प्रकाशितवाक्य 11
यह अंश
नापने का एक सरकण्डा किसी अनजान हाथ से यूहन्ना को थमाया जाता है, और आवाज़ आती है: "उठ, परमेश्वर के मन्दिर और वेदी, और उसमें भजन करनेवालों को नाप ले।" भीतर का हिस्सा नापा जाता है, बाहर का आँगन छोड़ दिया जाता है, क्योंकि वह बयालीस महीने तक रौंदा जाएगा। फिर दो गवाह मैदान में आते हैं, टाट ओढ़े, बारह सौ साठ दिन तक बोलते हुए, आग और सूखे और लहू के अधिकार के साथ। और फिर वे मारे जाते हैं, उनके शव तीन दिन चौक में पड़े रहते हैं, दुनिया जश्न मनाती है, और अचानक वे खड़े हो जाते हैं। सातवीं तुरही बजती है और स्वर्ग घोषित करता है: राज्य बदल गया।
मूल बात
ध्यान दें कि परमेश्वर क्या नापते हैं और क्या नहीं। मन्दिर, वेदी, और भजन करनेवाले लोग नापे जाते हैं; बाहर का आँगन छोड़ दिया जाता है। नापना यहाँ गिनती नहीं, दावा है: यह मेरा है, यह मैं जानता हूँ। परमेश्वर अपने लोगों को दुख से बाहर नहीं रखते, वे उन्हें दुख के भीतर पहचानते हैं। इसीलिए गवाह मरते हैं और फिर भी हारते नहीं। यूनानी शब्द मार्तुस का अर्थ है "गवाह", और कलीसिया की भाषा में यही शब्द "शहीद" बन गया, क्योंकि अनुभव ने सिखाया कि सच बोलने की कीमत जान होती है। यह अध्याय उस कीमत को छिपाता नहीं, पर वह अंतिम शब्द भी नहीं है।
जुड़ा हुआ धागा
"ये वे ही जैतून के दो पेड़ और दो दीवट हैं" — यह जकर्याह 4 से आता है, जहाँ खण्डहर बने यरूशलेम में दो अभिषिक्त पुरुष खड़े हैं, राजा और याजक, तेल से जलते दीपक की तरह। यूहन्ना उस चित्र को उठाकर कलीसिया पर रखता है: छोटी, थकी, पर परमेश्वर के तेल से जलती हुई। और गवाहों की कहानी का आकार देखिए: बोलना, मारे जाना, शहर के चौक में पड़ा रहना "जहाँ उनका प्रभु भी क्रूस पर चढ़ाया गया था", फिर जीवन का श्वास, फिर बादल पर चढ़ जाना। यह मसीह की कहानी है, दोहराई गई उनके लोगों में। कलीसिया की गवाही कभी क्रूस का रास्ता छोड़कर आगे नहीं बढ़ती, और कभी क़ब्र पर रुकती भी नहीं।
आईना
पद 10 सबसे असहज है: लोग मिठाई बाँटते हैं, "एक दूसरे के पास भेंट भेजेंगे", क्योंकि दो कष्टदायक आवाज़ें चुप हो गईं। सच बोलनेवाले लोग दुनिया को चुभते हैं, और उनकी चुप्पी राहत की तरह मनाई जाती है। यही डर हमें भीतर से काटता है: दफ़्तर की उस मीटिंग में जहाँ आपकी ईमानदारी सबका काम बढ़ा देती है, परिवार के उस झगड़े में जहाँ आप ही एकमात्र हैं जो असली बात कहते हैं, उस दोस्ती में जहाँ चुप रहना सस्ता है। हमें डर लगता है कि हमारी गवाही बेकार पड़ी रहेगी, चौक में, तीन दिन, बिना क़ब्र, बिना सम्मान। आज एक काम करें: वह एक सच्ची बात, जो आप हफ़्तों से किसी से टाल रहे हैं, दस मिनट में लिखकर भेज दें या फ़ोन उठाकर कह दें, नरमी से, पर कह दें।
पृष्ठभूमि
यूहन्ना यह पत्मुस द्वीप से लिखता है, पहली सदी के अंत में, एशिया माइनर की उन कलीसियाओं के लिए जो रोमी साम्राज्य के भीतर एक छोटी, संदिग्ध अल्पसंख्यक थीं। यरूशलेम का मन्दिर तब तक जल चुका था, इसलिए "मन्दिर को नाप ले" सुनकर कोई पत्थर की इमारत नहीं देखता; वह चित्र है, परमेश्वर के लोगों का। "बयालीस महीने", "एक हजार दो सौ साठ दिन", "साढ़े तीन दिन" — सब एक ही नाप हैं, आधा सात, अधूरा समय। यानी: यह कष्ट लम्बा लगेगा, पर यह पूरा युग नहीं, आधा है, कटा हुआ है। और वह "बड़ा नगर", जो "आत्मिक रीति से सदोम और मिस्र कहलाता है", कोई भी शहर है जो परमेश्वर के गवाहों को कुचलता है, यरूशलेम भी, रोम भी।
पहले सुननेवाले
जिन विश्वासियों ने यह पढ़ा, उनमें से कुछ ने अपने साथी को अदालत में खोया था, कुछ ने व्यापार, कुछ ने परिवार। उनके कानों में पद 7 कड़वा सच था, न कि भविष्य की कल्पना: पशु "उनसे लड़कर उन्हें जीतेगा और उन्हें मार डालेगा।" यूहन्ना यह नहीं छिपाता कि गवाह हारते हुए दिखेंगे। पर उन्होंने पद 15 भी सुना, वर्तमान काल में नहीं, बीते काल में: "जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया।" दानिय्येल 7 में यह राज्य वादा था; यहाँ यह हो चुका है। सम्राट के शहर में बैठे लोगों के लिए यह देशद्रोह जैसा वाक्य था और साँस लेने की जगह भी। उनकी असली हालत स्वर्ग में गाई जा चुकी थी।
कठिन प्रश्न
पर पद 5 का क्या करें, जहाँ गवाहों के मुँह से आग निकलकर बैरियों को भस्म करती है? यह मसीह जैसा नहीं लगता, जिन्होंने आग माँगनेवाले चेलों को डाँटा। मैं इसे चिकना नहीं करूँगा। इतना कह सकता हूँ: उनका हथियार मुँह है, यानी वचन, और भविष्यद्वक्ता का वचन सचमुच जलाता है, न्याय की घोषणा करता है और सुननेवाले को बदल देता है या तोड़ देता है। और यह भी सच है कि वे अंत में मारे जाते हैं, मारते नहीं। पर आग का चित्र फिर भी असुविधाजनक रहता है। प्रकाशितवाक्य हमें एक ऐसे परमेश्वर के सामने रखता है जो केवल कोमल नहीं हैं, और जो "पृथ्वी के बिगाड़नेवाले" को यूँ ही जाने नहीं देंगे। इस बेचैनी को मिटाने की जल्दी न करें।
मनन के प्रश्न
आपके जीवन का कौन-सा हिस्सा आपको "बाहर का आँगन" लगता है, रौंदा हुआ और अनदेखा, जबकि परमेश्वर उसे नापे हुए भीतरी हिस्से में गिनते हैं?
अगर आपकी गवाही तीन दिन चौक में पड़ी रही और किसी ने उसे सम्मान न दिया, तो क्या आप फिर भी बोलते रहेंगे?
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Revelation 11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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प्रकाशितवाक्य 11 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Revelation 11 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, जब दुनिया की खबरें डराती हैं और लगता है कि ताकतवर लोग ही सब तय करते हैं, मुझे याद दिला कि आखिरी शब्द तेरा है। तेरा राज्य आ रहा है, और तू हमेशा राज करेगा। मेरे छोटे से दिल को भी आज तेरे हाथ में रहने दे।
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