श्रेष्ठगीत 2:15
पाठ
वसन्त के उस पूरे निमंत्रण के बीच, जहाँ फूल खिल रहे हैं और प्रेमी अपनी प्रिया को बाहर बुला रहा है, अचानक एक दूसरी ही आवाज़ उठती है: "जो छोटी लोमड़ियाँ दाख की बारियों को बिगाड़ती हैं, उन्हें पकड़ ले, क्योंकि हमारी दाख की बारियों में फूल लगे हैं।" यह कोई काव्यात्मक सजावट नहीं, एक आदेश है, और बहुवचन में दिया गया है, मानो किसी पूरे समूह को काम पर लगाया जा रहा हो। प्रेम के गीत के ठीक बीच में खेत की मेहनत घुस आती है: बाड़ लगाओ, जाल बिछाओ, पहरा दो। कारण भी साफ है, इसलिए नहीं कि अंगूर पक चुके हैं, बल्कि इसलिए कि अभी केवल फूल लगे हैं। जो सबसे कोमल अवस्था है, वही सबसे असुरक्षित अवस्था है।
मर्म
दाख की बारी बाइबल में कभी भी केवल खेती नहीं रहती; यह वाचा की तस्वीर है, परमेश्वर की अपनी रोपी हुई जनता (भजन 80:8-13, जिसका संकेत यह पद स्वयं देता है)। और यहाँ धर्मविज्ञान का असली झटका यह है: बारी अनुग्रह से मिली है, पर उसकी रखवाली सौंपी गई है। परमेश्वर रोपते हैं, फूल वही खिलाते हैं, फिर भी कहते हैं, "पकड़ ले।" पवित्रता यहाँ प्रेम का विरोधी नहीं, प्रेम की चौकसी है। और ध्यान दीजिए, खतरा जंगली सूअर या शत्रु सेना नहीं, बल्कि "छोटी लोमड़ियाँ" हैं। वाचा-सम्बन्ध प्रायः किसी भव्य विद्रोह से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी अनदेखी कुतरनों से टूटता है। "हमारी" शब्द भी महत्वपूर्ण है: यह साझी बारी है, दूल्हे और दुल्हन दोनों की, और इसीलिए उसकी सुरक्षा भी साझी ज़िम्मेदारी है।
सूत्र
बाइबल की पूरी कहानी में दाख की बारी वहीं बार-बार लौटती है जहाँ परमेश्वर अपने लोगों से प्रेम और अपेक्षा दोनों रखते हैं। वे मिस्र से एक पौधा निकाल लाए, उसे रोपा, बाड़ लगाई, और फिर पूछा कि बाड़ क्यों टूटी। यह पद उसी धारा में खड़ा है, पर एक नई ध्वनि के साथ: यहाँ रखवाली का आदेश किसी न्यायी की धमकी नहीं, प्रेमी की पुकार है। और यही धारा यीशु मसीह तक पहुँचती है, जो स्वयं को सच्ची दाखलता कहते हैं और अपने शिष्यों को छाँटने वाले पिता की बात करते हैं। मसीह में दोनों बातें एक हो जाती हैं: वे दूल्हा हैं जो अपनी दुल्हन को शुद्ध रखना चाहते हैं, और वे ही वह बारी हैं जिसमें हम जुड़े रहते हैं। अनुग्रह हमें रोपता है; वही अनुग्रह हमें पहरेदार बनाता है।
दर्पण
लोमड़ियाँ छोटी हैं, यही उनकी ताक़त है। कोई भी विवाह एक ही रात में नहीं टूटता; वह उस लहजे से कुतरा जाता है जो आप हर शाम थककर घर लौटते हुए अपनाते हैं। कोई भी ईमानदारी एक बड़े घोटाले से नहीं मरती; वह उस छोटे से झूठ से मरती है जो आप रिपोर्ट में "थोड़ा सुधार" कहकर डाल देते हैं। प्रार्थना का जीवन विद्रोह से नहीं, उस आधे घंटे की स्क्रॉलिंग से सूखता है जिसे आप विश्राम कहते हैं। और जो चीज़ अभी फूल ही है, कोई नई शुरुआत, कोई लौटता हुआ भरोसा, कोई सुधरता रिश्ता, वही सबसे जल्दी कुतरी जाती है। आज ही एक काग़ज़ पर उस एक छोटी आदत का नाम लिखिए जो इस महीने आपकी बारी में कुतर रही है, उसे परमेश्वर के सामने ऊँची आवाज़ में कहिए, और उसके नीचे एक वाक्य में लिख दीजिए कि कल आप उसे कहाँ रोकेंगे।
मुख्य पात्र
बोलने वाला दूल्हा है, वही जिसने अभी-अभी कहा था "तेरा बोल मीठा, और तेरा मुख अति सुन्दर है।" उसका प्रेम भावुक है, पर अंधा नहीं। वह अपनी प्रिया को खिड़की से देखता है, पहाड़ों पर कूदता हुआ आता है, और उसी साँस में खेत की ओर मुड़कर कहता है, पकड़ो। यही एक परिपक्व प्रेमी का चित्र है: जो मोहित है, फिर भी सतर्क; जो सौंदर्य देखता है, फिर भी ख़तरा पहचानता है। और यह परमेश्वर के अपने स्वभाव की झलक है। वे अपने लोगों को "मेरी प्रिय, मेरी सुन्दरी" कहकर बुलाते हैं, और उसी प्रेम के कारण उनकी पवित्रता की रक्षा करते हैं। जो प्रेम चेतावनी नहीं देता, वह प्रेम नहीं, उदासीनता है।
प्रसंग
यह गीत उस दुनिया से आता है जहाँ पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीनुमा खेत बनाकर दाख लगाई जाती थी, पत्थरों की दीवार और एक छोटा पहरा-बुर्ज हर बारी का हिस्सा था। वसन्त में, जब बेलों पर कोमल फूल आते हैं, तब लोमड़ियाँ और गीदड़ जड़ों के पास बिल खोदते और नई कलियाँ कुतर जाते थे; एक रात की लापरवाही पूरे मौसम की फ़सल चुका देती थी। बारी की रखवाली प्रायः परिवार के जवानों को सौंपी जाती थी, और इसी पुस्तक में दुल्हन पहले ही कह चुकी है कि उसे दूसरों की बारियों की रखवाली करनी पड़ी। यानी यह रूपक उसके लिए जीवित अनुभव था। प्रेम का यह गीत महल और खेत दोनों में साँस लेता है, और इसीलिए इसकी आध्यात्मिकता हवाई नहीं, मिट्टी से सनी हुई है।
अंतर्पाठ
पद के साथ दिए गए दो संकेत ही सबसे अधिक बोलते हैं। भजन 80 में इस्राएल वह बारी है जिसकी बाड़ टूट चुकी है और जिसे राह चलते लोग नोच रहे हैं; वहाँ विलाप है, यहाँ रोकथाम। यहेजकेल 13 में झूठे भविष्यद्वक्ताओं की तुलना खंडहरों की लोमड़ियों से की गई है, जो दीवार बनाने के बजाय उसे और खोखला करते हैं। दोनों मिलकर दिखाते हैं कि "छोटी लोमड़ियाँ" केवल निजी कमज़ोरियाँ नहीं, वे झूठी शिक्षा और धीमी बेईमानी भी हैं, जो मण्डली को भीतर से खाती हैं। और इन्हीं के सामने पौलुस की वह छवि खड़ी होती है जिसमें मसीह अपनी कलीसिया को निष्कलंक दुल्हन के रूप में प्रस्तुत करते हैं; जो वे करेंगे, उसी में आज हमें शामिल होने को कहा गया है।
चिंतन
आपकी बारी में इस समय सबसे कोमल "फूल" क्या है, वह नई शुरुआत जो अभी फल नहीं बनी, और आप उसके चारों ओर कौन-सी बाड़ लगा रहे हैं?
जब परमेश्वर का प्रेम आपको "मेरी प्रिय" कहता है और उसी साँस में "पकड़ ले" कहता है, तो आप इनमें से किस आवाज़ को अनसुना करने के आदी हो गए हैं?
Song of Solomon में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
The Message of the Song of Songs
Reads the Song as a celebration of love the way God designed it.
The Song of Songs: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Song of Solomon 2:15 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
श्रेष्ठगीत 2:15 का क्या अर्थ है?
श्रेष्ठगीत 2:15 किस विषय में है?
श्रेष्ठगीत 2:15 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
श्रेष्ठगीत 2:15 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
श्रेष्ठगीत 2:15 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Song of Solomon 2 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि आप पहाड़ों पर कूदते फाँदते और पहाड़ियों पर उछलते हुए मेरी ओर आते हैं। मेरी कठिनाइयों की ऊँचाइयाँ आपको रोक नहीं पातीं। धन्यवाद कि मुझे आपकी पुकार सुनाई देती है, और आप पहले मेरे पास आते हैं।
पिता, धन्यवाद कि आप प्रेम का सही समय जानते हैं। "प्रेम को उस समय से पहले न जगाना जब तक उसकी इच्छा न हो" इस चेतावनी के लिए धन्यवाद, जो हमें जल्दबाज़ी और टूटे मन से बचाती है। धन्यवाद कि प्रतीक्षा के दिनों में भी आप हमारे हृदय की रखवाली करते हैं।
पिता, धन्यवाद कि आपने सर्दी के बाद फूलों का समय ठहराया है। धरती पर खिलते फूल, चिड़ियों के गीत और पिण्डुकी का शब्द हमें याद दिलाते हैं कि आपका समय कभी नहीं चूकता। मेरे सूखे दिनों के बाद भी आप नया मौसम ले आते हैं, इसके लिए मेरा मन आपका आभारी है।
देखो, वह हमारी दीवार के पीछे खड़ा है, वह खिड़कियों से ताक रहा है, वह झरोखों में से झाँक रहा है।"
दीवार है, फिर भी वह चला नहीं गया। वह वहीं खड़ा है, झाँक रहा है, तुम्हें देख रहा है।
तुमने जो दीवारें उठाई हैं, शर्म की, चुप्पी की, निराशा की, वे उसे दूर नहीं कर पाईं। वह प्रतीक्षा में है, कि तुम कब एक झरोखा खोलो।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें