बाइबल व्याख्या

प्रकाशितवाक्य 21:8

बाइबल

पाठ

पद 7 में जो जय पाता है उसे उत्तराधिकार मिलता है, परमेश्वर उसका पिता और वह परमेश्वर का पुत्र कहलाता है। और ठीक इसी ऊँचाई पर, बिना साँस लिए, आवाज़ मुड़ जाती है: "परन्तु।" फिर आठ नामों की एक सूची आती है, जो एक बुरी परेड की तरह गुज़रती है: डरपोक, अविश्वासी, घिनौने, हत्यारे, व्यभिचारी, टोन्हे, मूर्तिपूजक, और सब झूठे। इनके लिए भी एक "भाग" रखा गया है, पर वह नगर नहीं, वह "झील में मिलेगा, जो आग और गन्धक से जलती रहती है।" और सिंहासन पर बैठे हुए परमेश्वर इसे एक नाम देते हैं, जिससे बचने का कोई रास्ता नहीं: "यह दूसरी मृत्यु है।" नई सृष्टि के सबसे कोमल दृश्य के बीचोंबीच यह वाक्य पत्थर की तरह पड़ा है।

मूल बात

ध्यान दीजिए कि दोनों पदों में एक ही शब्द दोहराया गया है: विरासत। पद 7 में जय पानेवाला "वारिस" होगा; पद 8 में इन लोगों का भी "भाग" है। बाइबल में विरासत का अर्थ है वह हिस्सा जो परमेश्वर अपने लोगों को देते हैं, जैसे कनान में हर गोत्र को उसका भाग मिला। यहाँ अनन्तता में भी दो ही हिस्से हैं, और कोई तीसरा विकल्प नहीं। यह कठोर लगता है, पर इसके पीछे परमेश्वर की पवित्रता है, कोई मनमानी नहीं। जिस नगर में आँसू पोंछे जाते हैं, वहाँ हत्या और झूठ का साथ रहना असंभव है; क्योंकि आँसू आते ही वहीं से हैं। जीवन का जल "सेंत-मेंत" मिलता है, यानी अनुग्रह मुफ़्त है, पर मुफ़्त होने का अर्थ यह नहीं कि वह निष्प्रभावी है। जो उसे पीता है, वह बदल जाता है।

साझा सूत्र

यह सूची आसमान से नहीं गिरी। इसे ध्यान से पढ़िए और आपको दस आज्ञाओं की गूँज सुनाई देगी: हत्या, व्यभिचार, मूर्तिपूजा, झूठी गवाही। सीनै पर्वत पर जो वाचा बाँधी गई थी, उसकी शर्तें यहाँ अन्तिम रूप में सामने आती हैं। "आग और गन्धक" भी नया चित्र नहीं; सदोम पर यही गिरा था, और तब से यह इस्राएल की स्मृति में परमेश्वर के न्याय का चिह्न बना रहा। पर सबसे गहरा सूत्र यह है कि जिस मेम्ने की जीवन की पुस्तक का ज़िक्र पद 27 में होता है, वह स्वयं पहली मृत्यु से होकर गुज़रा। मसीह ने वह भाग पिया जो हमारा था, ताकि हमें वह भाग मिले जो उनका था। इसलिए यह सूची किसी और जाति का वर्णन नहीं, बल्कि हम सब का चित्र है, अनुग्रह से पहले।

दर्पण

सूची की शुरुआत हत्यारों से नहीं, "डरपोकों" से होती है। यह चुभता है, क्योंकि कायरता को हम पाप की श्रेणी में रखते ही नहीं; हम उसे स्वभाव कहते हैं, समझदारी कहते हैं, "माहौल ठीक नहीं था" कहते हैं। पर यूहन्ना जानता है कि डर ही वह दरवाज़ा है जिससे बाकी सातों भीतर आते हैं। दफ़्तर में जब किसी की बेइज़्ज़ती हो रही थी और आप चुप रहे। परिवार में जब मसीह का नाम लेना असुविधाजनक था और आपने बात घुमा दी। हिसाब में वह आधा सच जिससे झगड़ा टल गया। ये छोटी चीज़ें लगती हैं, पर आठों नामों में सबसे आख़िरी है "सब झूठों", और छोटा झूठ भी उसी परिवार का सदस्य है। आज ही उस एक व्यक्ति के पास जाइए जिससे आपने इस हफ़्ते कोई छोटी बात छिपाई या तोड़-मरोड़ कर कही, और एक वाक्य में उसे सीधा कर दीजिए।

संदर्भ

यूहन्ना यह दर्शन एशिया माइनर की सात कलीसियाओं को लिख रहा है, ऐसे समय में जब रोमी सम्राट की पूजा नागरिक कर्तव्य बन चुकी थी। व्यापारिक संघों के भोजों में मूर्ति के आगे झुकना सामान्य था; टोना-टोटका, ताबीज़ और जादुई औषधियाँ बाज़ार का हिस्सा थीं; और मसीहियों पर दबाव था कि वे एक चुटकी धूप जलाकर अपनी जान बचा लें। इस पृष्ठभूमि में यह सूची कोई सामान्य नैतिक चेतावनी नहीं, बल्कि उस समाज का सटीक चित्र है जिसमें विश्वासी रोज़ साँस लेते थे। और यूहन्ना स्वयं पतमुस के निर्वासन में है, यानी वह आराम से नहीं, दबाव के भीतर से लिख रहा है।

श्रोता

कल्पना कीजिए कि यह पत्र किसी घर की कलीसिया में ऊँची आवाज़ में पढ़ा जा रहा है, और सुननेवालों में कुछ ऐसे हैं जिनके भाई पिछले साल मारे गए। उनके लिए "डरपोकों" शब्द किसी शर्मीले स्वभाव की बात नहीं थी; यह उन लोगों की ओर इशारा था जो अदालत में खड़े होकर मुकर गए। और "अविश्वासियों" का अर्थ नास्तिक नहीं, बल्कि वे जो अन्त तक टिके नहीं। यह सुनकर किसी की रीढ़ में सिहरन दौड़ गई होगी। पर उसी साँस में उन्होंने पद 6 भी सुना: प्यासे को जीवन का जल "सेंत-मेंत"। यही दोनों बातें साथ सुनना उनके लिए सुसमाचार था, क्योंकि इसका अर्थ था कि उनकी वफ़ादारी बेकार नहीं जाएगी और उनकी कमज़ोरी अन्तिम शब्द नहीं है।

कठिन प्रश्न

जो परमेश्वर आँखों से हर आँसू पोंछते हैं, वे आग और गन्धक की झील कैसे रहने दे सकते हैं? इस प्रश्न को हल्का करने की कोशिश मत कीजिए। पाठ स्वयं इसका उत्तर नहीं देता; वह न अवधि समझाता है, न प्रक्रिया, न यह बताता है कि आग का चित्र कितना शाब्दिक है। वह बस एक नाम देता है: "यह दूसरी मृत्यु है।" शायद इतना कह सकते हैं कि जो जीवन के जल को अन्त तक ठुकराता है, उसे परमेश्वर अन्ततः वही देते हैं जो उसने माँगा था, यानी परमेश्वर के बिना अस्तित्व, और परमेश्वर के बिना कुछ भी जीवित नहीं रह सकता। पर यह व्याख्या दर्द कम नहीं करती। शायद उसे कम होना भी नहीं चाहिए, जब तक हमारे आसपास वे लोग हैं जिनके लिए हमें बोलना है।

चिंतन

इस सूची में कौन सा शब्द आपको सबसे कम "अपना" लगा, और क्या यह इसलिए तो नहीं कि आपने उसे कोई और नाम दे रखा है?

यदि डर वह दरवाज़ा है जिससे बाकी पाप भीतर आते हैं, तो इस समय आपके जीवन में वह दरवाज़ा कहाँ खुला हुआ है?

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Revelation 21:8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

प्रकाशितवाक्य 21:8 का क्या अर्थ है?
पद 7 में जो जय पाता है उसे उत्तराधिकार मिलता है, परमेश्वर उसका पिता और वह परमेश्वर का पुत्र कहलाता है। और ठीक इसी ऊँचाई पर, बिना साँस लिए, आवाज़ मुड़ जाती है: "परन्तु।" फिर आठ नामों की एक सूची आती है, जो एक बुरी परेड की तरह गुज़रती है: डरपोक, अविश्वासी, घिनौने, हत्यारे, व्यभिचारी, टोन्हे, मूर्तिपूजक, और सब झूठे। इनके लिए भी एक "भाग" रखा गया है, पर वह नगर नहीं, वह "झील में मिलेगा, जो आग और गन्धक से जलती रहती है।" और सिंहासन पर बैठे हुए परमेश्वर इसे एक नाम देते हैं, जिससे बचने का कोई रास्ता नहीं: "यह दूसरी मृत्यु है।" नई सृष्टि के सबसे कोमल दृश्य के बीचोंबीच यह वाक्य पत्थर की तरह पड़ा है।
प्रकाशितवाक्य 21:8 किस विषय में है?
यह सूची आसमान से नहीं गिरी। इसे ध्यान से पढ़िए और आपको दस आज्ञाओं की गूँज सुनाई देगी: हत्या, व्यभिचार, मूर्तिपूजा, झूठी गवाही। सीनै पर्वत पर जो वाचा बाँधी गई थी, उसकी शर्तें यहाँ अन्तिम रूप में सामने आती हैं। "आग और गन्धक" भी नया चित्र नहीं; सदोम पर यही गिरा था, और तब से यह इस्राएल की स्मृति में परमेश्वर के न्याय का चिह्न बना रहा। पर सबसे गहरा सूत्र यह है कि जिस मेम्ने की जीवन की पुस्तक का ज़िक्र पद 27 में होता है, वह स्वयं पहली मृत्यु से होकर गुज़रा। मसीह ने वह भाग पिया जो हमारा था, ताकि हमें वह भाग मिले जो उनका था। इसलिए यह सूची किसी और जाति का वर्णन नहीं, बल्कि हम सब का चित्र है, अनुग्रह से पहले।
प्रकाशितवाक्य 21:8 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यूहन्ना यह दर्शन एशिया माइनर की सात कलीसियाओं को लिख रहा है, ऐसे समय में जब रोमी सम्राट की पूजा नागरिक कर्तव्य बन चुकी थी। व्यापारिक संघों के भोजों में मूर्ति के आगे झुकना सामान्य था; टोना-टोटका, ताबीज़ और जादुई औषधियाँ बाज़ार का हिस्सा थीं; और मसीहियों पर दबाव था कि वे एक चुटकी धूप जलाकर अपनी जान बचा लें। इस पृष्ठभूमि में यह सूची कोई सामान्य नैतिक चेतावनी नहीं, बल्कि उस समाज का सटीक चित्र है जिसमें विश्वासी रोज़ साँस लेते थे। और यूहन्ना स्वयं पतमुस के निर्वासन में है, यानी वह आराम से नहीं, दबाव के भीतर से लिख रहा है।
प्रकाशितवाक्य 21:8 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
जो परमेश्वर आँखों से हर आँसू पोंछते हैं, वे आग और गन्धक की झील कैसे रहने दे सकते हैं? इस प्रश्न को हल्का करने की कोशिश मत कीजिए। पाठ स्वयं इसका उत्तर नहीं देता; वह न अवधि समझाता है, न प्रक्रिया, न यह बताता है कि आग का चित्र कितना शाब्दिक है। वह बस एक नाम देता है: "यह दूसरी मृत्यु है।" शायद इतना कह सकते हैं कि जो जीवन के जल को अन्त तक ठुकराता है, उसे परमेश्वर अन्ततः वही देते हैं जो उसने माँगा था, यानी परमेश्वर के बिना अस्तित्व, और परमेश्वर के बिना कुछ भी जीवित नहीं रह सकता। पर यह व्याख्या दर्द कम नहीं करती। शायद उसे कम होना भी नहीं चाहिए, जब तक हमारे आसपास वे लोग हैं जिनके लिए हमें बोलना है।
प्रकाशितवाक्य 21:8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि डर वह दरवाज़ा है जिससे बाकी पाप भीतर आते हैं, तो इस समय आपके जीवन में वह दरवाज़ा कहाँ खुला हुआ है?
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Revelation 21 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

पूरब की ओर तीन फाटक, उत्तर की ओर तीन फाटक, दक्षिण की ओर तीन फाटक, और पश्चिम की ओर तीन फाटक थे।"

नगर का कोई पिछवाड़ा नहीं है। जिस भी दिशा से कोई आए, उसके सामने फाटक ही पड़ता है। परमेश्वर ने अपने शहर को ऐसा बनाया कि किसी को घूमकर पीछे से न आना पड़े।

तू सोचता है तेरा रास्ता बहुत टेढ़ा रहा, तू बहुत दूर से आ रहा है। पर तेरी दिशा में भी एक फाटक खुला है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

यूहन्ना को ऊँचे पहाड़ पर इसलिए ले जाया गया कि वह देख सके, पर जो देखा वह ऊपर चढ़ता हुआ नहीं था। "पवित्र नगर यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्वर के पास से उतरते दिखाया।" नगर नीचे आ रहा था। तेरी सारी चढ़ाई, सारी कोशिश, अंत में इसी पर आकर रुकती है कि परमेश्वर स्वयं तेरे पास उतर आता है। और यह दृश्य उसे "आत्मा में" मिला, खुली आँखों से नहीं। शायद आज भी वही शर्त है।

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