बाइबल व्याख्या

भजन संहिता 40

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

गड्ढा, दलदल, और फिर चट्टान: भजन 40 की शुरुआत ही एक ऐसे आदमी की गवाही है जिसे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसकने का अनुभव है और जिसे फिर से खड़ा किया गया। दाऊद बताता है कि उसने धीरज से यहोवा की बाट जोही, और परमेश्वर ने "मेरी ओर झुककर मेरी दुहाई सुनी"; उसके मुँह में एक नया गीत रखा गया, ऐसा गीत जिसे सुनकर और लोग भी भरोसा करने लगेंगे। इसके बाद भजन एक अनपेक्षित मोड़ लेता है: बलिदानों से परमेश्वर प्रसन्न नहीं होते, कान खोले गए हैं, और उत्तर है "देख, मैं आया हूँ।" फिर, ठीक जब हम समापन की अपेक्षा करते हैं, आवाज़ टूट जाती है: अधर्म के काम सिर के बालों से भी अधिक हैं, शत्रु "आहा, आहा" कह रहे हैं, और प्रार्थना बदल जाती है, "हे यहोवा, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर!"

मर्म

इस भजन की धर्मशास्त्रीय रीढ़ इसके क्रम में है, और वह क्रम अनुग्रह का क्रम है। पहले परमेश्वर झुकते हैं, फिर मनुष्य उठता है; पहले उद्धार, फिर आराधना; पहले कान खोले जाते हैं, फिर "मैं आया हूँ" कहा जाता है। समर्पण उद्धार का मूल्य नहीं, उसका फल है। और इसीलिए पद 6 इतना चुभता है: मेलबलि, अन्नबलि, होमबलि, पापबलि, वाचा की पूरी बलि-व्यवस्था यहाँ रद्द नहीं की जा रही, बल्कि अपनी जगह पर बिठाई जा रही है। परमेश्वर पशु नहीं, व्यक्ति चाहते हैं; व्यवस्था केवल पत्थर पर नहीं, "मेरे अन्तःकरण में बसी है।" दूसरी बात इतनी ही महत्वपूर्ण है: यह वही आदमी है जो चट्टान पर खड़ा है और फिर भी कहता है, "मैं तो दीन और दरिद्र हूँ।" उद्धार पाया हुआ जन आत्मनिर्भर नहीं होता; वह हर सुबह फिर से परमेश्वर की "करुणा और सत्यता" पर निर्भर जीता है, क्योंकि परमेश्वर की धार्मिकता यहाँ मापदंड से अधिक उनका बचाने वाला कार्य है।

सूत्र

पद 6 से 8 इब्रानियों 10 में मसीह के मुँह में रखे गए हैं, और यह कोई ज़बरदस्ती की खींचतान नहीं है। पूरे पुराने नियम में बलिदान-व्यवस्था एक ऐसी व्यवस्था थी जो अपने ही अधूरेपन की ओर इशारा करती रही: हर साल फिर वही बैल, वही बकरा, वही लहू। भजन 40 भीतर से ही उस व्यवस्था की सीमा पहचान लेता है और उसकी जगह एक व्यक्ति रख देता है, "देख, मैं आया हूँ।" जो दाऊद आंशिक रूप से कह सका, यीशु मसीह ने पूरी तरह जीया: वे स्वयं वह आज्ञाकारी बलि बने जिनके अन्तःकरण में व्यवस्था सचमुच बसी थी। और ध्यान दीजिए कि यह गीत गड्ढे से निकाले गए आदमी का है, न कि किसी निर्दोष नायक का। छुटकारे की पूरी कहानी यहीं मुड़ती है: परमेश्वर वस्तुएँ नहीं, समर्पित जीवन माँगते हैं, और अंत में वह जीवन वे स्वयं देते हैं।

दर्पण

"मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा" वाक्य पढ़ने में सुंदर है, जीने में क्रूर। जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है, जिसका बेटा तीन साल से फ़ोन नहीं उठाता, जिसका कर्ज़ हर महीने थोड़ा और गहरा होता है, वह जानता है कि दलदल की कीच में समय बहुत धीरे बहता है। यह भजन आपसे यह नहीं कहता कि आप गड्ढे को गड्ढा न कहें। पर यह एक और चीज़ बेपर्दा करता है: हममें से बहुत से लोग बलिदान देना पसंद करते हैं, क्योंकि बलिदान नियंत्रित रहता है। सेवा, चंदा, उपस्थिति, सब कुछ मापा जा सकता है। खुला कान मापा नहीं जा सकता; वह हमें परमेश्वर के हाथ में असुरक्षित छोड़ देता है। और पद 9 चुभता है: हम अक्सर अपनी गवाही मन ही में रखते हैं, शालीनता के नाम पर। आज किसी एक व्यक्ति को, आमने-सामने या संदेश में, दो वाक्यों में बताइए कि परमेश्वर ने आपको किस गड्ढे से निकाला है। नाम लेकर, आज ही।

अन्तर्पाठ

पद 13 से 17 लगभग शब्दशः भजन 70 के रूप में दोबारा मिलते हैं, एक अलग गीत के तौर पर। यह छोटी-सी बात बड़ी है: इस्राएल ने इस पुकार को अलग करके बार-बार गाया, मानो कह रहा हो कि उद्धार की गवाही के बाद भी सहायता की गुहार अपनी जगह बनी रहती है। दूसरा प्रतिध्वनि शमूएल की वह चेतावनी है जो उसने शाऊल को दी थी, कि आज्ञा मानना बलिदान से उत्तम है। भजन 40 उसी सत्य को शिकायत के रूप में नहीं, आराधना के रूप में गाता है। पैगम्बरों की तीखी आवाज़ और भजनकार की कोमल आवाज़ यहाँ एक ही बात कह रही हैं: परमेश्वर वेदी पर से नहीं, हृदय से शुरू करते हैं

प्रश्न

अगर पद 7 और 8 मसीह के हैं, तो पद 12 का क्या करें? "मेरे अधर्म के कामों ने मुझे आ पकड़ा" यीशु मसीह के मुँह में नहीं बैठता, और इसे चतुराई से "उन्होंने हमारे पाप अपने ऊपर ले लिए" कहकर तुरंत सुलझा देना पाठ के साथ ज़ोर-ज़बरदस्ती है। ईमानदार उत्तर यह है कि यह भजन पहले दाऊद का है, एक असली, पापी, टूटे हृदय वाले आदमी का, और इसकी कुछ पंक्तियाँ उससे इतनी बड़ी हैं कि केवल मसीह में पूरी होती हैं। पवित्रशास्त्र ऐसे ही काम करता है: छाया और शरीर एक ही आकृति साझा करते हैं, पर एक-दूसरे में घुलते नहीं। हमें दोनों के बीच का यह खिंचाव सहना पड़ता है, और शायद यही सबसे सच्चा अनुभव है, क्योंकि हम भी बचाए गए हैं और अब भी दीन और दरिद्र हैं।

श्रोता

पहले सुनने वालों के लिए "तूने मेरे कान खोदकर खोले हैं" एक जानी-पहचानी तस्वीर थी। जो दास आज़ादी मिलने पर भी स्वेच्छा से अपने स्वामी के घर रह जाता था, उसका कान दरवाज़े पर छेदा जाता था, आजीवन समर्पण का चिह्न। यह उपासक मंदिर में खड़ा होकर कह रहा है कि उसने वही चुना है। साथ ही उनके कानों में पद 6 एक धमाके की तरह पड़ा होगा, क्योंकि बलि लाना केवल धर्म नहीं, अर्थव्यवस्था और सामाजिक पहचान भी थी। उन्हें यह भी सुनाई दिया जो हमें अक्सर नहीं सुनाई देता: "बड़ी सभा" कोई भावुक शब्द नहीं, बल्कि इकट्ठी हुई वाचा-प्रजा है। व्यक्तिगत छुटकारे की गवाही वहीं, समुदाय के बीच, अपनी पूरी जगह पाती थी।

चिंतन

आप परमेश्वर को कौन-सा "बलिदान" देना पसंद करते हैं ताकि खुला कान देने से बच सकें?

आपके जीवन का वह गड्ढा कौन-सा है जिससे निकाले जाने की कहानी आपने अब तक किसी को नहीं सुनाई, और क्यों नहीं?

पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें

आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।

स्वीकारोक्ति

स्वीकारोक्ति

संत अगस्तीन

अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।

उद्देश्य भरा जीवन

उद्देश्य भरा जीवन

रिक वॉरेन

चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।

परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास

परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास

भाई लॉरेन्स

रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।

जंगल का छिपने का स्थान

जंगल का छिपने का स्थान

कोरी टेन बूम

नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।

जीसस कॉलिंग

जीसस कॉलिंग

सारा यंग

प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।

एक Amazon Associate के रूप में, Faith.network योग्य खरीदारी से आय अर्जित करता है। इससे मंच निःशुल्क बना रहता है।

यह व्याख्या साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

Psalms 40 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

भजन संहिता 40 का क्या अर्थ है?
गड्ढा, दलदल, और फिर चट्टान: भजन 40 की शुरुआत ही एक ऐसे आदमी की गवाही है जिसे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसकने का अनुभव है और जिसे फिर से खड़ा किया गया। दाऊद बताता है कि उसने धीरज से यहोवा की बाट जोही, और परमेश्वर ने "मेरी ओर झुककर मेरी दुहाई सुनी"; उसके मुँह में एक नया गीत रखा गया, ऐसा गीत जिसे सुनकर और लोग भी भरोसा करने लगेंगे। इसके बाद भजन एक अनपेक्षित मोड़ लेता है: बलिदानों से परमेश्वर प्रसन्न नहीं होते, का
भजन संहिता 40 किस विषय में है?
पद 6 से 8 इब्रानियों 10 में मसीह के मुँह में रखे गए हैं, और यह कोई ज़बरदस्ती की खींचतान नहीं है। पूरे पुराने नियम में बलिदान-व्यवस्था एक ऐसी व्यवस्था थी जो अपने ही अधूरेपन की ओर इशारा करती रही: हर साल फिर वही बैल, वही बकरा, वही लहू। भजन 40 भीतर से ही उस व्यवस्था की सीमा पहचान लेता है और उसकी जगह एक व्यक्ति रख देता है, "देख, मैं आया हूँ।" जो दाऊद आंशिक रूप से कह सका, यीशु मसीह ने पूरी तरह जीया: वे स्वयं वह आज्ञाकारी बलि बने जिनके अन्तःकरण में व्यवस्था सचमुच बसी थी। और ध्यान दीजिए कि यह गीत गड्ढे से निकाले गए आदमी का है, न कि किसी निर्दोष नायक का। छुटकारे की पूरी कहानी यहीं मुड़ती है: परमेश्वर वस्तुएँ नहीं, समर्पित जीवन माँगते हैं, और अंत में वह जीवन वे स्वयं देते हैं।
भजन संहिता 40 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पद 13 से 17 लगभग शब्दशः भजन 70 के रूप में दोबारा मिलते हैं, एक अलग गीत के तौर पर। यह छोटी-सी बात बड़ी है: इस्राएल ने इस पुकार को अलग करके बार-बार गाया, मानो कह रहा हो कि उद्धार की गवाही के बाद भी सहायता की गुहार अपनी जगह बनी रहती है। दूसरा प्रतिध्वनि शमूएल की वह चेतावनी है जो उसने शाऊल को दी थी, कि आज्ञा मानना बलिदान से उत्तम है। भजन 40 उसी सत्य को शिकायत के रूप में नहीं, आराधना के रूप में गाता है। पैगम्बरों की तीखी आवाज़ और भजनकार की कोमल आवाज़ यहाँ एक ही बात कह रही हैं: परमेश्वर वेदी पर से नहीं, हृदय से शुरू करते हैं।
भजन संहिता 40 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पहले सुनने वालों के लिए "तूने मेरे कान खोदकर खोले हैं" एक जानी-पहचानी तस्वीर थी। जो दास आज़ादी मिलने पर भी स्वेच्छा से अपने स्वामी के घर रह जाता था, उसका कान दरवाज़े पर छेदा जाता था, आजीवन समर्पण का चिह्न। यह उपासक मंदिर में खड़ा होकर कह रहा है कि उसने वही चुना है। साथ ही उनके कानों में पद 6 एक धमाके की तरह पड़ा होगा, क्योंकि बलि लाना केवल धर्म नहीं, अर्थव्यवस्था और सामाजिक पहचान भी थी। उन्हें यह भी सुनाई दिया जो हमें अक्सर नहीं सुनाई देता: "बड़ी सभा" कोई भावुक शब्द नहीं, बल्कि इकट्ठी हुई वाचा-प्रजा है। व्यक्तिगत छुटकारे की गवाही वहीं, समुदाय के बीच, अपनी पूरी जगह पाती थी।
भजन संहिता 40 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन का वह गड्ढा कौन-सा है जिससे निकाले जाने की कहानी आपने अब तक किसी को नहीं सुनाई, और क्यों नहीं?

Psalms 40 में आपको क्या स्पर्श करता है?

इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।

अध्ययन टूल में खोलें

अस्वीकरण: Faith.network बाइबल की व्याख्याएँ तैयार करने के लिए स्वचालित भाषा मॉडल का उपयोग करता है। हम धर्मशास्त्रीय दृष्टि से सही रहने का पूरा प्रयास करते हैं, फिर भी यह सॉफ़्टवेयर त्रुटि कर सकता है। इस साधन को अपने निजी बाइबल अध्ययन और कलीसिया के संगति जीवन का स्थान लेने वाला न समझें, बल्कि उनके सहायक के रूप में प्रयोग करें।

© 2026 Faith.Network. सर्वाधिकार सुरक्षित।

Faith.network एक सेवकाई है Faith.network · KvK 84972599 · connect@faith.network

हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव
कंपनी?