रोमियों 16
पाठ
पौलुस रोमियों को लिखे इस अद्भुत पत्र का समापन एक लम्बी नमस्कार सूची से करते हैं। छब्बीस से अधिक नाम, कुछ पुरुष, कुछ स्त्रियाँ, कुछ यहूदी, कुछ अन्यजाति, कुछ कुलीन, कुछ दास। बीच में एक चेतावनी है कि फूट डालने वालों से सावधान रहो, और अन्त में एक स्तुतिगान जिसमें उस "भेद" की बात है जो युगों से छिपा था पर अब मसीह में प्रगट हुआ।
मर्म
यह अध्याय पहली नज़र में केवल पते और अभिवादन जैसा लगता है, जिसे लोग अक्सर छोड़ देते हैं। परन्तु यहीं सुसमाचार का असली फल दिखाई देता है। रोमियों 1 से 15 तक पौलुस ने अनुग्रह, विश्वास, धार्मिकता, और मेल-मिलाप की गहरी धर्मविद्या समझाई है। अब वह धर्मविद्या मांस और हड्डी पहन लेती है, इन असली नामों में। फीबे, प्रिस्का, मरियम, रूफुस, ये कोई विचार नहीं, ये लोग हैं जिनके जीवन मसीह ने बदल दिए। सुसमाचार अन्त में विचारधारा नहीं, समुदाय है। परमेश्वर एक ऐसा परिवार बना रहे हैं जहाँ दास और अधिकारी, स्त्री और पुरुष, यहूदी और यूनानी एक साथ "प्रभु में" खड़े हैं।
साझा सूत्र
पद 20 में एक पंक्ति है जो पूरे बाइबल की कहानी को समेट लेती है, "शान्ति का परमेश्वर शैतान को तुम्हारे पाँवों के नीचे शीघ्र कुचल देगा।" यह उत्पत्ति 3:15 की गूँज है, जहाँ परमेश्वर ने साँप से कहा था कि स्त्री का वंश उसका सिर कुचलेगा। हज़ारों वर्षों की प्रतीक्षा, भविष्यद्वक्ताओं की पुकार, बलिदानों का धुआँ, राजाओं का उठना और गिरना, यह सब उस एक वादे की ओर बढ़ रहा था। और अब पौलुस रोम की छोटी सी कलीसिया से कहता है कि वह प्राचीन विजय तुम्हारे पाँवों तले पूरी हो रही है। मसीह ने क्रूस पर सिर कुचल दिया, और उसका शरीर, अर्थात कलीसिया, उस विजय में साझी है। पद 25-26 का "भेद" यही है, जो युगों से छिपा था, अब सब जातियों तक पहुँच रहा है।
दर्पण
इस सूची में रुकिए और सोचिए, क्या आपका नाम किसी की ऐसी सूची में होगा? पौलुस उन्हें याद रखता है जिन्होंने "परिश्रम किया", जो "प्रभु में" खड़े रहे, जिन्होंने उसके प्राण के लिए अपना सिर दे दिया। हमारी संस्कृति चमकते नामों की भूखी है, बड़े मंच, बड़े अनुयायी। पर मसीह की कलीसिया मरियम जैसों पर टिकी है, जिनके बारे में हम केवल इतना जानते हैं कि उसने "बहुत परिश्रम किया।" कोई विवरण नहीं, कोई प्रशंसा-गीत नहीं। बस परिश्रम। क्या आप ऐसे परिश्रम के लिए तैयार हैं जिसका श्रेय शायद कभी न मिले? और पद 17-18 का आईना और तीखा है, फूट डालने वाले "अपने पेट की सेवा करते हैं।" अपनी भूख, अपनी महत्वाकांक्षा, अपनी पहचान की भूख, यही सबसे बड़ा खतरा है।
संदर्भ
रोम पहली सदी की महाशक्ति की राजधानी थी, जहाँ सम्राट की मूर्तियाँ, दास व्यवस्था, और वर्ग-भेद जीवन का ढाँचा थे। इस माहौल में एक ऐसी सभा उठ रही थी जहाँ प्रिस्का जैसी स्त्री को "सहकर्मी" कहा जाता है, फीबे जैसी सेविका पत्र लेकर आती है, और अरिस्तुबुलुस के "घराने" (सम्भवतः दासों) को नमस्कार पहुँचाया जाता है। इन नामों में कई ग्रीक, कुछ लातिनी, कुछ यहूदी हैं। नर्किस्सुस और अरिस्तुबुलुस राजघराने से जुड़े नाम हो सकते हैं। यह विविधता संयोग नहीं, यह सुसमाचार का चिह्न है। रोमी साम्राज्य वर्गों में विभाजित करता था; मसीह उन्हीं वर्गों को एक मेज़ पर बिठाते हैं।
मुख्य पात्र
यहाँ मुख्य पात्र कोई व्यक्ति नहीं, स्वयं मसीह हैं, जो हर नाम के पीछे खड़े हैं। पौलुस बार-बार लिखता है "प्रभु में", "मसीह में", "मसीह के लिये।" इपैनितुस "मसीह के लिये आसिया का पहला फल" है। अपिल्लेस "मसीह में खरा निकला।" रूफुस "प्रभु में चुना हुआ है।" हर पहचान मसीह से जुड़ी है, मानो उनका असली पता अब वही हैं। पौलुस स्वयं अंत में स्तुति करते हुए कहता है, "उसी एकमात्र अद्वैत बुद्धिमान परमेश्वर की यीशु मसीह के द्वारा युगानुयुग महिमा होती रहे।" वे केन्द्रीय पात्र हैं, गोंद हैं जो इन बिखरे लोगों को एक शरीर बनाता है। उनके बिना यह सूची केवल नामों की भीड़ है; उनके साथ यह स्वर्ग की नागरिकता का रजिस्टर है।
अंतर्पाठ
पद 20 उत्पत्ति 3:15 से सीधे बात करता है, जहाँ स्त्री के वंश का वादा किया गया था। परन्तु एक और गूँज सुनिए, प्रकाशितवाक्य 21 में यूहन्ना उस नई नगरी का दर्शन देखता है जहाँ हर जाति के लोग परमेश्वर की उपस्थिति में इकट्ठे होते हैं। रोमियों 16 उस अन्तिम दृश्य का पहला मसौदा है, एक छोटी सी झलक। और इफिसियों 3 में पौलुस उसी "भेद" की बात करते हैं जो अब अन्यजातियों तक खोला गया है। रोमियों 16 वह भेद कागज़ पर नहीं, बल्कि लोगों के चेहरों पर दिखाता है।
चिन्तन प्रश्न
*यदि पौलुस आज आपकी कलीसिया को पत्र लिखता, तो क्या आपका नाम "प्रभु में परि
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Romans 16 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
रोमियों 16 का क्या अर्थ है?
रोमियों 16 किस विषय में है?
रोमियों 16 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
रोमियों 16 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
रोमियों 16 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Romans 16 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्तखुस को नमस्कार।" इन दोनों के बारे में बाइबल और कुछ नहीं बताती। कोई उपदेश नहीं, कोई चमत्कार नहीं, बस नाम। फिर भी पौलुस उन्हें "हमारा सहकर्मी" कहता है, मेरा नहीं, हमारा। तेरी सेवा भी शायद किसी को दिखती न हो। पर जो तुझे जानता है, वह तेरा नाम भूलता नहीं।
पिता, तू हर नाम जानता है, उनका भी जिन्हें कोई याद नहीं करता। जो चुपचाप तेरे लोगों की सेवा करते हैं, उन्हें तू देखता है। मुझे भी ऐसा दिल दे कि अपने आसपास के लोगों को नाम लेकर याद रखूँ, उनके लिए प्रार्थना करूँ, और उन्हें अपनापन महसूस कराऊँ।
पौलुस चेतावनी देता है: "क्योंकि ऐसे लोग हमारे प्रभु मसीह की सेवा नहीं करते, परन्तु अपने पेट की; और चिकनी चुपड़ी बातों से भोले भाले लोगों के मन में धोखा देते हैं।" ध्यान दे, धोखा कठोर आवाज़ में नहीं आता, वह मीठी बातों में आता है। जो बात तेरे कान को सहलाती है पर तुझे क्रूस की ओर कभी नहीं ले जाती, उससे सावधान रह।
पिता, तेरे बेटे यीशु का अनुग्रह हम पर बना रहे, खासकर उन दिनों में जब हमारी अपनी ताकत खत्म हो जाती है। जो मैं कमा नहीं सकता, वह तू मुफ्त में देता है। यह अनुग्रह मेरे घर, मेरे दोस्तों और उन सब पर उतरे जिनसे मैं आज मिलूंगा।
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