7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 इतिहास 4

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

1 इतिहास 4 की व्याख्या

व्याख्या

यह अध्याय नामों की एक लंबी सूची है, यहूदा के गोत्र के परिवारों के नाम। पेरेस, हेस्रोन, कर्मी, हूर, शोबाल, और फिर उनके बेटे, और उनके बेटों के बेटे। सच कहें तो यह पढ़ना कठिन लग सकता है। इतने सारे नाम, इतनी सारी पीढ़ियाँ, कोई भी नाम आपने पहले नहीं सुना होगा।

पर इस लंबी सूची के बीच में, कुछ अचानक रुक जाता है। आयत 9 और 10 में हमें एक आदमी के बारे में बताया जाता है जिसका नाम याबेस था। उसकी माँ ने उसका नाम इसलिए याबेस रखा क्योंकि उसे उसे जन्म देते समय बहुत पीड़ा हुई थी, याबेस का मतलब ही है पीड़ा। सोचिए, यह नाम लेकर बड़ा होना कैसा होगा, हर बार जब कोई उसे बुलाता, उसे याद आता कि वह दुख के साथ जुड़ा है।

पर याबेस ने कुछ खास किया। उसने इस्राएल के परमेश्वर को पुकारा। उसने कहा, आप मुझे सचमुच आशीष दें, मेरा देश बढ़ाएँ, आपका हाथ मेरे साथ रहे, और आप मुझे बुराई से ऐसे बचाएँ कि मैं फिर पीड़ित न हों। और पवित्रशास्त्र कहता है, जो कुछ उसने माँगा, वह परमेश्वर ने उसे दिया।

बाकी अध्याय में हम सुनते हैं कि यहूदा के वंश से कारीगर निकले, कुम्हार निकले जो मिट्टी के बर्तन बनाते थे, और शिमोन के गोत्र के लोग भी शामिल हैं जो अलग-अलग शहरों में बस गए। आयत 41 में हम पढ़ते हैं कि राजा हिजकिय्याह के दिनों में उन्होंने चराई की खोज में जाकर मूनी लोगों को हराया, और बाद में सेईद पहाड़ पर बचे हुए अमालेकियों को भी हराया, ताकि उनकी भेड़-बकरियों के लिए जगह मिल सके।

इसका अर्थ क्या है?

क्यों परमेश्वर एक पूरे अध्याय में इतने नाम लिखवाते हैं? क्योंकि हर नाम एक सचमुच का इंसान था। किसी की माँ थी, किसी के बच्चे थे, किसी ने भेड़ें चराई, किसी ने बर्तन बनाए। परमेश्वर की नज़र में कोई भी परिवार इतना छोटा नहीं है कि उसे भुला दिया जाए।

और याबेस की कहानी हमें दिखाती है कि परमेश्वर एक ऐसे आदमी की प्रार्थना सुनते हैं जो अपने दर्द के साथ ईमानदार था। याबेस ने अपना नाम नहीं बदला, उसने अपनी पीड़ा को नकारा नहीं। उसने सीधे परमेश्वर से बात की और माँगा। यह हमें सिखाता है कि परमेश्वर के सामने हम जो हैं वही आ सकते हैं, अपने दुख के साथ भी।

समान सूत्र

यह वही यहूदा का गोत्र है जिससे बहुत बाद में राजा दाऊद आएगा, और उससे भी बहुत बाद में यीशु मसीह जन्म लेंगे। इन नामों की सूची पढ़ते हुए हमें याद आना चाहिए कि परमेश्वर की बड़ी कहानी छोटे, अनजान लोगों के जीवन से होकर गुज़रती है। पेरेस, हेस्रोन, कर्मी, ये सब वे कड़ियाँ हैं जिनसे होकर परमेश्वर का वादा आगे बढ़ता रहा।

याबेस की प्रार्थना हमें यह भी याद दिलाती है कि परमेश्वर सुनने वाले परमेश्वर हैं। यह बात पूरी बाइबल में सच रहती है, यीशु मसीह ने भी लोगों को सिखाया कि वे परमेश्वर के पास खुलकर आएँ, अपनी ज़रूरतों के साथ।

आपके लिए

क्या आपने कभी सोचा है कि आपका नाम क्या मतलब रखता है, या आपके परिवार में आपसे पहले कौन थे? आप भले ही उन सबको न जानते हों, पर परमेश्वर जानते हैं। हर एक व्यक्ति उनके लिए मूल्यवान है, चाहे वह इतिहास की किताबों में लिखा जाए या नहीं।

याबेस की तरह, आप भी परमेश्वर से खुलकर बात कर सकते हैं। आपको अपने डर या दुख को छिपाने की ज़रूरत नहीं है। आप कह सकते हैं, परमेश्वर, मुझे आपकी मदद चाहिए, ठीक वैसे जैसे याबेस ने कहा। और यह मत सोचिए कि परमेश्वर हर बार वही देंगे जो हम माँगते हैं, पर याबेस की कहानी हमें दिखाती है कि परमेश्वर सुनते हैं, और यही सबसे बड़ी बात है।

बात करें

अगर आपका कोई नाम रखा जाता जो आपकी किसी कठिनाई को याद दिलाए, तो आपको कैसा लगता?

याबेस ने अपनी प्रार्थना में चार बातें माँगी। आप परमेश्वर से क्या माँगना चाहेंगे, अगर आप जानते हों कि वे सुन रहे हैं?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हर नाम, हर परिवार, और हर हृदय को जानते हैं। जैसे आपने याबेस की प्रार्थना सुनी, वैसे ही हमारी प्रार्थनाएँ भी सुनिए। हमें अपने दुख और अपनी ज़रूरतों के साथ आपके पास आने का भरोसा दें। आप हमारे साथ रहें, आमीन।

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अन्य माता पिता या शिक्षकों के लिए, जिन्हें यह उपयोगी लग सकता है।

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1 इतिहास 4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 इतिहास 4 किस विषय में है?
यह अध्याय नामों की एक लंबी सूची है, यहूदा के गोत्र के परिवारों के नाम। पेरेस, हेस्रोन, कर्मी, हूर, शोबाल, और फिर उनके बेटे, और उनके बेटों के बेटे। सच कहें तो यह पढ़ना कठिन लग सकता है। इतने सारे नाम, इतनी सारी पीढ़ियाँ, कोई भी नाम आपने पहले नहीं सुना होगा।
1 इतिहास 4 क्या कहता है?
बाकी अध्याय में हम सुनते हैं कि यहूदा के वंश से कारीगर निकले, कुम्हार निकले जो मिट्टी के बर्तन बनाते थे, और शिमोन के गोत्र के लोग भी शामिल हैं जो अलग-अलग शहरों में बस गए। आयत 41 में हम पढ़ते हैं कि राजा हिजकिय्याह के दिनों में उन्होंने चराई की खोज में जाकर मूनी लोगों को हराया, और बाद में सेईद पहाड़ पर बचे हुए अमालेकियों को भी हराया, ताकि उनकी भेड़-बकरियों के लिए जगह मिल सके।
1 इतिहास 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह वही यहूदा का गोत्र है जिससे बहुत बाद में राजा दाऊद आएगा, और उससे भी बहुत बाद में यीशु मसीह जन्म लेंगे। इन नामों की सूची पढ़ते हुए हमें याद आना चाहिए कि परमेश्वर की बड़ी कहानी छोटे, अनजान लोगों के जीवन से होकर गुज़रती है। पेरेस, हेस्रोन, कर्मी, ये सब वे कड़ियाँ हैं जिनसे होकर परमेश्वर का वादा आगे बढ़ता रहा।
बच्चे 1 इतिहास 4 से क्या सीख सकते हैं?
याबेस की तरह, आप भी परमेश्वर से खुलकर बात कर सकते हैं। आपको अपने डर या दुख को छिपाने की ज़रूरत नहीं है। आप कह सकते हैं, परमेश्वर, मुझे आपकी मदद चाहिए, ठीक वैसे जैसे याबेस ने कहा। और यह मत सोचिए कि परमेश्वर हर बार वही देंगे जो हम माँगते हैं, पर याबेस की कहानी हमें दिखाती है कि परमेश्वर सुनते हैं, और यही सबसे बड़ी बात है।
1 इतिहास 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हर नाम, हर परिवार, और हर हृदय को जानते हैं। जैसे आपने याबेस की प्रार्थना सुनी, वैसे ही हमारी प्रार्थनाएँ भी सुनिए। हमें अपने दुख और अपनी ज़रूरतों के साथ आपके पास आने का भरोसा दें। आप हमारे साथ रहें, आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

एशतोन से बेतरापा, पासेह और ईर्नाहाश का पिता तहिन्ना उत्पन्न हुआ।" इन नामों की कोई कहानी नहीं बची, न कोई चमत्कार, न कोई गीत। फिर भी परमेश्वर ने इन्हें अपनी पुस्तक में लिखवा दिया। तुम सोचते हो तुम्हारा जीवन किसी को याद नहीं रहेगा। पर जो नाम लिखता है, वह भूलता नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 40

शिमोन के वंश ने अपनी भेड़ों के लिए चराई ढूँढ़ते हुए कदम बढ़ाया, और लिखा है: "उनको उत्तम से उत्तम चराई मिली, और देश लम्बा चौड़ा, चैन और शान्ति का था।" वह जगह पहले से वहीं थी, पर उन्हें निकलना पड़ा। परमेश्वर की तैयार की हुई चीज़ें अक्सर हमारी तंग जगह के बाहर मिलती हैं। तू किस डर के कारण ठहरा हुआ है?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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