श्रेष्ठगीत 4
पाठ
गीतगीत के इस अध्याय में दूल्हा अपनी दुल्हन के सौंदर्य का एक-एक अंग से वर्णन करता है, उसे "सर्वांग सुन्दरी" कहता है जिसमें "कोई दोष नहीं।" फिर वह उसे लबानोन के पहाड़ों से बुलाता है, उसकी उपस्थिति में मंत्रमुग्ध होता है, और उसे एक बन्द बारी, एक मुहरबन्द झरने के रूप में सराहता है। अन्त में दुल्हन स्वयं हवाओं को पुकारती है कि वे उसकी बारी पर बहें, ताकि उसका प्रेमी आकर उसके फल चखे।
मर्म
यह पाठ एक ऐसी बात कहता है जिसे हम अक्सर सुनने से डरते हैं: कि कोई हमें देखे, सचमुच देखे, और फिर भी हमसे मुँह न मोड़े। दूल्हा दुल्हन के हर अंग को नाम देता है, गिनता है, सराहता है। यह वासना नहीं, ध्यान है। और जब वह कहता है, "तुझ में कोई दोष नहीं," तो यह अन्धा प्रेम नहीं, बल्कि वह दृष्टि है जो प्रेम के भीतर से उठती है। परमेश्वर के प्रेम की यही विचित्रता है: वह जानकर प्रेम करता है, और प्रेम करके सुन्दर बनाता है। हम सोचते हैं कि पहले हमें दोषरहित होना है, फिर प्रेम मिलेगा। पर यहाँ क्रम उल्टा है, प्रेम पहले आता है, और वही देखने का ढंग बदल देता है।
सूत्र
यह अध्याय एक अकेला गीत नहीं है, यह एक बड़ी धुन का हिस्सा है जो पूरी बाइबल में बजती है। परमेश्वर अपने लोगों को दुल्हन कहते हैं, यशायाह और होशे में, और नये नियम में मसीह की देह कलीसिया के रूप में। पौलुस इफिसियों में लिखते हैं कि मसीह ने कलीसिया से इसलिए प्रेम किया कि वह उसे "बिना दाग या झुर्री" प्रस्तुत करे, और यहाँ के "तुझ में कोई दोष नहीं" के साथ यह पंक्ति सीधी गूँजती है। जो दूल्हा यहाँ बुलाता है, "मेरे संग लबानोन से चली आ," वही आवाज़ है जो प्रकाशितवाक्य के अन्त में कहती है, "आ।" पूरी बाइबल एक बुलावे और उत्तर का गीत है।
दर्पण
रुककर पूछिए: क्या आप विश्वास करते हैं कि परमेश्वर आपको इस तरह देखते हैं? हम में से अधिकांश दो चरम पर जीते हैं, या तो हम अपने आप को इतना दोषी मानते हैं कि किसी भी सराहना को झूठ समझते हैं, या हम इतनी सफाई से अपनी असलियत छुपाते हैं कि "बन्द किया हुआ सोता" बन जाते हैं, दूसरों के लिए ही नहीं, परमेश्वर के लिए भी। पर ध्यान दीजिए, दूल्हा बन्द बारी की निन्दा नहीं करता, वह उसे सराहता है, और दुल्हन स्वयं अन्त में हवाओं को बुलाती है कि बारी खुले। कब आपने अन्तिम बार परमेश्वर के सामने अपनी बारी के द्वार खोले? काम की थकान में, विवाह की चोटों में, शरीर के प्रति असन्तोष में, वह आपको देखना चाहते हैं जैसे आप हैं, न कि जैसे आप दिखाना चाहते हैं।
मुख्य पात्र
इस अध्याय में दूल्हा एक विशेष तरह से बोलता है। वह आदेश नहीं देता, वह आकर्षित करता है। "चली आ" कहता है, पर खींचता नहीं। वह दुल्हन को "मेरी बहन, मेरी दुल्हन" कहता है, एक ऐसा शब्द-युग्म जो सुरक्षा और घनिष्ठता दोनों समेटता है, पारिवारिक अपनापन और वैवाहिक निकटता एक साथ। उसका हृदय एक "चितवन" से "मोह" लिया जाता है, यानी वह कमज़ोर होने से नहीं डरता। यह वह परमेश्वर की छवि है जिसे हम भूल जाते हैं, वे जो सिंहासन पर बैठे हैं, वे ही अपनी दुल्हन के सामने प्रभावित होने को तैयार हैं। शक्ति और कोमलता का यह संगम केवल मसीह में पूरी तरह प्रकट होता है, जो क्रूस पर जाकर अपनी दुल्हन को जीत लेते हैं।
अन्तर्पाठ
यशायाह 62 में परमेश्वर कहते हैं कि जैसे दूल्हा दुल्हन से आनन्दित होता है, वैसे ही वे अपने लोगों से आनन्दित होंगे, और यह अध्याय उसी वादे का काव्य है। सफन्याह 3:17 में लिखा है कि परमेश्वर अपने लोगों पर "गीत गाकर आनन्द करेंगे," और गीतगीत 4 मानो उसी गीत का एक बन्द है जो हमें सुनने को दिया गया। पर एक विपरीत गूँज भी है, आदम और हव्वा गिरने के बाद अपनी नग्नता से लजाकर छुप गए थे। यहाँ दुल्हन नहीं छुपती, और दूल्हा उसे ढूँढ़ता नहीं, वह उसके सामने खड़ा है, नाम लेकर पुकारता है। यह अदन का उलटाव है, यह भावी स्वर्ग की झलक है।
प्रश्न
पर एक असहज बात रह जाती है: क्या यह प्रेम सचमुच हमारे लिए है? "तुझ में कोई दोष नहीं" ऐसे कानों में अजीब लगता है जो अपने भीतर के सब दाग जानते हैं। क्या यह वचन एक झूठ है, एक अतिशयोक्ति, या एक भविष्यवाणी? शायद यही उत्तर है, यह वर्तमान का विवरण नहीं, प्रेम की दृष्टि है जो भविष्य को खींच लाती है। परमेश्वर हमें उस रूप में देखते हैं जो हम मसीह में बन रहे हैं, और उनकी दृष्टि ही हमें वैसा बनाती है। यह रहस्य पूरी तरह सुलझता नहीं, इसे जीना पड़ता है। हमें बीच में रहना है, जानते हुए कि हम टूटे हैं, और फिर भी सुनते हुए, "तू सुन्दर है।"
चिन्तन
क्या मैं परमेश्वर को अपनी "बन्द बारी" में सचमुच आने देता हूँ, या मैं केवल साफ़-सुथरे कमरे दिखाता हूँ?
*यदि परमेश्वर मुझसे कहें, "तुझ में कोई दोष नहीं," तो मेर
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
दूल्हा कहता है, "तेरी दोनों छातियाँ दो बच्चों के समान हैं, जो हिरनी के जुड़वाँ बच्चे हैं, और सोसन फूलों के बीच चरते हैं।" ध्यान दो, यह शिकार का दृश्य नहीं, चरागाह का है। हिरनी के बच्चे वहीं चरते हैं जहाँ उन्हें डर न लगे। सच्चा प्रेम छीनता नहीं, वह एक सुरक्षित जगह बनाता है। जिस घर में तुम हो, क्या वहाँ कोई बिना डरे साँस ले पाता है?
पिता, जब तक सुबह की हवा न चले और परछाइयाँ ढल न जाएँ, मुझे अपने पास ठहरने दे। मेरा मन भागता रहता है, पर सच यही है कि तेरी संगति में ही चैन मिलता है। इस इंतज़ार के समय में भी मुझे थामे रख, और अपनी मीठी उपस्थिति से मेरा दिल भर दे।
पिता, तू मुझे अपने पास बुलाता है, उन ऊँची चोटियों से जहाँ डर और खतरा मेरे साथ रहते हैं। मैं अकेले वहाँ टिका रहना चाहता हूँ, पर तेरी आवाज़ कहती है, मेरे साथ चल। मुझे हिम्मत दे कि मैं उतर आऊँ और तेरे प्रेम में सुरक्षित रहूँ।
तेरी कनपटियाँ तेरे घूँघट के पीछे अनार के टुकड़ों के समान हैं।" दूल्हा उस हिस्से की तारीफ करता है जो घूँघट के पीछे छिपा है, जिसे भीड़ नहीं देखती। सोच, जो तुझमें ढका हुआ है, तेरी चुप लड़ाइयाँ, तेरे भीतर के आँसू, वही उसकी आँखों में सुंदर हैं। तू दिखावे से नहीं, प्रेम से देखा जाता है।
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