश्वर पद 5 में स्वर्ग झुकाने के लिए पुकारे जाते हैं। जो पूरा आकाश नीचा कर सकते हैं, वे एक उँगली के पोर को सिखाने में लगे हैं। बड़ेपन और बारीकी का यह मेल ही इस भजन का स्वर है।

पृष्ठभूमि

दाऊद का संसार वह है जहाँ राजा स्वयं युद्ध में जाता है और प्रजा की सुरक्षा उसके शरीर से बँधी होती है। "महासागर" यहाँ पानी नहीं, अराजकता का चित्र है; प्राचीन पूर्व में गहरा जल उस शक्ति का प्रतीक था जिसे मनुष्य वश में नहीं कर सकता। "परदेशी" वे पड़ोसी राज्य हैं जिनके साथ संधियाँ दाहिना हाथ उठाकर की जाती थीं, और जिन्हें तोड़ना रोज़ की राजनीति थी। पद 12 से स्वर "मेरा" से "हमारा" हो जाता है: यह राजा की व्यक्तिगत प्रार्थना मंदिर की सामूहिक प्रार्थना बन जाती है। भरे खत्ते, लदे बैल, हजारों भेड़-बकरियाँ, ये विलासिता नहीं, जीवित रहने की शर्तें थीं। और "चौकों में रोना-पीटना" वह विलाप है जो लूट या घेराबंदी के बाद गलियों में उठता था।

कठिन प्रश्न

पद 14 माँगता है कि कोई विघ्न न हो, कहीं बँधुआई में जाना न पड़े, चौकों में रोना-पीटना न हो। पर दाऊद के अपने घर में रोना-पीटना हुआ, और उसके वंश की गलियों में एक दिन बाबेल की ओर जाते बँधुओं की कतार लगी। हम भी यह प्रार्थना करते हैं, और फिर अस्पताल के गलियारे में खड़े रह जाते हैं। तो क्या यह भजन कुछ ऐसा वादा करता है जो वह निभा नहीं सकता?

ध्यान दीजिए, पद 12 से 14 वादे नहीं, इच्छाएँ हैं, माँगें हैं। और पद 15 धन्यता की परिभाषा खत्तों से नहीं करता: "जिस राज्य का परमेश्वर यहोवा है, वह क्या ही धन्य है।" यह उत्तर आसान नहीं है। भजन हमें ठोस भलाई माँगना सिखाता है और उसका परिणाम परमेश्वर के हाथ में छोड़ना भी। दाऊद बिजली माँगता है और उसे जीवन भर की प्रार्थना मिलती है। इस अंतर में हमें रहना सीखना है।

चिंतन

पद 4 पढ़कर आप किस चीज़ पर अपनी पकड़ ढीली कर सकते हैं, और किस चीज़ के लिए और साहस से माँग सकते हैं?

"अपने स्वर्ग को नीचा करके उतर आ" की प्रार्थना का उत्तर आपको किस रूप में मिला है, और क्या आपने उसे पहचाना?

Psalms में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Songs of Jesus

Timothy Keller

A year of daily devotions through every psalm, ideal alongside your reading.

Psalms 1-72

Derek Kidner

Kidner's crisp notes have helped generations pray the psalms.

Psalms 73-150

Derek Kidner

The second half of the psalter with the same loved precision.

Reflections on the Psalms

C.S. Lewis

Lewis thinking out loud about praise, cursing psalms and joy.

Psalms Volume 1

Gerald Wilson

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.

यह व्याख्या साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

Psalms 144 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

भजन संहिता 144 का क्या अर्थ है?
दाऊद उस परमेश्वर की स्तुति से शुरू करता है जो उसकी उँगलियों तक को लड़ाई का अभ्यास कराता है, और फिर अचानक ठिठककर पूछता है: "मनुष्य क्या है कि तू उसकी सुधि लेता है?" उत्तर कठोर है, मनुष्य साँस भर है, ढलती हुई छाया। इसी टूटी हुई हैसियत से वह पुकारता है कि परमेश्वर स्वर्ग को झुकाकर उतर आएँ, पहाड़ों को छुएँ, बिजली कड़काएँ, और उसे उन परदेशियों के हाथ से खींच निकालें जिनका दाहिना हाथ झूठ का दाहिना हाथ है। अंत में स्वर बदल जाता है: युद्ध की भाषा छूटकर घर की भाषा बन जाती है, बढ़ते हुए बेटे, महल के खम्भों जैसी बेटियाँ, भरे हुए खत्ते, हजारों हजार भेड़-बकरियाँ, और चौकों में रोना-पीटना नहीं। धन्य वह प्रजा जिसका परमेश्वर यहोवा है।
भजन संहिता 144 किस विषय में है?
पद 5 की प्रार्थना ठहरकर पढ़िए: "हे यहोवा, अपने स्वर्ग को नीचा करके उतर आ!" यह सीनै पर्वत की भाषा है, धुआँ उठते पहाड़, बिजली, तीर। दाऊद जिस उतरने की माँग करता है, वह आया, पर उस रूप में नहीं। स्वर्ग झुका, परन्तु पहाड़ धुआँ नहीं उठा; एक बच्चा जन्मा। परमेश्वर ने शत्रुओं को तितर-बितर करने के बजाय स्वयं शत्रुओं के हाथ में पड़ना चुना। यह भजन की माँग को रद्द नहीं करता, उसे गहरा करता है। और पद 9 का "नया गीत" इसी सूत्र का दूसरा सिरा है: प्रकाशितवाक्य में वही नया गीत मेम्ने के सामने गाया जाता है, उसके लिए जो वध किया गया। दाऊद दस तारवाली सारंगी पर जो गीत छेड़ता है, उसका पूरा राग सिंहासन के सामने ही सुनाई देगा।
भजन संहिता 144 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज यह कीजिए: कागज़ पर अपने घर के लोगों के नाम लिखिए, हर नाम के आगे एक ठोस चीज़ जो आप उनके लिए चाहते हैं, और फिर पद 15 ऊँची आवाज़ में पढ़िए।
भजन संहिता 144 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
दाऊद का संसार वह है जहाँ राजा स्वयं युद्ध में जाता है और प्रजा की सुरक्षा उसके शरीर से बँधी होती है। "महासागर" यहाँ पानी नहीं, अराजकता का चित्र है; प्राचीन पूर्व में गहरा जल उस शक्ति का प्रतीक था जिसे मनुष्य वश में नहीं कर सकता। "परदेशी" वे पड़ोसी राज्य हैं जिनके साथ संधियाँ दाहिना हाथ उठाकर की जाती थीं, और जिन्हें तोड़ना रोज़ की राजनीति थी। पद 12 से स्वर "मेरा" से "हमारा" हो जाता है: यह राजा की व्यक्तिगत प्रार्थना मंदिर की सामूहिक प्रार्थना बन जाती है। भरे खत्ते, लदे बैल, हजारों भेड़-बकरियाँ, ये विलासिता नहीं, जीवित रहने की शर्तें थीं। और "चौकों में रोना-पीटना" वह विलाप है जो लूट या घेराबंदी के बाद गलियों में उठता था।
भजन संहिता 144 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
ध्यान दीजिए, पद 12 से 14 वादे नहीं, इच्छाएँ हैं, माँगें हैं। और पद 15 धन्यता की परिभाषा खत्तों से नहीं करता: "जिस राज्य का परमेश्वर यहोवा है, वह क्या ही धन्य है।" यह उत्तर आसान नहीं है। भजन हमें ठोस भलाई माँगना सिखाता है और उसका परिणाम परमेश्वर के हाथ में छोड़ना भी। दाऊद बिजली माँगता है और उसे जीवन भर की प्रार्थना मिलती है। इस अंतर में हमें रहना सीखना है।

Psalms 144 में आपको क्या स्पर्श करता है?

इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।

अध्ययन टूल में खोलें

अस्वीकरण: Faith.network बाइबल की व्याख्याएँ तैयार करने के लिए स्वचालित भाषा मॉडल का उपयोग करता है। हम धर्मशास्त्रीय दृष्टि से सही रहने का पूरा प्रयास करते हैं, फिर भी यह सॉफ़्टवेयर त्रुटि कर सकता है। इस साधन को अपने निजी बाइबल अध्ययन और कलीसिया के संगति जीवन का स्थान लेने वाला न समझें, बल्कि उनके सहायक के रूप में प्रयोग करें।

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network

हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव
कंपनी?