भजन संहिता 71
पाठ
यह भजन एक बूढ़े होते विश्वासी की पुकार है। वह जीवन भर परमेश्वर पर टिका रहा है, गर्भ से ही, और अब जब बल घट रहा है और शत्रु ताक में हैं, वह एक ही बात माँगता है: मुझे अब मत छोड़िए। पुकार, स्मरण और प्रतिज्ञा तीनों आपस में गुँथे हुए हैं, और भजन शत्रुओं की लज्जा तथा अपने मुँह से निकलने वाले जयजयकार पर समाप्त होता है।
मर्म
ध्यान दीजिए, यह भजन लगभग पूरी तरह पुराने शब्दों से बना है। आरम्भ की तीन आयतें भजन 31 की आरम्भिक पंक्तियों की लगभग प्रतिध्वनि हैं; गर्भ से सम्भाले जाने की बात भजन 22 से आती है; शत्रुओं की लज्जा की माँग भजन 35 से। यह उधार नहीं, यह गवाही है। एक बूढ़ा आदमी नई प्रार्थना नहीं गढ़ता, वह उन्हीं शब्दों को दोहराता है जो जीवन भर सच निकले। धर्मशास्त्र यहाँ हमें बताता है कि परमेश्वर की धार्मिकता कोई अमूर्त गुण नहीं, वह एक सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड है। "तू तो धर्मी है, मुझे छुड़ा" का तर्क यही है: आप वैसे ही हैं, इसलिए मैं माँगता हूँ।
मुख्य सूत्र
आयत 11 सुनिए: "परमेश्वर ने उसको छोड़ दिया है; उसका पीछा करके उसे पकड़ लो, क्योंकि उसका कोई छुड़ानेवाला नहीं।" यही ताना क्रूस के नीचे फिर गूँजता है, जब लोग यीशु मसीह से कहते हैं कि यदि परमेश्वर उन्हें चाहते हैं तो अब छुड़ा लें। भजन 22 और भजन 71 एक ही धागे के दो सिरे हैं, और मसीह ने दोनों को अपने शरीर में जिया। पर यहाँ आयत 20 और भी चौंकाती है: "अब तू फिर से हमको जिलाएगा; और पृथ्वी के गहरे गड्ढे में से उबार लेगा।" पुराने नियम में यह पहले राष्ट्र की बहाली की भाषा थी। मसीह के जी उठने के बाद यह वाक्य अपने पूरे भार तक पहुँचता है।
दर्पण
यह भजन उस डर पर उँगली रखता है जिसे हम शायद ही कभी ज़ोर से कहते हैं: उपयोगी न रह जाने का डर। "जब मेरा बल घटे तब मुझ को छोड़ न दे।" जिस दिन आपकी नौकरी में आपकी जगह किसी युवा को दे दी जाती है, जिस दिन शरीर वह नहीं कर पाता जो पिछले साल तक करता था, जिस दिन बच्चे आपकी सलाह विनम्रता से सुनते हैं पर मानते नहीं, तब भीतर एक आवाज़ कहती है कि अब तुम्हारा काम खत्म। भजनकार इस आवाज़ से लड़ता नहीं, वह उसे प्रार्थना में बदल देता है। और उसकी माँग स्वार्थी नहीं है: वह जीना चाहता है ताकि "आनेवाली पीढ़ी" को परमेश्वर का बाहुबल सुना सके। बुढ़ापा यहाँ सेवानिवृत्ति नहीं, गवाही का अंतिम अध्याय है।
श्रोता
जिन लोगों ने यह भजन पहली बार गाया, उनके लिए वृद्धावस्था में परित्याग कोई भावनात्मक कल्पना नहीं थी। कोई पेंशन नहीं, कोई बीमा नहीं; बूढ़ा आदमी पूरी तरह परिवार और कुल की वफ़ादारी पर निर्भर था। और शत्रुओं का तर्क सामाजिक था: यदि परमेश्वर किसी को आशीष नहीं दे रहे, तो वह त्यागा हुआ है, और त्यागे हुए पर हाथ डालना जोखिम भरा नहीं। इसीलिए "उसका कोई छुड़ानेवाला नहीं" इतनी घातक बात है। इस्राएल में गोएल, छुड़ानेवाला, वह निकट सम्बन्धी था जो कमज़ोर की ज़मीन और जान वापस लेता था। शत्रु कह रहे हैं: इसका कोई रिश्तेदार नहीं बचा, स्वर्ग में भी नहीं।
प्रश्न
आयत 20 को हल्के में मत पढ़िए: "तूने तो हमको बहुत से कठिन कष्ट दिखाए हैं।" भजनकार कष्टों को दुर्घटना नहीं कहता, न शैतान के खाते में डालता है। वह सीधे परमेश्वर से कहता है कि आपने ही दिखाए। यह हमारी आधुनिक धर्मशास्त्रीय सुविधा को तोड़ता है, जिसमें हम परमेश्वर को केवल अच्छी चीज़ों का लेखक बनाना चाहते हैं। बाइबल यह सफ़ाई नहीं देती। और वह इसका समाधान भी नहीं देती; वह केवल वाक्य को आगे बढ़ाती है, "परन्तु अब तू फिर से हमको जिलाएगा।" वही हाथ जो गड्ढे तक ले गया, वही ऊपर खींचता है। यह उत्तर नहीं है, यह भरोसा है, और भजनकार इसी पर सारंगी उठाता है।
एक बारीकी
आयत 7 का एक शब्द अटकता है: "मैं बहुतों के लिये चमत्कार बना हूँ।" इब्रानी शब्द है मोफ़ेत, जिसका अर्थ केवल सुखद आश्चर्य नहीं, बल्कि "निशान" या "तमाशा" भी है, कुछ ऐसा जिसे देखकर लोग रुक जाएँ और घूरें। यही शब्द भविष्यद्वक्ताओं के लिए इस्तेमाल होता है जिनका पूरा जीवन एक चेतावनी-चिह्न बन जाता है। भजनकार जानता है कि लोग उसकी ओर देखते हैं और तय नहीं कर पाते: यह आदमी परमेश्वर का प्रिय है या परमेश्वर का त्यागा हुआ? और वह इसी दुविधा के बीच में खड़ा होकर कहता है, "परन्तु तू मेरा दृढ़ शरणस्थान है।" गवाही अक्सर ऐसी ही दिखती है, स्पष्ट सफलता नहीं, बल्कि एक ऐसा जीवन जिसे लोग समझ नहीं पाते पर नज़र नहीं हटा पाते।
चिंतन
आपके जीवन की कौन-सी प्रार्थना इतनी बार सच निकली है कि आप उसे बुढ़ापे में भी दोहरा सकें?
यदि आपको आज कोई देखे, तो आप किस अर्थ में "चमत्कार", यानी एक ऐसा निशान हैं जिसे लोग समझ नहीं पाते?
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Psalms 71 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 71 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 71 किस विषय में है?
भजन संहिता 71 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 71 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 71 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 71 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
तेरा धन्यवाद, क्योंकि तूने मेरे प्राण को छुड़ा लिया है। अब मेरे होंठ खाली नहीं, उनमें जयजयकार है। तूने मेरे भीतर गीत डाल दिया, इसलिए जब मैं तेरा भजन गाता हूँ, मेरा पूरा मन तेरे बचाव की गवाही देता है।
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