बाइबल व्याख्या

लूका 8

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

लूका 8 में यीशु गाँव-गाँव घूमकर राज्य का सुसमाचार सुनाते हैं, और उनके साथ बारह चेले तथा कुछ स्त्रियाँ हैं जो अपनी सम्पत्ति से इस सेवा को चला रही हैं। बीच में बोनेवाले का दृष्टान्त आता है, दीवट की बात, और परिवार की नई परिभाषा: "मेरी माता और मेरे भाई ये ही है, जो परमेश्वर का वचन सुनते और मानते हैं।" फिर चार दृश्य तेज़ी से चलते हैं: झील पर आँधी थमती है, गिरासेनियों के देश में एक आदमी अपनी सेना जैसी दुष्टात्माओं से छूटता है, एक स्त्री बारह वर्ष का लहू बहना छूने भर से रुकवा लेती है, और याईर की बारह वर्ष की बेटी कब्र के मुँह से लौट आती है।

मूल बात

यह अध्याय दो प्रश्नों पर टिका है, और दोनों यीशु ही पूछते हैं। पहला: "सावधान रहो, कि तुम किस रीति से सुनते हो?" दूसरा, नाव में: "तुम्हारा विश्वास कहाँ था?" चेलों के मुँह से तीसरा प्रश्न निकलता है, "यह कौन है, जो आँधी और पानी को भी आज्ञा देता है?" लूका इन तीनों को जोड़कर एक बात कहते हैं: परमेश्वर का राज्य वचन के बीज के रूप में आता है, बिना दिखावे के, पर उस वचन के पीछे वह सामर्थ्य खड़ी है जो समुद्र, दुष्टात्मा, रोग और मृत्यु को आज्ञा देती है। सुनना यहाँ कोई निष्क्रिय काम नहीं; यह तय करता है कि यह सामर्थ्य आपमें फल बनेगी या हवा में उड़ जाएगी।

मुख्य सूत्र

झील का दृश्य पुराने नियम के एक भजन पर सीधे हाथ रखता है। भजन 107 में नाविक जहाजों में समुद्र पर जाते हैं, आँधी उठती है, वे यहोवा को पुकारते हैं, और वह लहरों को थमा देता है, जिसके बाद वे अचम्भे में पड़ जाते हैं। लूका वही ढाँचा दोहराते हैं, केवल केंद्र बदल जाता है: जिसे पुकारा जाता है वह आकाश में नहीं, नाव की पिछली पटरी पर सो रहा है। इसीलिए चेलों का प्रश्न "यह कौन है" इतना काँपता हुआ है। वे समझ गए हैं कि जो काम भजनों में केवल परमेश्वर करता है, वह उनके सामने एक थके हुए आदमी ने किया है। यही सूत्र आगे कब्रों तक जाता है: जो सृष्टि की अराजकता को डाँट सकता है, वही मृत लड़की का हाथ पकड़कर उसे नींद कह सकता है।

दर्पण

दृष्टान्त की चारों भूमियों में सबसे असहज तीसरी है, क्योंकि वहाँ कुछ भी नाटकीय नहीं होता। न शैतान आता है, न सताव आता है। केवल "चिन्ता और धन और जीवन के सुख-विलास" धीरे-धीरे बढ़ते हैं और वचन को दबा देते हैं। फल आता ही नहीं, बस पकता नहीं। यह उस आदमी का चित्र है जो हर इतवार चर्च में है, बाइबल पढ़ता है, और फिर भी उसका पूरा दिमाग ईएमआई, बच्चों के दाख़िले, बॉस के मूड और अगली छुट्टी में बँटा हुआ है। झाड़ियाँ काटी नहीं जातीं, वे उगती हैं। आज एक काम कीजिए, उसी आदमी की तरह जिसे यीशु ने घर भेजा था: घर के किसी एक सदस्य के सामने ज़ोर से कहिए कि परमेश्वर ने पिछले साल आपके लिए कौन-सा बड़ा काम किया।

एक बारीकी

स्त्री ने "उसके वस्त्र के आँचल को छुआ" और तुरन्त चंगी हो गई। यह किनारा यहूदी पुरुष के ओढ़ने की वह झालर थी जो व्यवस्था के प्रति उसकी निष्ठा का चिह्न थी। नियमों के अनुसार लहू बहने की अवस्था में यह स्त्री अशुद्ध थी, और उसका छूना अशुद्धता को यीशु तक पहुँचाना था। पूरी व्यवस्था में गंदगी बाहर की ओर बहती है, पवित्रता छूने से नहीं फैलती। यहाँ धारा उलट जाती है: यीशु में से "सामर्थ्य निकली है", और अशुद्धता उन्हें छूकर मिट जाती है। और वह जिसने बारह वर्ष कोई नाम नहीं सुना था, भीड़ के बीच एक नया नाम पाती है, "पुत्री"। सुसमाचारों में यीशु किसी और स्त्री को इस तरह नहीं पुकारते।

कठिन प्रश्न

पद 10 चुभता है: दृष्टान्त इसलिए कहे जाते हैं "इसलिए कि वे देखते हुए भी न देखें, और सुनते हुए भी न समझें।" यह यशायाह 6 की बुलाहट से लिया गया है, जहाँ परमेश्वर भविष्यद्वक्ता को भेजते ही उसे बताते हैं कि उसका प्रचार लोगों के मन को कठोर करेगा। तो क्या यीशु जान-बूझकर ऐसे बोलते हैं कि लोग न समझें? इसे मीठा करने की कोशिश बेईमानी होगी। लूका यह नहीं कहते कि परमेश्वर किसी को समझने से रोकते हैं; वे यह कहते हैं कि जो सुनकर भी सुनना नहीं चाहता, उसके लिए वचन ही न्याय बन जाता है, और "जिसके पास नहीं है, उससे वह भी ले लिया जाएगा।" फिर भी असहजता बनी रहती है, और यीशु उसे हटाते नहीं। वे केवल ऊँचे शब्द से पुकारते हैं: "जिसके सुनने के कान हों वह सुन लें।"

पृष्ठभूमि

घटनास्थल गलील है, हेरोदेस के अधीन इलाका, जहाँ यीशु का दल किसी मन्दिर या संस्था के सहारे नहीं, बल्कि कुछ स्त्रियों के पैसे से चलता है। योअन्ना हेरोदेस के भण्डारी की पत्नी थी, यानी राजमहल का धन उस प्रचारक को पाल रहा था जिसका अग्रदूत उसी हेरोदेस ने मारा था। यह अपने समय में बेहद अनोखी बात थी: स्त्रियाँ शिष्य और संरक्षक दोनों। झील के पार गिरासेनियों का देश गैर-यहूदी क्षेत्र था, इसीलिए वहाँ सूअरों का झुण्ड चर रहा था; यीशु का वहाँ जाना सीमा पार करना था। और अंत में दो आदमियों का अंतर देखिए: याईर, आराधनालय का सरदार, सम्मानित, जो पाँवों पर गिरता है, और एक बेनाम स्त्री जो पीछे से चुपके छूती है। दोनों को वही उत्तर मिलता है।

चिंतन

इस साल आपके जीवन में कौन-सी झाड़ी सबसे तेज़ी से बढ़ी है, और आप उसे झाड़ी मानने से क्यों बचते रहे हैं?

यदि "यह कौन है" चेलों का असली प्रश्न था, तो आपके लिए यीशु की कौन-सी बात सबसे कम सुलझी हुई है, और आप उसे परमेश्वर के सामने कब रखेंगे?

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Luke 8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

लूका 8 का क्या अर्थ है?
लूका 8 में यीशु गाँव-गाँव घूमकर राज्य का सुसमाचार सुनाते हैं, और उनके साथ बारह चेले तथा कुछ स्त्रियाँ हैं जो अपनी सम्पत्ति से इस सेवा को चला रही हैं। बीच में बोनेवाले का दृष्टान्त आता है, दीवट की बात, और परिवार की नई परिभाषा: "मेरी माता और मेरे भाई ये ही है, जो परमेश्वर का वचन सुनते और मानते हैं।" फिर चार दृश्य तेज़ी से चलते हैं: झील पर आँधी थमती है, गिरासेनियों के देश में एक आदमी अपनी सेना जैसी दुष्टात्माओं से छूटता है, एक स्त्री बारह वर्ष का लहू बहना छूने भर से रुकवा लेती है, और याईर की बारह वर्ष की बेटी कब्र के मुँह से लौट आती है।
लूका 8 किस विषय में है?
झील का दृश्य पुराने नियम के एक भजन पर सीधे हाथ रखता है। भजन 107 में नाविक जहाजों में समुद्र पर जाते हैं, आँधी उठती है, वे यहोवा को पुकारते हैं, और वह लहरों को थमा देता है, जिसके बाद वे अचम्भे में पड़ जाते हैं। लूका वही ढाँचा दोहराते हैं, केवल केंद्र बदल जाता है: जिसे पुकारा जाता है वह आकाश में नहीं, नाव की पिछली पटरी पर सो रहा है। इसीलिए चेलों का प्रश्न "यह कौन है" इतना काँपता हुआ है। वे समझ गए हैं कि जो काम भजनों में केवल परमेश्वर करता है, वह उनके सामने एक थके हुए आदमी ने किया है। यही सूत्र आगे कब्रों तक जाता है: जो सृष्टि की अराजकता को डाँट सकता है, वही मृत लड़की का हाथ पकड़कर उसे नींद कह सकता है।
लूका 8 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
स्त्री ने "उसके वस्त्र के आँचल को छुआ" और तुरन्त चंगी हो गई। यह किनारा यहूदी पुरुष के ओढ़ने की वह झालर थी जो व्यवस्था के प्रति उसकी निष्ठा का चिह्न थी। नियमों के अनुसार लहू बहने की अवस्था में यह स्त्री अशुद्ध थी, और उसका छूना अशुद्धता को यीशु तक पहुँचाना था। पूरी व्यवस्था में गंदगी बाहर की ओर बहती है, पवित्रता छूने से नहीं फैलती। यहाँ धारा उलट जाती है: यीशु में से "सामर्थ्य निकली है", और अशुद्धता उन्हें छूकर मिट जाती है। और वह जिसने बारह वर्ष कोई नाम नहीं सुना था, भीड़ के बीच एक नया नाम पाती है, "पुत्री"। सुसमाचारों में यीशु किसी और स्त्री को इस तरह नहीं पुकारते।
लूका 8 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
घटनास्थल गलील है, हेरोदेस के अधीन इलाका, जहाँ यीशु का दल किसी मन्दिर या संस्था के सहारे नहीं, बल्कि कुछ स्त्रियों के पैसे से चलता है। योअन्ना हेरोदेस के भण्डारी की पत्नी थी, यानी राजमहल का धन उस प्रचारक को पाल रहा था जिसका अग्रदूत उसी हेरोदेस ने मारा था। यह अपने समय में बेहद अनोखी बात थी: स्त्रियाँ शिष्य और संरक्षक दोनों। झील के पार गिरासेनियों का देश गैर-यहूदी क्षेत्र था, इसीलिए वहाँ सूअरों का झुण्ड चर रहा था; यीशु का वहाँ जाना सीमा पार करना था। और अंत में दो आदमियों का अंतर देखिए: याईर, आराधनालय का सरदार, सम्मानित, जो पाँवों पर गिरता है, और एक बेनाम स्त्री जो पीछे से चुपके छूती है। दोनों को वही उत्तर मिलता है।
लूका 8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि "यह कौन है" चेलों का असली प्रश्न था, तो आपके लिए यीशु की कौन-सी बात सबसे कम सुलझी हुई है, और आप उसे परमेश्वर के सामने कब रखेंगे?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Luke 8 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 27

प्रभु, तू उस किनारे पर भी उतरता है जहाँ लोग जाने से डरते हैं। मेरे भीतर की वे जगहें जिन्हें मैं छिपाकर रखता हूँ, जहाँ अकेलापन और शर्म बसी है, वहाँ तू आ। मुझे कब्रों के बीच से निकालकर अपने पास बिठा ले, और फिर से पूरा कर दे।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 24

प्रभु, जब चारों ओर से लहरें उठती हैं और लगता है कि तू सो रहा है, तब भी मैं तुझे ही पुकारता हूँ। मेरे डर को शांत कर, जैसे तूने आँधी को शांत किया था। मुझे भरोसा दे कि तू मेरी नाव में है, और यही काफी है।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 40

पिता, उस भीड़ की तरह मैं भी तेरी राह देखता हूँ। कभी लगता है तू देर कर रहा है, फिर भी मेरा मन तुझी पर टिका रहे। जब तू आए, मेरा हृदय खुले दरवाज़े जैसा हो, तुझे खुशी से अपनाने को तैयार। मेरी प्रतीक्षा को भरोसे में बदल दे।

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