रूत 4:15
पाठ
बैतलहम की स्त्रियाँ नाओमी के चारों ओर खड़ी हैं, और वे एक नवजात शिशु की ओर इशारा करके कहती हैं कि यही बच्चा उसके प्राणों को लौटा लाएगा और बुढ़ापे में उसका सहारा बनेगा। कारण वे बच्चे की किसी विशेषता में नहीं, बल्कि उसकी माँ में खोजती हैं: "तेरी बहू जो तुझ से प्रेम रखती और सात बेटों से भी तेरे लिये श्रेष्ठ है उसी का यह बेटा है।" एक ही वाक्य में तीन चीज़ें जुड़ती हैं, एक टूटी हुई बुढ़िया, एक विदेशी बहू, और एक शिशु जिसका नाम अभी रखा भी नहीं गया। और वाक्य का भार बच्चे पर नहीं, रूत पर टिका है। यह अजीब है। आशीर्वाद बेटे के लिए बोला जा रहा है, प्रशंसा बहू की हो रही है।
मूल बात
"जी में जी ले आनेवाला" के पीछे का इब्रानी विचार है प्राण को लौटाना, उसे फिर से बसाना, जैसे कोई सूखे कुएँ में पानी लौटा दे। नाओमी ने अध्याय एक में खुद को खाली कहा था; अब उसी खालीपन में कुछ रखा जा रहा है, पर वैसा नहीं जैसा उसने माँगा होता। उसके बेटे नहीं लौटे। उसका पति नहीं लौटा। मोआब की कब्रें वहीं रहीं। जो लौटा वह प्राण है, जीवन की इच्छा, आगे का एक दिन। परमेश्वर यहाँ घड़ी को पीछे नहीं घुमाते, वे आगे की ओर भरते हैं। और वे इसे न किसी चमत्कार से करते हैं, न आकाशवाणी से, बल्कि एक स्त्री की ज़िद्दी वफ़ादारी से जिसका इस परिवार पर कोई कानूनी कर्ज़ नहीं था। "सात बेटों से भी श्रेष्ठ" उस समाज में सम्पूर्णता की परिभाषा को ही उलट देना है। क्या परमेश्वर अपनी करुणा वहीं नहीं उँड़ेलते जहाँ हम देखना भूल जाते हैं?
सूत्र
वचन 15 में जो शब्द गूँजता है, वह पूरे अध्याय का शब्द है: छुड़ाना। वचन 14 में स्त्रियाँ कहती हैं कि यहोवा ने नाओमी को "छुड़ानेवाले कुटुम्बी के बिना नहीं छोड़ा", और अगला ही वाक्य बताता है कि यह छुड़ाना कैसा दिखता है, एक गोद में रखा हुआ बच्चा। परमेश्वर का उद्धार यहाँ संस्था से होकर शरीर तक उतरता है: कानून, फाटक, गवाह, जूती, और अंत में एक साँस लेता हुआ शिशु। वंशावली बताती है कि यही ओबेद दाऊद का दादा हुआ, और उसी वंश से वह आया जो स्वयं हमारा छुड़ानेवाला है। पर ध्यान दीजिए कि यहाँ कोई नहीं जानता कि यह सब कहाँ जा रहा है। स्त्रियाँ बस इतना कह रही हैं कि बुढ़िया अब भूखी नहीं मरेगी। परमेश्वर अपने बड़े काम को प्रायः इतने छोटे वाक्यों में छिपा देते हैं कि हम उन्हें पढ़कर आगे बढ़ जाते हैं।
दर्पण
आप शायद उस उम्र में हैं जहाँ कुछ दरवाज़े बंद हो चुके हैं। वह नौकरी नहीं मिली, वह रिश्ता नहीं लौटा, वह बच्चा नहीं हुआ, वह माता-पिता चले गए और उनके साथ बहुत कुछ चला गया। नाओमी की कड़वाहट झूठी नहीं थी, और पाठ उसे झूठा नहीं कहता। पर यह पाठ एक असहज सवाल रखता है: क्या आप उस भरण को पहचान पाएँगे जो उस रूप में नहीं आया जिसकी आपने माँग की थी? नाओमी का सहारा एक मोआबी बहू और उसके बेटे के रूप में आया, यानी ठीक वहाँ से जहाँ से वह कभी कुछ अच्छा आने की उम्मीद नहीं करती थी। हमारी सबसे बड़ी अंधता यह नहीं कि परमेश्वर चुप हैं, बल्कि यह कि वे गलत दरवाज़े से बोलते हैं। आज एक काम कीजिए: उस एक व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जो इस साल आपके जीवन में "जी में जी" लौटाने का साधन बना, और उसे अभी एक संदेश भेजकर यह बता दीजिए।
अंतर्पाठ
सात बेटों की बात यूँ ही नहीं कही गई। हन्ना के गीत में भी यही संख्या आती है, जहाँ बाँझ स्त्री सात को जन्म देती है और बहुत बेटोंवाली मुरझा जाती है। इस्राएल की कल्पना में सात बेटे पूर्णता की पराकाष्ठा थे, सुरक्षा, सम्मान, वंश की गारंटी। बैतलहम की स्त्रियाँ इस पूरे हिसाब को एक विदेशी विधवा के पलड़े में डालकर कहती हैं कि वह भारी पड़ती है। दूसरी गूँज वचन 12 में है, जहाँ लोग तामार और पेरेस का नाम लेते हैं, एक ऐसी कहानी जिसमें वंश कानून से नहीं, एक स्त्री के जोखिम भरे कदम से बचा था। बाइबल बार-बार अपने ही बनाए पैमानों को तोड़ती है। प्रेम और वफ़ादारी, जिसे इब्रानी में हेसेद कहते हैं, वह गिनती से नहीं नापी जाती।
संदर्भ
यह न्यायियों का समय है, वह अराजक दौर जब हर कोई अपनी दृष्टि में ठीक काम करता था। अकाल ने एक परिवार को मोआब भेजा, और मोआब इस्राएल के लिए सिर्फ़ पड़ोसी देश नहीं, एक पुराना घाव था। नाओमी बिना पति और बिना बेटों के लौटी, यानी उस व्यवस्था में बिल्कुल असुरक्षित, क्योंकि स्त्री की रोटी और छत पुरुष रिश्तेदारों के माध्यम से ही आती थी। फाटक पर हुई कार्यवाही, दस वृद्ध, जूती का उतारना, यह सब कानूनी नाटक नहीं था, यह उस समाज की अदालत थी। और वचन 15 उसी अदालत के बाहर, स्त्रियों के बीच बोला गया वाक्य है। पुरुषों ने सम्पत्ति तय की; स्त्रियों ने बताया कि असल में क्या लौटा। दोनों सच हैं, पर दूसरा वाला ही प्राण तक पहुँचता है।
प्रश्न
फिर भी एक बेचैनी बची रहती है। क्या रूत को इसलिए श्रेष्ठ कहा गया क्योंकि उसने बेटा दिया? अगर गर्भ न ठहरता, तो क्या वह सात बेटों से बेहतर न होती? पाठ यह सवाल खुला छोड़ देता है, और हमें उसे ज़बरदस्ती बंद नहीं करना चाहिए। मुझे लगता है वाक्य का क्रम कुछ कह रहा है: पहले "जो तुझ से प्रेम रखती", फिर "उसी का यह बेटा है"। बच्चा प्रेम का प्रमाण है, मूल्य नहीं। पर यह भी सच है कि इस कहानी में भरण ठोस रूप में आया, और बहुत लोगों के जीवन में वैसा नहीं आता। नाओमी को गोद में बच्चा मिला; कितनी नाओमियों को नहीं मिलता। बाइबल उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करती, पर यहाँ वह उनका उत्तर भी नहीं देती। शायद इसी चुप्पी में प्रतीक्षा करना सीखना ही विश्वास है।
चिंतन
आपके जीवन में वह कौन सा खालीपन है जिसे आप अब भी उसी पुराने रूप में भरा जाना चाहते हैं, और क्या आप उसे परमेश्वर के हाथ में किसी और रूप में स्वीकार कर पाएँगे?
आपके आसपास कौन है जिसे आप "सात बेटों से श्रेष्ठ" कह सकते हैं, और आपने उसे यह कभी कहा क्यों नहीं?
Ruth में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Faithful God: An Exposition of the Book of Ruth
A warm exposition of God's quiet providence in ordinary lives.
Draws out the loyalty, loss and redemption woven through this short story.
Ruth as a school of committed love when life is hard and unglamorous.
Judges and Ruth: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Ruth 4:15 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
रूत 4:15 का क्या अर्थ है?
रूत 4:15 किस विषय में है?
रूत 4:15 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
रूत 4:15 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
रूत 4:15 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Ruth 4 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, नाओमी के खाली हाथों को आपने फिर से भर दिया। मेरे जीवन में भी जहाँ सब कुछ सूना लगता है, वहाँ आप नई जान डाल दीजिए। जिन लोगों को आपने मेरे पास भेजा है, उनके प्यार के लिए धन्यवाद। बुढ़ापे तक मुझे थामे रखिए, क्योंकि आप कभी नहीं छोड़ते।
पिता, आपने बोअज के ज़रिए एक अनजान विधवा को घर, नाम और भविष्य दिया। मैं भी कई बार खुद को भुला हुआ महसूस करता हूँ, जैसे मेरी कहानी कहीं खत्म हो गई हो। पर आप भूलते नहीं। मुझे अपनाइए, मेरा नाम अपने लोगों के बीच बनाए रखिए, और मुझे यह भरोसा दीजिए कि आपके हाथ में मेरा कल सुरक्षित है।
नाओमी ने कभी कहा था, "मैं भरी पूरी चली गई थी, परन्तु यहोवा ने मुझे खाली हाथ लौटाया है।" और अब वही खाली गोद एक बच्चे से भर गई: "नाओमी ने उस बच्चे को लेकर अपनी गोद में रखा।" परमेश्वर ने उसे वही बेटे वापस नहीं दिए जो मरे थे। उसने कुछ नया दिया। तेरी खाली गोद में वह क्या रखना चाहता है, जिसे तू अब तक पहचान नहीं पाया?
पिता, नाओमी की तरह मेरे हाथ से भी बहुत कुछ छूट गया है। जो खोया है, उसे लौटाने वाला तू ही है। मुझे ऐसा कोई भेज जो मेरी ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर ले ले, और मुझे भी सिखा कि दूसरों के बोझ में साथ खड़ा होना क्या होता है।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें